स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने आयातित औषधियों के लिए शेष गुणवत्ता अवधि शर्तों को तार्किक बनाने के उद्देश्य से संशोधन के प्रारूप पर सार्वजनिक टिप्पणियां आमंत्रित कीं
प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य पर्याप्त शेष गुणवत्ता अवधि वाली गुणवत्तापूर्ण औषधियों की उपलब्धता सुनिश्चित रखते हुए व्यवसाय सुगमता बढ़ाना है
प्रविष्टि तिथि:
26 JUN 2026 10:22AM by PIB Delhi
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषधि नियमावली, 1945 के नियम 31 में संशोधन का प्रस्ताव करते हुए एक मसौदा अधिसूचना प्रकाशित की है। इसका उद्देश्य आयातित दवाओं के लिए बची हुई शेल्फ-लाइफ (शेष गुणवत्ता अवधि) की आवश्यकता को तर्कसंगत बनाना और फार्मास्युटिकल क्षेत्र में व्यवसाय सुगमता को और अधिक बढ़ावा देना है।
22 जून 2026 की गजट अधिसूचना जी.एस.आर. 505 (इ) के माध्यम से सार्वजनिक सुझावों के लिए प्रकाशित इस मसौदा संशोधन में, आयातित दवाओं के लिए वर्तमान में लागू न्यूनतम 60 प्रतिशत से अधिक की बची हुई शेष गुण्वत्ता अवधि की आवश्यकता को संशोधित करके, आयात के समय न्यूनतम 12 महीने की बची हुई शेल्फ-लाइफ करने का प्रस्ताव है। हालांकि, जैविक उत्पादों और रेडियोफार्मास्युटिकल्स की विशिष्ट प्रकृति और सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए, उनके लिए न्यूनतम 60 प्रतिशत से अधिक की बची हुई शेष गुण्वत्ता अवधि की मौजूदा शर्त लागू रहेगी।
प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य मरीजों के लिए गुणवत्तापूर्ण दवाओं की उपलब्धता बनाए रखते हुए औषधियों की आपूर्ति श्रृंखला में अधिक कुशलता लाना है। देश में आने वाली आयातित औषधियों की न्यूनतम शेष गुणवत्ता अवधि कम से कम बारह महीने होना सुनिश्चित करके, यह प्रस्ताव उपयोग अवधि समाप्त होने से पहले वितरण और उपभोग के लिए पर्याप्त समय प्रदान करता है, इससे यह सुनिश्चित होता है कि मरीजों को इस्तेमाल के लिए सही उपयोग की समय-सीमा वाली दवाइयाँ मिलती रहें।
इस संशोधन से सप्लाई चेन में औषधियों की बर्बादी कम होने की उम्मीद है, जो दवाओं के इस्तेमाल की बची हुई अवधि से जुड़ी सख्त शर्तों के कारण होती है। इससे आपूर्ति प्रबंधन बेहतर होगा, लागत कम होगी और देश में ज़रूरी दवाओं की उपलब्धता बढ़ेगी।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित संशोधन केवल औषधियों के आयात के समय लागू होने वाली शेष शेल्फ-लाइफ की आवश्यकता से संबंधित है। यह प्रस्ताव औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 और औषधि नियम, 1945 के तहत दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा या प्रभाव से संबंधित किसी भी अन्य नियामक आवश्यकताओं में कोई बदलाव नहीं करता है।
मंत्रालय ने इस मसौदा अधिसूचना पर सभी संबंधित पक्षों से आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए हैं। टिप्पणियां निर्धारित अवधि के भीतर अवर सचिव (औषधि), स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार, यू-6, वर्क हॉल-सी विंग, प्रथम तल, कर्तव्य भवन-1, नई दिल्ली-110001 को भेजी जा सकती हैं या drugsdiv-mohfw[at]gov[dot]in पर ईमेल की जा सकती हैं।
मसौदा राजपत्र अधिसूचना को इस लिंक पर देखा जा सकता है: https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/273833.pdf
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पीके/केसी/एसके
(रिलीज़ आईडी: 2278134)
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