स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
केंद्र ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से आग्रह किया है कि वे चिकित्सा संस्थानों में स्वास्थ्य सेवा दरों का प्रमुखता से प्रदर्शन सुनिश्चित करें
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर स्वास्थ्य सेवाओं के शुल्कों के पारदर्शी प्रदर्शन से संबंधित प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने का आह्वान किया है
इस कदम का उद्देश्य रोगियों को स्वास्थ्य संबंधी सूचित निर्णय लेने में सक्षम बनाना, बिल संबंधी विवादों को रोकना और स्वास्थ्य सेवाओं में विश्वास को मजबूत करना है
राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से यह भी आग्रह किया गया है कि वे मेडिकल और आयुष वीजा पर भारत आने वाले अंतरराष्ट्रीय रोगियों के लिए पैकेज दरों के पारदर्शी प्रदर्शन की सुविधा प्रदान करें
प्रविष्टि तिथि:
12 OCT 2026 1:05PM by PIB Delhi
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने पारदर्शिता, जवाबदेही और रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा वितरण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आग्रह किया है कि वे नैदानिक प्रतिष्ठानों द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं और सुविधाओं के लिए ली जाने वाली दरों को प्रमुखता से प्रदर्शित करना सुनिश्चित करें।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को लिखे पत्र में लागू नियामक प्रावधानों के अनुपालन की समीक्षा करने और यह सुनिश्चित करने के लिए उचित उपाय करने का आह्वान किया है कि स्वास्थ्य सेवा शुल्क संबंधी जानकारी रोगियों और उनके परिचारकों के लिए स्पष्ट रूप से दिखाई दे और आसानी से सुलभ हो।
स्वास्थ्य सेवाओं की मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता के महत्व पर जोर देते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि दरों का स्पष्ट प्रदर्शन रोगियों और उनके परिवारों को उपचार की संभावित लागत को समझने, स्वास्थ्य संबंधी सूचित निर्णय लेने और अपने चिकित्सा व्यय की योजना बनाने में मदद करेगा। अधिक पारदर्शिता से अनावश्यक भ्रम और बिल संबंधी विवादों को कम करने में भी मदद मिलेगी, साथ ही स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रणाली में विश्वास और भरोसा बढ़ेगा।
पत्र में नैदानिक प्रतिष्ठान (पंजीकरण एवं विनियमन) अधिनियम, 2010 और नैदानिक प्रतिष्ठान (केंद्रीय सरकार) नियम, 2012 का उल्लेख है, जो नैदानिक प्रतिष्ठान के लिए एक नियामक ढांचा प्रदान करते हैं। इन नियमों के तहत, उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जहां अधिनियम लागू है, नैदानिक प्रतिष्ठान को मरीजों और उनके परिचारकों की सुविधा के लिए, प्रदान की जाने वाली प्रत्येक प्रकार की सेवा और उपलब्ध सुविधाओं के लिए ली जाने वाली दरों को स्थानीय भाषा के साथ-साथ अंग्रेजी में भी एक प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित करना अनिवार्य है।
जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह अधिनियम लागू नहीं है, वहां नैदानिक प्रतिष्ठान संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के ढांचे के अंतर्गत विनियमित होते हैं, जिनमें से कई में स्वास्थ्य सेवाओं और सुविधाओं के लिए दरों के प्रदर्शन से संबंधित प्रावधान भी शामिल हैं।
यह मानते हुए कि स्वास्थ्य एक राज्य का विषय है और लागू नियामक प्रावधानों का कार्यान्वयन और प्रवर्तन संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के दायित्व में है, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने मुख्य सचिवों से संबंधित अधिकारियों के माध्यम से प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने का आह्वान किया है।
पत्र में अंतरराष्ट्रीय मरीजों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की कीमतों में पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया गया है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अनुरोध किया गया है कि वे जहां भी लागू हो, मेडिकल या आयुष वीजा पर भारत आने वाले विदेशी मरीजों को दी जाने वाली पैकेज दरों को प्रमुखता से प्रदर्शित करने के लिए प्रोत्साहित करें। इससे अंतरराष्ट्रीय मरीजों को सोच-समझकर निर्णय लेने में मदद मिलेगी, कीमतों और बिलिंग संबंधी शिकायतों को कम करने में सहायता मिलेगी और चिकित्सा एवं आयुष देखभाल के लिए एक विश्वसनीय गंतव्य के रूप में भारत की स्थिति और मजबूत होगी।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने इस मामले में मुख्य सचिवों का व्यक्तिगत ध्यान आकर्षित किया है और उनसे अनुरोध किया है कि वे संबंधित अधिकारियों और नैदानिक प्रतिष्ठान को आवश्यक कार्रवाई के लिए उचित सलाह जारी करें, जिसमें यह सुनिश्चित करना भी शामिल है कि लागू नियमों के अनुसार दरें स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाले और आसानी से सुलभ स्थानों पर प्रदर्शित की जाएं।
यह पहल स्वास्थ्य सेवा वितरण को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और रोगियों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है, यह सुनिश्चित करते हुए कि स्वास्थ्य शुल्क पर स्पष्ट जानकारी तक पहुंच रोगी-केंद्रित देखभाल का एक अभिन्न अंग बन जाए।
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पीके/केसी/आरटी/एचएन/जीआरएस
(रिलीज़ आईडी: 2322292)
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