प्रविष्टि तिथि:
03 NOV 2026 2:09PM by PIB Delhi
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने आज नई दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज में आयोजित ‘युवा नेतृत्व संवाद मंच’ (यंग लीडर्स डिस्कोर्स फोरम) में मुख्य भाषण देते हुए युवाओं से महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करने, परिवर्तन को अपनाने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
श्री गोयल ने इस बात पर जोर दिया कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करना अनिवार्य (गैर-समझौतावादी) है और आज के युवा इस महत्वपूर्ण उपलब्धि की दिशा में देश की यात्रा के शिल्पकार होंगे। उन्होंने कहा कि जब भारत अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहा होगा, तब आज के विद्यार्थियों की आयु 40 और 50 वर्ष के बीच की होगी। उनकी पसंद, आकांक्षाएं और योगदान ही देश का भविष्य निर्धारित करेंगे।
भारत के निर्यात प्रदर्शन को रेखांकित करते हुए श्री गोयल ने कहा कि देश ने पिछले वर्ष अब तक का सर्वाधिक 863 बिलियन अमरीकी डालर का निर्यात दर्ज किया। उन्होंने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने इस वर्ष अप्रैल-मई में अपने अनुमानों में वैश्विक व्यापार की वृद्धि दर 1.9 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया था, इस बावजूद भारत ने चालू वर्ष के लिए 1 ट्रिलियन अमरीकी डालर के निर्यात का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया, जो 16 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि भारत पिछले वर्ष के निर्यात के मुकाबले 5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 900 बिलियन अमरीकी डालर का निर्यात लक्ष्य भी निर्धारित कर सकता था। वैश्विक व्यापार में अनुमानित वृद्धि को देखते हुए यह भी अपने आप में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होती। 900 बिलियन अमरीकी डालर का लक्ष्य भी वैश्विक व्यापार की अनुमानित वृद्धि दर से दोगुने से अधिक वृद्धि को दर्शाता। हालांकि, भारत ने इससे भी अधिक महत्वाकांक्षी 1 ट्रिलियन अमरीकी डालर का लक्ष्य निर्धारित करने का निर्णय लिया। श्री गोयल ने विश्वास व्यक्त किया कि देश इस उपलब्धि को हासिल कर लेगा। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष के पहले छह महीनें (अप्रैल-सितंबर) के दौरान ही निर्यात में 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है और यह 480 बिलियन अमरीकी डॉलर तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि वार्षिक लक्ष्य करने के लिए शेष छह महीनों में 520 बिलियन अमरीकी डालर का निर्यात करना होगा, उन्होंने यह भी कहा कि अक्टूबर का महिना भी अच्छा रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि आईएमएफ ने हाल ही में वैश्विक व्यापार की वृद्धि दर के अपने अनुमान को संशोधित कर लगभग 3.5 प्रतिशत कर दिया है। उन्होंने कहा कि भारत का निर्यात प्रदर्शन भी इस संशोधन के प्रमुख कारणों में से एक रहा हो, हो सकता है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा पर जोर देते हुए श्री गोयल ने कहा कि भारत ने एक कमजोर पांच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की स्थिति से निकलकर दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में स्थान बनाया है और वो सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। विश्व बैंक की हालिया रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में लगभग 50 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर आए हैं और अपने कठिन परिश्रम से जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने भारत की विकास यात्रा का श्रेय कई कारकों को दिया। उनमें देश प्रतिभा संपदा, युवा आबादी का कौशल, लोकतांत्रिक व्यवस्था, 30 वर्ष से कम की औसत आयु वाली युवा जनसांख्यिकीय संरचना तथा 140 करोड़ भारतीयों द्वारा गुणवत्तापूर्ण वस्तुओं और सेवाओं की मांग शामिल है। उन्होंने कहा कि यह सभी विशेषताएं सामूहिक रूप से भारत की विकास गाथा को गति प्रदान कर रही हैं।
श्री गोयल ने कहा कि भारत ने विश्व का विश्वास अर्जित किया है और लगभग सभी क्षेत्रों के देश इसके साथ तरजीही व्यापार समझौते (पीटीए) तथा मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) करने के इच्छुक हैं। उन्होंने कहा कि भारत को तेजी से एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में देखा जा रहा है। देश की युवा आबादी, प्रतिभा, कड़ी मेहनत करने की तत्परता और वैश्विक विकास में योगदान देने की प्रतिबद्धता ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा को और मजबूत किया है।
संकट के समय विभिन्न देशों को भारत द्वारा दिए गए सहयोग का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने अपने प्रत्येक नागरिक को नि:शुल्क टीकाकरण उपलब्ध कराने के साथ-साथ दुनिया के अन्य देशों को भी टीके उपलब्ध कराए। उन्होंने संकट के समय विभिन्न देशों को दवाईयां उपलब्ध कराने तथा राहत एवं पुनर्वास सहायता प्रदान करने में भारत के योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत ने यह सहायता इस बात की परवाह किए बिना प्रदान की कि विश्वभर में भारत की जो पहचान और सम्मान मिल रहा है, वह इसके कार्यों से अर्जित विश्वास को दर्शाता है।
विद्यार्थियों से महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान करते हुए श्री गोयल ने उनसे पूछा कि क्या वे सीमित लक्ष्यों से संतुष्ट रहना चाहेंगे या बेहतर भविष्य की आकांक्षा रखेंगे। उन्होंने कहा कि परिवर्तन के लिए लोगों की सोचने, काम करने और जीवन जीने की पद्धति में बदलाव आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से निरंतर स्वयं को विकसित करने, बदलती परिस्थितियों के प्रति खुला दृष्टिकोण रखने और जीवन भर ज्ञान अर्जित करते रहने का आग्रह किया।
व्यक्तित्व निर्माण में शैक्षणिक संस्थानों के महत्व पर बल देते हुए श्री गोयल ने कहा कि महाविद्यालय विद्यार्थियों को शैक्षणिक रूप से तैयार करने के साथ-साथ उनके चरित्र, दृढ़ता, आत्मविश्वास और कठिन परिश्रम करने की प्रवृत्ति का भी विकास करते हैं। ये संस्थान युवाओं के भविष्य के प्रति उनके दृष्टिकोण को आकार देते हैं और उन्हें देश की नियति को दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार करते हैं। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि विदयार्थी अपने विद्यालय और महाविद्यालय के वर्षों के दौरान अक्सर उनके योगदान को पूरी तरह नहीं समझ पाते। वास्तविक दुनिया में कदम रखने के बाद ही उन्हें अहसास होता है कि इन प्रारंभिक और महत्वपूर्ण वर्षों में शिक्षकों, शैक्षणिक वातावरण तथा समग्र व्यक्तित्व विकास ने उनके जीवन को किस प्रकार आकार दिया और उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए तैयार किया। उन्होंने कहा कि अंतत: सफलता व्यक्ति के अपने हाथों में होती है।
उन्होंने विद्यार्थियों के जीवन और भविष्य को आकार देने में शिक्षकों के योगदान को भी स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे व्यक्ति जीवन में आगे बढ़ता हैं, उसे शिक्षकों के मार्गदर्शन और शैक्षिक वातावरण के प्रभाव का महत्व अधिक स्पष्ट रूप से समझ में आता है।
अपनी शैक्षणिक यात्रा के अनुभव साझा करते हुए श्री गोयल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत शुरू की गई ‘लचीली’ व्यवस्था का उल्लेख किया। इसके तहत विद्यार्थियों को अपने पाठ्यक्रम बदलने, शैक्षणिक कार्य के लिए क्रेडिट अर्जित करने और एक संकाय से दूसरे संकाय में जाने की सुविधा मिलती है। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी सौभाग्यशाली हैं कि उन्हें ऐसे वातावरण में अपने सपनों को पूरा करने के अधिक अवसर मिल रहे हैं, जहां शिक्षा व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक ‘लचीली’ है।
श्री गोयल ने कहा कि आज के विद्यार्थी इस लिए भी सौभाग्यशाली हैं क्योंकि उनके सामने अवसरों की एक व्यापक श्रृंखला उपलब्ध है और वे अपनी पसंद का करियर चुन सकते है। लगभग पूरा देश डिजिटल हो चुका है और 1.1 बिलियन इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के साथ युवा पूरी दुनिया से जुड़े हुए हैं। उन्हें ऑनलाईन ज्ञान और अनुभवों के एक बड़े भंडार तक पहुंच प्राप्त है। उन्होंने इसे विद्यार्थियों के लिए सीखने, अपने कौशल का विकास करने और भारत की विकास यात्रा में योगदान देने का एक महत्वपूर्ण अवसर बताया।
अपने संबोधन के समापन पर श्री गोयल ने परंपराओं को कायम रखने और संस्थानों में अनुशासन बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अनुशासन और परंपराओं के प्रति सम्मान किसी भी संगठन की नींव होते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासित जीवन जीने, अपने सामने एक बड़ा लक्ष्य रखने तथा कभी भी अपना आत्मविश्वास या साहस न खोने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो लोग साहस का परिचय देते हैं, वे अंततः सफल होते हैं।
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