शिक्षा मंत्रालय
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शिक्षा मंत्रालय ने विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया और "तंबाकू-मुक्त पीढ़ी की ओर: स्कूल चैलेंज 2025" के विजेता विद्यालयों को सम्मानित किया

प्रविष्टि तिथि: 01 JUN 2026 2:32PM by PIB Delhi

शिक्षा मंत्रालय के विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (डीओएसईएल) ने विश्व तंबाकू निषेध दिवस की पूर्व संध्या पर 29 मई 2026 को नई दिल्ली में राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों, विद्यालय प्रमुखों, शिक्षक प्रतिनिधियों तथा एनसीईआरटी, एनवीएस और केवीएस के अधिकारियों की एक राष्ट्रीय बैठक का आयोजन किया। यह कार्यक्रम मायगव इनोवेट अभियान के अंतर्गत आय़ोजित "तंबाकू-मुक्त पीढ़ी की ओर: स्कूल चैलेंज 2025" के विजेता विद्यालयों को सम्मानित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया।

 

विद्यालयी शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (डीओएसईएल) के सचिव श्री संजय कुमार इस कार्यक्रम में शामिल हुए और विजेता विद्यालयों को पुरस्कार प्रदान किए। उन्होंने स्वस्थ एवं नशा मुक्त शैक्षणिक वातावरण विकसित करने के लिए किए गए सक्रिय प्रयासों की सराहना की।

 

इस कार्यक्रम में स्कलू शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की आर्थिक सलाहकार सुश्री ए. श्रीजा, संयुक्त निदेशक श्री राम सिंह, एनसीईआरटी के निदेशक प्रोफेसर दिनेश प्रसाद सकलानी और शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

 

अपने संबोधन में श्री संजय कुमार ने पुरस्कार प्राप्त विद्यालयों को बधाई दी और कहा कि देश भर से 17,000 से अधिक विद्यालयों ने इस अभियान में भाग लिया। उन्होंने सभी शैक्षणिक संस्थानों से तंबाकू-मुक्त बनने का प्रयास करने का आग्रह किया। तंबाकू नियंत्रण के निरंतर प्रयासों की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने विशेष रूप से बच्चों और किशोरों के बीच जागरूकता, संवेदनशीलता और व्यवहार परिवर्तन संबंधी पहलों के माध्यम से मांग में कमी लाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

 

श्री कुमार ने विद्यार्थियों में प्रारंभिक व्यवहारगत परिवर्तनों की पहचान करने तथा उनके मानसिक एवं भावनात्मक अभियान की रक्षा करने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि विद्यालय स्वस्थ व्यवहार को बढ़ावा देने, समग्र कल्याण को प्रोत्साहित करने और समय रहते प्रारंभिक निवारक हस्तक्षेपों को समर्थन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 

विद्यालयी शिक्षा प्रणाली की व्यापक पहुंच का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विद्यालय लगभग 24.69 करोड़ बच्चों तक पहुंचते हैं और 15-20 करोड़ परिवारों को प्रभावित कर सकते हैं। इससे तंबाकू-मुक्त अभियान एक राष्ट्रव्यापी सामाजिक आंदोलन का रूप ले सकता है। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों के आसपास तंबाकू-मुक्त वातावरण को मजबूत करने तथा विद्यालयों एवं परिवारों को अभियान की दीर्घकालिक कार्य योजना में सक्रिय रूप से समर्थन देने का आह्वान किया, जो एक अधिक स्वस्थ और अधिक विकसित भारत के निर्माण के विजन के अनुरूप है।

 

इस अवसर पर नशा-मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत डीओएसईएल की तीन वर्षीय कार्य योजना (2026-2029) तथा नशा मुक्त विद्यालय पोर्टल (https://tofei.education.gov.in/) का भी शुभारंभ किया गया। यह पोर्टल नशा मुक्त विद्यालय अभियान के कार्यान्वयन में शैक्षणिक संस्थानों की प्रगति की निगरानी और प्रलेखन के लिए एक प्रमुख मंच के रूप में कार्य करेगा।

 

फाउंडेशनल, प्रिपरेटरी, मिडिल और सेकेंडरी जैसी चार श्रेणियों में कुल 12 स्कूलों को सम्मानित किया गया, जिनमें से प्रत्येक श्रेणी से तीन स्कूलों का चयन किया गया था। विजेता स्कूलों को ट्रॉफियां और प्रथम स्थान के लिए 50,000 रुपये, द्वितीय स्थान के लिए 25,000 रुपये तथा तृतीय स्थान के लिए 15,000 रुपये के नकद पुरस्कार मिला। इसके अलावा, इस पहल में सराहनीय प्रयासों के लिए 41 स्कूलों को प्रशंसा पुरस्कार प्रदान किए गए।

 

यह तीन वर्षीय कार्य योजना चार प्रमुख हस्तक्षेपों पर आधारित है: (i) स्कूलों स्व-घोषणा, निगरानी और अनुपालन ट्रैकिंग के लिए यूडीआईएसई+ के माध्यम से नशा मुक्त विद्यालय पोर्टल; (ii) शैक्षणिक संस्थानों के आस-पास 500 मीटर के नशा मुक्त क्षेत्र को लागू करना; (iii) एनसीईआरटी, सीबीएसई और राज्य बोर्ड के पाठ्यक्रमों में आयु-उपयुक्त मादक द्रव्यों के सेवन की रोकथाम और स्वास्थ्य शिक्षा का एकीकरण; और (iv) शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों में जागरूकता पैदा करने के लिए मानकीकृत बहुभाषी सूचना एवं संचार शिक्षा सामग्री का विकास। यह पहल सेवा-पूर्व और सेवाकालीन प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षकों की क्षमता निर्माण, जोखिमग्रस्त छात्रों की शीघ्र पहचान और रेफरल, मनोदर्पण (राष्ट्रीय हेल्पलाइन 844 844 0632) के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य सहायता तथा प्रभावी कार्यान्वयन और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए विद्यालय से राष्ट्रीय स्तर तक एक मजबूत निगरानी ढांचें पर भी ध्यान केंद्रित करती है।

 

डीओएसईएल की आर्थिक सलाहकार सुश्री ए. श्रीजा ने अपने स्वागत भाषण में तंबाकू सेवन को नियंत्रित करने के लिए सरकार के निरंतर नीतिगत और संस्थागत प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने तंबाकू सेवन पर अंकुश लगाने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा अपनाए गए विधायी और वित्तीय उपायों का उल्लेख किया, जिसमें 2003 में सीओटीपीए अधिनियम को लागू करना, 2019 में इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट पर प्रतिबंध और तंबाकू उत्पादों पर उच्चतम जीएसटी दरों और उपकरों लागू करना शामिल है।

 

उन्होंने तंबाकू नियंत्रण और जन जागरूकता प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के वैश्विक युवा तंबाकू सर्वेक्षण का हवाला देते हुए उन्होंने बच्चों और किशोरों के बीच शुरुआती जागरूकता और रोकथाम पहलों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने स्कूलों में छात्रों को तंबाकू और मादक पदार्थों के सेवन के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूक और संवेदनशील बनाने के महत्व पर जोर दिया और कहा कि शुरुआती हस्तक्षेप का जीवन भर प्रभाव हो सकता है।

 

सुश्री श्रीजा ने यह भी बताया कि विद्यालयों और राज्यों को जागरूकता, अनुपालन तथा प्रवर्तन प्रयासों को मजबूत करने में सहायता देने के लिए डीओएसईएल ने 2024 में विद्यालयों में टीओएफईआई दिशानिर्देशों के कार्यान्वयन हेतु एक मार्गदर्शिका विकसित की थी।

 

इस कार्यक्रम में तंबाकू और मादक द्रव्यों के सेवन की रोकथाम, मानसिक स्वास्थ्य, व्यवहारगत परिवर्तन और नशा मुक्त भारत के निर्माण में विद्यालयों, परिवारों, समुदायों और सरकारी संस्थानों द्वारा सहयोगात्मक कार्रवाई के महत्व पर विशेषज्ञ पैनल चर्चा भी शामिल थी।

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पीके/केसी/आईएम/एसवी


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