वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय
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भारत और ओमान ने ऐतिहासिक व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) के माध्यम से नए व्यापार सम्बंधों की शुरूआत की


भारत और ओमान के बीच इस समझौते से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में रणनीतिक आर्थिक साझेदारी के एक नए युग का शुभारंभ हुआ

2047 में विकसित भारत के लिए एक नया व्यापार गलियारा: सीईपीए भारत के ओमान को होने वाले 99.38 प्रतिशत निर्यात के लिए शून्य शुल्क पहुंच प्रदान करता है

भारत, अमरीका के बाद ओमान के साथ व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौता करने वाला दूसरा देश बन गया है

भारत-ओमान सीईपीए से द्विपक्षीय व्यापार, निर्यात, रोजगार सृजन और रणनीतिक आर्थिक एकीकरण को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा मिलने की उम्मीद है

कृषि, समुद्री उत्पाद, वस्त्र, रत्न और आभूषण, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग सामान, जूते और ऑटोमोबाइल जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में पूर्ण शुल्क हटाने और प्रतिस्पर्धी लाभ के साथ मजबूत निर्यात विस्तार की संभावना है

अभूतपूर्व व्यापार सुविधा उपायों से गैर-शुल्क बाधाएं दूर होती हैं और भारतीय उत्पादों के लिए बाजार पहुंच में तेजी आती है: ओमान के बंदरगाहों पर ईआईसी प्रमाणपत्र स्वीकार किए जाएंगे

शुल्क हटने से मत्स्य पालन, मांस, अंडे, समुद्री उत्पाद और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के मामले में भारत का प्रभुत्व मजबूत होता है

जीसीसी और पूर्वी अफ्रीका का प्रवेश द्वार: सोहार, दुक्म और सलालाह में ओमान के लॉजिस्टिक्स हब भारत की क्षेत्रीय व्यापार कनेक्टिविटी को बढ़ाएंगे

ओमान द्वारा 127 सेवा उप-क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ सेवाओं से भारतीय पेशेवरों, स्टार्टअप्स और ज्ञान आधारित उद्यमों के लिए अवसर खुल रहे हैं

व्यावसायिक अवसरों में वृद्धि: सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) की सीमा 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत की गई; इंजीनियरों, डॉक्टरों, आईटी पेशेवरों, शिक्षकों और सलाहकारों के लिए समर्पित व्यावसायिक प्रतिबद्धताएं

किसानों और घरेलू उद्योग की सुरक्षा के लिए, डेयरी, अनाज, फल, सब्जियां, खाद्य तेल, तिलहन, रबर, चमड़ा और मसाले जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को बाजार पहुंच से बाहर रखा गया है

फार्मास्यूटिकल्स के लिए त्वरित बाजार पहुंच: यूएसएफडीए, ईएमए, यूके एमएचआरए और टीजीए द्वारा अनुमोदित उत्पादों को 90 दिनों के भीतर विपणन प्राधिकरण प्राप्त होगा

भारत-ओमान सीईपीए से द्विपक्षीय व्यापार, निर्यात और रोजगार सृजन में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद: इससे मजबूत आधार बनेगा

प्रविष्टि तिथि: 01 JUN 2026 3:46PM by PIB Delhi

आज भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) लागू हो गया है। यह द्विपक्षीय आर्थिक सम्बंधों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और दोनों देशों के बीच रणनीतिक व्यापार और निवेश सहयोग में परिवर्तनकारी नए अध्याय की शुरूआत है।

भारत-ओमान सीईपीए पर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और महामहिम सुल्तान हैथम बिन तारिक अल सईद की उपस्थिति में 18 दिसंबर, 2025 को मस्कट में हस्ताक्षर किए गए थे। दोनों पक्षों द्वारा आंतरिक प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद, यह समझौता 1 जून, 2026 से प्रभावी हो गया है।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल और भारत में ओमान के राजदूत महामहिम ईसा सालेह अल शिबानी की उपस्थिति में समझौते को लागू किया गया। समझौते के लागू होने पर मुंबई, कोलकाता और चेन्नई से तरजीही शुल्क का लाभ प्राप्त कृषि और रत्न एवं आभूषण निर्यात की पहली खेपों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।

ओमान खाड़ी क्षेत्र में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और अपने उन्नत बंदरगाह अवसंरचना के माध्यम से व्यापक जीसीसी बाजार के लिए एक रणनीतिक प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और ओमान के बीच द्विपक्षीय व्यापार 11.18 अरब अमरीकी डॉलर तक पहुंच गया। यह वित्त वर्ष 2024-25 के 10.61 अरब अमरीकी डॉलर से सकारात्मक रुझान दर्शाता है। एक सुनियोजित वार्ता प्रक्रिया के माध्यम से सफलतापूर्वक संपन्न यह समझौता, वस्तुओं, सेवाओं, पेशेवर गतिशीलता, नियामक सहयोग, गैर-शुल्क बाधा सुरक्षा उपायों और सहयोग अध्यायों को शामिल करते हुए, जीसीसी अर्थव्यवस्थाओं में भारत की बढ़ती आर्थिक और व्यापारिक उपस्थिति और रणनीतिक प्रभाव को मजबूत करता है। इसके साथ ही दीर्घकालिक आर्थिक संरचना के निर्माण के लिए शुल्क कटौती मामले में भी महत्वपूर्ण है।

ओमान खाड़ी क्षेत्र में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और अपनी उन्नत रसद और बंदरगाह अवसंरचना के माध्यम से व्यापक जीसीसी और पूर्वी अफ्रीकी बाजारों के लिए एक रणनीतिक प्रवेश द्वार के रूप में भी कार्य करता है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और ओमान के बीच द्विपक्षीय व्यापार 11.18 अरब अमरीकी डॉलर तक पहुंच गया, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 10.61 अरब अमरीकी डॉलर से लगातार वृद्धि दर्शाता है।

भारत-ओमान सीईपीए खाड़ी क्षेत्र के साथ भारत की बढ़ती भागीदारी में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और यह विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता, रोजगार सृजन, सेवा निर्यात और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकरण का समर्थन करने वाली लचीली, विश्वसनीय और विविध व्यापार साझेदारी बनाने की भारत की व्यापक रणनीति को दर्शाता है।

सीईपीए के संचालन पर बोलते हुए श्री पीयूष गोयल ने कहा:

भारत-ओमान सीईसीए समझौता ओमान के साथ भारत के सम्बंधों में एक महत्वपूर्ण कदम है और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के किसानों, मछुआरों, युवाओं, महिलाओं, उद्यमियों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए लाभकारी व्यापारिक साझेदारियां स्थापित करने के दृष्टिकोण को दर्शाता है। इस समझौते खाड़ी क्षेत्र में विकास को कई गुना बढ़ाएगा। भारत के 99.38 प्रतिशत निर्यात को शुल्क-मुक्त पहुंच प्रदान करने वाला यह समझौता हमारे निर्यातकों और पेशेवरों के लिए नए अवसर खोलता है। ओमान हमारा विश्वसनीय साझेदार है, हमारे लोगों के लिए एक सेतु है और खाड़ी और पूर्वी अफ्रीका का प्रवेश द्वार है। हमारे अवसर बढ़ेंगे और सीईसीए क्षेत्रीय और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत के एकीकरण को मजबूत करेगा। श्रम-प्रधान क्षेत्रों को महत्वपूर्ण लाभ पहुंचाकर, यह रोजगार सृजन में सहयोग करेगा, निवेश को बढ़ावा देगा और भारतीय उद्यमों को उन देशों के आपूर्तिकर्ताओं के साथ समान स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाएगा जिन्हें तरजीही बाजार पहुंच प्राप्त है।

वाणिज्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल ने कहा, ऐसे समय में जब आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण, उत्पादन नेटवर्क में बदलाव और नए आर्थिक गलियारों के उदय से वैश्विक व्यापार के स्वरूप में परिवर्तन आ रहा है, सीईपीए भारत और ओमान को इन संरचनात्मक परिवर्तनों का लाभ उठाने के लिए तैयार करता है। व्यापार, सेवाओं, निवेश और रसद में घनिष्ठ एकीकरण को बढ़ावा देकर, यह समझौता अधिक लचीली मूल्य श्रृंखलाओं, बेहतर आर्थिक प्रतिस्पर्धा और क्षेत्रीय एवं वैश्विक महत्व वाली मजबूत रणनीतिक साझेदारी के लिए एक ढांचा तैयार करता है। भारत-ओमान सीईपीए हमारी द्विपक्षीय आर्थिक भागीदारी को नई ऊर्जा प्रदान करता है। यह पूरक शक्तियों, गहन नियामक सहयोग और विकास के प्रति साझा प्रतिबद्धता पर आधारित है। यह समझौता शुल्क उदारीकरण के साथ-साथ कई लाभ भी प्रदान करता है: यह बाजार पहुंच को बढ़ाता है, सेवा व्यापार को सुगम बनाता है और दोनों बाजारों में काम करने वाले व्यवसायों के लिए अधिक पूर्वानुमान प्रदान करता है।

खाड़ी देशों का प्रवेश द्वार: विकसित भारत 2047 के लिए व्यापार, सेवाओं और समृद्धि को बढ़ावा देना

वस्तुओं का व्यापार: परिवर्तनकारी 99.38 प्रतिशत शुल्क-मुक्त पहुंच

  • सीईपीए मूल्य के हिसाब से ओमान को भारत के 99.38 प्रतिशत निर्यात के लिए शुल्क-मुक्त पहुंच प्रदान करता है। इसमें ओमान की 98.08 प्रतिशत शुल्क प्रक्रिया शामिल हैं। इससे यह समझौता खाड़ी क्षेत्र में भारत द्वारा हासिल किए गए सबसे व्यापक बाजार पहुंच परिणामों में से एक बन गया है।
  • सभी शून्य शुल्क रियायतें तत्काल प्रभाव से लागू हो रही हैं। इससे भारतीय निर्यातकों को निश्चितता और प्रतिस्पर्धात्मकता प्राप्त होगी।
  • पहले, एमएफएन व्यवस्था के तहत, भारत के निर्यात का केवल 15.33 प्रतिशत हिस्सा ही ओमान में शुल्क-मुक्त प्रवेश करता था। सीईपीए के साथ, भारतीय निर्यातकों को ओमान के लगभग 28 अरब अमरीकी डॉलर के आयात बाजार में कीमतों के मामले में काफी प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्राप्त होगा।
  • इस समझौते से रत्न एवं आभूषण, वस्त्र, चमड़ा, जूते, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और फार्मास्यूटिकल्स जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों, विनिर्माण और रोजगार को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा मिलने की आशा है।
  • भारतीय निर्यातक अब उन देशों के आपूर्तिकर्ताओं के मुकाबले समान या बेहतर शर्तों पर प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। इन निर्यातकों का ओमान के साथ कोई तरजीही व्यापार समझौता नहीं है।
  • सोहार, दुक्म और सलालाह में स्थित ओमान के रणनीतिक लॉजिस्टिक्स हब भारतीय निर्यातकों को न केवल ओमान बल्कि व्यापक जीसीसी और पूर्वी अफ्रीकी बाजारों तक बेहतर पहुंच प्रदान करते हैं।

 

संतुलित बाजार पहुंच और संवेदनशील क्षेत्रों का संरक्षण

  • भारत ने ओमान से आयात होने वाले 94.81 प्रतिशत मूल्य के आयात को कवर करने वाली 77.79 प्रतिशत शुल्क प्रक्रियाएं पर शुल्क उदारीकरण की पेशकश की है, जबकि संवेदनशील क्षेत्रों के लिए मजबूत सुरक्षा उपायों को बनाए रखा है।
  • बहिष्करण सूची के अंतर्गत संरक्षित उत्पादों में डेयरी उत्पाद, अनाज, फल, सब्जियां, खाद्य तेल, तिलहन, रबर, चमड़ा, मसाले और प्रमुख कृषि उत्पाद शामिल हैं।
  • घरेलू उद्योग और विनिर्माण प्रतिस्पर्धा की रक्षा के लिए चुनिंदा संवेदनशील औद्योगिक और कृषि उत्पादों के लिए शुल्क दर कोटा और न्यूनतम आयात मूल्य तंत्र को भी शामिल किया गया है।
  • रियायतों की सुनियोजित संरचना भारत की निर्यात महत्वाकांक्षाओं को खाद्य सुरक्षा सम्बंधी चिंताओं, किसान कल्याण और ग्रामीण आजीविका संरक्षण के साथ संतुलित करती है।

समुद्री उत्पाद: क्षेत्रीय समुद्री खाद्य मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की उपस्थिति को बढ़ाना

  • झींगा, मछली और कटलफिश सहित सभी समुद्री उत्पादों को तत्काल शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा। यह पहले लागू होने वाले 5 प्रतिशत तक के आयात शुल्क का स्थान लेगा।
  • 2025 में ओमान का समुद्री आयात 35.3 मिलियन अमरीकी डॉलर था, जबकि भारत का निर्यात केवल 10 मिलियन अमरीकी डॉलर था। यह पर्याप्त अप्रयुक्त क्षमता को दर्शाता है।
  • इस समझौते से आंध्र प्रदेश, केरल, तमिलनाडु और गुजरात सहित प्रमुख तटीय राज्यों से निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।
  • भारतीय समुद्री निर्यातकों को बेहतर प्रतिस्पर्धात्मकता, तेजी से मंजूरी और खाड़ी क्षेत्र की खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं में मजबूत एकीकरण प्राप्त होता है।

रत्न और आभूषण: वैश्विक आभूषण व्यापार में भारत के नेतृत्व को मजबूत करना

  • रत्नों और आभूषणों पर लगने वाले 5 प्रतिशत तक के आयात शुल्क को पहले दिन से ही समाप्त कर दिया गया है।
  • भारतीय निर्यातकों को इटली, तुर्की, थाईलैंड और चीन के प्रतिस्पर्धियों की तुलना में संरचनात्मक मूल्य लाभ प्राप्त होता है।
  • ओमान का कुल रत्न और आभूषण आयात बाजार सालाना 1.07 अरब अमरीकी डॉलर का है। इस क्षेत्र में भारत का ओमान को निर्यात 2025 में 25.78 मिलियन अमरीकी डॉलर था। इसमें 18.48 मिलियन अमरीकी डॉलर के पॉलिश किए हुए प्राकृतिक हीरे और 6.67 मिलियन अमरीकी डॉलर के सोने के आभूषण शामिल थे।
  • अनुमान है कि तीन वर्षों के भीतर निर्यात छह गुना बढ़कर 150 मिलियन अमरीकी डॉलर तक पहुंच सकता है। भारतीय आपूर्तिकर्ताओं को अब अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में संरचनात्मक मूल्य और प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्राप्त है। वहीं, दूसरी ओर उनके सभी प्रतिस्पर्धियों को ओमान के शुल्क का सामना करना पड़ रहा है।
  • सूरत (हीरे), जयपुर (रत्न), मुंबई, कोलकाता और चेन्नई के क्लस्टर इस वृद्धि को भुनाने के लिए अच्छी स्थिति में हैं, क्योंकि रत्न और आभूषण के लिए नए अवसर खुल रहे हैं और इन सभी क्लस्टरों में रोजगार में वृद्धि की उम्मीद है।

 

कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ: वैश्विक बाजारों के लिए भारत की कृषि शक्ति का उपयोग करना

  • भारत, ओमान के आयात में 17.8 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ, ओमान का दूसरा सबसे बड़ा कृषि आपूर्तिकर्ता है। जहां निर्यात 9.13 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़कर 2025 में 552.85 मिलियन अमरीकी डॉलर तक पहुंच गया है, वहीं कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा)-सूचीबद्ध उत्पादों का निर्यात इससे भी अधिक तेजी से 12.36 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़कर 477 मिलियन अमरीकी डॉलर तक पहुंच गया है।
  • शुल्क हटाने से शहद, मसाले, काजू, बासमती चावल, मक्खन और मीठे बिस्कुट जैसे उत्पादों में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत होती है।
  • वर्तमान में ओमान द्वारा किए जाने वाले गोमांस के आयात में 94 प्रतिशत से अधिक और ताजे अंडे के आयात में 98 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी भारत की है। इससे ओमान खाड़ी क्षेत्र में भारत के सबसे महत्वपूर्ण कृषि निर्यात स्थलों में से एक बन गया है।
  • निर्यात के लिए पहचाने गए प्रमुख उत्पादों में बासमती और उबले हुए चावल, काजू, प्याज, आलू, सोयाबीन का आटा, मीठे बिस्कुट, मक्खन, जमे हुए बिना हड्डी वाले गोमांस और निषेचित अंडे शामिल हैं। यह किसानों, खाद्य प्रसंस्करणकर्ताओं और कृषि निर्यातकों के लिए एक व्यापक और बढ़ता हुआ पोर्टफोलियो प्रस्तुत करते हैं।
  • अल्फोंसो, केसर और दशहरी किस्मों सहित आम के निर्यात को शुल्क-मुक्त पहुंच के माध्यम से खाड़ी बाजारों में बेहतर प्रतिस्पर्धात्मकता प्राप्त होती है।
  • इस समझौते से उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु सहित राज्यों के किसानों, कृषि प्रसंस्करणकर्ताओं और खाद्य निर्यातकों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

फार्मास्युटिकल्स: नियामकीय सफलताओं के माध्यम से बाजार पहुंच को बढ़ावा देना

  • यह समझौता दवाओं, टीकों और फार्मास्युटिकल सामग्रियों (पेनिसिलिन, स्ट्रेप्टोमाइसिन और टेट्रासाइक्लिन सहित) के लिए बाध्यकारी शून्य-शुल्क पहुंच प्रदान करता है।
  • ओमान के दवा बाजार का मूल्य 2025 में 302.84 मिलियन अमरीकी डॉलर था और 2031 तक 473.71 मिलियन अमरीकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है (6.6 प्रतिशत की सीएजीआर दर), जो भारत के दवा निर्यातकों के लिए एक महत्वपूर्ण और बढ़ता हुआ अवसर प्रस्तुत करता है।
  • यूएसएफडीए, ईएमए, यूके एमएचआरए और टीजीए द्वारा अनुमोदित उत्पाद बिना पूर्व निरीक्षण के 90 दिनों के भीतर विपणन प्राधिकरण के लिए पात्र होंगे। जहां निरीक्षण आवश्यक हैं वहां 270 कार्यदिवसों का लक्ष्य रखा गया है।
  • जीएमपी और निरीक्षण रिपोर्टों की स्वीकृति से अनुपालन का बोझ काफी कम हो जाता है और भारतीय दवा निर्यातकों के लिए बाजार में प्रवेश की प्रक्रिया तेज हो जाती है।
  • खाड़ी देशों के स्वास्थ्य सेवा बाजार में भारतीय दवा कंपनियों को बेहतर पूर्वानुमान, तेजी से अनुमोदन और बेहतर प्रतिस्पर्धात्मकता प्राप्त होती है।
  • आने वाले वर्षों में ओमान के दवा बाजार में काफी वृद्धि होने का अनुमान है। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए बड़े अवसर पैदा होंगे।

इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग सामान: पूर्ण शुल्क निश्चितता से भारत के विनिर्माण निर्यात लाभ को मजबूती मिलेगी

  • सभी इंजीनियरिंग उत्पादों को शून्य शुल्क वाले बाजार में प्रवेश मिलेगा। इससे अति तरजीही राष्ट्र - एमएफएन के 5 प्रतिशत तक के शुल्क की जगह ले ली जाएगी।
  • मशीनरी, ऑटोमोबाइल, विद्युत उपकरण, लोहा और इस्पात तथा औद्योगिक मशीनरी जैसे प्रमुख क्षेत्रों को लाभ मिलेगा।
  • ओमान ने 2025 में लगभग 1.7 अरब अमरीकी डॉलर मूल्य के इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का आयात किया। इससे भारतीय निर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर उत्पन्न हुए हैं। ओमान को भारत का इलेक्ट्रॉनिक निर्यात 146 मिलियन अमरीकी डॉलर था, जो एक महत्वपूर्ण अंतर है। इसे सीईपीए के पूर्ण शुल्क निर्धारण के माध्यम से पाटने का प्रयास किया जा रहा है। इस निर्धारण में बोर्ड और कैबिनेट, स्टैटिक कन्वर्टर और टीवी रिसेप्शन उपकरण सहित सभी इलेक्ट्रॉनिक श्रेणियों को शामिल किया गया है।
  • उत्पादन आधारित प्रोत्साहन - पीएलआई ढांचे के तहत काम करने वाले भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग निर्यातकों सहित अन्य निर्यातकों को बाजार में अधिक हिस्सेदारी हासिल करने की आशा है।
  • भारत के इंजीनियरिंग निर्यात के लिए ओमान एक महत्वपूर्ण गंतव्य है। हमारा व्यापार वित्त वर्ष 2025-26 में 875.83 मिलियन अमरीकी डॉलर तक पहुंच गया। इसमें मशीनरी, विद्युत उपकरण, ऑटोमोबाइल, लोहा और इस्पात तथा अलौह धातुएं शामिल हैं। सभी इंजीनियरिंग उत्पादों को शून्य शुल्क पर बाजार पहुंच प्राप्त है, जो पहले के 0-5 प्रतिशत के एमएफएन शुल्क का स्थान लेता है। अनुमान है कि 2030 तक ओमान को इंजीनियरिंग निर्यात बढ़कर 1.3-1.6 बिलियन अमरीकी डॉलर हो जाएगा। बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए लोहा और इस्पात, विद्युत और औद्योगिक मशीनरी, मोटर वाहन (5 प्रतिशत शुल्क हटा दिया गया) और तांबा उत्पादों में प्रमुख वृद्धि की आशा है।

सेवाएं: ओमान द्वारा पेश किया गया अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव, सेवाओं के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने में सहायक।

  • द्विपक्षीय सेवा व्यापार 2024 में 863 मिलियन अमरीकी डॉलर का रहा, जिसमें भारत को 447 मिलियन अमरीकी डॉलर का अधिशेष प्राप्त हुआ। ओमान का वैश्विक सेवा आयात 12.52 बिलियन अमरीकी डॉलर था, जबकि भारत का इसमें केवल 5.31 प्रतिशत हिस्सा था, जो अपार संभावनाओं को दर्शाता है।
  • सीईपीए के तहत, ओमान ने 127 सेवा उप-क्षेत्रों में व्यापक और गहन बाजार पहुंच प्रतिबद्धताएं की हैं। ये प्रतिबद्धताएं जीएटीएस/सर्वश्रेष्ठ एफटीए-प्लस प्रतिबद्धताओं का प्रतिनिधित्व करती हैं। इससे यह किसी भी जीसीसी देश द्वारा भारत को दी गई सबसे व्यापक सेवा पेशकश बन जाती है।
  • प्रमुख क्षेत्रों में कंप्यूटर और सम्बंधित सेवाएं, पेशेवर सेवाएं, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, वित्तीय सेवाएं, निर्माण, पर्यटन और दूरसंचार शामिल हैं।
  • प्रमुख उप-क्षेत्रों में एमएफएन की प्रतिबद्धताएं यह सुनिश्चित करती हैं कि ओमान द्वारा तीसरे देशों को दिया जाने वाला कोई भी अधिक अनुकूल व्यवहार स्वतः ही भारत को भी दिया जाएगा।
  • किसी भी द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौते में पहली बार, ओमान ने लेखांकन, इंजीनियरिंग, चिकित्सा, आईटी, शिक्षा और निर्माण सहित पेशेवरों की परिभाषित श्रेणियों के लिए बाध्यकारी प्रतिबद्धताएं की हैं।
  • बेहतर आवागमन प्रावधानों से भारत-ओमान के लगभग 6,000 संयुक्त उद्यमों को लाभ होगा। व्यावसायिक आगंतुक ओमान में 90 दिनों तक रह सकते हैं; स्वतंत्र पेशेवर 180 दिनों तक रह सकते हैं; और अंतर-निगम स्थानांतरण (आईसीटी) 4 वर्षों तक रह सकते हैं। ये प्रावधान भारत के पेशेवर कार्यबल के लिए स्पष्ट और कानूनी रूप से लागू होने योग्य आवागमन मार्ग प्रदान करते हैं।
  • इस समझौते में सामाजिक सुरक्षा समझौते (एसएसए) पर भविष्य में बातचीत का प्रावधान है। एसएसए सामाजिक सुरक्षा लाभों की पारस्परिक निरंतरता सुनिश्चित करेगा और ओमान में भारतीय श्रमिकों और नियोक्ताओं के लिए दोहरे योगदान से बचने में मदद करेगा।

स्मार्ट विनियमन और व्यापार सुविधा

  • ओमान भारत की निर्यात निरीक्षण परिषद (ईआईसी) द्वारा जारी प्रमाणपत्रों को अनिवार्य रूप से स्वीकार करेगा। इससे दोहराव वाले परीक्षण और निरीक्षण समाप्त हो जाएंगे।
  • भारत की एनपीओपी जैविक प्रमाणन और हलाल प्रमाणन प्रणालियों को ओमान की मान्यता प्राप्त है।
  • समर्पित एसपीएस और टीबीटी अध्याय गैर-शुल्क बाधाओं को कम करते हैं और पारदर्शिता और नियामक सहयोग में सुधार करते हैं।
  • निर्यातकों के लिए मानक कार्गो निकासी समयसीमा और नाशवान वस्तुओं के लिए त्वरित प्रक्रिया तंत्र से दक्षता में सुधार होता है और लॉजिस्टिक्स लागत कम होती है।

निवेश: आर्थिक संरचना को सुदृढ़ बनाना

  • सीईपीए निवेश को सुगम बनाने के लिए एक संरचित ढांचा स्थापित करता है। यह विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा और सेवाओं सहित प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में निवेश का समर्थन करता है।
  • अनुपालन सम्बंधी बोझ में कमी, नियामकीय निश्चितता में सुधार और बाजार तक पहुंच में वृद्धि से भारत की सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों की प्रतिस्पर्धात्मकता में उल्लेखनीय मजबूती आने की उम्मीद है।
  • स्टार्टअप, महिलाएं, उद्यमी और सेवा पेशेवर, जीसीसी मूल्य श्रृंखलाओं में बेहतर एकीकरण से लाभान्वित होने की आशा है।

द्विपक्षीय व्यापार: मजबूत गति, व्यापार को पुनर्जीवित कर रही है

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और ओमान के बीच द्विपक्षीय व्यापार 11.18 अरब अमरीकी डॉलर तक पहुंच गया और इसमें लगातार मजबूत वृद्धि देखी जा रही है। सीईपीए के लागू होने से, बेहतर बाजार पहुंच, सहयोग, निवेश प्रवाह और मजबूत आर्थिक तालमेल के माध्यम से आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय विस्तार होने की आशा है।

यह समझौता भारत और ओमान के बीच व्यापार, निवेश, सेवाओं, रसद और नियामक साझेदारी को समाहित करते हुए एक सुदृढ़ आर्थिक ढांचा स्थापित करता है। भारत-ओमान सीईपीए, विकसित भारत @2047 की परिकल्पना के तहत वैश्विक स्तर पर एकीकृत, लचीली और प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में भारत की यात्रा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।

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पीके/केसी/वीके/केके


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