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राष्ट्रपति 7 अगस्त को 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में वर्ष 2025 के राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार प्रदान करेंगी


भारत के हथकरघा क्षेत्र में बेहतरीन कार्य के लिए 22 संत कबीर और राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार दिए जाएंगे

प्रविष्टि तिथि: 06 AUG 2026 4:42PM by PIB Delhi

वस्त्र मंत्रालय 7 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र (आरबीसीसी) में 12वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाएगा। यह कार्यक्रम भारत की समृद्ध हथकरघा विरासत को संरक्षित करने, बढ़ावा देने और मजबूत करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराएगा। इसके साथ ही यह देश के सांस्कृतिक और आर्थिक विकास में हथकरघा बुनकर समुदाय के अमूल्य योगदान को मान्यता देगा।

भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि के रूप में समारोह की शोभा बढ़ाएंगी। वे वर्ष 2025 के  संत कबीर हथकरघा पुरस्कार तथा राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार प्रदान करेंगी। इस समारोह में केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह, वस्त्र राज्य मंत्री श्री पवित्र मार्गेरिटा, सचिव (वस्त्र) श्रीमती नीलम शमी राव, विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीना, संसद सदस्य, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, हथकरघा उद्योग के प्रतिनिधि, मास्टर बुनकर, डिज़ाइनर, निर्यातक, कारीगर, संत कबीर और राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार विजेता तथा देश भर से अन्य गणमान्य अतिथि शामिल होंगे।

समारोह का मुख्य आकर्षण 22 प्रतिष्ठित पुरस्कारों का वितरण होगा। इसमें 3 संत कबीर हथकरघा पुरस्कार और 19 राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार शामिल हैं। ये पुरस्कार हथकरघा क्षेत्र से जुड़े बुनाई, नवाचार, डिज़ाइन विकास, विपणन पहल, स्टार्ट-अप उद्यमों और उत्पादक कंपनियों में उत्कृष्ट उपलब्धियों को मान्यता देंगे। राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम (एनएचडीपी) के हथकरघा विपणन सहायता (एचएमए) घटक के तहत शुरू किए गए ये पुरस्कार भारत के हथकरघा इकोसिस्टम में उत्कृष्टता के लिए सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान का प्रतिनिधित्व करते हैं।

संत कबीर हथकरघा पुरस्कार, हथकरघा बुनकरों के लिए देश का सर्वोच्च सम्मान है। यह पुरस्कार असाधारण कारीगरी, जीवन भर के समर्पण और भारत की बुनाई परंपराओं को संरक्षित और बढ़ावा देने में निरंतर योगदान को मान्यता देता है। राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार उन हथकरघा बुनकरों और अन्य संबंधित पक्षों को सम्मानित करता है जिन्होंने पारंपरिक कौशल को संरक्षित करते हुए और आधुनिक तकनीकों को अपनाते हुए उत्कृष्ट रचनात्मकता, गुणवत्ता, नवाचार और उत्कृष्टता का प्रदर्शन किया है। पुरस्कार विजेताओं का चयन सख्त बहु-स्तरीय मूल्यांकन प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है, जिसमें विशेषज्ञ समितियां शामिल होती हैं। यह प्रक्रिया पारदर्शिता, निष्पक्षता और हथकरघा क्षेत्र के सभी वर्गों में उत्कृष्टता की पहचान सुनिश्चित करती है।

इस समारोह में भारत की समृद्ध और विविध हथकरघा बुनाई परंपराओं का उत्सव मनाने के लिए चार स्मारक डाक टिकट भी जारी किए जाएंगे। कार्यक्रम के दौरान दो प्रकाशनों - "अर्थ. रूट. थ्रेडआल डाइड हैंडलूम टेक्सटाइल्स ऑफ सेंट्रल इंडिया" और "हैंडलूम अवार्ड्स बुक 2025" - का भी अनावरण किया जाएगा। कार्यक्रम के साथ-साथ पुरस्कार विजेता हथकरघा उत्पादों की प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी, जबकि पारंपरिक कानी बुनाई और वॉल हैंगिंग बुनाई के लाइव प्रदर्शन आगंतुकों को भारत की हथकरघा परंपराओं की विविधता, कलात्मकता और कारीगरी की झलक दिखाएंगे।

राष्ट्रीय समारोह के अलावा, राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाने और देश की जीवंत हथकरघा परंपराओं का उत्सव मनाने के लिए देश भर में प्रदर्शनियां, डिजाइनर सम्मेलन, आईआईएचटी सम्मेलन और अन्य प्रचार गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।

भारत का हथकरघा क्षेत्र देश में टिकाऊ ग्रामीण रोजगार के सबसे बड़े स्रोतों में से एक बना हुआ है। यह 35 लाख से अधिक लोगों की आजीविका का समर्थन करता है, जिसमें कार्यबल का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा महिलाएं हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अपने महत्वपूर्ण योगदान के अलावा, यह क्षेत्र भारत की समृद्ध कपड़ा विरासत का संरक्षक और पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ उत्पादन प्रथाओं में महत्वपूर्ण योगदानकर्ता बना हुआ है।

हर साल 7 अगस्त को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय हथकरघा दिवस, 7 अगस्त 1905 को शुरू किए गए स्वदेशी आंदोलन की याद दिलाता है, जिसने स्वदेशी उद्योगों और भारत के हथकरघा क्षेत्र को नई गति दी थी। 2015 में अपनी शुरुआत के बाद से, यह दिवस भारत के हथकरघा बुनकरों की कलात्मकता, कौशल और समर्पण का उत्सव मनाता रहा है और साथ ही हथकरघा क्षेत्र के संरक्षण, संवर्धन और टिकाऊ विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराता है।  (वर्ष 2025 के लिए संत कबीर और राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार विजेताओं की सूची)

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पीके/केसी/पीके


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