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प्रधानमंत्री ने विनम्रता और निस्वार्थ सेवा के गुणों को दर्शाने वाले संस्कृत सुभाषितम् को साझा किया

प्रविष्टि तिथि: 07 JUL 2026 10:01AM by PIB Delhi

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि समृद्धि की वास्‍तविक सुंदरता विनम्रता और निस्वार्थ सेवा में निहित है। उन्होंने कहा कि सफलता तभी सार्थक है जब वह लोक कल्याण और समाज की भलाई की भावना से निर्देशित हो।

प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया-

“भवन्ति नम्रास्तरवः फलोद्गमैर्नवाम्बुभि-र्दूर-विलम्बिनो घनाः। अनुद्धताः सत्पुरुषाः समृद्धिभिः स्वभाव एवैष परोपकारिणाम्॥”

सुभाषितम् का अर्थ है कि जिस प्रकार फलों से लदे हुए वृक्ष और वर्षा से भरे बादल स्वाभाविक रूप से धरती की ओर झुक जाते हैं, उसी प्रकार सच्चे परोपकारी और महान व्यक्ति धन, ज्ञान, पद या प्रसिद्धि प्राप्त करने के बाद भी विनम्र बने रहते हैं। वे अपनी उपलब्धियों पर अहंकार नहीं करते, बल्कि अपनी क्षमता, संसाधनों और अनुभव का उपयोग समाज के कल्याण और उत्थान के लिए करते हैं। यह सुभाषितम् हमें सिखाता है कि वास्तविक महानता विनम्रता, सेवा-भाव और परोपकार में निहित होती है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;

“समृद्धि की शोभा विनम्रता और परोपकार में निहित है। सफलता वही सार्थक है, जिसमें लोककल्याण की भावना सर्वोपरि हो।

भवन्ति नम्रास्तरवः फलोद्गमैर्नवाम्बुभि-र्दूर-विलम्बिनो घनाः।

अनुद्धताः सत्पुरुषाः समृद्धिभिः स्वभाव एवैष परोपकारिणाम्॥”

 

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केपी/केसी/एसएस/एसके


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