रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय

थोक में दवाओं के घरेलू उत्पादन और चिकित्सा उपकरणों ‘संशोधित’ के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए पीएलआई योजनाओं के दिशानिर्देश

‘न्यूनतम सीमा रेखा’ निवेश की आवश्यकताको‘प्रतिबद्ध निवेश’ द्वारा प्रतिस्थापित किया गया

यह प्रौद्योगिकी विकल्पों की उपलब्धता को ध्यान में रखता है जो उत्पाद-दर-उत्पाद भिन्न होता है

संभावित निवेशकों द्वारा आवेदन करने की अंतिम तिथि एक सप्ताह बढ़ाकर30 नवंबर 2020 की गई है

Posted On: 29 OCT 2020 12:48PM by PIB Delhi

केन्द्रीय औषध विभाग, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने उद्योग जगत से प्राप्त सुझावों और टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए थोक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन से जुड़ेहुए प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं को संशोधित किया है।तदनुसार, ‘न्यूनतम सीमा रेखा’ निवेश की आवश्यकता को प्रौद्योगिकी विकल्पों की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए‘प्रतिबद्ध निवेश’ द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है जो उत्पाद-दर-उत्पाद भिन्न होता है।

औषध विभाग निम्नलिखित दो उत्पादन से जुड़ेहुए प्रोत्साहन योजनाओं के साथ आया है-

भारत में महत्वपूर्ण रूप से शुरू करने वाली सामग्री, दवा मध्यवर्ती और सक्रिय दवा सामग्री के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन से जुड़ाहुआ प्रोत्साहन योजना

चिकित्सा उपकरणों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन जुड़ाहुआ प्रोत्साहन योजना

दोनों योजनाओं को 20 मार्च 2020 को मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित किया गया था और योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश विभाग द्वारा 27 जुलाई 2020 को जारी किया गया था।

विस्तृत दिशानिर्देशों के जारी होने के बाद, विभाग को औषध और चिकित्सा उपकरण बनाने वाले उद्योग से कई महत्वपूर्ण सुझाव और जानकारी प्राप्त हुई, जिसमें इन दो योजनाओं में उद्योग जगत की प्रभावी भागीदारी को सक्षम करने बनाने हेतु कुछ संशोधन की मांग की गई। इन योजनाओं के तहत गठित तकनीकी समितियों द्वारा सुझावों की जांच की गई। तकनीकी समितियों की सिफारिशों को उन योजनाओं की अधिकार प्राप्त समितियों के समक्ष रखा गया था जिनकी अध्यक्षता नीति आयोग केसीईओ द्वारा की गई। तकनीकी समितियों की सिफारिशों पर विचार करने के बाद, अधिकार प्राप्त समितियों ने दोनों योजनाओं के लिए दिशानिर्देशों के संशोधन को मंजूरी दे दी। तदनुसार, संशोधित दिशानिर्देश आज 29 अक्टूबर 2020 को जारी कर दिए गए हैं और यह टैब "योजनाओं" के तहत औषध विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

भारत में महत्वपूर्ण शुरू करने वाली सामग्री, दवा मध्यवर्ती और सक्रिय दवा सामग्री के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन से जुड़ाहुआ प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के संशोधित दिशानिर्देशों में जो मुख्य परिवर्तन किया गया वो इस प्रकार हैं:

चयनित आवेदक द्वारा ‘प्रतिबद्ध निवेश’ के द्वारा‘न्यूनतम सीमा रेखा’ निवेश के मानदंडों का प्रतिस्थापन। यह परिवर्तन उत्पादन पूंजी के कुशल उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए किया गया है क्योंकि उत्पादन के एक विशेष स्तर को प्राप्त करने के लिए आवश्यक निवेश की मात्रा प्रौद्योगिकी की पसंद पर निर्भर करती है और यह उत्पाद-दर-उत्पाद भी भिन्न होता है। योजना के तहत प्रोत्साहन के उद्देश्य से चयनित आवेदक द्वारा किए गए वास्तविक निवेश के सत्यापन का प्रावधान जारी है।

प्रावधान को समाप्त करना जो केवल घरेलू उत्पादों की बिक्री के लिए पात्र उत्पादों की बिक्री को प्रतिबंधित करता है, प्रोत्साहन प्राप्त करने की पात्रता के लिए, योजना को अन्य पीएलआई योजनाओं के अनुरूप लाना और बाजार विविधीकरण को प्रोत्साहित करना।

10 उत्पादों- टेट्रासाइक्लिन, नियोमाइसिन, पारा अमीनो फिनॉल (पीएपी), मेरोपेनेम, आर्टेसुनेट, लोसार्टन, टेल्मिसर्टन, एसाइक्लोविर, सिप्रोफ्लोक्सासिन और एस्पिरिन के लिए न्यूनतम वार्षिक उत्पादन क्षमता में परिवर्तन। न्यूनतम वार्षिक उत्पादन क्षमता योजना के तहत पात्रता मानदंड का एक हिस्सा है।

इस योजना के तहत आवेदन प्राप्त करने की अंतिम तिथि अब एक सप्ताह बढ़ाकर 30 नवंबर 2020 (सम्मिलित) कर दी गई है।

इसी प्रकार, चिकित्सा उपकरणों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन से जुड़ेहुएप्रोत्साहन योजना के संशोधित दिशानिर्देशों में जो मुख्य परिवर्तन हुए हैं, वे निम्नलिखित हैं-

चयनित आवेदक द्वारा ‘प्रतिबद्ध निवेश’ के द्वारा‘न्यूनतम सीमा रेखा’ निवेश के मानदंडों का प्रतिस्थापन। यह परिवर्तन उत्पादन पूंजी के कुशल उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए किया गया है क्योंकि उत्पादन के एक विशेष स्तर को प्राप्त करने के लिए आवश्यक निवेश की मात्रा प्रौद्योगिकी की पसंद पर निर्भर करती है और यह उत्पाद-दर-उत्पाद भी भिन्न होता है। योजना के तहत प्रोत्साहन के उद्देश्य से चयनित आवेदक द्वारा किए गए वास्तविक निवेश के सत्यापन का प्रावधान जारी है।

इस योजना के तहत प्रोत्साहन प्राप्त करने के उद्देश्य से अनुमानित मांग, प्रौद्योगिकी की प्रवृत्ति और बाजार के विकास के अनुरूप न्यूनतम बिक्री सीमारेखा की पात्रता मानदंड में परिवर्तन।

वित्तीय वर्ष 2021-22 में चयनित आवेदकों द्वारा किए जाने वाले पूंजीगत व्यय को ध्यान में रखते हुए योजना का कार्यकाल एक वर्ष बढ़ा दिया गया है। तदनुसार, प्रोत्साहन का लाभ उठाने के उद्देश्य से बिक्री को वित्तीय वर्ष 2021-2022 के बजाय वित्तीय वर्ष 2022-2023 से शुरू कर 5 वर्षों के लिए किया जाएगा।

इस योजना के तहत आवेदन प्राप्त करने की अंतिम तिथि अब एक सप्ताह बढ़ाकर 30 नवंबर 2020 (सम्मिलित) कर दी गई है।

भारतीय औषध उद्योग वैश्विक रूप से विस्तार के मामले में तीसरा सबसे बड़ा उद्योग है और यह भारत की आर्थिक वृद्धि और निर्यात से आय में महत्वपूर्ण योगदान देता है। चिकित्सा उपकरण उद्योग की पहचान विविधीकरण और रोजगार सृजन हेतु बहुत अधिक क्षमता रखने वाले तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्र के रूप में की जाती है। भारत सरकार ने आने वाले वर्षों में अपनी क्षमता तक पहुंचने के लिए औषध और चिकित्सा उपकरण उद्योग को समर्थन देने हेतु कई पहल की शुरूआत की है।

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