पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
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ग्लाव झील अरुणाचल प्रदेश की पहली रामसर स्थल बनी; भारत में रामसर स्थलों की कुल संख्या 101 हुई


केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि की घोषणा करते हुए आर्द्रभूमि संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण और सतत आजीविका के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया

प्रविष्टि तिथि: 03 AUG 2026 8:10PM by PIB Delhi

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने आज अरुणाचल प्रदेश की ग्लाव झील को भारत का 101वां रामसर स्थल घोषित करने की घोषणा की। यह राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है क्योंकि उसे अपना पहला रामसर स्थल प्राप्त हुआ है। केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में इस विकास को जैव विविधता संरक्षण, जल और जलवायु सुरक्षा तथा सतत आजीविका के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

श्री यादव ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के रामसर नेटवर्क के उल्लेखनीय विस्तार पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “2014 में 26 रामसर स्थलों से आज 101 तक की यह उल्लेखनीय यात्रा पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण और सतत विकास के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है।” केंद्रीय मंत्री ने आगे इस बात पर बल दिया कि प्रत्येक नया रामसर स्थल प्रकृति की रक्षा करने और इन महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्रों पर निर्भर समुदायों के हितों की रक्षा करने के भारत के संकल्प को और मजबूत करता है।

इस उपलब्धि का जश्न मनाते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा, “भारत रामसर स्थलों को नामित करने के मामले में 100 का आंकड़ा पार कर अपनी यात्रा जारी रखे हुए है।” ग्लाव झील के जुड़ने से भारत में रामसर स्थलों की संख्या 101 हो गई है, जो देश के अमूल्य आर्द्रभूमि पारिस्थितिक तंत्रों के संरक्षण के प्रति उसकी निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

कमलांग टाइगर रिजर्व और वन्यजीव अभ्यारण्य के अंतर्गत स्थित ग्लाव झील पूर्वी हिमालय में एक निर्मल मीठे पानी की झील है और जैव विविधता का एक प्रमुख केंद्र है। यह झील बारहमासी पहाड़ी धाराओं से पोषित होती है और चारों ओर घनी वनस्पति से घिरी हुई है, जो समृद्ध वनस्पति विविधता को संरक्षित करती है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस आर्द्रभूमि में 150 से अधिक वृक्ष प्रजातियां और 49 ऑर्किड प्रजातियां पाई जाती हैं, जो ग्लाव झील और इसके आसपास के परिदृश्य के पारिस्थितिक महत्व को रेखांकित करती हैं।

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पीके/केसी/जीके


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