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राष्ट्रपति 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर, भारत के हथकरघा क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए हथकरघा पुरस्कार 2025 प्रदान करेंगी

प्रविष्टि तिथि: 04 AUG 2026 6:53PM by PIB Delhi

राष्ट्रपति 7 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह के दौरान प्रतिष्ठित हथकरघा पुरस्कार प्रदान करेंगी।

इस समारोह में केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह, वरिष्ठ गणमान्य व्यक्ति, हथकरघा उद्योग के प्रतिनिधि, मास्टर बुनकर, डिजाइनर, निर्यातक, कारीगर और अन्य विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे।

भारत की समृद्ध हथकरघा परंपराओं के संरक्षण, संवर्धन और विकास में असाधारण योगदान के लिए कुल 22 पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा, जिनमें 3 संत कबीर हथकरघा पुरस्कार विजेता और 19 राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार विजेता शामिल हैं।

(2025 के लिए संत कबीर और राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार विजेताओं की सूची)

हथकरघा क्षेत्र में उत्कृष्टता का उत्सव

वस्त्र मंत्रालय ने संत कबीर हथकरघा पुरस्कार और राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार 2025 के विजेताओं की घोषणा की है। ये पुरस्कार हथकरघा क्षेत्र में बुनाई, नवाचार, डिजाइन विकास, विपणन पहल, स्टार्ट-अप उद्यमों और उत्पादक कंपनियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन को मान्यता देते हैं।

ये पुरस्कार राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम (एनएचडीपी) के हथकरघा विपणन सहायता (एचएमए) घटक के अंतर्गत स्थापित किए गए हैं और हथकरघा क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए सर्वोच्च राष्ट्रीय मान्यता का प्रतिनिधित्व करते हैं।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह के दौरान ये पुरस्कार उन व्यक्तियों और संगठनों को प्रदान किए जाएंगे, जिन्होंने भारत की हथकरघा विरासत को मजबूत करने और घरेलू व अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में इसकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

इस कार्यक्रम में देश भर से संसद सदस्य, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, उद्योग विशेषज्ञ, शैक्षणिक संस्थान, निर्यातक, डिजाइनर और हथकरघा बुनकर के शामिल होने की उम्मीद है।

हथकरघा पुरस्कार

हथकरघा पुरस्कारों का उद्देश्य हथकरघा क्षेत्र में उत्कृष्टता, नवाचार और निरंतर प्रतिबद्धता को प्रोत्साहित करना है। ये पुरस्कार उत्कृष्ट शिल्प कौशल, पारंपरिक कौशल को संरक्षित करते हुए आधुनिक तकनीकों को अपनाने, उत्पाद विविधीकरण, डिजाइन नवाचार और बुनकर समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान को मान्यता देते हैं।

संत कबीर हथकरघा पुरस्कार

यह पुरस्कार उन हथकरघा बुनकरों के लिए देश का सर्वोच्च सम्मान है, जिन्होंने असाधारण शिल्प कौशल और भारत की बुनाई परंपराओं को संरक्षित और बढ़ावा देने के लिए आजीवन समर्पण दिखाया है।

पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं का चयन असाधारण तकनीकी कौशल, नवाचार, इस क्षेत्र में निरंतर योगदान, पारंपरिक बुनाई के तरीकों को बढ़ावा देने, कारीगरों को मार्गदर्शन देने और समुदाय के विकास के लिए किए गए प्रयासों के आधार पर किया जाता है।

पुरस्कार में शामिल हैं-

  • सोने का सिक्का (जड़ा हुआ)
  • ताम्रपत्र
  • शॉल
  • प्रमाण-पत्र

राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार

राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार उन हथकरघा बुनकरों और अन्य हितधारकों को सम्मानित करता है जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट रचनात्मकता, गुणवत्ता, नवाचार और उत्कृष्टता का प्रदर्शन किया है।

यह पुरस्कार कारीगरों और संस्थानों को भारत की विविध हथकरघा परंपराओं को संरक्षित करते हुए शिल्प कौशल, उत्पाद विकास और बाजार पहुंच में मानकों को लगातार बेहतर बनाने के लिए प्रेरित करता है।

पुरस्कार में शामिल हैं-

  • ताम्रपत्र
  • शॉल
  • प्रमाण-पत्र

चयन प्रक्रिया

बुनाई श्रेणी के पुरस्कार विजेताओं का चयन जोनल, मुख्यालय और केंद्रीय स्तर की चयन समितियों के माध्यम से एक कठोर बहु-स्तरीय मूल्यांकन प्रक्रिया द्वारा किया जाता है। इन समितियों में अनुभवी पेशेवर, तकनीकी विशेषज्ञ और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी शामिल होते हैं, जो निर्धारित पात्रता मानदंडों और मूल्यांकन मापदंडों के आधार पर नामांकनों का आकलन करते हैं।

डिजाइन विकास, विपणन, स्टार्ट-अप उद्यमों और उत्पादक कंपनियों से संबंधित श्रेणियों के लिए, नामांकन को अंतिम स्वीकृति से पहले मुख्यालय समिति और केंद्रीय स्तर की समिति द्वारा एक व्यवस्थित मूल्यांकन से गुजरना पड़ता है।

यह चयन प्रक्रिया हथकरघा क्षेत्र के सभी वर्गों में पारदर्शिता, निष्पक्षता और वास्तविक उत्कृष्टता को मान्यता देना सुनिश्चित करती है।

(2025 के लिए संत कबीर और राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार विजेताओं की सूची)

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पीके/केसी/एसके/डीए


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