कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय
डॉ. जितेंद्र सिंह का कहना है कि सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक, परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल के खिलाफ कानूनी ढांचे को और मजबूत करेगा
सरकार छात्रों के भविष्य की रक्षा करने और सार्वजनिक परीक्षाओं की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है
संशोधन विधेयक का उद्देश्य योग्यता को बढ़ावा देनाप और सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता को मजबूत करना है: डॉ. जितेंद्र सिंह
प्रविष्टि तिथि:
28 JUL 2026 5:58PM by PIB Delhi
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय में कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 परीक्षा संबंधी अनुचित प्रथाओं पर अंकुश लगाने और देश भर के छात्रों और युवाओं के हितों की रक्षा के लिए कानूनी ढांचे को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
लोकसभा में विधेयक पर चर्चा शुरू करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह विधेयक छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को पुष्ट करता है और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के इस संकल्प को दर्शाता है कि देश के युवाओं की आकांक्षाओं से किसी को समझौता नहीं करने दिया जाएगा। उन्होंने इस विधेयक को भारत की सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली की अखंडता को मजबूत करने की दिशा में एक मील का पत्थर बताया।
मंत्री जी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न राज्यों में प्रश्नपत्र लीक होने और परीक्षा संबंधी अनुचित गतिविधियों की घटनाएं हुई हैं, जो एक व्यापक राष्ट्रीय कानूनी ढांचे की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं। उन्होंने बताया कि सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों से निपटने के लिए देश के पहले व्यापक कानून के रूप में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 को लागू किया है और अब इसके कार्यान्वयन के दौरान प्राप्त अनुभव के आधार पर कानून को और अधिक सख्त और प्रभावी बनाने के लिए इसमें और संशोधन प्रस्तावित कर रही है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह अधिनियम संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी), कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी), रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी), बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (आईबीपीएस) और उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) सहित प्रमुख भर्ती एजेंसियों द्वारा आयोजित परीक्षाओं को कवर करता है। उन्होंने याद दिलाया कि 2024 के अधिनियम ने इसके दायरे में आने वाले अपराधों को संज्ञेय, गैर-जमानती और गैर-समझौता योग्य बना दिया है, जिसमें कठोर दंडात्मक प्रावधान हैं।
संशोधन विधेयक के प्रमुख प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए मंत्री जी ने कहा कि अनुचित साधनों का सहारा लेने वाले व्यक्तियों के लिए सजा को तीन से पांच वर्ष के कारावास से बढ़ाकर पांच से दस वर्ष करने का प्रस्ताव है, जबकि अधिकतम जुर्माना 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है। ऐसे अपराधों में शामिल सेवा प्रदाताओं के लिए अधिकतम जुर्माना 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने और सार्वजनिक परीक्षाओं के संचालन पर प्रतिबंध की अवधि चार वर्ष से बढ़ाकर आठ वर्ष करने का प्रस्ताव है। सेवा प्रदाताओं के निदेशकों और वरिष्ठ प्रबंधन के लिए सजा को भी तीन से दस वर्ष के कारावास से बढ़ाकर पांच से दस वर्ष करने का प्रस्ताव है, जबकि अधिकतम जुर्माना 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है। विधेयक में संगठित अपराध के लिए सजा को पांच से दस वर्ष के कारावास से बढ़ाकर सात से दस वर्ष करने और अधिकतम जुर्माना 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने का भी प्रस्ताव है।
त्वरित न्याय के महत्व पर जोर देते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि संशोधन विधेयक में सार्वजनिक परीक्षाओं से संबंधित अपराधों से निपटने के लिए विशेष त्वरित न्यायालयों की स्थापना का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि विधेयक में आरोप पत्र दाखिल होने की तिथि से दो महीने के भीतर जांच और तीन महीने के भीतर मुकदमे की कार्यवाही पूरी करने की परिकल्पना की गई है, जिससे ऐसे मामलों का शीघ्र निपटारा सुनिश्चित होगा। विधेयक केंद्र सरकार को इस अधिनियम के अंतर्गत अपराधों की जांच के लिए गठित विशेष कार्य बल को मामला सौंपने का अधिकार भी देता है, जिससे संगठित परीक्षा संबंधी अपराधों के विरुद्ध त्वरित और प्रभावी कार्रवाई संभव हो सकेगी।
मंत्री महोदय ने सदन को सूचित किया कि सरकार ने ऐसे मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए कई स्थानों पर विशेष त्वरित न्यायालयों की स्थापना के लिए पहले ही कदम उठा लिए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली को "लीक-प्रूफ" बनाने के लिए प्रख्यात विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय कार्य समिति के गठन की घोषणा का भी उल्लेख किया। उन्होंने आगे कहा कि परीक्षा प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए गठित समिति की सिफारिशों को लागू करने में पहले ही काफी प्रगति हो चुकी है। उन्होंने कहा कि संशोधनों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्रों को उनके वास्तविक प्रयासों के लिए पुरस्कृत किया जाए, साथ ही सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता, पारदर्शिता और निष्पक्षता को बढ़ाया जाए।
अपने संबोधन का समापन करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन संगठित परीक्षा संबंधी अपराधों के खिलाफ निवारण को मजबूत करेंगे, त्वरित न्याय सुनिश्चित करेंगे और देश की सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली की अखंडता, पारदर्शिता और निष्पक्षता में जनता के विश्वास को और मजबूत करेंगे।




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पीके/केसी/एनकेएस
(रिलीज़ आईडी: 2290700)
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