वित्त मंत्रालय
भारत के केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) ने "ऑपरेशन वज्र" के तहत 12 करोड़ ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड (जिसे "फाइटर ड्रग" भी कहा जाता है) टैबलेट की अवैध तस्करी को नाकाम कर दिया है
पूरी खेप दिल्ली के एक गोदाम से जब्त की गई; बेंगलुरु और कोच्चि से तीन मुख्य संदिग्ध गिरफ्तार
प्रविष्टि तिथि:
20 JUL 2026 8:31PM by PIB Delhi
राजस्व विभाग (डीओआर), वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) ने लगभग 30 मीट्रिक टन (30,000 किलोग्राम) वजन वाली, 120 मिलियन (12 करोड़) हाई-स्ट्रेंथ ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड (250 मिग्रा) टैबलेट्स की निर्यात खेप की अवैध तस्करी और डायवर्जन को पकड़ा और तीन मुख्य लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें से एक बेंगलुरु और दो कोच्चि के रहने वाले हैं।

शुरुआती जांच से पता चला कि गिनी-बिसाऊ को भेजी जा रही इस खेप को असल में लीबिया भेजा जाना था। दिल्ली के एक गोदाम से पूरी खेप को जब्त कर लिया गया, जिससे इसे गैर-कानूनी अंतरराष्ट्रीय रास्तों पर भेजे जाने से रोक दिया गया।

"ऑपरेशन वज्र" नाम का यह अभियान केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन), ग्वालियर के निरोधक दस्तों ने 10 से 20 जुलाई 2026 के बीच बेंगलुरु, दिल्ली और कोच्चि में चलाया। इसमें राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) बेंगलुरु, डीआरआई कोच्चि और दूसरी एजेंसियों का प्रभावी और कुशल सहयोग मिला।
खुफिया जानकारी मिली थी कि गिनी-बिसाऊ भेजी जाने वाली 120 मिलियन (12 करोड़) ट्रामाडोल टैबलेट्स को लीबिया भेजने की योजना है। सीबीएन की मजबूत जोखिम आधारित निर्यात नियंत्रण प्रणाली के तहत जांच के दौरान कई जोखिम संकेतक (रिस्क इंडिकेटर) मिले, जिसके बाद विस्तृत जांच और तालमेल की जरूरत महसूस हुई। इसके बाद सीबीएन ने इंटरनेशनल नारकोटिक्स कंट्रोल बोर्ड (आईएनसीबी) और गिनी-बिसाऊ के संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर जांच की, जिससे पता चला कि बताया गया गंतव्य गलत था और खेप को दूसरी जगह भेजने की कोशिश की जा रही थी।
जांच के नतीजों के आधार पर, सीबीएन ने बेंगलुरु में एक साथ मिलकर कार्रवाई की और बेंगलुरु स्थित लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (एलएलपी) फर्म के निदेशक को एनडीपीएस अधिनियम, 1985 की संबंधित धाराओं के तहत गिरफ्तार किया। आगे की जांच से पता चला कि मुख्य साजिशकर्ता केरल से काम कर रहे थे। कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचने की बार-बार कोशिशों के बावजूद, लगातार खुफिया जानकारी जुटाने के बाद कोच्चि से बाकी दो मुख्य साजिशकर्ताओं को भी पकड़ लिया गया। तीनों आरोपियों को एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के तहत गिरफ्तार किया गया है। आगे की जांच जारी है।
सीबीएन इंडिया की सतर्कता ने सक्रिय संघर्ष वाले इलाकों में गैर-कानूनी सिंथेटिक ओपिओइड्स की भारी आमद को सफलतापूर्वक रोका। यह अभियान जोखिम-आधारित प्रोफाइलिंग, अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच मजबूत खुफिया जानकारी साझा करने और वैश्विक फार्मास्युटिकल आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने के लिए राष्ट्रीय एजेंसियों के बीच सहयोग के महत्व को उजागर करता है।
"ऑपरेशन वज्र" की सफल कार्रवाई, देशों की सीमाओं के पार होने वाली संगठित ड्रग तस्करी से निपटने में खुफिया जानकारी पर आधारित कार्रवाई, अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की प्रभावी भूमिका को दिखाती है। साथ ही, यह एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के तहत भारत के मजबूत नियामकीय ढांचे को भी उजागर करती है।
केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) भारत के नियामकीय ढांचे की सुरक्षा करने और ड्रग तस्करी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह सरकार के 'नशा मुक्त भारत' और दवाओं के सुरक्षित इस्तेमाल के विजन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक कदम है।
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पीके / केसी/ एमपी
(रिलीज़ आईडी: 2286854)
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