रक्षा मंत्रालय
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रक्षा मंत्री के नेतृत्व में नई दिल्ली में पश्चिम एशिया की स्थिति पर 'मंत्रियों के अनौपचारिक समूह' (आईजीओएम) की दूसरी बैठक का आयोजन किया गया


श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत को किसी भी आपात स्थिति से निपटने और तैयार रहने के लिए चौबीसों घंटे निगरानी और सुनियोजित प्रतिक्रिया की आवश्यकता है

प्रविष्टि तिथि: 02 APR 2026 9:32PM by PIB Delhi

नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-2 में 2 अप्रैल, 2026 को रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में पश्चिम एशिया में उत्पन्न हो रही स्थिति की निगरानी करने और भारत पर उसके प्रभाव को कम करने के लिए सक्रिय उपायों का सुझाव देने हेतु गठित 'मंत्रियों के अनौपचारिक समूह' (आईजीओएम) की दूसरी बैठक आयोजित की गई।

'मंत्रियों के अनौपचारिक समूह' (आईजीओएम) ने हाल के घटनाक्रमों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण उत्पन्न होने वाले किसी भी प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के लिए सरकार द्वारा उठाए जाने वाले अगले कदमों पर चर्चा की।

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इस बैठक में वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण; पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी; विद्युत मंत्री श्री मनोहर लाल; रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा; विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर; उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह और रेल, सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव भी उपस्थित थे।

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'अनिश्चितता की स्थिति' को ध्यान में रखते हुए रक्षा मंत्री ने स्थिति पर 24 घंटे निगरानी रखने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए समन्वित तरीके से प्रतिक्रिया देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने यह सुनिश्चित करने को कहा कि देश के लोगों पर इस संघर्ष का कम से कम प्रभाव पड़े।

बैठक के दौरान सचिवों के सात अधिकार प्राप्त समूहों ने आईजीओएम को स्थिति से निपटने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में जानकारी दी। वैश्विक व्यापार व्यवधानों के कारण उत्पन्न चिंताओं को दूर करने और उद्योग, विशेष रूप से विनिर्माण क्षेत्र को राहत और समर्थन प्रदान करने तथा निवेशकों का विश्वास बढ़ाने के लिए वित्त मंत्रालय द्वारा उठाए गए कदमों से 'मंत्रियों के अनौपचारिक समूह' (आईजीओएम) को अवगत कराया गया। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

दिनांक 1 अप्रैल, 2026 को जारी अधिसूचना में 30 जून, 2026 तक 40 महत्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर पूर्ण सीमा शुल्क छूट से संबंधित प्रावधान किए गए हैं।

एसईजेड में पात्र इकाइयों को घरेलू बाजार में अपने उत्पाद बेचने के लिए एक बार की गारंटी के तौर पर सीमा शुल्क में छूट दी जाएगी और यह छूट 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2027 तक प्रभावी रहेगी।

राजस्व विभाग द्वारा 31 मार्च, 2026 को जारी अधिसूचना में यह स्पष्ट किया गया कि 1 अप्रैल, 2017 को या उसके बाद किए गए निवेशों पर जीएएआर व्यवस्था लागू नहीं होगी।

इन उपायों से कपड़ा, पैकेजिंग और फार्मास्यूटिकल्स सहित अन्य क्षेत्रों पर लागत का दबाव कम होगा, देश में आपूर्ति स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा और भारत में निवेश करने की योजना बना रहे निवेशकों को आवश्यक स्पष्टता प्राप्त होगी।

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श्री राजनाथ सिंह ने घरेलू उड़ानों के लिए विमानन टरबाइन ईंधन की कीमतों में मासिक वृद्धि पर 25% की सीमा लगाने के सरकार के निर्णय की सराहना की, जो 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी है। उन्होंने कहा कि इस कदम से लोगों को अचानक किराया बढ़ने से बचाने में मदद मिलेगी।

सरकार ने घरेलू एलपीजी आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है, और खपत की आवश्यकताओं को पूरी तरह से पूरा करने के लिए रिफाइनरी उत्पादन को बढ़ाया गया है। मंत्रियों के समूह को बताया गया कि एलपीजी वितरकों की ओर से कमी की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है और घरेलू एलपीजी सिलेंडरों का वितरण सामान्य कार्यक्रम के अनुसार जारी है। जमाखोरी और कालाबाजारी की घटनाओं के कारण आपूर्ति संबंधी अस्थायी चिंताएं उत्पन्न हुईं, जिससे कुछ इलाकों में घबराहट फैल गई थी।

मंत्रियों को सूचित किया गया कि एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए कई राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में छापेमारी की जा रही है और सख्त कार्रवाई की जा रही है। कुछ एलपीजी वितरकों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है जो अनियमितताओं में लिप्त थे।

प्रवासी श्रमिकों और कम खपत वाले परिवारों का सहयोग करने के लिए सरकार 5 किलोग्राम के फ्री ट्रेड एलपीजी सिलेंडरों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कर रही है और 23 मार्च, 2026 से अब तक 4.3 लाख से अधिक ऐसे सिलेंडर बेचे जा चुके हैं। ऐसे राज्यों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है जहां मांग अधिक है।

आईजीओएम को बताया गया कि कमर्शियल एलपीजी पर निर्भर उद्योगों की जरूरतें पूरी की जा रही हैं। काम-काज में कोई रुकावट न आए, यह सुनिश्चित करने के लिए संकट से पहले के सप्लाई लेवल का 80% से ज्दाया हिस्सा बनाए रखा गया है। विभिन्न मंत्रालयों और विभिन्न उद्योगों से जुड़े लोगों के साथ उनकी मांग को समझने और उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए विशेष बैठकें आयोजित की गई हैं। तेल सार्वजनिक उपक्रम पूरे देश में ऑटो एलपीजी की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित कर रहे हैं। हालांकि, निजी ऑपरेटरों को खरीद संबंधी चुनौतियों के कारण आपूर्ति संबंधी कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, यही वजह है कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के ऑटो एलपीजी पंपों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। जहां भी ऑटो चालित वाहन ड्यूल फीड हैं और पेट्रोल का उपयोग कर सकते हैं, वहां उन्हें पेट्रोल का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

मंत्रियों को सूचित किया गया कि घबराहट में की गई खरीदारी के कारण मांग में अचानक हुई वृद्धि को पूरा करने के लिए प्रतिदिन एलपीजी की डिलीवरी की संख्या में काफी वृद्धि की गई है, जिससे उपभोक्ताओं के लिए किसी भी प्रकार की कमी न हो। जहां भी संभव हो औद्योगिक उपयोग के लिए पाइपयुक्त प्राकृतिक गैस (पीएनजी) को एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है। जिन क्षेत्रों में पहले से ही पीएनजी का उपयोग हो रहा है, वहां औद्योगिक उपयोग के लिए इसकी आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है, जिससे परिचालन की निरंतरता बनी रहे।

आईजीओएम को यह भी जानकारी दी गई कि कुछ शरारती तत्व जानबूझकर सोशल मीडिया पर फोटोशॉप और मॉर्फ की गई तस्वीरें और भ्रामक सामग्री प्रसारित करके दहशत फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।  इस तरह की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। लोगों को सलाह दी जाती है कि वे अपुष्ट जानकारी पर विश्वास न करें और न ही उसे साझा करें तथा सटीक जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें।

आईजीओएम की पहली बैठक 28 मार्च 2026 को आयोजित की गई। इस बैठक में रक्षा मंत्री ने अधिकारियों को स्थिति पर बारीकी से नजर रखने, मध्यम से दीर्घकालिक तैयारी का दृष्टिकोण अपनाने, उच्च-स्तरीय समन्वय बनाए रखने और त्वरित निर्णय सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।

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पीके/केसी/आरकेजे


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