कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

कृषि अनुसंधान, शिक्षा और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में आगे बढ़ने के लिए भारत और घाना ने ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए


आईसीएआर और सीएसआईआर-सीआरआई (घाना) फसल उत्पादकता, फसलोत्तर अवसंरचना और व्यावसायीकरण को बढ़ावा देंगे; दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ समारोह

प्रविष्टि तिथि: 07 OCT 2026 6:04PM by PIB Delhi

भारत और घाना ने कृषि अनुसंधान, शिक्षा और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), नई दिल्ली और क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीएसआईआर-सीआरआई), अकरा, घाना के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। समझौता ज्ञापन से भारत दक्षिण-दक्षिण सहयोग तथा भारत-अफ्रीका सहयोग पर और अधिक ध्‍यान केन्द्रित करेगा। हस्ताक्षर समारोह में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और घाना के विदेश मंत्री महामहिम सैमुअल ओकुडजेटो अब्लाकवा की गरिमामयी उपस्थिति रही।

पांच वर्ष की अवधि वाला यह समझौता ज्ञापन संयुक्त कृषि अनुसंधान, वैज्ञानिक एवं तकनीकी आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण तथा कृषि प्रौद्योगिकियों के अनुप्रयोग और व्यावसायीकरण के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक रूपरेखा प्रदान करता है। इस सहयोग को अरिमा फार्म्स लिमिटेड, घाना द्वारा सुगम बनाया गया है, जिसे इस रूपरेखा के तहत विशिष्ट अनुसंधान और व्यावसायीकरण गतिविधियों के लिए सीएसआईआर-सीआरआई के वाणिज्यिक साझेदार के रूप में मान्यता दी गई है।

सहयोग के पहले चरण में सब्जी फसलों के अनुसंधान पर ध्यान केन्‍द्रित किया जाएगा, जिसमें विशेष रूप से टमाटर अनुसंधान और विकास को प्राथमिकता दी जाएगी। इस सहयोग के तहत, आईसीएआर सिद्ध कृषि प्रौद्योगिकियों को व्यापक स्तर पर अपनाने में सहायता करेगा तथा घाना में घरेलू टमाटर उत्पादन को मजबूत करने में योगदान देने के लिए उपयुक्त उच्च उपज देने वाली टमाटर लाइनों और किस्मों की शुरुआत में सहयोग करेगा।

इस साझेदारी के तहत कसावा, रतालू और अन्य कंद फसलों के प्रसंस्करण तथा मूल्य संवर्धन पर भी ध्यान दिया जाएगा, जिसका उद्देश्य कृषि मूल्य शृंखलाओं को मजबूत करना है। सहयोग में फसलोत्तर प्रबंधन भी शामिल होगा। इसके अंतर्गत शीत भंडारण, प्रशीतित परिवहन, छंटाई, ग्रेडिंग और प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में तकनीकी सहायता और क्षमता निर्माण किया जाएगा, ताकि फसलोत्तर नुकसान को कम किया जा सके।

समझौता ज्ञापन में वैज्ञानिकों और प्रौद्योगिकीविदों, जर्मप्लाज्म एवं प्रजनन सामग्री, वैज्ञानिक जानकारी, कार्यप्रणालियों और तकनीकी ज्ञान के आदान-प्रदान के साथ-साथ सहयोगात्मक अनुसंधान परियोजनाओं के विकास और कार्यान्वयन का प्रावधान किया गया है। इसमें दोनों देशों के संबंधित अनुसंधान संस्थानों और केन्‍द्रों के बीच संस्थागत संपर्क स्थापित करने की भी परिकल्पना की गई है, ताकि निरंतर वैज्ञानिक सहयोग को सुगम बनाया जा सके।

इस सहयोग की निगरानी आईसीएआर और सीएसआईआर-सीआरआई के प्रतिनिधियों से गठित संयुक्त कार्य समूह द्वारा की जाएगी। यह समूह सहयोग की प्रगति की समीक्षा करेगा और इसके कार्यान्वयन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान करेगा। संयुक्त कार्य समूह की बैठकें समय-समय पर नई दिल्ली और अकरा में आयोजित की जाएंगी।

इस साझेदारी से कृषि अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास, क्षमता निर्माण और वाणिज्यिक अनुप्रयोग के बीच संबंध मजबूत होने की उम्मीद है। इससे प्रासंगिक कृषि प्रौद्योगिकियों को अपनाने में सुविधा होगी तथा घाना में सतत कृषि विकास और लोगों की आजीविका में सुधार में योगदान मिलेगा।

****

पीके/केसी/आरटी/केपी


(रिलीज़ आईडी: 2320813) आगंतुक पटल : 36
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Urdu , Marathi , Gujarati , Telugu , Malayalam