पंचायती राज मंत्रालय
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गांधी जयंती पर देश भर में 2.42 लाख विशेष ग्राम सभाओं ने जन-केंद्रित पहलों को जमीनी स्तर की चर्चाओं के केंद्र में रखा'


सबकी योजना, सबका विकास' हुआ शुरु; विशेष ग्राम सभाओं ने पंचायत विकास योजनाओं 2027-28 के लिए मंच तैयार किया

प्रविष्टि तिथि: 02 OCT 2026 8:31PM by PIB Delhi

गांधी जयंती के अवसर पर, देशभर में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया गया। जीपीडीपी पोर्टल (https://gpdp.nic.in) और पंचायत निर्णय पोर्टल (https://meetingonline.gov.in) पर 24 लाख से अधिक विशेष ग्राम सभाएं आयोजित की गईं। इन ग्राम सभाओं में स्थानीय निवासियों, निर्वाचित प्रतिनिधियों, पंचायत पदाधिकारियों और अधिकारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इन विशेष ग्राम सभाओं के साथ ही जन योजना अभियान 2026-27, “सबकी योजना, सबका विकास” का भी शुभारंभ हुआ, जिसके तहत पंचायतें वित्तीय वर्ष 2027-28 के लिए अपनी पंचायत विकास योजनाएं तैयार करेंगी। इन 2.42 लाख विशेष ग्राम सभाओं में भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों- मुख्य रूप से पंचायती राज मंत्रालय, ग्रामीण विकास विभाग, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, उपभोक्ता हित विभाग, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग, जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनर्जीवन विभाग और भूमि संसाधन विभाग की योजनाओं और प्रमुख पहलों पर विशेष रूप से चर्चा की गई।

विशेष ग्राम सभाओं ने ग्रामीण नागरिकों को सरकार की प्रमुख पहलों और स्थानीय महत्व के मुद्दों पर चर्चा में भाग लेने के लिए एक सीधा मंच प्रदान किया। व्यापक विचार-विमर्श में पंचायतों को केंद्रीय वित्त आयोग के अनुदानों का बेहतर हस्तांतरण, स्वयं के राजस्व के माध्यम से वित्तीय आत्मनिर्भरता, सुरक्षित संपत्ति और भूमि अधिकार, सुनिश्चित रोजगार और आजीविका, सुरक्षित पेयजल और स्वच्छता, जल सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, उपभोक्ता संरक्षण और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण जैसे कई क्षेत्र शामिल थे। इन बैठकों में पिछले बारह वर्षों में किए गए परिवर्तनकारी शासन सुधारों और नागरिक-केंद्रित उपायों सहित प्रमुख सरकारी पहलों को उजागर करने वाली कार्यसूची और जागरूकता सामग्री को पढ़कर सुनाया गया और उस पर चर्चा की गई। स्थानीय निवासियों, निर्वाचित प्रतिनिधियों, पंचायत पदाधिकारियों और अधिकारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और अपने अनुभव, दृष्टिकोण और सुझाव साझा किए, जो ग्राम पंचायत विकास योजनाओं को समृद्ध बनाने में योगदान देंगे। इन विशेष ग्राम सभाओं के राष्ट्रव्यापी आयोजन को सहयोगी मंत्रालयों और विभागों के समन्वित प्रयासों, उनके जमीनी स्तर के पदाधिकारियों और माई इंडिया स्वयंसेवकों के सहयोग से संभव बनाया गया। राज्य, जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तरों पर उनकी सहभागिता ने नागरिक-केंद्रित योजनाओं और पहलों पर सार्थक संवाद को सुगम बनाने में मदद की, साथ ही जमीनी स्तर पर जन भागीदारी और संवाद को मजबूत किया । समग्र सरकारी दृष्टिकोण अपनाते हुए, पंचायती राज मंत्रालय के सचिव डॉ. विनीत जोशी ने मंत्रालय और भारत सरकार के अन्य मंत्रालयों और विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पूरे दिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखा, देश भर में आयोजित विशेष ग्राम सभाओं की प्रगति की समीक्षा की और सहकारी संघवाद की भावना से घनिष्ठ समन्वय को सुगम बनाया। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के समन्वित प्रयासों, उनके पंचायती राज विभागों, जिला प्रशासनों और जमीनी स्तर के पदाधिकारियों के सहयोग से, इस अभूतपूर्व राष्ट्रव्यापी अभ्यास का सुचारू संचालन सुनिश्चित हुआ।

जन योजना अभियान 2026-27 'सबकी योजना, सबका विकास'

पंचायती राज मंत्रालय द्वारा भारत सरकार के 21 मंत्रालयों और विभागों के सहयोग से चलाया जा रहा जन योजना अभियान, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘सम्पूर्ण सरकार’ के दृष्टिकोण को दर्शाता है। मंत्रालय 2018 से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जन योजना अभियान चला रहा है ताकि पंचायतों को साक्ष्य-आधारित, समग्र और सहभागी योजनाएं तैयार करने में सक्षम बनाया जा सके। राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के तहत, मंत्रालय स्थानीय विकास के नौ विषयों पर प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में सहयोग प्रदान करता है। 25 लाख से अधिक ग्राम पंचायतें सहभागी ग्राम पंचायत विकास योजनाएं तैयार करती हैं और उन्हें ई-ग्रामस्वराज पोर्टल पर अपलोड करती हैं, जबकि पंचायत उन्नति सूचकांक प्रत्येक ग्राम पंचायत को अपनी उपलब्धियों और कमियों की पहचान करने में मदद करता है। इस आधार पर, ग्राम सभा प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर संकल्प ले सकती है, जिससे सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण और विकसित भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाया जा सके।

विशेष ग्राम सभाओं में प्रस्तुत प्रमुख सुधार और उपलब्धियाँ

सशक्त एवं आत्मनिर्भर पंचायतें (पंचायती राज मंत्रालय)। सोलहवें वित्त आयोग ने ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए वर्ष 2026-31 के लिए ₹4,35,236 करोड़ की अनुशंसा की है, जो पंद्रहवें वित्त आयोग की तुलना में लगभग 84 प्रतिशत अधिक है। इसके साथ ही प्रति व्यक्ति वार्षिक अनुदान लगभग ₹400 से बढ़कर लगभग ₹950 हो गया है। समर्थ पंचायत पोर्टल पर 57 लाख से अधिक करदाताओं और 15 लाख संपत्तियों का पंजीकरण हो चुका है, और आत्मनिर्भर पंचायत विशेष पुरस्कार के अंतर्गत ₹1 करोड़ तक के प्रोत्साहन दिए जाते हैं। पंचायत लेखा-जोखा अब केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा अपनाई जाने वाली छह स्तरीय संरचना का अनुसरण करता है, और 2.5 लाख से अधिक पंचायती राज संस्थाएं ऑडिटऑनलाइन प्रणाली से जुड़ चुकी हैं। ग्राम क्षेत्रों में उन्नत प्रौद्योगिकी के साथ ग्राम आबादी और मानचित्रण सर्वेक्षण (एसवीएएमआईटीवीए) योजना के तहत, 2.06 लाख गांवों के लिए 3.33 करोड़ संपत्ति कार्ड तैयार किए गए हैं, लगभग ₹1,713 करोड़ के ऋण स्वीकृत किए गए हैं और महिलाओं को संपत्ति मालिकों के रूप में मान्यता देने को प्रोत्साहित किया गया है।

रोजगार एवं आजीविका (ग्रामीण विकास विभाग)। 1 जुलाई 2026 से लागू विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों का मजदूरी रोजगार सुनिश्चित किया जाता है, जिसमें फेस ऑथेंटिकेशन और डिजिटल भुगतान के माध्यम से उपस्थिति दर्ज की जाती है। अब तक इसमें 31.69 करोड़ से अधिक व्यक्ति-दिवस सृजित किए जा चुके हैं, लगभग 2.23 करोड़ परिवारों के 2.81 करोड़ से अधिक श्रमिकों को रोजगार प्राप्त हुआ है, और लगभग 2.31 लाख ग्राम पंचायतों में कार्य प्रगति पर हैं। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 2026-27 के लिए ₹93,841 करोड़ का अंतरिम आवंटन किया गया है, और विकसित ग्राम पंचायत योजना ग्राम सभा को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार कार्यों का निर्णय लेने में सक्षम बनाती है।

सुरक्षित पेयजल और स्वच्छता (पेयजल एवं स्वच्छता विभाग)। जल जीवन मिशन के तहत, ग्रामीण क्षेत्रों में नल के पानी के कनेक्शन लगभग 3.23 करोड़ घरों (17 प्रतिशत) से बढ़कर 16 करोड़ से अधिक (80 प्रतिशत से अधिक) हो गए हैं, और ग्राम पंचायतों और समुदायों को पूर्ण जल आपूर्ति योजनाओं के हस्तांतरण हेतु ‘जल अर्पण’ पर भी प्रकाश डाला गया। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत, 12.22 करोड़ घरेलू शौचालयों का निर्माण किया गया है और 5.25 लाख से अधिक गांवों (89.6 प्रतिशत) ने स्वयं को खुले में शौच मुक्त (मॉडल) घोषित किया है। स्वच्छता ही सेवा 2026 के समापन के अवसर पर ग्राम सभाओं में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 पर चर्चा की गई।

जल सुरक्षा (जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनर्जीवन विभाग)। जल संचय जन भागीदारी: को कैच द रेन कार्यक्रम के तहत, सामुदायिक भागीदारी से 1.55 करोड़ से अधिक कृत्रिम जल पुनर्भरण (आर्टिफिशियल रीचार्ज) और भंडारण संरचनाओं का निर्माण किया गया है, और पहले चरण के प्रभाव अध्ययन में 2.43 अरब घन मीटर भूजल पुनर्भरण का अनुमान लगाया गया है। संशोधित जलसंभर विकास मानदंडों के तहत मैदानी क्षेत्रों में ₹22,000 प्रति हेक्टेयर और पहाड़ी एवं दुर्गम क्षेत्रों में ₹28,000 प्रति हेक्टेयर तक निधि बढ़ाई गई है, और परियोजना की अवधि सात वर्ष से घटाकर पांच वर्ष कर दी गई है। कैच द रेन के तहत ग्राम सभा की गतिविधियों का उद्देश्य वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और समुदाय-नेतृत्व वाले जल संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ाना था। स्थानीय समुदायों, पंचायती राज प्रतिनिधियों और जिला अधिकारियों ने कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लिया, जिसमें तकनीकी मार्गदर्शन, जागरूकता वीडियो का प्रदर्शन, वृक्षारोपण और श्रमदान गतिविधियों के साथ-साथ जल शपथ भी दिलाई गई। वर्षा जल की हर बूंद को संरक्षित करने और सतत जल प्रबंधन की दिशा में सामूहिक कार्रवाई को बढ़ावा देने के संदेश को सुदृढ़ करने के लिए कैच द रेन (सीटीआर) गान भी बजाया और प्रदर्शित किया गया।

खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता संरक्षण (खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग और उपभोक्ता मामले विभाग)। एक राष्ट्र एक राशन कार्ड के तहत, हर महीने लगभग 3.27 करोड़ पोर्टेबिलिटी लेनदेन होते हैं, और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 81.35 करोड़ लाभार्थियों को मुफ्त अनाज उपलब्ध कराया जाता है, जिसे 2028 तक बढ़ा दिया गया है। 17 भाषाओं में उपलब्ध राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन को अगस्त 2026 में 3,42,371 कॉल प्राप्त हुए, जबकि अगस्त 2019 में यह संख्या 78,477 थी, और अप्रैल 2025 से अब तक 105 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वापस की जा चुकी है। ई-जागृति प्लेटफॉर्म ने 2.81 लाख मामलों में से 2.55 लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया है और राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 में रजत पुरस्कार प्राप्त किया है।

डिजिटल भूमि अभिलेख (भूमि संसाधन विभाग)। डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत, 99.90 प्रतिशत अधिकारों के रिकॉर्ड और 97.4 प्रतिशत कैडस्ट्रल मानचित्रों का डिजिटलीकरण किया गया है। 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नागरिक ऑनलाइन भूमि रिकॉर्ड तक पहुंच सकते हैं, और 24 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित रिकॉर्ड डाउनलोड कर सकते हैं, जिससे मालिकों को धोखाधड़ी वाले नामांतरण (म्यूटेशन) से बचाया जा सके और क्रेडिट (ऋण) तक पहुंच आसान हो सके।

अन्य प्रमुख राष्ट्रीय पहलों के बारे में जागरूकता

कई मंत्रालयों/विभागों ने ग्राम स्तर पर जागरूकता सुनिश्चित करने में बहुमूल्य सहयोग प्रदान किया। गृह मंत्रालय ने नए आपराधिक कानूनों, जैसे भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय सक्षम अधिनियम, के बारे में जागरूकता फैलाने में सहायता की; सहकारिता मंत्रालय ने डिजिटल रूपांतरण और सहकारिता सुदृढ़ीकरण में; महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बाल विवाह मुक्त भारत में; और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने नशा मुक्त भारत अभियान में सहयोग दिया, ताकि सुरक्षित, स्वस्थ, बाल विवाह मुक्त और नशामुक्त गांवों का निर्माण हो सके।

इन विशेष ग्राम सभाओं ने ग्राम सभा को सहभागी लोकतंत्र और स्थानीय शासन की नींव के रूप में पुनः रेखांकित। पंचायती राज मंत्रालय जन योजना अभियान के तहत 2027-28 के लिए जन-केंद्रित पंचायत विकास योजनाओं की तैयारी के लिए तत्पर है, ताकि विकसित भारत के व्यापक प्रयास के अंतर्गत सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित पंचायतों का निर्माण किया जा सके।

 

 

 

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