पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
12वीं ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक में भारत का जन-केंद्रित और कार्यान्वयन-उन्मुख पर्यावरणीय कार्रवाई का आह्वान
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि ब्रिक्स संगठन ज्ञान साझाकरण, प्रौद्योगिकी सहयोग और सुदृढ़ संस्थागत साझेदारी द्वारा सहयोग को क्षमता में बदल सकता है
श्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि समुदायिक हित का ध्यान रखते हुए स्थिति अनुकूलता, दायित्वपूर्ण नवाचार और विकास केंद्रित संवहनीयता महत्वपूर्ण
ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की 12वीं बैठक सर्वसम्मति से संयुक्त मंत्रिस्तरीय वक्तव्य अपनाने और चार ज्ञान संकलनों के साथ संपन्न
प्रविष्टि तिथि:
18 AUG 2026 3:28PM by PIB Delhi
भारत की अध्यक्षता में आज नई दिल्ली में आयोजित 12वीं ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक में केन्द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने ब्रिक्स सदस्य देशों के मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों का स्वागत किया।
श्री यादव ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की अध्यक्षता प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की दृष्टि-योजना से निर्देशित है जिसमें विकासशील देशों-वैश्विक दक्षिण की चिंताओं को एजेंडा में सबसे आगे रखा गया है। इसमें ब्रिक्स संगठन को सहयोग और संवहनीयता हेतु स्थिति अनुकूल और नवाचार निर्माण के रूप में पुनर्परिभाषित किया गया है जिसमें जन-केंद्रित दृष्टिकोण और मानवता की भावना सर्वोपरि है।
श्री यादव ने विशेष रूप से विकासशील देशों में जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता क्षय, प्रदूषण और आपदा जोखिम जैसी बढ़ती वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियों का उल्लेख किया, जहां पर्यावरणीय असुरक्षा प्राय: व्यापक विकास प्राथमिकताओं से निकटता से जुड़ी होती हैं। उन्होंने जंगलों में आग लगने की रोकथाम, इसकी तैयारी, आरंभिक चेतावनी, प्रतिक्रिया और अग्नि घटनाओं के उपरांत क्षेत्र में ब्रिक्स सहयोग मजबूत बनाने का आह्वान किया। उन्होंने इसके साथ ही जलवायु वित्त पोषण, अनुकूलन और स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने के महत्व पर बल दिया।
केन्द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री ने भारतीय दृष्टिकोण व्यक्त करते हुए कहा कि पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन और मानव विकास साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने मिशन लाइफ और एक पेड़ मां के नाम जैसी परियोजनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि ये परियोजनाएं प्राकृतिक पर्यावरण को पहली जैसी स्वस्थ स्थिति में लाने, जनभागीदारी और सामुदायिक स्वामित्व को जोड़ती हैं। उन्होंने पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान को साथ लाने का भी आह्वान किया ताकि समाधानों को वैज्ञानिक रूप से सुदृढ़, स्थानीय तौर पर प्रासंगिक और सामाजिक रूप से समावेशी बनाया जाए। श्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि 2031-2035 के लिए भारत का नया राष्ट्रीय निर्धारित योगदान समावेशी विकास और ऊर्जा सुरक्षा के साथ प्रबलता से जलवायु परिवर्तन रोकने की महत्वाकांक्षी प्रतिबद्धता दर्शाता है।
श्री यादव ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की चार प्राथमिकताएं रेखांकित कीं जिनमें संवहनीय जीवनशैली को बढ़ावा देना; वनरोपण, वन अग्नि प्रबंधन और आपदा से निपटने की क्षमता; चक्रीय अर्थव्यवस्था; और अनुकूलन शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये चारों प्राथमिकताएं सरल लेकिन दृढ़ विश्वास दर्शाती हैं कि पर्यावरणीय कदम जन-केंद्रित और संवहनीय, कार्यान्वयन उन्मुख और विकासशील देशों की वास्तविकताओं के अनुरूप होनी चाहिए।
श्री यादव ने कहा कि भारत की अध्यक्षता में हासिल प्रगति महीनों के संवाद, विमर्श और सहयोग का नतीजा है। उन्होंने समुदायों के हितों का ध्यान रखते हुए स्थिति अनुकूलता विकसित करने, दायित्वपूर्ण नवाचार को आगे बढ़ाने और विकास केन्द्रित संवहनीयता का आह्वान किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि ब्रिक्स संगठन अपने ज्ञान साझाकरण, तकनीकी आदान-प्रदान, प्रशिक्षण, प्रौद्योगिकी सहयोग और सुदृढ़ संस्थागत साझेदारी द्वारा आपसी सहयोग को सामूहिक और सहयोगात्मक क्षमता में बदल सकता है।
ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की 12वीं बैठक सर्वसम्मति से संयुक्त मंत्रिस्तरीय वक्तव्य अपनाने और चार ज्ञान संकलनों के साथ संपन्न हुई। संयुक्त मंत्रिस्तरीय वक्तव्य में चार अपेक्षित परिणाम मसौदा शामिल हैं:
- विचारार्थ विषय - संवहनीय जीवनशैली में ज्ञान साझाकरण, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ब्रिक्स संस्थानों का नेटवर्क स्थापित करना
- मरुस्थलीकरण से निपटने, संवहनीय भूमि प्रबंधन और पारिस्थितिकी तंत्र स्थिति अनुकूलन के लिए एकीकृत प्राकृतिक तत्व प्रबंधन हेतु ब्रिक्स सिद्धांत
- ब्रिक्स देशों में वनों में आग लगने की घटना से निपटने की तैयारी और प्रतिक्रिया पर आम सहमति
- पारंपरिक ज्ञान आधारित जन-केंद्रित और समुदाय-आधारित अनुकूलन द्वारा जलवायु स्थिति अनुरूपण के ब्रिक्स सिद्धांत
पर्यावरण मंत्रियों की बैठक में विचारोत्तेजक पैनल परिचर्चा और अन्य कार्यक्रम भी आयोजित हुए:
- जलवायु परिवर्तन पर ब्रिक्स उच्च स्तरीय संवाद - जन-केंद्रित, समुदाय-आधारित अनुकूलन: जन-केंद्रित, स्थिति अनुरूपण और संवहनीय ढांचे द्वारा आधुनिक विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के साथ पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय प्रथाओं के एकीकरण को बढ़ावा देकर जलवायु अनुकूलन आगे बढ़ाना।
- एकीकृत भूदृश्य-आधारित हरियाली – स्थिति अनुरूप एकीकृत प्राकृतिक तत्वों और सतत विकास हेतु ब्रिक्स अनुभवों का साझाकरण: सदस्य देशों के बीच सफल एकीकृत प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन पहल और ज्ञान-साझाकरण।
कार्यक्रम के दौरान, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने एक डिजिटल और इंटरैक्टिव मिशन लाइफ पवेलियन स्थापित किया, जिसमें इमर्सिव गेमिंग और इंटरैक्टिव तकनीकों द्वारा भारत की प्रमुख पहल प्रदर्शित किए गए। इसने संधारणीय जीवनशैली को बढ़ावा देने के भारत के प्रयासों का संपूर्ण और चौतरफा अनुभव प्रदान किया। दो दिवसीय बैठक के दौरान, ब्रिक्स प्रतिनिधियों को भारतीय कलाकारों की सांस्कृतिक और मनमोहक प्रस्तुति देखने का मौका मिला जिसमें भारतीय संस्कृति की जीवंत झलक पेश की गई।
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पीके/केसी/एकेवी/एमपी
(रिलीज़ आईडी: 2300872)
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