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गगन: भारत के आसमान में सटीकता के साथ मार्ग-निर्देशन

प्रविष्टि तिथि: 01 JUL 2026 2:50PM by PIB Delhi

 

गगन (जीपीएस एडेड जियो ऑगमेंटेड नेविगेशन) भारत की अपनी उपग्रह-आधारित संवर्धित प्रणाली है, जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने मिलकर विकसित किया है। यह जीपीएस की सटीकता को बढ़ाता है और विमानों के सुरक्षित उड़ान हेतु  विश्वसनीयता (इंटीग्रिटी) संबंधी जानकारी प्रदान करता है। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रमाणित, गगन उपग्रह-आधारित लैंडिंग में मदद करता है और विमानन (एविएशन) के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी सेवाएं प्रदान करता है। मार्ग-निर्देशन की स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करके, गगन उपग्रहों के मार्ग-निर्देशन (सैटेलाइट नेविगेशन) के क्षेत्र में तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व के भारत के विजन को और सशक्त बनाता है।

 

सटीक मार्ग-निर्देशन की जरूरत: भारत ने गगन को क्यों विकसित किया

विमानन क्षेत्र में बेहद सटीक मार्ग-निर्देशन (नेविगेशन) की जरूरत होती है जगह बताने में हुई जरा सी भी गलती उड़ान की सुरक्षा पर असर डाल सकती है। यूं तो ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) विमानों को अपनी जगह का पता लगाने में मदद करता है, लेकिन इसके सिग्नल पर मौसम और अन्य दूसरी वजहों से प्रभाव पड़ सकता है। अब जबकि भारत एक बड़े विमानन बाजार के रूप में आगे बढ़ रहा है, सटीक और भरोसेमंद मार्ग-निर्देशन की जरूरत एक राष्ट्रीय प्राथमिकता बन गई है।

इस जरूरत को पूरा करने हेतु, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) ने मिलकर जीपीएस एडेड जियो ऑगमेंटेड नेविगेशन (गगन) प्रणाली को विकसित  किया। यह एक उपग्रह-आधारित संवर्धित प्रणाली (एसबीएएस) है, जो वास्तविक समय में सुधार (रियल-टाइम करेक्शन) और विश्वसनीयता (इंटीग्रिटी) संबंधी जानकारी देकर जीपीएस को बेहतर बनाता है। विश्वसनीयता (इंटीग्रिटी) संबंधी जानकारी पायलटों को तब सतर्क करती है जब जीपीएस का सिग्नल मार्ग-निर्देशन के लिए अनुपयुक्त होता है।

गगन परियोजना 2015 से पूरी तरह काम कर रही है। इसने भारत को अमेरिका, यूरोप और जापान जैसे उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल कर दिया है जिनके पास संचालन संबंधी एसबीएएस  उपलब्ध है। आज, गगन भारतीय हवाई क्षेत्र में विमानों की सुरक्षित उड़ान में मदद करता है और इसका उपयोग विमानन के अलावा अन्य कई क्षेत्रों में भी होता है। यह भारत की अपनी मार्ग-निर्देशन  क्षमता को भी मजबूत करता है और आत्मनिर्भर भारत के विजन को आगे बढ़ाता है।

 

भारत के मार्ग-निर्देशन इकोसिस्टम में गगन

 लॉन्च होने के बाद से, गगन निरंतर एक विश्व-प्रसिद्ध मार्ग-निर्देशन उपग्रह (नेविगेशनल सैटेलाइट) के रूप में उभरा है। इन वर्षों में, इसने प्रमाणन और संचालन संबंधी महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। इसकी सबसे हालिया उपलब्धि जून 2026 में मिली, जब नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने गगन का इस्तेमाल करके एक व्यावसायिक जेट विमान पर भारत के पहले उपग्रह-आधारित लैंडिंग सिस्टम अप्रोच को सफलतापूर्वक पूरा किया।

 

गगन के मुख्य तत्व

गगन ग्राउंड स्टेशनों, संचार प्रणालियों और जियोस्टेशनरी उपग्रहों के एक समन्वित नेटवर्क के जरिए काम करता है। ये सभी मिलकर वास्तविक समय में जीपीएस के सिग्नल की निगरानी करते हैं, जरूरी सुधारों की गणना करते हैं और विमान को मार्ग-निर्देशन संबंधी बेहतर जानकारी भेजते हैं।

मुख्य तत्व

तैनात किए गए तत्वों की संख्या

भूमिका

इंडियन रेफरेन्स स्टेशंस  (आईएनआरईएस)

15

पूरे देश में जीपीएस सिग्नल की लगातार निगरानी करते हैं और किसी भी तरह की गड़बड़ी का पता लगाते हैं।

इंडियन मास्टर कंट्रोल सेंटर्स (आईएनएमसीसी)

2

सभी रेफरेंस स्टेशनों से प्राप्त डेटा को प्रोसेस करते हैं, सिग्नल करेक्शन की गणना करते हैं और विश्वसनीयता संबंधी जानकारी तैयार करते हैं।

इंडियन लैंड अपलिंक स्टेशंस (आईएनएलयूएस)

3

जमीन से गगन उपग्रहों तक सुधार और विश्वसनीयता संबंधी जानकारी भेजते हैं।

संचार नेटवर्क

4

सभी गगन स्टेशनों को जोड़ते हैं और मार्ग-निर्देशन संबंधी डेटा के सुरक्षित एवं वास्तविक समय में प्रसारण को संभव बनाते हैं।

गगन पेलोड वाले जियोस्टेशनरी उपग्रह

3

सेवा वाले क्षेत्र में सुधारे गए मार्ग-निर्देशन संबंधी सिग्नल को प्रसारित करते हैं।

 

क्या आप जानते हैं? भू-स्थिर (जियोस्टेशनरी) उपग्रह पृथ्वी के घूमने की गति से ही चक्कर लगाते हैं, इसलिए वे एक ही जगह पर स्थिर दिखाई देते हैं। जीसैट-8, जीसैट-10 और जीसैट-15 भारत के भू-स्थिर (जियोस्टेशनरी) उपग्रह हैं जिनमें गगन पेलोड लगे हैं। ये मार्ग-निर्देशन संबंधी विशेष प्रणाली हैं जो उपयोगकर्ताओं को गगन की सुधारी हुई और विश्वसनीयता संबंधी जानकारी भेजते हैं।

इस क्षेत्र में मार्ग-निर्देशन की सटीकता और सुचारू संचालन को बेहतर बनाकर, यह उपग्रह-आधारित विमानन सेवाओं में भारत की अग्रणी भूमिका को और मजबूत कर रहा है।

 

भारत का मार्ग-निर्देशन संबंधी स्वदेशी इकोसिस्टम

गगन की समन्वित संरचना भारत के व्यापक उपग्रह मार्ग-निर्देशन कार्यक्रम का एक अहम हिस्सा है। गगन के साथ-साथ, भारत ने अपना स्वदेशी क्षेत्रीय मार्ग-निर्देशन उपग्रह प्रणाली नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन (नाविक) भी विकसित किया है। जहां ‘नाविक’ पोजिशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग की सुविधाएं देता है, वहीं गगन, जीपीएस के सिग्नल को बेहतर बनाता है ताकि विमानों को सटीक मार्ग-निर्देशन और लैंडिंग में मदद मिल सके।

गगन

नाविक

उपग्रह-आधारित संवर्धित प्रणाली (एसबीएएस)

स्वतंत्र क्षेत्रीय मार्ग-निर्देशन उपग्रह प्रणाली

वास्तविक समय में सुधार और विश्वसनीयता संबंधी जानकारी के जरिए जीपीएस को बेहतर बनाता है।

पोजिशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग की सुविधाएं देता है

भारतीय उड़ान सूचना क्षेत्र में नागर विमानन को समर्थन प्रदान करता है।

कवरेज क्षेत्र में भारत और भारतीय सीमा से परे 1500 किलोमीटर तक का इलाका शामिल है।

 

क्या आप जानते हैं? 2025 में, भारत ने दक्षिण अफ्रीका के साथ नाविक रेफरेंस स्टेशन बनाने से संबंधित एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह पहल देश की सीमाओं के बाहर भारत की अपनी उपग्रह मार्ग-निर्देशन प्रणाली के प्रदर्शन और पहुंच को मजबूत करेगी। यह साझेदारी मार्ग-निर्देशन के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाती है और भारत की अंतरिक्ष-आधारित पोजिशनिंग और टाइमिंग संबंधी क्षमताओं में बढ़ते अंतरराष्ट्रीय भरोसे को दर्शाती है।

 

वैश्विक मार्ग-निर्देशन नेटवर्क के साथ अंतर-संचालित

गगन को अंतरराष्ट्रीय नागर विमानन मानकों के अनुरुप विकसित किया गया है और यह विदेशी प्रणालियों के साथ अंतर-संचालित है, जो जीपीएस सिग्नल की सटीकता को बेहतर बनाती हैं, जैसे कि:

•     संयुक्त राज्य अमेरिका का वाइड एरिया ऑग्मेंटेशन सिस्टम (डब्ल्यूएएएस)

•     यूरोपीय जियोस्टेशनरी नेविगेशन ओवरले सर्विस (ईजीएनओएस)

•     जापान का मल्टी-फंक्शनल सैटेलाइट ऑग्मेंटेशन सिस्टम (एमएसएएस)

 

गगन भूमध्यरेखीय क्षेत्र के लिए प्रमाणित पहला एसबीएएस भी है, जिससे भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिनके पास सक्रिय उपग्रह-आधारित संवर्धित प्रणाली भी उपलब्ध है।

स्वदेशी नवाचार को अंतरराष्ट्रीय मानकों के साथ जोड़कर, गगन भारत की विमानन सुरक्षा और मार्ग-निर्देशन संबंधी सेवाओं को सशक्त बना रहा है।

गगन की सक्रियता: विमानन से परे विभिन्न क्षेत्रों में सदुपयोग

भले ही गगन को मुख्य रूप से नागर विमानन के लिए विकसित किया गया था, लेकिन इसकी सटीक पोजिशनिंग और मार्ग-निर्देशन संबंधी क्षमताएं कई अन्य क्षेत्रों में भी मदद करती हैं। जीपीएस  सिग्नल की सटीकता और विश्वसनीयता को बेहतर बनाकर, गगन सुरक्षित संचालन, बेहतर नियोजन  और सेवाओं की अधिक कुशल आपूर्ति को संभव बनाता है।

  • समुद्री आवागमन: तटीय और गहरे समुद्र वाले इलाकों में अधिक सटीक पोजिशनिंग को संभव बनाता है।
  • सड़क परिवहन और राजमार्ग: कुशल परिवहन प्रणाली और बेड़ा प्रबंधन (फ्लीट मैनेजमेंट) में सहायता करता है।
  • रेलवे: परिचालन क्षमता और सुरक्षा को बेहतर बनाता है।
  • आपदा प्रबंधन: आपातकालीन स्थितियों और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सटीक लोकेशन का पता लगाना संभव बनाता है।
  • रक्षा और सुरक्षा: रक्षा अभियानों के लिए मार्ग-निर्देशन को मजबूत करता है।
  • दूरसंचार: दूरसंचार बुनियादी ढांचे के भरोसेमंद समन्वयन में सहायता करता है।
  • सर्वेक्षण और मैपिंग: जमीन के सर्वेक्षण और भू-स्थानिक मैपिंग की सटीकता को बेहतर बनाता है।

सटीक उपग्रह मार्ग-निर्देशन के लाभों को विमानन क्षेत्र से आगे बढ़ाकर, गगन अधिक कुशल सार्वजनिक सेवाएं प्रदान करने में योगदान दे रहा है।

 

आगे की राह

निरन्तर आगे बढ़ते हुए, गगन सुरक्षित हवाई मार्ग-निर्देशन में मदद करके, हवाई यातायात प्रबंधन को बेहतर बनाकर और पूरे देश में उपग्रह-आधारित मार्ग-निर्देशन सेवाओं का विस्तार करके भारत के उपग्रह मार्ग-निर्देशन इकोसिस्टम को सशक्त बनाना जारी रखेगा। नाविक के साथ मिलकर, यह मार्ग-निर्देशन की स्वदेशी तकनीकों को आगे बढ़ाने और विदेशी प्रणाली पर निर्भरता कम करने में अहम भूमिका निभाएगा। परिवहन, आपदा प्रबंधन, सर्वेक्षण और दूसरे अन्य सेक्टरों में इसके बढ़ते सदुयोग के साथ, गगन एक संयोजित, आत्मनिर्भर और तकनीक-आधारित भविष्य की दिशा में भारत की यात्रा का एक मुख्य आधार बना रहेगा।

 

संदर्भ

अंतरिक्ष विभाग

https://www.pib.gov.in/newsite/PrintRelease.aspx?relid=130384&reg=48&lang=2

पीआईबी बैकग्राउंडर

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2181865&reg=48&lang=2

नागर विमानन मंत्रालय

https://www.pib.gov.in/newsite/PrintRelease.aspx?relid=124704&reg=48&lang=2

https://www.pib.gov.in/newsite/PrintRelease.aspx?relid=123209&reg=3&lang=2

tre यू आर राव उपग्रह केंद्र

https://www.ursc.gov.in/navigation/gagan.jsp

इसरो

https://www.isro.gov.in/Navic.html

 

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पीआईबी रिसर्च

पीके/केसी/आर


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