उप राष्ट्रपति सचिवालय
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उपराष्ट्रपति ने शिमला में आईआईएएस द्वारा आयोजित वंदे मातरम पर स्थायी प्रदर्शनी और सरदार पटेल के अखंडता, एकीकरण और संघीयवाद के दृष्टिकोण पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया


“वंदे मातरम ने मातृभूमि के प्रति प्रेम को एक पवित्र राष्ट्रीय कर्तव्य में बदल दिया”: उपराष्ट्रपति

“नवाचार किसी राष्ट्र को समृद्ध बना सकते हैं, लेकिन महान राष्ट्र की नींव विचारों पर ही टिकी होती हैं”: उपराष्ट्रपति

सरदार पटेल ने न केवल क्षेत्रों को बल्कि भारतीयों के दिलों को भी जोड़ा: उपराष्ट्रपति

देशभक्ति को ईमानदारी, उत्कृष्टता और उद्देश्य की एकता के माध्यम से प्रतिदिन साकार किया जाना चाहिए: उपराष्ट्रपति

प्रविष्टि तिथि: 10 JUL 2026 1:43PM by PIB Delhi

उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने आज हिमाचल प्रदेश के शिमला स्थित राष्ट्रपति निवास के भारतीय उन्नत अध्ययन संस्थान (आईआईएएस) द्वारा आयोजित वंदे मातरम पर एक स्थायी प्रदर्शनी और सरदार पटेल के अखंडता, एकीकरण और संघीयवाद के दृष्टिकोण पर तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया।

 

 

उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्र दो ऐतिहासिक उपलब्धियों का स्मरण कर रहा है- राष्ट्रगान वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ और सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती। उन्होंने कहा कि ऐसे अवसर न केवल इतिहास को याद करने का अवसर प्रदान करते हैं, बल्कि इसकी आत्मा से पुनः जुड़ने का भी अवसर देते हैं।

उपराष्ट्रपति ने भारतीय उन्नत अध्ययन संस्थान को छह दशकों से उच्चतम स्तर की विद्वत्ता को पोषित करने वाली संस्था बताते हुए, स्थायी प्रदर्शनी और अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन के लिए संस्थान की सराहना की।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि नवाचार किसी राष्ट्र को समृद्ध बना सकते हैं, लेकिन विचार ही उसे सही मायने में महान बनाते हैं। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में वंदे मातरम की भूमिका को याद करते हुए उन्होंने कहा कि इस राष्ट्रगान ने स्वतंत्र भारत के साझा सपने के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों, भाषाओं, धर्मों और सामाजिक पृष्ठभूमि के लोगों को एकजुट किया। उन्होंने कहा कि अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों के लिए वंदे मातरम साहस, बलिदान और आशा का स्रोत बन गया, जिसने मातृभूमि के प्रति प्रेम को एक पवित्र राष्ट्रीय कर्तव्य में बदल दिया।

तमिलनाडु के उदाहरण देते हुए उपराष्ट्रपति ने वंदे मातरम की भावना से प्रेरित स्वतंत्रता सेनानियों- वी.ओ. चिदंबरम पिल्लई, तिरुप्पुर कुमारन, वंचिनाथन और महाकवि सुब्रमण्यम भारती के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देशभक्ति केवल संघर्ष के क्षणों तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे हर दिन ईमानदारी, उत्कृष्ट कार्य और एकता के माध्यम से व्यक्त किया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह स्थायी प्रदर्शनी आने वाली पीढ़ियों, विशेषकर युवाओं को प्रेरित करेगी।

उपराष्ट्रपति ने सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वंदे मातरम ने राष्ट्र के जन्म को प्रेरित किया, लेकिन सरदार पटेल ने ही सैकड़ों रियासतों को एक एकीकृत गणराज्य में परिवर्तित किया। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने न केवल क्षेत्रों का एकीकरण किया बल्कि दिलों को भी एकजुट किया, जिससे एक राष्ट्र, एक संविधान और एक साझा भविष्य की नींव रखी गई।

उपराष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि अगले तीन दिनों तक इन चर्चाओं के दौरान सार्थक विचारों का आदान-प्रदान होगा और राष्ट्र निर्माण के लिए सरदार पटेल के चिरस्थायी दृष्टिकोण की समझ में योगदान मिलेगा।

अपने समापन भाषण में, उपराष्ट्रपति ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे एकजुट, आत्मविश्वासी और समावेशी भारत के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के साथ वंदे मातरम के शाश्वत संदेश और सरदार वल्लभभाई पटेल की चिरस्थायी विरासत को आगे बढ़ाएं।

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पीके/केसी/बीयू/केके


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