प्रधानमंत्री कार्यालय

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 10 अगस्त को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के लिए सबमरीन केबल कनेक्टिविटी का उद्घाटन करेंगे

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के लिए हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी

चेन्नई-पोर्ट ब्लेयर और पोर्ट ब्लेयर एवं 7 द्वीपों के बीच समुद्र के भीतर लगभग 2300 किलोमीटर लंबी केबल

ई-गवर्नेंस, पर्यटन और सूचना प्रौद्योगिकी को काफी बढ़ावा

Posted On: 07 AUG 2020 2:41PM by PIB Delhi

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 10 अगस्त, 2020 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चेन्नई एवं पोर्ट ब्लेयर को जोड़ने वाली सबमरीन ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) का उद्घाटन करेंगे और राष्ट्र को समर्पित करेंगे। यह सबमरीन केबल पोर्ट ब्लेयर को स्वराज द्वीप (हैवलॉक), लिटल अंडमान, कार निकोबार, कामोर्टा, ग्रेट निकोबार, लॉन्ग आइलैंड और रंगट से भी जोड़ेग इससे भारत के अन्य हिस्सों की तरह अंडमान एंड निकोबार द्वीप समूह को भी तेज एवं अधिक भरोसेमंद मोबाइल और लैंडलाइन टेलीकॉम सेवाएं मिल पाएंगी। इस परियोजना की आधारशिला माननीय प्रधानमंत्री द्वारा 30 दिसंबर 2018 को पोर्ट ब्लेयर में रखी गई थी।

उद्घाटन हो जाने के बाद सबमरीन ओएफसी लिंक चेन्नई एवं पोर्ट ब्लेयर के बीच 2 x 200 गीगाबाइट प्रति सेकेंड (जीबीपी) और पोर्ट ब्लेयर एवं अन्य द्वीपों के बीच 2 x 100 जीबीपी की बैंडविड्थ देगा। इन द्वीपों में भरोसेमंद, मजबूत एवं हाई-स्‍पीड वाली दूरसंचार और ब्रॉडबैंड सुविधाओं की उपलब्‍धता उपभोक्ताओं की दृष्टि के साथ-साथ रणनीतिक और गवर्नेंस उद्देश्‍यों से भी एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी। 4जी मोबाइल सेवाओं में भी उल्‍लेखनीय सुधार दिखाई देगा, जो अब तक उपग्रह के माध्यम से प्राप्‍त सीमित बैकहॉल बैंडविड्थ के कारण बाधित होती रही हैं।  

बेहतर दूरसंचार एवं ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी से द्वीपों में पर्यटन और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे अर्थव्यवस्था के विकास को नई गति मिलेगी तथा लोगों का जीवन स्तर सुधरेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से टेलीमेडिसिन और टेली-एजुकेशन जैसी ई-गवर्नेंस सेवाएं मिलने में भी आसानी होगी। ई-कॉमर्स में अवसरों से छोटे उद्यमों को फायदा होगा, जबकि शिक्षण संस्थान ई-लर्निंग और ज्ञान को साझा करने में बैंडविड्थ की बढ़ी हुई उपलब्धता का उपयोग करेंगे। बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग सेवाएं और अन्य मध्यम एवं बड़े उद्यम भी बेहतर कनेक्टिविटी से लाभान्वित होंगे।

यह परियोजना संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग के अधीनस्‍थ सार्वभौमिक सेवा दायित्व कोष (यूएसओएफ) के माध्यम से भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित है। भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) ने इस परियोजना को कार्यान्वित किया, जबकि टेलीकम्‍युनिकेशंस कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड (टीसीआईएल) तकनीकी सलाहकार है। तकरीबन 1224 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 2300 किलोमीटर लंबी सबमरीन ओएफसी केबल बिछाई गई है और यह परियोजना समय पर पूरी हो गई है।

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एसजी/एएम/आरआरएस- 6787                                                    

 



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