महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
भारत ने अमरीका के न्यूयॉर्क में स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित संयुक्त राष्ट्र सामाजिक विकास आयोग के 64वें सत्र में अधिकार-आधारित, समावेशी और लोक-केंद्रित विकास दृष्टिकोण को रेखांकित किया
महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने "कोपेनहेगन से दोहा तक सामाजिक विकास के लिए द्वितीय विश्व शिखर सम्मेलन के परिणामों का लाभ: 2030 और उसके बाद के लिए राष्ट्रीय कार्रवाई का संघटन" थीम पर मंत्रिस्तरीय फोरम को संबोधित किया
प्रविष्टि तिथि:
04 FEB 2026 8:00AM by PIB Delhi
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में "कोपेनहेगन से दोहा तक आयोजित द्वितीय विश्व सामाजिक विकास शिखर सम्मेलन के परिणामों का लाभ" थीम पर हुई चर्चा में अपने अधिकार-आधारित, समावेशी और लोक-केंद्रित विकास दृष्टिकोण को रेखांकित किया। भारत की ओर से वक्तव्य देते हुए महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने इस बात पर बल दिया कि सामाजिक न्याय भारत के 2047 के विकसित भारत के राष्ट्रीय विजन का केंद्रबिंदु बना हुआ है।

श्रीमती ठाकुर ने कोपेनहेगन घोषणा में विकास के केंद्र में लोगों को रखे जाने और दोहा राजनीतिक घोषणा में उभरती वैश्विक चुनौतियों के बीच इस प्रतिबद्धता की पुष्टि किए जाने का स्मरण करते हुए कहा कि भारत का " सबका साथ, सबका विकास " का शासन दर्शन सभी के लिए गरिमा, समानता और अवसर सुनिश्चित करने के समग्र सरकार और समाज के संपूर्ण दृष्टिकोण को दर्शाता है।
श्रीमती सावित्री ठाकुर ने भारत के व्यापक सामाजिक संरक्षण और समावेशन उपायों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि:
- खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों के अंतर्गत 80 करोड़ से अधिक लोग शामिल हैं।
- स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से 55 करोड़ से अधिक नागरिक निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा का लाभ उठाते हैं।
- 16,000 जन आरोग्य केंद्रों के माध्यम से किफायती दवाएं और चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं।
- स्थानीय प्रशासन में 14 लाख से अधिक निर्वाचित महिला प्रतिनिधि कार्यरत हैं, जो जमीनी स्तर पर लोकतंत्र के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
- बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और सुकन्या समृद्धि योजना जैसी प्रमुख पहलें लड़कियों की शिक्षा और आर्थिक सुरक्षा को सुदृढ़ कर रही हैं।
- श्रम सुधार समान वेतन, सुरक्षित कार्यस्थलों और महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी को बढ़ावा देते हैं।
- व्यापक स्तर पर बिना गारंटी वाले ऋणों ने लाखों महिलाओं, उद्यमियों और स्ट्रीट वेंडरों को औपचारिक अर्थव्यवस्था में प्रवेश करने में सक्षम बनाया है।
- स्माइल जैसी लक्षित योजनाएं ट्रांसजेंडर व्यक्तियों और अन्य निर्बल समूहों के पुनर्वास और समाज में उनके समावेशन में सहायता कर रही हैं।
श्रीमती ठाकुर ने इस बात पर बल दिया कि भारत की विकास यात्रा में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण और नागरिक भागीदारी को एकीकृत किया गया है, जिससे पारदर्शिता और अंतिम छोर तक वितरण सुनिश्चित होता है।
श्रीमती ठाकुर ने भारत की सभ्यतागत विचारधारा " वसुधैव कुटुंबकम " (विश्व एक परिवार है) की पुष्टि करते हुए वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने और विश्व स्तर पर सामाजिक न्याय को आगे बढ़ाने के लिए अपने विकास अनुभव को साझा करने के लिए भारत की तत्परता व्यक्त की।
इस सत्र में संयुक्त राष्ट्र के अधिकांश सदस्य देशों की सक्रिय भागीदारी देखी गई।
सत्र के बाद, श्रीमती ठाकुर ने स्वीडन की सामाजिक सेवा मंत्री सुश्री कैमिला वाल्टरसन ग्रोनवॉल के साथ शिष्टाचार मुलाकात भी की।

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पीके/केसी/एसकेजे/एमयू
(रिलीज़ आईडी: 2222949)
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