गृह मंत्रालय

वर्षांत समीक्षा 2020 : गृह मंत्रालय

गृह मंत्रालय के प्रमुख निर्णयों/पहलों की मुख्य बातें

(कोविड-19 से संबंधित गृह मंत्रालय की गतिविधियों पर प्रेस विज्ञप्तियों के लिंक अनुलग्‍नक-1 में हैं)

Posted On: 07 JAN 2021 8:03PM by PIB Delhi

परिचय

कोविड-19 महामारी के प्रकोप और भारत में इसके तेजी से फैलने से जुड़ी चिंताओं ने इस साल के आरंभ से ही गृह मंत्रालय की गतिविधियों को प्रभावित करना शुरू कर दिया। कोविड-19 से संबंधित गृह मंत्रालय की गतिविधियों का विवरण अनुलग्‍नक-1 में देखा जा सकता है।

वर्ष 2020 के दौरान गृह मंत्रालय की प्रमुख गतिविधियां साल के दौरान महत्‍वपूर्ण गतिवधियां का सारांश :

जम्‍मू एवं कश्‍मीर और लद्दाखनए संघ शासित प्रदेशों के संघ के साथ एकीकरण की दिशा में उठाए गए आगे के कदम

संघ शासित प्रदेश जम्‍मू एवं कश्‍मीर और संघ शासित प्रदेश लद्दाख में केंद्रीय कानूनों और राज्‍य कानूनों का अनुकूलन किया गया।

संघ शासित प्रदेश जम्‍मू एवं कश्‍मीर के संदर्भ में 48 केंद्रीय कानूनों और 167 राज्‍य कानूनों के अनुकूलन से संबंधित आदेश अधिसूचित किए गए।

संघ शासित प्रदेश लद्दाख के संदर्भ में 44 केंद्रीय कानूनों और 148 राज्‍य कानूनों के अनुकूलन से संबंधित आदेश भी अधिसूचित किए गए।

जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (कठिनाइयों को दूर करना) आदेश, 2020 को 31 मार्च 2020 को अधिसूचित किया गया। इसने जम्‍मू एवं कश्‍मीर और लद्दाख के साझा उच्‍च न्‍यायालय के लिए नियुक्‍त किए गए नए न्‍यायाधीशों के शपथ ग्रहण के लिए जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन कानून, 2019 की धारा 75 से संबंधित कठिनाइयों को दूर कर दिया।

जम्‍मू में 08 जून 2020 को केंद्रीय प्रशासनिक न्‍यायाधिकरण की एक पीठ की स्‍थापना की गई।

जम्मू एवं कश्मीर राजभाषा अधिनियम-2020 को 27 सितम्बर 2020 को अधिसूचित किया गया। यह अधिनियम 29 सितम्बर 2020 से लागू किया गया। कश्‍मीरी, डोगरी, उर्दू, हिंदी और अंग्रेजी संघ शासित प्रदेश जम्‍मू एवं कश्‍मीर की राजभाषाएं बन चुकी हैं।

वर्ष 2020 में (15 नवम्‍बर तक) आतंकवादी घटनाओं की संख्‍या में वर्ष 2019 की समान अवधि की तुलना में 63.93 प्रतिशत तक की कमी आई। वर्ष 2020 में (15 नवम्‍बर तक) विशेष सुरक्षा बलों के शहीद होने वाले कर्मियों की संख्‍या में भी वर्ष 2019 की समान अवधि की तुलना में 29.11 प्रतिशत तक की कमी आई है और नागरिकों की मौतों की संख्‍या में 14.28 प्रतिशत तक की कमी आई है।

पाकिस्‍तान के कब्‍जे वाले जम्‍मू कश्‍मीर (पीओजेके) और छम्‍ब के 36,384 विस्‍थापित परिवारों को प्रधानमंत्री विकास पैकेज के अंतर्गत प्रति परिवार 5.5 लाख रुपये की एकमुश्‍त वित्‍तीय सहायता उपलब्‍ध करायी गयी है। पीओजेके और छम्‍ब के विस्‍थापित परिवारों के समान ही जम्‍मू कश्‍मीर में पश्चिमी पाकिस्‍तान के शरणार्थियों (डब्‍ल्‍यूपीआर) के 5,764 परिवारों को 5.5 लाख रुपये प्रति परिवार की दर पर एकमुश्‍त वित्‍तीय सहायता भी उपलब्‍ध करायी जा रही है।

4 अप्रैल : गृह मंत्रालय ने जम्मू और कश्मीर के निवासियों को संघ शासित प्रदेश में सभी सरकारी पदों के लिए पात्र बनाने का आदेश जारी किया।

14 अक्‍टूबर : केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने वित्त वर्ष 2023-24 तक, पांच वर्ष की अवधि के लिए संघ शासित प्रदेश जम्‍मू-कश्‍मीर और लद्दाख को 520 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज देने की मंजूरी दी और केन्‍द्र शासित प्रदेश जम्‍मू-कश्‍मीर और लद्दाख में इस विस्‍तारित अवधि के दौरान आवंटन को गरीबी अनुपात से जोड़े बिना मांग जनित आधार पर दीनदयाल अंत्‍योदय योजना- राष्‍ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) का वित्त पोषण सुनिश्चित करने की भी मंजूरी दी।

21 अक्‍टूबर : केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जम्मू और कश्मीर में वर्ष 2020-21 के दौरान सेब की खरीद के लिए पिछले सीजन यानी 2019-20 में निर्धारित नियम एवं शर्तों के आधार पर ही मार्केट इंटरवेंशन स्कीम के विस्तार को मंजूरी दी।

26 सितम्‍बर : लद्दाख के वरिष्‍ठ नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्‍ली में केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह के साथ मुलाकात की।

केंद्रीय गृहमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि भारत सरकार, लेह और करगिल की लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद (एलएएचडीसी) को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है तथा सरकार, संघ शासित प्रदेश लद्दाख के लोगों के हितों की रक्षा करेगी। आश्‍वासनों के पश्‍चात, प्रतिनिधिमंडल ने आगामी एलएएचडीसी, लेह चुनावों के बहिष्कार के आह्वान को वापस लेने पर सहमति व्यक्त की।

संघ शासित प्रदेश जम्‍मू और कश्‍मीर में जिला विकास परिषद (डीडीसी) चुनाव।

भारत सरकार ने जम्‍मू एवं कश्‍मीर के प्रत्‍येक जिले में जिला विकास परिषद (डीडीसी) की स्‍थापना करने के लिए 16 अक्टूबर 2020 को जम्‍मू एवं कश्‍मीर पंचायती राज अधिनियम, 1989 में संशोधन किया। पहली बार लिए गए इस ऐतिहासिक निर्णय से पश्चिमी पाकिस्‍तान से आए शरणार्थी अपने मताधिकार का इस्‍तेमाल करने के पात्र बन सके। जिला विकास परिषद (डीडीसी) का गठन संघ शासित प्रदेश जम्‍मू और कश्‍मीर में पूरी तरह कार्यशील पंचायती राज प्रणाली को स्‍थापित करने का अंतिम और निर्णायक कदम था, जो 73वें संविधान संशोधन, 1992 के तहत अनिवार्य था।

जम्‍मू एवं कश्‍मीर में लोकतंत्र की बुनियाद को मजबूती प्रदान करने की प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की प्रतिबद्धता और संकल्‍प को परिलक्षित करते हुए इतिहास में पहली बार, संघ शासित प्रदेश जम्‍मू एवं कश्‍मीर में डीडीसी चुनाव कराए गए। ये चुनाव नवम्‍बर के अंतिम सप्‍ताह से दिसम्‍बर के तीसरे सप्‍ताह तक आठ चरणों में सम्‍पन्‍न कराए गए। 280 निर्वाचन क्षेत्रों में 2,178 प्रत्‍याशियों ने चुनाव लड़ा। कुल 58,34,458 पात्र मतदाताओं में से 30,00,185 ने अपने मताधिकार का उपयोग किया और कुल 51.42 प्रतिशत मतदाताओं ने मत डाले।

6 मार्च : सीआईएसएफ ने जम्‍मू हवाई अड्डे की सुरक्षा का दायित्‍व ग्रहण किया। श्रीनगर हवाई अड्डे की सुरक्षा 26 फरवरी को सीआईएसएफ को सौंपी गई।

पूर्वोत्‍तर क्षेत्र : शांति प्रक्रिया को मजबूती

वर्ष 2014 के बाद से पूर्वोत्‍तर के सुरक्षा की स्थिति में व्‍यापक सुधार हुआ है। पिछले छह वर्षों में उग्रवादी घटनाओं में महत्‍वपूर्ण कमी आयी है। उग्रवादी घटनाओं में कमी का सिलसिला वर्ष 2020 में भी जारी रहा।

पिछले छह वर्षों में सुरक्षा की स्थिति में सुधार के कारण, सशस्‍त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम को मेघालय और त्रिपुरा से पूरी तरह हटा लिया गया और अरुणाचल प्रदेश में इसके अनुप्रयोग में कमी आई है।

16 जनवरी : ब्रू-रियांग शरणार्थी संकट को समाप्‍त करने के लिए ऐतिहासिक समझौते पर हस्‍ताक्षर।

23 वर्ष पुराने ब्रू-रियांग प्रवासी संकट को समाप्‍त करने के लिए केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की अध्यक्षता में 16 जनवरी को नई दिल्ली में भारत सरकार, त्रिपुरा और मिज़ोरम सरकार और ब्रू-रियांग प्रतिनिधियों के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। यह ऐतिहासिक समझौता पूर्वोत्‍तर की प्रगति और क्षेत्र के लोगों के सशक्तिकरण के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की दृष्टि के अनुरूप है। लगभग 37,000 ब्रू प्रवासियों को त्रिपुरा में बसाया जाएगा और उनके पुनर्वास तथा सर्वांगीण विकास के लिए केंद्र की ओर से लगभग 600 करोड़ रुपये के पैकेज के माध्‍यम से सहायता दी जाएगी।

27 जनवरी : बोडो समझौता

50 साल से ज्‍यादा पुराने बोडो संकट का समाधान करने के लिए केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की अध्यक्षता में 27 जनवरी को नई दिल्ली में भारत सरकार, असम सरकार और बोडो प्रतिनिधियों के बीच एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

इसके परिणामस्‍वरूप, एनडीएफबी गुटों के 1615 सदस्यों ने आत्‍मसमर्पण किया तथा 9-10 मार्च, 2020 को एनडीएफबी के गुटों ने स्‍वयं को भंग कर दिया।

बोडो क्षेत्रों के विकास के लिए विशिष्ट परियोजनाएं चलाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से तीन वर्ष में 1500 करोड़ रुपये का पैकेज दिया जाएगा।

पूर्वोत्‍तर में शांति कायम करने के लिए जारी प्रयासों में अल्‍फा/आई, एनडीएफबी, केएलओ आदि विविध गुटों के 644 सदस्‍यों ने 23 जनवरी 2020 को असम में अपने हथियार डाल दिए।

महत्वपूर्ण कानूनों में संशोधन

विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 में संशोधन

विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2020 संसद द्वारा सितंबर 2020 में पारित किया गया था और 28 सितंबर, 2020 को अधिसूचित किया गया था। अधिनियम में किए गए संशोधन विभिन्न संगठनों द्वारा प्राप्त विदेशी अंशदानों की प्राप्ति और उपयोग की प्रभावी निगरानी में सहायोग करेंगे। सरकार ने 10 नवंबर, 2020 को विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम, 2011 में संशोधन को भी अधिसूचित किया।

यह अधिनियम ऐसी किसी भी गतिविधियों के लिए विदेशी योगदान पर प्रतिबंध लगाता है जो राष्ट्रीय हित के लिए खतरा उत्पन्न करती हैं।

यह भारतीय नागरिकों के लिए आधार और विदेशियों के लिए पासपोर्ट या ओसीआई को पहचान प्रमाणित करने के लिए अनिवार्य बनाता है।

• 9 सितंबर: श्री हरमंदिर साहिब को एफसीआरए की मंजूरी।

गृह मंत्रालय ने सचखंड श्री हरमंदिर साहिब, श्री दरबार साहिब, पंजाब को पंजीकरण की अनुमति दी।

केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक निर्णय के रूप में श्री हरिमंदिर साहिब को एफसीआरए को मंजूरी पर खुशी व्यक्त की।

इसे एक धन्य क्षणबताते हुए श्री अमित शाह ने अपने एक ट्वीट में कहा, “प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी अत्यंत भाग्यशाली है कि वाहे गुरु जी ने उनसे सेवा ली है। श्री हरमंदिर साहिब के लिए एफसीआरए पर निर्णय एक अभूतपूर्व निर्णय है जो एक बार फिर हमारे सिख भाइयों और बहनों की सेवा की उत्कृष्ट भावना को प्रदर्शित करेगा।

• 29 सितंबर: देश के कानून के उल्लंघन के लिए मानवाधिकार को बहाना नहीं बनाया जा सकता-गृह मंत्रालय।

अवैध तरीके से धन का दुरूपयोग करने के मामले में, गृह मंत्रालय ने एमनेस्टी इंटरनेशनल के एफसीआरए लाइसेंस को निलंबित किया।

गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि एमनेस्टी भारत में मानवीय कार्य जारी रखने के लिए स्वतंत्र था, जैसा कि कई अन्य संगठनों द्वारा किया जा रहा है। हालांकि, भारत अपने निर्धारित कानून के माध्यम से विदेशी योगदान द्वारा वित्त पोषित संस्थाओं द्वारा घरेलू राजनीतिक विवाद में हस्तक्षेप की अनुमति नहीं देता है।

• 11 नवंबर: एफआरआरओ, दिल्ली ने गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद जिलों में रहने वाले ओसीआई कार्ड धारकों के संबंध में सेवाओं से संबंधित मामलों पर क्षेत्राधिकार दिया। केरल में तीन एफआरआरओ के अधिकार क्षेत्र को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।

अब तक, उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद जिले पहले से ही एफआरआरओ, लखनऊ के क्षेत्राधिकार में थे।

• 24 फरवरी: आयुध अधिनियम, 1959 एवं आयुध नियम, 2016 में संशोधनों को अधिसूचित किया; निशानेबाजों के लिए आग्नेयास्त्रों और गोला बारूद की संख्या में वृद्धि की गई।

• 8 जनवरी: आपराधिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहायता के लिए संशोधित दिशा-निर्देश।

भारत सरकार ने अपराध के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति को आगे बढ़ाने और शीघ्रता से न्याय दिलाने के प्रयास में, गृह मंत्रालय ने दिसंबर 2019 में आपराधिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहायता के लिए संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए थे।

भारत ने 42 देशों के साथ पारस्परिक कानूनी सहायता संधि/समझौते किए हैं और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संधिपत्रों जैसे यूएनसीएसी, यूएनटीओसी आदि में हस्ताक्षरकर्ता है।

संशोधित दिशा-निर्देशों में भारत सहित पूरी दुनिया में नए कानूनों, विनियमों, संधिपत्रों और प्रक्रियात्मक कानूनों में संशोधन के आधार पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में किया गया पर्याप्त बदलाव शामिल हैं।

• 19 मार्च: मोदी सरकार ने एनसीसी सर्टिफिकेट धारकों को अर्ध-सैनिक बलों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु महत्वपूर्ण कदम उठाया।

राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) में भारत के युवाओं की भागीदारी में वृद्धि के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के स्वप्न को साकार करने के लिए, केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह ने एनसीसी सर्टिफिकेट धारकों को बोनस अंक देने के लिए एक अनूठा निर्णय लिया है और अब केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ), सशस्त्र बलों की प्रचलित परीक्षाओं में एनसीसी कैडेट को अलग से अंक दिए जाएंगे।

यूएपीए अधिनियम के तहत नामित लोगकसता शिकंजा

1 जुलाई: गृह मंत्रालय ने सिख आतंकवादी समूहों से जुड़े नौ लोगों को यूएपीए के तहत आतंकवादी घोषित किया।

27 अक्टूबर: अठारह और व्यक्तियों को, सभी पाकिस्तान आधारित, गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के तहत आतंकवादी घोषित किया गया।

 

गृह मंत्रालय की नई पहलें- सुरक्षित भारत का निर्माण

10 जनवरी: गृह मंत्री श्री अमित शाह ने नई दिल्ली में भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) का उद्घाटन किया; राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के लिए समर्पित।

सभी प्रकार के साइबर अपराधों से व्यापक और समन्वयपूर्वक तरीके से निपटने के लिए 415.86 करोड़ रुपयों की कुल लागत के साथ आई4सी को स्थापित करने की योजना को अक्टूबर 2018 में स्वीकृत किया गया था।

गृह मंत्रालय की पहल पर, 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने संबंधित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में क्षेत्रीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र स्थापित करने के लिए अपनी सहमति प्रदान की है।

• 29 जनवरी: एनसीआरबी ने लापता लोगों की खोज से संबंधित और वाहन एनओसी बनाने के लिए राष्ट्रीय स्तर की दो ऑनलाइन सेवाओं का शुभारंभ किया।

• 1 मार्च: केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कोलकाता में एनसीजी क्षेत्रीय केंद्र के परिसर का उद्घाटन किया।

कोलकाता में 162 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित एनएसजी का अत्याधुनिक क्षेत्रीय केंद्र परिसर एक आदर्श क्षेत्रीय केंद्र बन गया है। इस केंद्र की जिम्मेदारियों के दायरे में पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और पूरा पूर्वोत्तर क्षेत्र शामिल है।

• 2 दिसंबर: केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने 55वें वार्षिक डीजीपी/आईजीपी सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। इस तरह का पहला सम्मेलन वर्चुअल रूप से आयोजित किया गया।

अपने उद्घाटन भाषण में, गृह मंत्री ने ज़ोर दिया कि आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहिष्णुता होनी चाहिए। नागरिकों की सुरक्षा और गरिमा को सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए, उन्होंने आपातकालीन स्थितियों और आपदाओं से निपटने के लिए पुलिस की क्षमता निर्माण के महत्व को रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भी बाद में इस वर्चुअल सम्मेलन में सहभागिता की और पिछले सम्मेलन के महत्वपूर्ण बिंदुओं की समीक्षा की।

• 4 मार्च: गृह मंत्रालय ने एनसीआरबी द्वारा स्वचालित रूप से चेहरे की पहचान प्रणाली के कार्यान्वयन को मंजूरी दे दी। यह अपराधियों, अज्ञात शवों और लापता/पाए गए बच्चों एवं व्यक्तियों की बेहतर पहचान के लिए सुविधा प्रदान करेगी।

एएफआरएस पुलिस रिकॉर्ड का उपयोग करेगा और केवल कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए उपलब्ध होगा।

अपराधियों, अज्ञात शवों और लापता/पाए गए बच्चों और व्यक्तियों की सटीक पहचान को संभव बनाने के क्रम में यह निजता का उल्लंघन नहीं करेगा।

• 12 मार्च: एनसीआरबी ने क्राइम मल्टी एजेंसी सेंटर (सीआरआई-एमएसी) और नेशनल साइबर क्राइम प्रशिक्षण केंद्र (एनसीटीसी) का शुभारंभ किया।

सीआरआई-एमएसी जघन्य अपराध और अंतर-राज्य समन्वय से संबंधित अन्य मुद्दों पर जानकारी को साझा करने में सक्षम बनाने के लिए; पुलिस अधिकारियों, न्यायाधीशों, अभियोजकों और अन्य हितधारकों के लिए व्यापक स्तर पर साइबर अपराध संबंधी जांच के लिए पेशेवर गुणवत्ता वाली ई-शिक्षण सेवाएं प्रदान करने के लिए एनसीटीसी का गठन।

• 13 अक्टूबर: एनसीआरबी की ई-साइबर लैब का उद्घाटन।

अत्याधुनिक साइबर फोरेंसिक उपकरणों के साथ एनसीआरबी द्वारा स्थापित ई-साइबर लैब, साइबर अपराधों की जांच की दिशा में वर्चुअल अनुभव प्रदान करेगी।

प्रधानमंत्री, श्री नरेन्द्र मोदी की सरकार अपराध और आतंक में शून्य सहिष्णुता में विश्वास करती है। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में सरकार का उद्देश्य अपराध मुक्त भारत का निर्माण करना है।

केंद्रीय गृह मंत्री, श्री अमित शाह ने पुलिस बलों के आधुनिकीकरण (एमपीएफ) के महत्व पर ज़ोर दिया है। वित्तीय वर्ष 2019-20 के दौरान, भारत सरकार ने पूरे भारत में एमपीएफ के लिए 780 करोड़ रुपये जारी किए।

• 15 दिसंबर: सीसीटीएनएस और आईसीजेएस में बेहतर कार्यप्रणालियों पर दूसरा सम्मेलन

गृह मंत्रालय के दो प्रमुख आधुनिकीकरण कार्यक्रम आपराधिक ट्रैकिंग नेटवर्क और सिस्टम (सीसीटीएनएस)/इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) ने कानून प्रवर्तन को प्रभावी बनाया और ये महत्वपूर्ण रूप से प्रभावी साबित हुए हैं।

सीसीटीएनएस लगभग 2000 करोड़ रुपये के बजट के साथ एक मिशन मोड परियोजना है जिसने अपनी व्यापक पहुंच और कनेक्टिविटी के साथ जांच और पुलिस तंत्र में क्रांति ला दी है। यह सर्वाधिक दूर-दराज के क्षेत्रों सहित पुलिस स्टेशनों और अन्य कार्यालयों को जोड़ने में कामयाब रही है।

देश के कुल 16,098 पुलिस स्टेशनों में से, 95 प्रतिशत से अधिक पुलिस स्टेशनों में सीसीटीएनएस सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जा रहा है; 97 प्रतिशत पुलिस स्टेशनों में संपर्क सुविधा उपलब्ध है और 93 प्रतिशत पुलिस स्टेशनों में अब सीसीटीएनएस के माध्यम से 100 प्रतिशत एफआईआर दर्ज की जा रही है।

आईसीजेएस के माध्यम से डेटा साझाकरण को उच्चतम स्तर पर ले जाया जा सका है और यह कानून प्रवर्तन और न्यायिक प्रणालियों के बीच सत्य के एक स्रोत को सुनिश्चित करता है, इस प्रकार आपराधिक न्याय प्रणाली की परिचालन दक्षता में सुधार करता है। आईसीजेएस के माध्यम से ई-फॉरेनसिक, ई-अभियोजन और ई-कारागार जैसे सभी घटकों को कई गुना विस्तारित किया गया है तथा कई और डेटाबेस प्रणालियों के साथ एकीकृत किया गया है।

28 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की अदालतों में और 32 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के कारागारों में सीसीटीएनएस डेटा का इलेक्ट्रॉनिक रूप से उपयोग किया जा रहा है। 9 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में सीसीटीएनएस में कोर्ट डेटा का रिवर्स ट्रांसफर भी शुरू हो गया है।

प्रधानमंत्री के स्मार्ट पुलिसिंग के दृष्टिकोण के तहत, जवाबदेही, पारदर्शिता, समुदाय-आधारित रणनीतियों और दक्षता पर ध्यान देने के साथ कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए एक नई अवधारणा सामने आई है।

सुरक्षित शहर परियोजना- नागरिकों, विशेषकर महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल प्रदान करने की दिशा में

सुरक्षित शहर परियोजनाओं में 8 शहरों (अहमदाबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता, लखनऊ और मुंबई) को पहले चरण में मंजूरी दी गई।

सुरक्षित शहर की परिकल्पना इन शहरों में मौजूदा परिसंपत्तियों के विस्तार और महिलाओं के लिए सुरक्षित पारिस्थितिकी तंत्र के लिए नागरिक मांगों को पूर्ण करने की परियोजना है।

सुरक्षित शहर परियोजनाएं, शहर की महिला निवासियों की मांग को ध्यान में रखते हुए और मौजूदा बुनियादी ढांचे की खामियों को दूर करने के उद्देश्य से स्मार्ट पुलिसिंग और सुरक्षा प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग से पुलिस एवं शहर के नगर निगमों द्वारा संयुक्त रूप विकसित की गई समग्र एवं एकीकृत परियोजनाएं हैं।

 

राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को कुल 1,220 करोड़ रुपये का वितरण किया गया है।

दिल्ली दंगें - गृह मंत्री द्वारा उठाए गए कदम

• 25 फरवरी: केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने दिल्ली में हिंसा के मुद्दे पर राजनीतिक दलों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की अध्यक्षता की।

श्री अमित शाह ने राजनीतिक दलों से भड़काऊ भाषणों और बयानों से बचने का आग्रह किया जिससे सांप्रदायिक हिंसा भड़क सकती है। उन्होंने कहा कि पेशेवर आकलन के आधार पर यह कहा जा सकता है कि राजधानी में हिंसा स्वतः रूप से हुई है। केंद्रीय गृह मंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त बलों की तैनाती का निर्देश दिया।

• 27 फरवरी: केंद्रीय गृह मंत्री ने दिल्ली में मौजूदा कानून व्यवस्था की स्थिति का जायजा लिया।

• 12 मार्च: श्री शाह ने राज्यसभा में दिल्ली के कुछ हिस्सों में हाल ही में कानून और व्यवस्था की स्थिति पर चर्चा का जवाब दिया।

दिल्ली हिंसा में जान-माल की हानि पर दुःख व्यक्त करते हुए, केंद्रीय गृह मंत्री ने राज्यसभा में राष्ट्र को आश्वस्त किया कि मोदी सरकार अपराधियों को उनके धर्म, जाति, पंथ या राजनीतिक संबद्धता की परवाह किए बिना कानून के दायरे में लाते हुए सज़ा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।

श्री अमित शाह ने ज़ोर दिया कि किसी भी अपराधी को क्षमा नहीं किया जाएगा और यह सजा भविष्य में अपराधियों के दिलों में कानून का ख़ौफ पैदा करेगी।

उन्होंने कहा कि दंगों के दौरान संपत्ति के सारे नुकसान को इसके जिम्मेदार लोगों से वसूला जाएगा।

उन्होंने सदन को जानकारी दी कि दंगों की शुरुआत से एक दिन पहले कई सोशल मीडिया अकाउंट बनाए गए थे और उन्हें दंगों के समाप्त होने के बाद बंद कर दिया गया था। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से दंगे भड़काने वाले सभी लोगों पर कार्रवाई करने का संकल्प लिया।

श्री शाह ने कहा कि निहित स्वार्थी तत्व भारतीय मुसलमानों को गुमराह कर रहे हैं और उनके मन में एक डर पैदा कर रहे हैं कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) उनकी नागरिकता छीन लेगा। सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में पिछले दो महीनों में दिए गए द्वेषपूर्ण भाषण दिल्ली दंगों का मुख्य कारण बने।

गृह मंत्री ने लोगों को इसका भी आश्वासन दिया कि नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) के संचालन के दौरान किसी भी प्रकार के दस्तावेज की मांग नहीं की जाएगी और नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) के आधार पर किसी को भी नागरिकता के संदर्भ में संदिग्ध के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जाएगा।

गृह मंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से राजनीति से ऊपर उठने का और सभी से इस संबंध में आम लोगों के मन से भय दूर करने का अनुरोध किया।

सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास - सीमांत विकासोत्‍सव: सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास में तेजी लाने और राष्ट्रीय सुरक्षा में उनकी भूमिका के बारे में स्थानीय लोगों को जागरूक करने के लिए यह एक अनोखा प्‍लेटफॉर्म है।

देश के सीमावर्ती क्षेत्रों की समग्र सुरक्षा में वहां की आबादी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वे देश की और विशेष रूप से सुरक्षा बलों की 'आंख और कान' के रूप में कार्य करते हैं। सीमावर्ती आबादी वास्तव में सुरक्षा बलों की ताकत को कई गुना बढ़ा देती है। सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले समुदाय और उनके प्रतिनिधि सीमा पर निगरानी के लिए महत्वपूर्ण जरिया हैं, क्योंकि वे किसी भी संदिग्ध/अजनबी/संदिग्ध वस्तुओं की आवाजाही की पहचान करते हैं और उनके बारे में खबर देते हैं।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की पहल पर 12 नवंबर, 2020 को कच्छ (गुजरात) के धोरदो गांव में एक 'सीमांत क्षेत्र विकासोत्सव- 2020' का आयोजन किया गया था जो राष्ट्रीय सुरक्षा में सीमावर्ती आबादी की भूमिका के बारे में स्थानीय लोगों को जागरूक करने के लिए एक अनोखा प्‍लेटफॉर्म है। साथ ही इस प्‍लेटफॉर्म के जरिये स्‍थानीय आबादी को भारत सरकार द्वारा प्रदान किए जाने वाले महत्‍वपूर्ण बुनियादी ढांचे और स्‍थायी जीवन यापन सुनिश्चित करने के लिए शुरू किए गए विकास कार्यों के बारे में भी जानकारी दी जाती है।

केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में पाकिस्‍तान की सीमा से लगे गुजरात के तीन सीमावर्ती जिलों कच्छ, बनासकांठा और पाटन के 158 सीमावर्ती गांवों के ग्राम प्रधानों, जिला और तालुक पंचायतों के सदस्यों ने भाग लिया।

केंद्रीय गृह मंत्री ने सीमांत विकास उत्सव-2020 को संबोधित करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य सुशासन और विकास को सीमावर्ती क्षेत्रों तक लाना है।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सीमावर्ती गांवों में रहने वाले नागरिकों को शहरों में रहने वाले नागरिकों की तरह ही सुविधा मिलनी चाहिए। इसके साथ ही सीमांत विकास उत्सव का उद्देश्य इन क्षेत्रों की आबादी को राष्ट्रीय सुरक्षा के महत्व के प्रति संवेदनशील बनाना और सीमावर्ती क्षेत्रों के सुरक्षा संबंधी पहलुओं एवं सामरिक महत्व के प्रति जागरूक करना है।

भारत को आत्‍मनिर्भर बनाने के लिए सीएपीएफ की प्रतिबद्धता- स्वदेशी को प्रोत्‍साहन:

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने 12 मई को भारत को आत्मनिर्भर बनाने और भारत में बने उत्पादों का उपयोग करने की अपील की।

केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने इस अपील को भविष्य में भारत को ग्लोबल लीडर यानी विश्व गुरु बनाने वाले एक प्रेरणा स्त्रोत के रूप में रेखांकित किया

इसी क्रम में गृह मंत्रालय ने निर्णय लिया कि देश भर के सभी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल कैंटीन एवं स्टोरों में अब 1 जून, 2020 से केवल स्वदेशी उत्पादों की ही बिक्री होगी।

केंद्रीय पुलिस कल्‍याण भंडार-केपीकेबी (जिसे पहले सेंट्रल पुलिस कैंटीन के नाम से जाना जाता था) को 01 जून 2020 से केवल स्वदेशी वस्‍तुओं की ही बिक्री करने का निर्देश दिया गया। इसी क्रम में केपीकेबी ने खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के साथ एक समझौता भी किया है ताकि भंडारों के माध्यम से उनके उत्पादों की बिक्री की जा सके।

सीएपीएफ कपड़ों एवं खाद्य वस्तुओं की अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए केवीआईसी के उत्पादों को खरीदने के लिए प्रयास भी कर रहे हैं। इससे खादी एवं ग्रामोद्योग को बढ़ावा मिलेगा और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

कुल खरीद मूल्य करीब 2,800 करोड़ रुपये का होगा।

केंद्रीय गृह मंत्रालय के इस निर्णय के साथ ही लगभग 10 लाख सीएपीएफ कर्मियों के परिवार के करीब 50 लाख सदस्‍य स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करेंगे।

सीएपीएफ (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल) की वृक्षारोपण मुहिम

• 25 जनवरी 2020: केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने इच्‍छा व्यक्त की कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) यानी सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी), सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी), राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) और असम राइफल्स (एआर) को मॉनसून के मौसम में 'वृक्षारोपण मुहिम 2020' चलानी चाहिए और कम से कम एक करोड़ पौधे लगाने की योजना बनानी चाहिए। इस दौरान लगाए जाने वाले पौधे स्वदेशी किस्म के लंबे जीवन काल वाले हों और स्‍वास्‍थ्‍य के लिए लाभकारी हों। इन पेड़ों का जीवन काल 10 से 100 वर्ष तक होना चाहिए। तदनुसार, सीएपीएफ ने मॉनसून सीजन के दौरान बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण मुहिम-2020 चलाने का संकल्प लिया।

• 12 जुलाई: केंद्रीय गृह मंत्री ने सीएपीएफ के राष्ट्रव्यापी वृक्षारोपण मुहिम की शुरुआत की।

केंद्रीय गृह मंत्री ने 12 जुलाई को गुरुग्राम में सीआरपीएफ कैंपस में पीपल का एक पौधा लगाकर सीएपीएफ के राष्ट्रव्यापी वृक्षारोपण अभियान का शुभारंभ किया।

श्री अमित शाह ने सुरक्षा सुनिश्चित करने एवं कोविड-19 वैश्विक महामारी के खिलाफ देश की लड़ाई में योगदान देने के अलावा फरवरी, 2020 से ही इस विशाल अभियान को चलाने और देश भर में लंबे जीवनकाल वाले वाले पेड़ों के 1.37 करोड़ से अधिक पौधे लगाने के लिए सीएपीएफ की सराहना की।

श्री अमित शाह ने एक प्राचीन हिंदू पाठ का हवाला देते हुए कहा कि एक पेड़ दस से अधिक पुत्रों के समान है:

दशकूपसमावापी, दशवापीसमोह्रदः।

दशह्रदसमोपुत्रो, दशपुत्रसमोद्रुमः।।

[एक तालाब 10 कुओं के बराबर है, दस तालाबों के बराबर एक झील है।

एक बेटा दस झीलों के लायक है, एक पेड़ दस बेटों के बराबर है।।]

इस वृक्षारोपण मुहिम के लिए चुने गए पौधे, जैसे पीपल, जामुन, नीम, वटवृक्ष, बरगद आदि ऑक्सीजन देने और विभिन्न मौसम में जीवित रहने की क्षमता पर आधारित हैं। इसके तहत हरसंभव स्थानीय प्रजातियों के पौधों को लगाया जा रहा है और कुल वृक्षारोपण में लगभग आधे हिस्‍से के लिए 100 साल या इससे अधिक के जीवनकाल के साथ लंबे समय तक चलने वाले औषधीय एवं पर्यावरण के अनुकूल पेड़ों को प्राथमिकता दी गई है।

• 30 नवंबर 2020 तक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों द्वारा 27 राज्यों और 7 केंद्र शासित प्रदेशों में 1,216 जगहों पर 1.47 करोड़ पौधे लगाए जा चुके थे। इन बलों द्वारा लगाए गए पौधों का विवरण इस प्रकार है: -

सीएपीएफ

वृक्षारोपण का लक्ष्‍य

30.11.2020 तक लगाए गए कुल पौधों की संख्‍या

असम राइफल्‍स

75,95,350

76,42,484

सीआरपीएफ

22,92,408

27,86,800

एसएसबी

12,31,837

14,21,285

बीएसएफ

11,52,013

11,82,379

सीआईएसएफ

7,49,848

8,98,656

आईटीबीपी

5,00,000

5,45,652

एनएसजी

2,50,000

2,50,029

कुल

1,37,71,456

1,47,27,285

 

• 23 जुलाई: केंद्रीय गृह मंत्री ने कोयला मंत्रालय के वृक्षारोपण अभियान-2020 का शुभारंभ किया।

श्री अमित शाह ने नई दिल्ली में केंद्रीय कोयला, खान एवं संसदीय मामलों के मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी की उपस्थिति में कोयला मंत्रालय के वृक्षारोपण अभियान का शुभारंभ किया।

केंद्रीय गृह मंत्री ने 6 इकोपार्क/पर्यटन स्थलों का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया।

कोयला/लिग्नाइट के भंडार वाले 10 राज्यों के 38 जिलों में 130 से अधिक जगहों पर आयोजित वृक्षारोपण अभियान का संचालन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये किया गया।

नए विश्वविद्यालय - राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू)

भारत सरकार ने एक राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना की जो आपराधिक जांच में सुधार के लिए आवश्यक फोरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाले श्रमबल की बढ़ती आवश्यकता को रेखांकित करता है। यह विश्वविद्यालय एक राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है और इस संस्थान ने 1 अक्टूबर, 2020 से अपना काम-काज शुरू किया।

पुलिस से जुड़े कार्यों, आपराधिक न्याय और सुधार प्रशासन की विभिन्न इकाइयों में उच्च गुणवत्ता वाले प्रशिक्षित श्रमशक्ति की बढ़ती आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) के नाम से एक राष्ट्रीय पुलिस विश्वविद्यालय की भी स्थापना की है।

यह विश्वविद्यालय एक राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है और इसका परिचालन 1 अक्टूबर, 2020 को शुरू हुआ।

आपदा प्रबंधन- उचित नियोजन एवं त्‍वरित सहायता

चक्रवाती तूफान अम्‍फान :

18 मई : प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने तैयारियों की समीक्षा की। केन्‍द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह भारत सरकार के वरिष्‍ठ अधिकारियों, आईएमडी, एनडीएमए और एनडीआरएफ के अधिकारियों के साथ उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री ने चक्रवात के मार्ग वाले क्षेत्रों को पूरी तरह से खाली कराने और आवश्यक सामग्री की पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति बनाये रखने का निर्देश दिया।

प्रचंड चक्रवाती तूफान ने 20 मई 2020 को भारतीय समुद्र तट पर पहुंचकर पश्चिम बंगाल और ओडिशा राज्यों को प्रभावित किया। यह 185 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सुंदरबन से होता हुआ 155-165 किमी/घंटे की रफ्तार के साथ पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश को पार कर गया। निम्न दबाव वाले क्षेत्र से लेकर स्थिति पर 24 घंटे उच्चतम स्तर पर निगरानी की गई थी। गृह मंत्रालय ने एनडीआरएफ और रक्षा बलों की तैनाती सहित सभी आवश्यक वित्तीय और रसद सहायता प्रदान की। राज्य सरकारों, रक्षा मंत्रालय, एनडीआरएफ और अन्य केन्‍द्रीय मंत्रालयों/विभाग के साथ सावधानीपूर्वक तालमेल स्‍थापित करने और गृह मंत्रालय के ठोस प्रयासों से मानव जीवन के नुकसान को काफी हद तक कम कर लिया गया।

प्रधानमंत्री, श्री नरेन्‍द्र मोदी ने पश्चिम बंगाल और ओडिशा के चक्रवात प्रभावित जिलों का हवाई सर्वेक्षण किया और राहत कार्य तत्काल शुरू कराने के लिए पश्चिम बंगाल के लिए 1,000 करोड़ रुपये और ओडिशा के लिए 500 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की घोषणा की। उन्होंने इन राज्‍यों में तूफान में मरने वालों के परिजनों को दो लाख रुपये और गंभीर रूप से घायलों को 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की।

क्षति आकलन रिपोर्ट के आधार पर, राहत कार्यों पर होने वाले खर्च को पूरा करने के लिए पश्चिम बंगाल राज्य को 1,000 करोड़ रुपये की पहले से जारी वित्तीय सहायता के अलावा राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (एनडीआरएफ) से 1,250.28 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई थी।

चक्रवाती तूफान निसर्ग और चक्रवाती तूफान निवार

03 जून 2020 को चक्रवाती तूफान निसर्ग अलीबाग के दक्षिण में महाराष्‍ट्र के समुद्र तट को 100-110 किमी. प्रति घंटे से लेकर 120 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से पार कर गया।

चक्रवाती तूफान निवार 25 और 26 नवम्‍बर 2020 की रात के दौरान प्रचंड हवा के साथ 120-130 किमी. प्रति घंटे से लेकर 145 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से पुदुचेरी के आसपास कराईकल और मम्‍मलपुरम के बीच तमिलनाडु और पुदुचेरी के समुद्री तट को पार कर गया।

निम्न दबाव वाला क्षेत्र बनने की शुरुआत से स्थिति पर 24 घंटे उच्चतम स्तर पर निगरानी रखी जा रही थी। तूफान प्रभावित राज्‍यों में आवश्यक रसद सहायता प्रदान की गई और एनडीआरएफ और सशस्‍त्र बलों द्वारा मानवशक्ति और संसाधनों की तैनाती की गई।

क्षति आकलन रिपोर्ट के आधार पर, चक्रवाती तूफान निसर्ग के लिए एनडीआरएफ से महाराष्‍ट्र राज्‍य को 268.59 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई।

केन्‍द्र सरकार ने तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केन्‍द्र शासित पुदुचेरी राज्‍यों में इस चक्रवात के प्रभाव के कारण हुए नुकसान का आकलन करने के लिए अंतर मंत्रालयी केन्‍द्रीय टीमों (आईएमसीटी) का गठन किया।

राज्य आपदा जोखिम प्रबंधन कोष (एसडीआरएमएफ)/राज्य आपदा राहत कोष (एसडीआरएफ) और राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (एनडीआरएफ) से धनराशि जारी की गई।

वर्ष 2020-21 के लिए, एसडीआरएमएफ/एसडीआरएफ का आवंटन 28,983.00 करोड़ रुपये है, जिसमें से 22,184.00 करोड़ रुपये केन्द्र का हिस्‍सा है और 6,799.00 करोड़ रुपये राज्य सरकारों का हिस्सा है। वर्ष 2020-21 (30 नवंबर 2020 तक) 11,170.425 करोड़ रुपये की पहली किस्त 28 राज्‍यों को केन्‍द्र के एसडीआरएमएफ हिस्‍से के रूप में जारी की गई। इसके अलावा, वर्ष 2020-21 के लिए एसडीआरएमएफ के केन्‍द्रीय हिस्‍से की दूसरी किस्त के रूप में 10 राज्यों को 5,423.50 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई। इसके अतिरिक्त, 10 राज्यों को एनडीआरएफ की ओर से 4,406.81 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता जारी की गई है।

क्षेत्रीय परिषदें और द्वीप विकास एजेंसी (आईडीए)- सौहार्दपूर्ण संघीय ढांचे को बढ़ावा

28 जनवरी : केन्‍द्रीय गृह मंत्री ने नया रायपुर, छत्‍तीसगढ़ में केन्‍द्रीय क्षेत्रीय परिषद की 22वीं बैठक की अध्‍यक्षता की

बैठक के दौरान, गृह मंत्री ने क्षेत्रीय परिषदों की नियमित बैठकें बुलाने की आवश्‍यकता पर जोर दिया।

श्री शाह ने वन संबंधी स्‍वीकृति से जुड़े मुद्दों का शीघ्रता से समाधान करने और प्रत्येक गांव- विशेषकर नक्सल इलाकों में 5 किलोमीटर के दायरे में सड़क के किनारे परम्‍परागत व्‍यवसाय के लिए सदस्‍यों को प्रेरित किया।

उन्‍होंने राज्‍यों से आह्वान किया कि वे पोक्‍सो कानून के अंतर्गत अपराधों की जांच के लिए 2 महीने की समय-सीमा का पालन करें।

गृह मंत्री ने राज्‍यों को याद दिलाया कि वे सीआरपीसी और आईपीसी के विस्‍तृत संशोधनों के लिए सुझाव भेजें, जिसके लिए वे सभी मुख्‍यमंत्रियों को पहले ही पत्र लिख चुके हैं।

श्री अमित शाह ने किसानों को शीघ्र भुगतान करने का आह्वान किया और क्षेत्र में राज्यों को आश्वासन दिया कि अनाज की खरीद और उनके निपटान से संबंधित उनके मुद्दों को जल्दी से हल किया जाएगा और सूचित किया कि एक उच्च स्तरीय समिति इस मामले पर अभी विचार कर रही है।

28 फरवरी : श्री अमित शाह ने भुवनेश्‍वर में पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की 24वीं बैठक की अध्‍यक्षता की।

गृह मंत्री ने क्षेत्रीय परिषद व्‍यवस्‍था की उपयोगिता पर संतोष व्यक्त किया और बताया कि क्षेत्रीय परिषदों की हाल की बैठकों के आधार पर 70 प्रतिशत से अधिक मुद्दों को हल कर लिया गया है और शेष मुद्दे भी हल किए जा रहे हैं।

13 जनवरी : श्री अमित शाह ने नई ऊंचाइयों को छूने के लिए द्वीप में हरित विकास पर ध्‍यान केन्द्रित करते हुए द्वीप विकास एजेंसी की बैठक की अध्‍यक्षता की।

देश में पहली बार, आईडीए के मार्गदर्शन में, वैज्ञानिक रूप से मूल्यांकन की जाने वाली क्षमता के दायरे में चिन्हित द्वीपों में निरंतर विकास की पहल की गई है।

संघ शासित प्रदेश

सरकार ने परिकल्पना की है कि संघ शासित प्रदेशों (यूटी) में रहन-सहन का उच्‍चतम स्तर, नागरिक सेवाएं और बुनियादी ढांचा होना चाहिए, और वे देश के बाकी हिस्सों के लिए सुशासन और विकास के मॉडल बनें। भारत सरकार के आत्‍म निर्भर भारत अभियान की घोषणा के बाद, भारत सरकार के विकास कार्यक्रमों के प्रभावी और परिणामोन्मुखी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं।

समुद्री अर्थव्यवस्था को विकसित करने के लिए, प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण और द्वीपों की सुरक्षा चिंताओं को दूर करते हुए, प्रमुख बुनियादी ढांचा पर्यटन परियोजनाओं की योजना बनाई गई है और निजी क्षेत्र की भागीदारी और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप में स्थानीय द्वीपवासियों के समर्थन से उन्‍हें कार्यान्वित किया जा रहा है।

मुख्यभूमि को पोर्ट ब्लेयर और आगे स्‍वराज द्वीप, छोटे अंडमान, कार निकोबार, कमोरता, ग्रेटर निकोबार, लोंग द्वीप और रंगत से जोड़ने वाली सबमरीन ऑप्टिकल फाइबर केबल परियोजना सीएएनआई (चेन्नई और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह) के सभी खंड चालू कर दिए गए हैं। यह हाईस्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी परियोजना मुख्य भूमि भारत के बराबर तेज और अधिक विश्वसनीय मोबाइल और भूमि दूरसंचार सेवा प्रदान करने में सक्षम होगी। सीएएनआई परियोजना द्वीपवासियों के लिए जबरदस्‍त परिवर्तन लाएगी और द्वीपों में जीवन और ई-शासन को सुगम बनाने के अलावा, अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करेगी और द्वीप में रहने वालों के जीवन स्तर में सुधार करेगी।

अनुलग्‍नक-1 देखने के लिए यहां क्लिक करें-

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/123%20-%20Copy%204.pdf

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