प्रधानमंत्री कार्यालय
प्रधानमंत्री ने निस्वार्थ सेवा और करुणा की भावना को दर्शाने वाला एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
प्रविष्टि तिथि:
06 MAY 2026 9:12AM by PIB Delhi
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि निस्वार्थ भाव से किया गया कर्म ही सच्ची मानवता है। उन्होंने उल्लेख किया कि ऐसे कार्य न सिर्फ आत्मिक खुशी प्रदान करते हैं, बल्कि समाज के कल्याण में भी योगदान देते हैं।
प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया-
“अद्रोहः सर्वभूतेषु कर्मणा मनसा गिरा।
अनुग्रहश्च दानं च शीलमेतत्प्रशस्यते॥”
सुभाषितम् यह संदेश देता है कि किसी भी जीव के प्रति मन, वचन और कर्म से द्वेष न रखना, सभी के प्रति करुणा भाव रखना और उदारतापूर्वक दान करना—इन्हें आचरण का सर्वोच्च रूप माना गया है।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;
“निस्वार्थ भाव से किया गया कर्म ही सच्ची मानवता है। इससे आत्मिक खुशी तो मिलती ही है, समाज का भी कल्याण होता है।
अद्रोहः सर्वभूतेषु कर्मणा मनसा गिरा।
अनुग्रहश्च दानं च शीलमेतत्प्रशस्यते॥”
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पीके/केसी/पीकेपी
(रिलीज़ आईडी: 2258274)
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