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एक खेल राष्ट्र का निर्माण


खेलों इंडिया और अंतरराष्ट्रीय उत्कृष्टता की राह

प्रविष्टि तिथि: 27 JUL 2026 5:01PM by PIB Delhi

जैसे-जैसे भारत राष्ट्रमंडल खेल 2026 में प्रतिस्पर्धा कर रहा है, उसकी बढ़ती सफलता खेलों में वर्षों से किए गए निरंतर निवेश को दर्शाती है। खेलो इंडिया और अन्य पहल से प्रेरित होकर, देश ने एथलीटों के विकास को मजबूत किया है, खेल के अवसरों का विस्तार किया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने प्रदर्शन में सुधार किया है। बुनियादी स्तर की भागीदारी से लेकर वैश्विक पोडियम तक, भारत एक मजबूत खेल इकोसिस्टम का निर्माण कर रहा है और भविष्य के चैंपियनों को तैयार कर रहा है।

 

खेल भावना से भरा भारत

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23 जुलाई से 2 अगस्त 2026 तक जब राष्ट्रमंडल खेल ग्लासगो में हो रहे हैं, भारत अपनी खेल यात्रा में एक और नया अध्याय शुरू कर रहा है। 1934 में शुरू हुई अपनी विरासत को जारी रखते हुए, यह राष्ट्रमंडल खेलों में भारत की 19वीं उपस्थिति है। वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने ग्लासगो में अपना लगातार तीसरा राष्ट्रमंडल स्वर्ण पदक जीतकर भारत का खाता खोल दिया है।

ऐसे क्षण केवल पदकों से कहीं अधिक बड़ी बात को दर्शाते हैं। खेल किसी राष्ट्र को बदलने, व्यक्तियों को तराशने और देशों को वैश्विक मंच पर एक नया मुकाम दिलाने की अपार शक्ति रखते हैं। यह नागरिकों में चरित्र और आत्मविश्वास का निर्माण करता है, साथ ही एक खेल महाशक्ति के रूप में राष्ट्र के आगमन का शंखनाद करता है। खेल के मैदान पर मिली जीत अपार राष्ट्रीय गर्व लाती है, जो जाति, पंथ और धर्म की सीमाओं से परे जाकर लोगों को एकजुट करती है। यह साझा गर्व एक अधिक खुशहाल, स्वस्थ और एकजुट समाज के निर्माण में मदद करता है।

भारत की सबसे बड़ी खेल संपत्ति उसकी युवा आबादी है। देश की लगभग 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 वर्ष से कम आयु की है। इस अपार क्षमता को पहचानते हुए, युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय देश भर में युवा विकास को मजबूत करने और खेल उत्कृष्टता को बढ़ावा देने में लगातार जुटा हुआ है। केंद्रीय बजट 2026-27 में मंत्रालय को 4,479.88 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड आवंटन किया गया, जो 2013-14 में मात्र 1,219 करोड़ रुपये था।

इस बदलाव के केंद्र में खेलो इंडिया कार्यक्रम खड़ा है, जिसे कई अन्य प्रमुख पहल का समर्थन प्राप्त है। साथ मिलकर, वे ग्रामीण और शहरी भारत में एक समान रूप से खेल भागीदारी और खेल उत्कृष्टता को बढ़ावा देते हैं। वे हर स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान, प्रशिक्षण और उन्हें निखारने के लिए आवश्यक अवसंरचना और वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं। ये प्रयास एक ऐसी पीढ़ी को आकार दे रहे हैं जो दुनिया के सबसे बड़े मंचों पर गर्व के साथ भारत का नाम रोशन करने के लिए तैयार है।

खेलो इंडिया विजन

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भारतीय खेलों के लिए एक मजबूत नींव तैयार करने के उद्देश्य से 2017 में शुरू की गई खेलो इंडिया योजना के तहत तीन मौजूदा कार्यक्रमों को एक साथ लाया गया था। इसने खेल विकास के लिए एक एकीकृत ढांचे के तहत 'राजीव गांधी खेल अभियान', 'शहरी खेल अवसंरचना योजना' और 'राष्ट्रीय खेल प्रतिभा खोज योजना' का विलय कर दिया।

यह योजना खेल इकोसिस्टम के हर चरण को मजबूत करने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण का पालन करती है। इसके पांच मुख्य स्तंभ हैं:

  • प्रतिभाशाली एथलीटों की पहचान करना और उन्हें पेशेवर उत्कृष्टता की ओर मार्गदर्शन करने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करना।

  • समर्पित विकास कार्यक्रमों के माध्यम से कोच और सहायक कर्मचारियों की क्षमता का निर्माण करना।

  • एथलीटों के प्रदर्शन में सुधार के लिए खेल विज्ञान और उन्नत तकनीक के उपयोग का विस्तार करना।

  • एक जीवंत खेल संस्कृति को बढ़ावा देने और प्रतिस्पर्धी अवसर प्रदान करने के लिए प्रतियोगिताओं और लीगों का आयोजन करना।

  • प्रशिक्षण और प्रतिस्पर्धी आयोजनों दोनों का समर्थन करने के लिए खेल अवसंरचना का विकास करना।

यह मिशन राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की योजनाओं के माध्यम से हर जिले में एक खेलो इंडिया प्रशिक्षण केंद्र की परिकल्पना करता है। यह खेल विज्ञान, मनोविज्ञान और पोषण द्वारा समर्थित संरचित एथलीट मार्गों को भी बढ़ावा देता है। डेटा-संचालित प्लेटफॉर्म एथलीटों की रियल-टाइम ट्रैकिंग को सक्षम बनाते हैं। इस एकीकृत दृष्टिकोण का उद्देश्य 2036 तक भारत को दुनिया के अग्रणी खेल राष्ट्रों में स्थापित करना है।

खेलो इंडिया में बढ़ता निवेश

  • 2017–18 से 2019–20: योजना को नया रूप देने के लिए तीन वर्षों के लिए 1,756 करोड़ रुपये स्वीकृत।

  • 2020–21: एक वर्ष के लिए 328.77 करोड़ रुपये का आवंटन।

  • 2021–22 से 2025–26: गतिविधियों के विस्तार और खेल बुनियादी ढांचे (स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर) को मजबूत करने के लिए पांच वर्षों के लिए वित्तीय व्यय बढ़ाकर 3,790.50 करोड़ रुपये किया गया।

  • 2026–27: 924.35 करोड़ रुपये का आवंटन, जो निरंतर समर्थन को सुदृढ़ करता है क्योंकि योजना परिणाम-उन्मुख (outcome-oriented) कार्यान्वयन के एक नए चरण में प्रवेश कर रही है।

 

खेलो इंडिया योजना की प्रमुख उपलब्धियां (जुलाई 2026 तक):

  • 3,176 करोड़ रुपये के कुल निवेश के साथ 349 नई खेल अवसंरचना परियोजनाओं को मंजूरी

  • बुनियादी स्तर (Grassroots) पर प्रशिक्षण और एथलीट सहायता को मजबूत करने के लिए 1,067 खेलो इंडिया केंद्र (KICs) स्थापित

  • विभिन्न खेल स्पर्धाओं में खेल प्रतिभाओं को तराशने के लिए 267 अकादमियों को सहायता

  • 2,745 खेलो इंडिया एथलीटों (KIAs) को सहायता, जिसमें कोचिंग, उपकरण, चिकित्सा देखभाल और एक मासिक जेब खर्च (Out of pocket allowance) शामिल है।

निरंतर निवेश और एक स्पष्ट दीर्घकालिक विजन के माध्यम से, खेलो इंडिया भारत के लिए नए चैंपियनों की एक मजबूत पीढ़ी तैयार कर रहा है।

खेलो इंडिया गेम्स: भविष्य के चैंपियनों का मंच

खेलो इंडिया आंदोलन ने 2018 में 'खेलो इंडिया स्कूल गेम्स' के शुभारंभ के साथ एक नए चरण में प्रवेश किया। नई दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम से देशभर की युवा खेल प्रतिभाओं को एक मंच पर लाया गया।

इसी वर्ष के अंत में, भारतीय ओलंपिक संघ भी इस पहल में शामिल हो गया। 2019 से, इस आयोजन का नाम बदलकर 'खेलो इंडिया यूथ गेम्स' (KIYG) कर दिया गया। यह खेलो इंडिया के तहत प्रमुख प्रतियोगिता के रूप में अपना योगदान दे रहा है।

खेलो इंडिया गेम्स ने विभिन्न खेलों में एथलीटों के लिए अधिक अवसर पैदा करने हेतु अपना लगातार विस्तार किया है। अब वार्षिक प्रतियोगिताएं राज्यों और विश्वविद्यालयों का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रतिभागियों को एक साथ लाती हैं, जिससे उन्हें प्रतिस्पर्धा करने, उत्कृष्टता प्राप्त करने और उच्च स्तर के लिए तैयार होने में मदद मिलती है। 2018 से, 63,000 से अधिक एथलीटों ने खेलो इंडिया गेम्स में भाग लिया है।

खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स (KIUG) और खेलो इंडिया विंटर गेम्स (KIWG) की शुरुआत 2020 में की गई थी। इसके बाद 2023 में खेलो इंडिया पैरा गेम्स (KIPG) शुरू हुए। यह विस्तार 2025 में खेलो इंडिया बीच गेम्स (KIBG) और खेलो इंडिया वॉटर स्पोर्ट्स फेस्टिवल के शुभारंभ के साथ जारी रहा। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स (KITG) की शुरुआत 2026 में हुई।

खेलो इंडिया गेम्स युवा एथलीटों को उत्कृष्टता हासिल करने के लिए एक राष्ट्रीय मंच प्रदान करके भारत की खेल संस्कृति को लगातार मजबूत कर रहे हैं।

भारत की खेल सफलता को सक्षम बनाना

खेलों में भारत का उभार केवल अवसंरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) और प्रतियोगिताओं तक सीमित नहीं है। कई लक्षित पहल एथलीटों के विकास को मजबूत करती हैं, उभरती हुई प्रतिभाओं की पहचान करती हैं और दीर्घकालिक खेल क्षमता का निर्माण करती हैं। सामूहिक रूप से, ये प्रयास जमीनी स्तर की भागीदारी से लेकर वैश्विक सफलता तक एक मजबूत मार्ग तैयार कर रहे हैं।

टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS)

युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय ने ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों में भारत के प्रदर्शन में सुधार के लिए सितंबर 2014 में टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) की शुरुआत की। एथलीटों को समग्र सहायता प्रदान करने के लिए एक समर्पित तकनीकी सहायता टीम के साथ अप्रैल 2018 में इस योजना को पुनर्गठित किया गया था।

TOPS विदेशी प्रशिक्षण, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, कोचिंग शिविरों, विशेष उपकरणों और 50,000 रुपये के मासिक वजीफे (स्टाइपेंड) के माध्यम से एथलीटों की सहायता करता है। जूनियर एथलीटों को 25,000 रुपये के मासिक वजीफे के साथ सहयोग करने के लिए एक 'डेवलपमेंट ग्रुप' भी शुरू किया गया था।

अप्रैल 2026 तक, यह योजना वर्तमान में 51 कोर एथलीटों, 52 पैरा कोर एथलीटों और 130 डेवलपमेंट एथलीटों को सहायता प्रदान कर रही है। TOPS ने टोक्यो 2020 और पेरिस 2024 ओलंपिक खेलों में भारत के पदक जीतने वाले प्रदर्शनों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कीर्ति (KIRTI)

खेलो इंडिया राइजिंग टैलेंट आइडेंटिफिकेशन (KIRTI) पहल 9 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों के बीच खेल प्रतिभाओं की पहचान करती है और उन्हें निखारती है। यह पारदर्शी और योग्यता-आधारित चयन सुनिश्चित करने के लिए टैलेंट असेसमेंट सेंटर, मानकीकृत मूल्यांकन प्रोटोकॉल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तथा डेटा एनालिटिक्स सहित उन्नत आईटी उपकरणों का उपयोग करता है।

वर्तमान में, 3 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 174 टैलेंट असेसमेंट सेंटर काम कर रहे हैं, जिनके तहत 1,87,921 मूल्यांकन पूरे हो चुके हैं। कीर्ति (KIRTI) का लक्ष्य भारत को 2036 तक शीर्ष 10 और 2047 तक शीर्ष 5 खेल राष्ट्रों में शामिल होने में मदद करने के लिए एक टिकाऊ प्रतिभा पाइपलाइन तैयार करना है।

खेल सामग्री निर्माण

केंद्रीय बजट 2026-27 में 500 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ खेल सामग्री निर्माण के लिए एक समर्पित पहल की घोषणा की गई। इस पहल का उद्देश्य उच्च गुणवत्ता और किफायती खेल सामग्री के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करना है।

इसके प्रमुख उद्देश्यों में घरेलू निर्माण क्षमता का विस्तार करना, उपकरण डिजाइन में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना, सामग्री विज्ञान (मटीरियल साइंसेज) को आगे बढ़ाना, वैश्विक खेल आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की उपस्थिति को मजबूत करना और विनिर्माण एवं संबद्ध क्षेत्रों में रोजगार पैदा करना शामिल है।

ये पहल भारत के खेल इकोसिस्टम को मजबूत कर रही हैं और एथलीटों को वैश्विक मंच पर आत्मविश्वास के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार कर रही हैं।

वैश्विक खेल मंच पर भारत का उभार

भारत के खेल इकोसिस्टम में किए गए निवेश वैश्विक मंच पर परिणाम दे रहे हैं। प्रमुख अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में भारत का प्रदर्शन ओलंपिक, पैरालंपिक और बहु-खेल स्पर्धाओं में देश की बढ़ती ताकत को दर्शाता है। एथलीटों के बेहतर विकास, बेहतर प्रशिक्षण सहायता और निरंतर निवेश ने विश्व स्तर पर निरंतर सुधार का रूप लिया है। भागीदारी और पदक तालिकाओं में निरंतर वृद्धि एक अत्यधिक प्रतिस्पर्धी खेल राष्ट्र के रूप में भारत के उभार को रेखांकित करती है।

ओलंपिक खेल

2016 और 2024 के बीच भारत की ओलंपिक यात्रा में एक उल्लेखनीय बदलाव देखा गया। देश रियो 2016 के दो पदकों से बढ़कर टोक्यो 2020 में सात पदकों तक पहुंचा। भारत ने पेरिस 2024 में छह पदकों के साथ इस गति को बनाए रखा। नीरज चोपड़ा टोक्यो 2020 में भारत के पहले ओलंपिक एथलेटिक्स स्वर्ण पदक विजेता बने। मीराबाई चानू भी भारत की सबसे सुसंगत (कंसिस्टेंट) ओलंपिक पदक विजेताओं में से एक बनकर उभरीं।

वर्ष

मेजबान शहर

भारतीय एथलीट

जीते गए मैडल

2016

रियो डि जेनिरो

117

2

2020

टोक्यो

119

7

2024

पेरिस

117

6

पैरालंपिक खेल

 

भारत के पैरालंपिक प्रदर्शन ने पिछले तीन संस्करणों में असाधारण वृद्धि देखी है। पदक तालिका रियो 2016 के चार से बढ़कर टोक्यो 2020 में 19 हो गई। पेरिस 2024 में 29 पदकों के साथ भारत का अब तक का सबसे बेहतरीन पैरालंपिक अभियान रहा। अवनी लेखरा, सुमित अंतिल और प्रमोद भगत देश के उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों में शामिल रहे हैं। TOPS और खेलो इंडिया पैरागेम्स जैसे कार्यक्रमों ने पैरा-एथलीटों के लिए सहायता को मजबूत किया है।

वर्ष

मेजबान शहर

भारतीय एथलीट

जीते गए मैडल

स्वर्ण

रजत

कांस्य

2016

रियो डि जेनिरो

19

4

2

1

1

2020

टोक्यो

54

19

5

8

6

2024

पेरिस

84

29

7

9

13

एशियाई खेल

भारत ने बड़े दलों (दल/कंटिनजेंट) और मजबूत पदक जीतने वाले प्रदर्शनों के माध्यम से एशियाई खेलों में लगातार अपने प्रदर्शन का स्तर उठाया है। देश ने इंचियोन 2014 में 57 पदक जीते और जकार्ता 2018 में सुधार करते हुए 69 पदक हासिल किए। होंगझोउ 2023 एक ऐतिहासिक संस्करण बन गया क्योंकि भारत ने 107 की अपनी अब तक की सबसे अधिक पदक संख्या दर्ज की। नीरज चोपड़ा, लवलीना बोरगोहेन, सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी प्रमुख योगदानकर्ताओं में शामिल थे।

वर्ष

मेजबान शहर

भारतीय एथलीट

जीते गए मैडल

स्वर्ण

रजत

कांस्य

2014

इंचियोन

541

57

11

9

37

2018

जकार्ता

570

69

15

24

30

2023

होंगझोउ

655

107

28

38

41

राष्ट्रमंडल खेल

भारत राष्ट्रमंडल खेलों में सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वालों में से एक बना हुआ है। देश ने ग्लासगो 2014 में 64 पदक जीते और गोल्ड कोस्ट 2018 में सुधार करते हुए 66 पदक हासिल किए। भारत ने इसके बाद बर्मिंघम 2022 में 61 पदक जीते। कुश्ती, वेटलिफ्टिंग, टेबल टेनिस, बैडमिंटन और एथलेटिक्स ने लगातार भारत की सफलता में योगदान दिया है। पीवी सिंधु, विनेश फोगट और अचिंत शिउली देश के उल्लेखनीय खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं।

वर्ष

मेजबान शहर

भारतीय एथलीट

जीते गए मैडल

स्वर्ण

रजत

कांस्य

2014

ग्लासगो

215

64

15

30

19

2018

गोल्ड कोस्ट

218

66

26

20

20

2022

बर्मिंघम

210

61

22

16

23


वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती सफलता उसके खेल इकोसिस्टम की ताकत और विश्व मंच पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए उसके एथलीटों के दृढ़ संकल्प को दर्शाती है।

राष्ट्रमंडल खेल 2026

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राष्ट्रमंडल खेल 2026 ग्लासगो में 23 जुलाई से 2 अगस्त 2026 तक आयोजित किए जा रहे हैं। इन खेलों में चार स्थानों पर आयोजित 10-खेल कार्यक्रमों में 74 देशों के एथलीट एक साथ आए हैं, जिनमें छह पूरी तरह से एकीकृत पैरा स्पोर्ट्स शामिल हैं।

भारत का प्रतिनिधित्व 124 सदस्यीय दल द्वारा किया जा रहा है, जिसमें 78 पुरुष और 46 महिला एथलीट शामिल हैं। यह दल कई खेल विधाओं में देश की बढ़ती प्रतिभा की गहराई को दर्शाता है।

27 जुलाई 2026 तक, भारत ने एक स्वर्ण, दो रजत और एक कांस्य सहित चार पदक जीते हैं। झंडू कुमार ने पैरा पावरलिफ्टिंग में कांस्य पदक जीतकर भारत का पदक खाता खोला। ऋषिकांता सिंह पुरुषों के 60 किग्रा वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में रजत पदक जीतने के बाद पदक जीतने वाले पहले सक्षम (एबल-बॉडी) भारतीय बने। उन्होंने स्नैच में एक नया राष्ट्रमंडल खेल रिकॉर्ड भी बनाया।

मीराबाई चानू ने ग्लासगो में भारत का पहला स्वर्ण पदक जीतकर एक और ऐतिहासिक क्षण प्रदान किया। इस जीत ने उनके लगातार तीसरे राष्ट्रमंडल खेल खिताब को दर्ज किया। मुथुपंडी राजा ने पुरुषों की 65 किग्रा वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में रजत जीतकर भारत की पदक तालिका में इजाफा किया।

अभी भी कई स्पर्धाएं बाकी हैं, भारतीय एथलीट दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास के साथ प्रतिस्पर्धा जारी रखे हुए हैं। देश को और अधिक यादगार प्रदर्शनों की उम्मीद है क्योंकि ग्लासगो में तिरंगा ऊंचा लहरा रहा है।

खेल उत्कृष्टता का लक्ष्य

भारत की खेल यात्रा लगातार गति पकड़ रही है। निरंतर निवेश, मजबूत सहायता प्रणालियां और लक्षित एथलीट विकास सफलता के लिए एक स्थायी नींव का निर्माण कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बढ़ती भागीदारी और बेहतर प्रदर्शन इन प्रयासों के प्रभाव को दर्शाते हैं। राष्ट्रमंडल खेल 2026 अभी भी जारी होने के साथ, भारतीय एथलीट दृढ़ संकल्प और गौरव के साथ प्रतिस्पर्धा जारी रखे हुए हैं। हर प्रदर्शन अगली पीढ़ी को बड़े सपने देखने और उच्च लक्ष्य तय करने के लिए प्रेरित करता है। जैसे-जैसे भारत भविष्य की ओर देख रहा है, देश चैंपियन बनाने और दुनिया के अग्रणी खेल राष्ट्रों के बीच अपना स्थान मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

संदर्भ:

पीआईबी बैकग्राउंडर

युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय

वस्त्र मंत्रालय

कॉमनवेल्थ स्पोर्ट:

पीडीएफ में देखने के लिए यहाँ क्लिक करें

पीआईबी रिसर्च

पीके/केसी/जेएस


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