संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय

श्री रवि शंकर प्रसाद ने डाक विभाग को खाद्य वस्तुओं की तत्काल आवश्यकता वाले लोगों पर फोकस करने को कहा

भारतीय डाक दूरदराज के क्षेत्रों में उम्मीद और अनिवार्य वस्तुओं की आपूर्ति करता है

Posted On: 18 APR 2020 5:02PM by PIB Delhi

कोविड-19 संकट के इस समय में डाक विभाग ने देश भर में डाक घरों के अपने विशाल नेटवर्क के जरिये देश के लोगो की सहायता करने में खुद को योग्य साबित किया है। केंद्रीय संचार, विधि एवं न्याय तथा इलेक्ट्रोनिक्स और आईटी मंत्री श्री रवि शंकर प्रसाद ने प्रत्येक राज्य के साथ एक वीडियो कांफ्रेंस किया जिसके द्वारा मुख्य पोस्ट मास्टर जनरल एवं मुख्य महाप्रबंधको को देश भर के जरुरतमंद लोगों की सेवा करने के लिए अपने पोस्टल नेटवर्क को तैयार एवं सक्रिय रखने का निर्देश दिया गया। भारतीय डाक एक वास्तविक कोरोना योद्धा की तरह लगातार दूरदराज के क्षेत्रों में लाखों लोगों को उम्मीद और अनिवार्य वस्तुओं का आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।

खाद्य एवं सूखा राशन वितरण

श्री रवि शंकर प्रसाद ने वीडियो कांफ्रेंस में विशेष रूप से निर्बल वर्गों एवं खाद्य वस्तुओं की तत्काल आवश्यकता वाले लोगों पर फोकस करने से संबंधित निर्देश जारी किया। डाक विभाग के कर्मचारियों ने झुग्गी-झोंपड़ियों में रहने वाले जरुरतमंदों, प्रवासी मजदूरों एवं दिहाड़ी मजदूरों को भोजन, सूखा राशन एवं यहां तक कि मास्क भी वितरित करने के लिए अपनी बचतों को इकट्ठा किया है।  पिछले कुछ दिनों में, लगभग 1 लाख भोजन/सूखे राशन के पैकेट वितरित किए गए हैं। केवल उप्र में ही नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ, प्रयागराज एवं फैजाबाद में प्रवासी मजदूरों, जरुरतमंदों एवं निर्माण श्रमिकों के बीच 50 हजार से अधिक भोजन/सूखे राशन के पैकेट वितरित किए गए हैं। इसी प्रकार, बिहार में स्वेच्छा से लगभग 16,000 फूड पैकेट एवं साबुन, मास्क, सैनिटाइजर एवं ग्लोव्स के 11500 पैकेट वितरित किए गए हैं। उदाहरण के लिए, लाकडाउन अवधि के दौरान तेलंगाना में पोस्टल मेल वाहनों के द्वारा लगभग 18000 भोजन पहुंचाए गए जबकि  डाक कर्मचारियों ने हैदराबाद सिटी में लगभग 1750 परिवारों को भोजन एवं सूखा राशन के पैकेट वितरित किए। इसी प्रकार, नागपुर में भी डाक कर्मचारियों द्वारा लगभग 1500 प्रवासी मजदूरों को भोजन/सूखे राशन के पैकेट उपलब्ध कराए गए। पंजाब पोस्टल सर्किल ने निर्माण मजदूरों, हाकरों, रिक्शा चलाने वालों, पीजीआई के रोगियों के परिचारकों एवं चंडीगढ़ के विभिन्न हिस्सों में फंसे प्रवासी मजदूरों के लिए फूड आन व्हील्सआरंभ किया है।

खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के समन्वय से, चंडीगढ़ के डाक अधिकारी डिपार्टमेंट मेल मोटर वाहन में भोजन पार्सल ले जाते हैं और विभिन्न क्षेत्रों में दिन में दो बार उनका वितरण करते है। सोशल डिस्टैंसिंग का पालन करते हुए फूड आन व्हील्सके जरिये प्रति दिन दो बार लगभग 2,000 से 3,500 जरुरतमंद लोगों को भोजन वितरित किया जाता है। रेड पोस्टल मेल मोटर इन घर विहीन, भूखे लोगों के लिए अब उम्मीद की नई किरण बन गया है और वे व्याकुलता से इनकी प्रतीक्षा करते हैं। मुंबई में, डाक कर्मचारी न केवल प्रवासी मजदूरों और स्लम में रहने वालों को खिला रहे हैं बल्कि धारावी आदि जैसे सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में उन्हें मास्क और सैनिटाइजर भी उपलब्ध कर रहे हैं।

चिकित्सा उपलब्धता को सुगम बनाना

लाकडाउन के दौरान, रूटीन दवाएं तो उपलब्ध थीं, लेकिन कैंसर, किडनी उपचार एवं अन्य प्राणघातक बीमारियों के लिए विशिष्ट दवाएं, जिन्हें आम तौर पर बड़े शहरो में रहने वाले रोगी के बच्चों एवं संबंधियों द्वारा खरीदा जाता था, उपलब्ध नहीं थीं। संचार मंत्री को ट्वीटर एवं अन्य माध्यमों के जरिये काफी सुझाव दिए गए। तदनुरूप, मंत्री ने डाक विभाग को अंतिम गंतव्य तक इन जीवन रक्षक दवाओं की प्रदायगी के लिए डाक घर के जरिये स्पीड पोस्ट एवं डाकिये का उपयोग करने का निर्देश जारी किया है। इनमें से कुछ कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं- श्री सुशील जोशी, जो एक पूर्व सैनिक हैं, के पिता जी श्री एम पी जोशी को उत्तराखंड के सुदूर हिस्से गौचर में जीवन रक्षक दवाएं पहुंचाई गईं। इसी प्रकार, माईलैब के आग्रह पर एमएमएस, पुणे द्वारा 13 अप्रैल, 2020 को कोविड टेस्टिंग किट की खेप ले जाकर 14 अप्रैल, 2020 को गुजरात के अंकलेश्वर में पहुंचाई गई। इसी प्रकार, लगभग 40 डेफिब्रिलेटर्स की प्रदायगी चेन्नई से 36 घंटों के भीतर उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लायज कारपोरेशन लिमिटेड, लखनऊ को की गई। पांडीचेरी से ओडिशा एवं गुजरात तक वेंटिलेंटरों की प्रदायगी की गई है और इसके अतिरिक्त, कोलकाता से रांची एवं सिलीगुड़ी तक सड़क परिवहन नेटवर्कों के जरिये टनों दवाएं एवं उपकरणों का परिवहन किया गया है।

वित्तीय सेवाओं की दरवाजे तक प्रदायगी

पोस्टल नेटवर्क बैंक खाता खोलने एवं इससे भी महत्वपुर्ण यह कि आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (एईपीएस) के उपयोग के द्वारा गरीबों के दरवाजे तक नकदी की निकासी से संबंधित सुविधाएं भी प्रदान कर रहा है। इससे लोगो की विभिन्न पेंशन योजनाओं, मनरेगा एवं प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज के तहत हाल ही में घोषित राहत उपायों के तहत उन्हें भेजी जाने वाली प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण राशि की निकासी में सहायता की है। आम लोगों ने इस सुविधा का इतना अधिक लाभ उठाया है कि 13 अप्रैल को इंडियन पोस्टल पेमेंट बैंक ने सर्वकालिक उच्च कारोबार अर्थात 22.82 करोड़ रुपये के बराबर का 1.09 लाख लेनदेन दर्ज कराया है।

कुछ उदाहरणों का उल्लेख किया जाए तो, शिलौंग के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में खाता खोलने के शिविर का आयोजन किया गया, जहां आसपास के गांवों एवं पहाड़ियों से आने वाले सभी प्रवासी मजदूरों को स्थानीय प्रशासन द्वारा रखा गया है। मास्क, सोशल डिस्टैंसिंग एवं हैंड सैनिटाइजिंग जैसी सभी आवश्यक सावधानियों को बरतने के बाद ऐसा किया गया। आईपीपीबी खातों की सहायता से ये प्रवासी मजदूर केंद्रीय एवं राज्य योजनाओं के जरिये राहत प्राप्त करने में सक्षम हो सके। इसी प्रकार, बड़े पैमाने पर देश भर में, विशेष रूप से जम्मू, कश्मीर, लेह, गुजरात, तेलंगाना, कर्नाटक के सुदूर हिस्सों, झारखंड के जलजातीय क्षेत्रों, बिहार एवं मध्यप्रदेश आदि में दरवाजों पर पेंशन का भुगतान किया गया है। विधवा, दिव्यांगों एवं बुजुर्ग पेंशनधारकों को विशेष रूप से उनके दरवाजों पर किए जाने वाले इन भुगतानों का लाभ पहुंचा है।

एएम/एसकेजे

 



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