पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय
इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के बारे में तथ्य: गलत धारणाओं और तथ्यों में अंतर
प्रविष्टि तिथि:
30 JUL 2026 7:05PM by PIB Delhi
हाल ही में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम के बारे में मीडिया और सोशल मीडिया में कुछ भ्रामक दावे किए गए हैं। वैज्ञानिक सत्यापन, इस क्षेत्र के व्यापक अनुभव और उद्योग के आंकड़ों के आधार पर निम्नलिखित बिंदुवार स्पष्टीकरण में इन दावों का समाधान और तथ्यात्मक स्थिति प्रस्तुत की गई है।
दावा 1: 2023 से पहले विनिर्मित वाहन ई20 पेट्रोल से नहीं चल सकते।
• ई15-प्लस ईंधन का उपयोग साढ़े तीन वर्ष से अधिक समय से व्यापक रूप से किया जा रहा है, जबकि ई19-ई20 ईंधन का उपयोग ढाई वर्ष से अधिक समय से किया जा रहा है।
• इस अवधि के दौरान, इथेनॉल मिश्रण के कारण इंजन खराब होने या वाहन बंद पड़ने की कोई सत्यापित खबर सामने नहीं आई है। अगर इथेनॉल मिश्रण से इंजन या ईंधन प्रणाली (फ्यूल सिस्टम) को कोई बड़ा नुकसान होता, तो ऐसे मामलों में बड़े पैमाने पर वारंटी के दावे, सर्विस कैंपेन और ग्राहकों की शिकायतें देखने को मिलतीं, लेकिन ऐसी कोई भी बात सामने नहीं आई है।
- इथेनॉल कोई नया ईंधन नहीं है। इसका उपयोग विश्व स्तर पर एक सदी से अधिक समय से किया जा रहा है, ब्राजील जैसे देश दशकों से उच्च इथेनॉल मिश्रण का इस्तेमाल कर रहे हैं। भारत में, इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम 2001 में एक पायलट के साथ शुरू हुआ, 2006 में ई5 शुरू किया गया था और हालांकि 2013-14 में मिश्रण का स्तर लगभग 1.53% था, लेकिन आवश्यक उत्पादन क्षमता, बुनियादी ढांचे और नियामक ढांचा तैयार करने के बाद इसे धीरे-धीरे और सही तरीके से बढ़ाया गया है।
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जैसा कि तालिका से पता चलता है, यह प्रगति धीरे-धीरे हुई है:
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इथेनॉल आपूर्ति वर्ष
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औसत मिश्रण (%)
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2013-14
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~1.53
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2020-21
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~8.1
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2021-22
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~10
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2022-23
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~12
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2023-24
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~14.6
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2024-25
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~19.2
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2025-26 (नवंबर-जून)
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20
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- सरकार ने बड़े पैमाने पर असल दुनिया में वाहनों के इस्तेमाल के अनुभव पर भी विचार किया है। भारत में प्रति दिन लगभग 8 करोड़ वाहन खुदरा बिक्री केंद्रो पर आते हैं (इनमें से लगभग 80% पेट्रोल वाहन होते हैं),
- सरकार का आकलन विनिर्माता के सर्विस डेटा पर भी आधारित है। एक प्रमुख ओईएम ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की, जिसमें लगभग 1.5 करोड़ ऐसे वाहन शामिल थे जो मूल रूप से ई20-के अनुकूल प्रमाणित नहीं थे और ई20 से जुड़े कोई भी जंग, असामान्य टूट-फूट या पार्ट्स की उम्र कम होने जैसी समस्या नहीं देखी गई। दो-पहिया वाहन बनाने वाली एक प्रमुख कंपनी ने भी ऐसा ही अनुभव बताया है।
- इसके अलावा, अधिक इथेनॉल मिश्रणों को लागू करने का कार्य ऑटोमोबाइल विनिर्माताओं, एसआईएएम, एआरआई, पार्ट्स बनाने वाली कंपनियों, परीक्षण एजेंसियों और तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के साथ व्यापक परामर्श के बाद ही किया गया था।
- इसे लागू करने से पहले सामग्री अनुकूलता, इंजन कैलिब्रेशन,चालन क्षमता, टिकाऊपन, उत्सर्जन, ईंधन प्रणालियों और परफॉर्मेंस का वैज्ञानिक तरीके से मूल्यांकन किया गया। विनिर्माताओं ने वाहनों की वारंटी देना जारी रखा है, जो इस ईंधन की अनुकूलता पर उनके भरोसे को दर्शाता है।
- हाल ही में एक प्रमुख ओईएम ने बताया कि लंबे समय तक ट्रैक किए गए 1.4 करोड़ ई20-चालित वाहनों के डेटा से इथेनॉल के कारण जंग लगने का कोई सबूत नहीं मिला, जबकि एआरएआई ने फिर से पुष्टि की कि ई20-अनुकूल वाहनों के उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले उनका कड़े अंतरराष्ट्रीय-मानकों के आधार पर सत्यापन किया जाता है।
- इसके अलावा, तेल विपणन कंपनियां मिलावट और ईंधन गुणवत्ता सत्यापन के लिए 30,000 से अधिक खुदरा बिक्री केंद्रों का निरीक्षण करके ईंधन गुणवत्ता सुनिश्चित करती हैं, इसके साथ ही राज्यों को ईंधन में मिलावट के प्रति सख्त रुख अपनाने के निर्देश भी दिए गए हैं। इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल बीआईएस विनिर्देशों के अनुरूप है और पूरी सप्लाई चेन के दौरान इसकी गुणवत्ता की जांच की जाती है।
- तदनुसार, सरकार का यह बयान कि "कोई बड़ी समस्या" सामने नहीं आई है, जो किसी इक्का-दुक्का मामले पर नहीं, बल्कि 25 से अधिक वर्षों में इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने, बड़े पैमाने पर वैज्ञानिक सत्यापन, करोड़ों वाहनों में लगातार फील्ड अनुभव, विनिर्माताओं के सर्विस रिकॉर्ड, हितधारक से परामर्श और लगातार गुणवत्ता निगरानी पर आधारित है।
- सरकार, विनिर्माताओं और तकनीकी एजेंसियों के परामर्श से सोशल मीडिया पर फैलने वाले दावों की जांच करती है। ऐसे कई दावे बढ़ा-चढ़ाकर बताए गए, भ्रामक या बिना किसी तकनीकी सबूत के पाए गए हैं और इथेनॉल मिश्रण के कारण व्यापक इंजन क्षति का कोई सत्यापित प्रमाण सामने नहीं आया है।
दावा 2: लगभग 30 करोड़ वाहन इस्तेमाल के लायक नहीं रहेंगे।
ई15+ मिश्रित पेट्रोल का उपयोग पहले से ही साढ़े तीन वर्ष से अधिक समय से बड़े पैमाने पर हो रहा है, जबकि ई19-ई20 ईंधन का इस्तेमाल ढाई वर्ष से अधिक समय से हो रहा है।
इस अवधि के दौरान:
• 20 करोड़ से अधिक दो-पहिया वाहन
• 3 करोड़ से अधिक पेट्रोल कारें इन ईंधनों से चली हैं और इथेनॉल मिश्रण की वजह से इंजन खराब होने या वाहन के बंद होने का कोई भी पक्का सबूत नहीं मिला है।
अगर ई20 से वास्तव में वाहन इस्तेमाल के लायक न होते, तो भारत में लाखों वाहन खराब होते, वारंटी के दावे आते और सर्विस कैंपेन चलाने पड़ते। ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है।
दावा 3: ऑटोमोबाइल विनिर्माताओं ने निजी तौर पर संकेत दिया है कि ई20 वांछनीय नहीं है।
4 जुलाई 2026 को, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भारी उद्योग मंत्रालय तथा सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के साथ मिलकर एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन किया। इसमें टोयोटा किर्लोस्कर, मारुति सुजुकी, हीरो मोटोकॉर्प, हुंडई मोटर इंडिया, टीवीएस मोटर कंपनी और बजाज ऑटो के वरिष्ठ अधिकारियों ने ई20 से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा की। उनका रुख बिल्कुल स्पष्ट था:
- टोयोटा किर्लोस्कर ने कहा कि ई20 को पुराने वाहनों पर सख्त परीक्षण के बाद ही शुरू किया गया था। उन्होंने इथेनॉल को पर्यावरण अनुकूल और बढ़िया परफॉर्मेंस वाला ईंधन बताया, जिसका इस्तेमाल दुनिया भर में दशकों से हो रहा है। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि परीक्षण प्रोटोकॉल यूएनईसीई मानकों के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित होते हैं और उनसे कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
- मारुति सुजुकी ने उपभेक्ताओं के लिए एक "भरोसे का बयान" जारी किया। वित्त वर्ष 2025-26 में सर्विस किए गए 2.84 करोड़ वाहनों, जिनमें 1.5 करोड़ से अधिक पुराने वाहन शामिल थे, जो मूल रूप से ई20-प्रमाणित नहीं थे, के आधार पर कंपनी ने बताया कि ई20 की वजह से कोई जंग, असामान्य टूट-फूट या पार्ट्स की उम्र कम होने जैसी समस्या नहीं देखी गई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि माइलेज पर असर आम तौर पर 3–3.5% तक ही होता है और रोज़मर्रा की चीज़ें जैसे टायर का प्रेशर, वाहन चलाने का तरीका, रखरखाव और यातायात का ईंधन इकॉनमी पर कहीं ज़्यादा असर पड़ता है।
- दुनिया की सबसे बड़ी दो-पहिया वाहन बनाने वाली कंपनियों में से एक, हीरो मोटोकॉर्प ने कहा कि उनके व्यापक सर्विस डेटा के विश्लेषण से पता चला है कि पुराने ईंधनों की तुलना में ई20 से चलने वाले वाहनों में नुकसान की कोई ज़्यादा घटना नहीं देखी गई।
- हुंडई, टीवीएस मोटर कंपनी और बजाज ऑटो ने भी इस संवाददाता सम्मेलन में हिस्सा लिया और ई20 कार्यक्रम के प्रति उद्योग के भरोसे को फिर से दोहराया। पैनल ने अपनी बात समाप्त करते हुए इस कार्यक्रम के लिए अपनी प्रतिबद्धता और उपभोक्ताओं की चिंताओं को पारदर्शी तरीके से दूर करने के वादे को फिर से दोहराया।
दावा 4: पुराने वाहन जोखिम में हैं।
एक प्रमुख ऑटोमोबाइल विनिर्माता ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की।
इनमें से लगभग 1.5 करोड़ वाहन ऐसे थे, जिन्हें मूल रूप से ई20 के अनुकूल प्रमाणित नहीं किया गया था।
इसके बावजूद,
• ई20 ईंधन की वजह से कोई असामान्य जंग,
• कोई असामान्य घिसाव,
• या पुर्ज़ों की उम्र में कोई कमी नहीं देखी गई।
दो-पहिया वाहन बनाने वाली एक प्रमुख कंपनी ने भी ऐसा ही अनुभव बताया है, जबकि एक अन्य ओईएम ने लंबे समय तक ई20 से चलने वाले 1.4 करोड़ वाहनों को ट्रैक किया और इथेनॉल की वजह से जंग लगने का कोई सबूत नहीं मिला।
दावा 5: माइलेज बहुत कम हो जाएगा।
सरकार के अध्ययनों और ऑटोमोबाइल विनिर्माताओं ने लगातार यह बताया है कि ईंधन की बचत कई बातों पर निर्भर करती है, जैसे:
• वाहन चलाने का तरीका,
• यातायात की स्थिति,
• वाहन का रखरखाव
• टायर का प्रेशर,
• एयर-कंडीशनर का इस्तेमाल।
ई10 के लिए डिजाइन किए गए कुछ पुराने वाहनों में, फ्यूल इकॉनमी में कमी आम तौर पर लगभग 3-5% तक ही रहती है, न कि उन बढ़ा-चढ़ाकर बताए गए आंकड़ों के बराबर जो फैलाए जा रहे हैं।
इसके साथ ही, ई20 के यह लाभ भी हैं:
• बेहतर ऑक्टेन रेटिंग और बेहतर एंटी-नॉक गुण,
• स्वच्छ कंबशन (दहन) और इंजन की बेहतर परफ़ॉर्मेंस,
• बेहतर एक्सिलरेशन और चालन गुणवत्ता।
दावा 6: विनिर्माताओं को ई20 का समर्थन करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
अगर ऑटोमोबाइल विनिर्माता वैज्ञानिक सत्यापन से संतुष्ट नहीं होते, तो वे न तो
• ई20-अनुकूल वाहनों को प्रमाणित करते,
• और न ही वारंटी की शर्तों को पूरा करते।
विनिर्माता, विनिर्देश के अनुरूप ई20 ईंधन से चलने वाले वाहनों के लिए वारंटी की शर्तों को पूरा करना जारी रखे हुए हैं, क्योंकि उन्हें उस व्यापक परीक्षण पर भरोसा है जो इसे शुरू करने से पहले किए गए थे।
दावा 7: ऑटोमोबाइल कंपनियों पर ई20 के बारे में सच छिपाने के लिए सरकार का दबाव है।
- भारत के ऑटोमोबाइल विनिर्माता स्वतंत्र और लिस्टेड कंपनियां हैं, जिनकी अपने उपभोक्ताओं के प्रति कानूनी और नियामक संबंधी ज़िम्मेदारियां हैं।
- वे वाहनों में मौजूद बड़ी खराबी को छिपा नहीं सकते, क्योंकि ऐसा करने पर उन्हें वारंटी दावों, उत्पाद देयता, नियामक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है और उनकी साख को अत्यधिक नुकसान पहुंच सकता है।
- विनिर्माताओं ने ई20-अनुकूल वाहनों के लिए वारंटी देना जारी रखा है, अगर उन्हें लगता कि ई20 से इंजन को कोई गंभीर नुकसान हो रहा है, तो वे ऐसा नहीं करते। वारंटी से जुड़े फैसले इंजीनियरिंग सत्यापन और फील्ड अनुभव के आधार पर लिए जाते हैं, न कि राजनीतिक कारणों से।
- उद्योग का पक्ष सार्वजनिक और पारदर्शी तरीके से भी रखा गया है। 4 जुलाई 2026 को, टोयोटा किर्लोस्कर, मारुति सुजुकी, हीरो मोटोकॉर्प, हुंडई मोटर इंडिया, टीवीएस मोटर कंपनी और बजाज ऑटो के वरिष्ठ अधिकारियों ने संयुक्त रूप से मीडिया को संबोधित किया। उन्होंने फिर से कहा कि ई20 को कड़े परीक्षण और व्यापक सत्यापन के बाद ही शुरू किया गया था।
- उनके बयान असल दुनिया के सर्विस डेटा पर आधारित थे।
- मारुति सुजुकी ने वित्त वर्ष 2025-26 में सर्विस किए गए 2.84 करोड़ वाहनों का विश्लेषण किया, जिसमें 1.5 करोड़ से अधिक पुराने वाहन शामिल थीं और पाया कि ई20 से जुड़ा कोई जंग,असामान्य घिसाव या पार्ट्स की उम्र में कोई कमी नहीं आई।
- हीरो मोटोकॉर्प ने बताया कि उसके व्यापक सर्विस डेटा से पता चला है कि ई20 से चलने वाले दो-पहिया वाहनों में गाड़ी खराब होने की कोई अधिक घटना नहीं देखी गई।
- टोयोटा किर्लोस्कर ने कहा कि ई20 को पुराने वाहनों पर कड़े परीक्षण के बाद ही शुरू किया गया था, जिसमें यूएनईसीई मानकों के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त परीक्षण प्रोटोकॉल का अनुपालन किया गया था।
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