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सरकार ने पीएमजीकेएवाई योजना के तहत बेहतर गुणवत्ता वाले चावल की आपूर्ति को मंजूरी दी; 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को बेहतर गुणवत्ता वाला चावल मिलेगा

कच्चे चावल में टूटे दानों की अधिकतम सीमा 25 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत तथा उसना चावल में 16 प्रतिशत के घटाकर 5 प्रतिशत की गई; खरीफ विपणन सत्र (केएमएस) 2027-28 से चरणबद्ध तरीके से लागू होगी नई व्यवस्था


इस सुधार से खाद्य गुणवत्ता बढ़ेगी, परिचालन दक्षता में सुधार होगा, पारदर्शिता मजबूत होगी और सालाना लगभग 2,161 करोड़ रुपये की बचत होगी

प्रविष्टि तिथि: 02 JUL 2026 3:33PM by PIB Delhi

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत आपूर्ति किए जाने वाले चावल की गुणवत्ता में सुधार के लिए एक ऐतिहासिक सुधार को मंजूरी दे दी है।

लगभग तीन दशकों में पहली बार सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत आपूर्ति किए जाने वाले चावल की गुणवत्ता संबंधी विशिष्टताओं को संशोधित किया है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि लाभार्थियों को उनकी मौजूदा पात्रता (राशन की मात्रा) में बिना किसी बदलाव के काफी कम टूटे दानों वाला चावल मिले।

स्वीकृत नीति के तहत

  1. पीएमजीकेएवाई के तहत आपूर्ति किए जाने वाले कच्चे चावल में टूटे दानों की मात्रा अधिकतम 10 प्रतिशत होगी, जो मौजूदा 25 प्रतिशत की सीमा की जगह लेगी।
  2. उसना चावल में टूटे दानों की मात्रा अधिकतम 5 प्रतिशत होगी, जो मौजूदा 16 प्रतिशत की सीमा की जगह लेगी।

बेहतर गुणवत्ता वाले चावल की खरीद तत्काल प्रभाव से शुरू होगी और खरीफ विपणन सत्र (केएमएस) 2027-28 तक सभी खरीद करने वाले राज्यों में चरणबद्ध तरीके से लागू कर दी जाएगी।

पीएमजीकेएवाई और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत बेहतर गुणवत्ता वाले चावल का वितरण भी चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा, जिससे सभी राज्यों में संशोधित विशिष्टताओं के साथ सुचारू रूप से बदलाव सुनिश्चित हो सके।

लाभार्थियों के लिए बेहतर गुणवत्ता

यह निर्णय न केवल खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि पीएमजीकेएवाई और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को आपूर्ति किए जाने वाले खाद्यान्न की गुणवत्ता में सुधार लाने के प्रति भी सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। लाभार्थियों को उनकी पात्रता में बिना किसी बदलाव के बेहतर साबुत दानों वाला, दिखने में अच्छा और अधिक स्वीकार्य चावल मिलेगा।

टूटे हुए चावल का उत्पादक उपयोग

संशोधित विशिष्टताओं के तहत कुटाई के दौरान निकलने वाले टूटे चावल को अलग कर दिया जाएगा और उसका अन्य कार्यों के लिए उत्पादक रूप से उपयोग किया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि पीएमजीकेएवाई के लाभार्थियों तक बेहतर गुणवत्ता वाला खाने योग्य चावल पहुंचे।

वित्तीय और परिचालन संबंधी लाभ

इस सुधार से परिवहन, भंडारण तथा रखरखाव की लागत में युक्तिसंगत कमी आने की उम्मीद है, क्योंकि टूटे चावल की नीलामी सीधे चावल मिलों से की जाएगी। इसके अतिरिक्तए जूट के बोरों के बजाय एचडीपीई बैगों में संग्रहित किया जाएगा, जिससे जूट के बोरों की आवश्यकता भी कम हो जाएगी। इन उपायों के परिणामस्वरूप परिवहन, भंडारण और पैकेजिंग लागत में कमी के माध्यम से प्रति वर्ष लगभग 2161 करोड़ रुपये की बचत होना का अनुमान है। साथ ही, टूटे चावल की बिक्री से अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त होगा, जिससे खाद्य सब्सिडी का बोझ कम करने में सहायता मिलेगी।

पायलट आधार पर कार्यान्वयन

इस प्रस्ताव का पहले ही हरियाणा, आंध्र प्रदेश, पंजाब, ओडिशा, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ जैसे कई राज्यों में पायलट आधार पर सफल परीक्षण किया जा चुका है। पायलट परियोजना से यह सिद्ध हुआ है कि बड़े पैमाने पर बेहतर गुणवत्ता वाले चावल का उत्पादन परिचालन की दृष्टि से पूरी तरह संभव है। मंत्रिमंडल की स्वीकृति के बाद उत्पादित बेहतर गुणवत्ता वाले चावल का वितरण भी पीएमजीकेएवाई तथा अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को किया जाएगा।

पारदर्शिता को मिलेगा और अधिक बल

इस सुधार के अंतर्गत चावल की बोरों पर क्यूआर-कोड टैग लगाए जाएंगे, जिससे पूरी आपूर्ति श्रृंखला में शुरू से अंत तक पता लगाना सुनिश्चित होगा। इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही तथा भंडारण प्रबंधन और अधिक मजबूत होगा, जिससे किसी भी तरह की कालाबाज़ारी की गुंजाइश को प्रभावी ढंग से खत्म किया जा सकेगा।

सरकार ने प्रत्येक पात्र परिवार के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की है। अब अगला कदम बेहतर गुणवत्ता के साथ खाद्य सुरक्षा हासिल करना है। यह ऐतिहासिक निर्णय यह सुनिश्चित करता है कि गरीब परिवारों को सम्मान के साथ बेहतर गुणवत्ता का चावल मिले, साथ ही खाद्यान्न प्रबंधन में दक्षता, पारदर्शिता और राजकोषीय विवेक में सुधार हो।

प्रमुख बिंदु

  • लगभग 30 वर्षों में पहली बार चावल में स्वीकार्य टूटे दानों की सीमा में कमी।
  • कच्चे चावल में अधिकतम 10 प्रतिशत तथा उसना चावल में अधिकतम 5 प्रतिशत टूटे दानों की अनुमति।
  • पीएमजीकेएवाई के 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को बेहतर गुणवत्ता वाला चावल।
  • अलग किये गये टूटे चावल का उत्पादक एवं औद्योगिक उपयोग।
  • सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता को मजबूत करने के लिए चावल के बोरों पर क्यूआर-कोड आधारित अनुरेखण।

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पीके/केसी/आईएम/एसके


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