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डिजिटल इंडिया


परिवर्तन के 11 वर्ष

प्रविष्टि तिथि: 27 JUN 2026 4:51PM by PIB Delhi

डिजिटल इंडिया कार्यक्रम ने देश भर में नागरिकों के जुड़ने, सीखने, लेन-देन करने और सरकारी सेवाओं का लाभ उठाने के तरीके को बदल दिया है। पिछले 11 वर्ष में भारत ने बड़े पैमाने पर दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना पारिस्थितिकी में से एक को तैयार किया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म ने विशेष रूप से ग्रामीण और कम सुविधा वाले इलाकों में स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, कौशल प्रदान करने, खेती और कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच बढ़ाई है। भारत डिजिटल पेमेंट और डिजिटल गवर्नेंस नवाचार में ग्लोबल लीडर के तौर पर भी उभरा है। 'इंडिया स्टैक' के कई देशों तक पहुंचने के साथ, डिजिटल इंडिया समावेशी, नागरिक-केंद्रित और प्रौद्योगिकी-आधारित विकास में भारत के वैश्विक नेतृत्व को मजबूत कर रहा है।

डिजिटल इंडिया का विकास

डिजिटल इंडिया कार्यक्रम 1 जुलाई 2026 को 11 वर्ष पूरे कर रहा है, जो भारत के डिजिटल परिवर्तन की यात्रा में महत्वपूर्ण पड़ाव है। 2015 से पहले, सरकारी सेवाओं का मतलब अकसर लंबी पंक्तियाँ, कागजी कार्रवाई और सीमित संपर्क होता था। डिजिटल इंडिया ने इंटरनेट की पहुंच बढ़ाकर और सेवाओं को ऑनलाइन लाकर डिजिटल अंतर को कम करने में सहायता की। इसने डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत किया और सेवाओं को अधिक तेज, पारदर्शी और अधिक सुलभ बनाया। अब लाखों लोग स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, बैंकिंग और कल्याणकारी योजनाओं के लाभ के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं। डिजिटल अवसंरचना में सरकारी निवेश ने ग्रामीण और शहरी भारत में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाया। इस कार्यक्रम ने किफायती इंटरनेट और बड़े पैमाने पर डिजिटल पहुंच के जरिए डिजिटल टेक्नोलॉजी के लोकतंत्रीकरण को भी बढ़ावा दिया।

पिछले दशक में, डिजिटल इंडिया भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना की नींव बन गया है। भारत अब ग्लोबल रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट में सबसे आगे है, जिसमें यूपीआई मात्रा के लिहाज से दुनिया भर के लेनदेन का लगभग 49% संभालता है। डिजिटल अर्थव्यवस्था भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 12-14% का योगदान देती है। आशा है कि अगले दशक में यह लगभग पांचवां हिस्सा (20%) योगदान देगी। डिजिटल इंडिया ने अलग-अलग क्षेत्र में नवाचार, स्टार्टअप ग्रोथ और प्रौद्योगिकी को अपनाने की गति को तेज किया। इसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग और साइबर सुरक्षा में भारत की क्षमताओं को भी मजबूत किया। जैसे-जैसे भारत 'विकसित भारत 2047' की ओर बढ़ रहा है, डिजिटल इंडिया देश भर में समावेशी विकास, प्रौद्योगिकी के मामले में आत्मनिर्भरता और नागरिकों के सशक्तिकरण को बढ़ावा दे रहा है।

 

 डिजिटल इंडिया के नौ स्तंभ

डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को 9 स्तंभों के आधार पर बनाया गया था, ताकि डिजिटल पहुंच को बढ़ाने और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एकीकृत ढांचा तैयार किया जा सके।

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स्तंभ 1: ब्रॉडबैंड हाईवेज

पूरे देश में डिजिटल अंतर को पाटने के लिए मोबाइल कनेक्टिविटी बहुत ज़रूरी है। भारतनेट-1 और भारतनेट-2 के अंतर्गत, देश भर में 2.22 लाख से ज़्यादा ग्राम पंचायतों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया था। जनवरी 2026 तक, लगभग 2.15 लाख ग्राम पंचायतें यानी लगभग 97% पंचायतें जुड़ चुकी हैं और देश भर में लगभग 7 लाख किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई गई है। इससे ग्रामीण भारत में ई-गवर्नेंस, डिजिटल पेमेंट, ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन और स्थानीय उद्यमिता को काफी मजबूती मिली है।

 

स्तंभ 2: मोबाइल कनेक्टिविटी तक सबकी पहुँच

डिजिटल गवर्नेंस और समावेशी आर्थिक वृद्धि के लिए भरोसेमंद ब्रॉडबैंड ज़रूरी है। मार्च 2026 के अंत तक ब्रॉडबैंड इंटरनेट सब्सक्राइबर की संख्या बढ़कर 106.58 करोड़ हो गई। इससे ग्रामीण भारत में भरोसेमंद 'लास्ट-माइल' डिजिटल कनेक्टिविटी मजबूत हुई।

 

स्तंभ 3: सार्वजनिक इंटरनेट पहुंच कार्यक्रम

आसानी से उपलब्ध डिजिटल सेंटर नागरिकों को अपने घरों के पास सेवाएं पाने में सहायता करते हैं। अब 6.5 लाख से ज़्यादा सामान्य सेवा केंद्र और 1.6 लाख डाक घर डिजिटल सेवाएं दे रहे हैं। ये केंद्र ग्रामीण और कम सुविधा वाले इलाकों में ई-गवर्नेंस, बैंकिंग और नागरिक सेवाएं प्रदान करते हैं।

 

स्तंभ 4: -गवर्नेंस: टेक्नोलॉजी के ज़रिए सरकार में सुधार

इलेक्ट्रॉनिक रूप से सेवाएँ देने के लिए बनाया गया ई-गवर्नेंस, पेपरलेस, एकीकृत और जनता-केंद्रित प्रशासन को बढ़ावा देता है। आज,  डिजिलॉकर और नेशनल सिंगल साइन-ऑन इकोसिस्टम जैसे प्लेटफ़ॉर्म सर्टिफ़िकेट, आवेदन, भुगतान और सार्वजनिक सेवाओं तक आसानी से पहुँचने में मदद करते हैं, जिससे कागज़ी काम कम होता है और जीवन आसान बनता है।

 

स्तंभ 5: -क्रांति: सेवाओं का इलेक्ट्रॉनिक वितरण

डिजिटल इंडिया के सेवा वितरण स्तंभ के तौर पर, ई-क्रांति ने फिजिकल से डिजिटल गवर्नेंस की ओर परिवर्तन को तेज़ किया है। e-Hospital, e-Sanjeevani और e-Courts जैसे एकीकृत प्लेटफ़ॉर्म ने सर्टिफ़िकेट, स्वास्थ्य देखभाल और न्याय सेवाओं तक पहुँच को आसान बना दिया है, जिससे शासन ज़्यादा कुशल और नागरिक-केंद्रित हो गया है।

 

क्या आप जानते थे? e-Courts मिशन मोड प्रोजेक्ट ने भारत की कागज़-आधारित न्यायिक प्रणाली को डिजिटल न्याय पारिस्थितिकी में बदल दिया है। 660 करोड़ से ज़्यादा पृष्ठ डिजिटाइज़ किए गए हैं, जबकि 1.07 करोड़ केस ऑनलाइन फ़ाइल किए गए हैं।

 

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स्तंभ 6: सभी के लिए जानकारी

यह स्तंभ सरकारी जानकारी को आसानी से उपलब्ध कराकर और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए नागरिकों की भागीदारी को बढ़ावा देकर पारदर्शी और भागीदारी वाले शासन को मज़बूत करता है। MyGov और Open Government Data जैसी पहल नागरिकों को जानकारी पाने और सरकारी कार्यक्रमों व सेवाओं से रियल-टाइम में जुड़े रहने में सक्षम बनाती हैं।

 

स्तंभ 7: इलेक्ट्रॉनिकी विनिर्माण

डिजिटल इंडिया ने नीति समर्थन, नवाचार और निवेश के ज़रिए भारत की इलेक्ट्रॉनिकी विनिर्माण पारिस्थितिकी को मज़बूत किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन वित्त वर्ष 2014-15 में 1.9 लाख करोड़ से बढ़कर मार्च 2026 तक लगभग 12 लाख करोड़ हो गया है। आज, भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फ़ोन निर्माता है, जो ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स मूल्य शृंखला में इसकी बढ़ती भूमिका को दिखाता है।

 

स्तंभ 8: नौकरियों के लिए सूचना प्रौद्योगिकी

भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था बड़े पैमाने पर रोज़गार के अवसर सर्जित कर रही है। नैसकॉम के अनुसार, सूचना प्रौद्योगिकी और ITeS उद्योग ने वित्त वर्ष 2025 में 283 अरब अमरीकी डॉलर का राजस्व सर्जित किया है। भारत के 2,100 से ज़्यादा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) में इंजीनियरिंग, एनालिटिक्स, साइबर सिक्योरिटी और एआई-आधारित भूमिकाओं में लगभग 26 लाख प्रोफ़ेशनल काम करते हैं।

 

स्तंभ 9: अर्ली हार्वेस्ट प्रोग्राम

बायोमेट्रिक अटेंडेंस, सुरक्षित सरकारी ईमेल, पब्लिक वाई-फाई हॉटस्पॉट, -बुक्स, एसएमएस-आधारित मौसम चेतावनी और डिजिटल कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म जैसी तुरंत असर दिखाने वाले कार्यक्रमों ने प्रौद्योगिकी-आधारित शासन के फ़ौरन मिलने वाले फ़ायदे दिखाए।

ये 9 स्तंभ डिजिटल इंडिया के लिए रणनीतिक ढांचा तैयार करते हैं और ऐसे देश की नींव रखते हैं जो आपस में जुड़ा हुआ है और भविष्य के लिए तैयार है।


प्रमुख पहल जिन्होंने समावेशी दशक को शक्ति दी

डिजिटल इंडिया प्रोग्राम, डिजिटल अंतर को कम करने की पहल से आगे बढ़कर दुनिया के सबसे बड़े डीपीआई इकोसिस्टम में से एक बन गया है, जो विभिन्न क्षेत्रों में शासन को बढ़ावा दे रहा है।

 

जेएएम ट्रिनिटी: डिजिटल इंडिया की नींव

जेएएम ट्रिनिटी — जन धन, आधार और मोबाइल कनेक्टिविटी — ने भारत में वित्तीय समावेशन और कल्याणकारी योजनाओं के लाभ पहुंचाने के तरीके में क्रांतिकारी परिवर्तन किया है। इसने लाखों लोगों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा और सरकारी सेवाओं तक आसान पहुंच संभव बनाई।

जन धन योजना ने पूरे देश में बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच को तेज़ी से बढ़ाया। बैंक खाते मार्च 2015 में 14.72 करोड़ से बढ़कर फरवरी 2026 तक 57.78 करोड़ हो गए। इसी दौरान जमा राशि 15,670 करोड़ से बढ़कर 2.94 लाख करोड़ हो गई।

इसके अलावा, आधार ने सुरक्षित और तुरंत डिजिटल प्रमाणीकरण के लिए भरोसेमंद बायोमेट्रिक पहचान प्लेटफॉर्म बनाया। आधार नामांकन 2010-11 में 0.42 करोड़ से बढ़कर मार्च 2026 तक 144 करोड़ से अधिक हो गए।

मोबाइल कनेक्टिविटी ने पूरे भारत में डिजिटल पहुंच बढ़ाकर जेएएम इकोसिस्टम को और मज़बूत किया। मार्च 2026 तक, 85.5% भारतीय परिवारों के पास कम से कम एक स्मार्टफोन था, जबकि 109 करोड़ से अधिक लोगों के पास इंटरनेट की सुविधा थी।

इन तीनों (जेएएम) ने मिलकर डिजिटल इंडिया के समावेशी शासन ढांचे की रीढ़ का कार्य किया। जून 2026 तक, 176 करोड़ नागरिकों को सीधे 51 लाख करोड़ से अधिक का लाभ अंतरित किया गया, जिससे पूरे देश में पारदर्शिता और डिजिटल गवर्नेंस में सुधार हुआ।

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केस स्टडी: भारत ने अपनी डिजिटल पहचान में किस प्रकार क्रांतिकारी बदलाव किया

आधार से पहले, लाखों भारतीयों के पास सत्यापन योग्य पहचान पत्र नहीं था, जिससे बैंकिंग, कल्याणकारी योजनाओं और सार्वजनिक सेवाओं तक उनकी पहुंच सीमित हो गई थी। आधार ने सुरक्षित बायोमेट्रिक-आधारित डिजिटल पहचान मंच के माध्यम से इस चुनौती का समाधान किया। समावेश पर केंद्रित इस कार्यक्रम की प्रतीक, महाराष्ट्र के तेम्भाली गांव की आदिवासी महिला श्रीमती रंजना सोनावाने, पहली आधार धारक बनीं। आधार ने केवल मुख्यधारा के नागरिकों, बल्कि पूरे भारत में आदिवासी और वंचित समुदायों के लिए भी बैंकिंग, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और सरकारी सेवाओं तक पहुंच का विस्तार किया। आधार अधिनियम, 2016 के पारित होने के बाद इस परिवर्तन को और गति मिली, जिसने यूआईडीएआई को वैधानिक अधिकार प्रदान किया और आधार को मूलभूत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) के रूप में मान्यता दी।

आधार ने बड़े पैमाने पर बैंक खाते खोलने और प्रमाणीकरण को सक्षम बनाकर और वित्तीय सेवाओं तक आसान पहुंच प्रदान करके भारत के वित्तीय समावेशन को पुनर्गठित किया।

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बिचौलियों के बिना कल्याणकारी योजनाएँ: आधार ने सुरक्षित और पारदर्शी सेवा वितरण को सक्षम बनाकर कल्याणकारी योजनाओं के वितरण में क्रांति ला दी है। अनाज के सार्वजनिक वितरण का 98% से अधिक हिस्सा अब आधार-प्रमाणित है। पात्र लाभार्थी आधार-आधारित प्रमाणीकरण का उपयोग करके 3,100 से अधिक प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) योजनाओं और 360 से अधिक सार्वजनिक सेवाओं से लाभान्वित होते हैं।

सत्यापन अब कागजी प्रक्रिया से मुक्त: आधार ने विभिन्न क्षेत्रों में पहचान सत्यापन को सरल बना दिया है। 30 अप्रैल 2025 तक कुल ई-केवाईसी लेनदेन 2,393 करोड़ तक पहुंच गए, जिससे कागजी कार्रवाई कम हुई और सार्वजनिक सेवाओं तक तेजी से पहुंच संभव हुई।

इसका नवीनतम संस्करण, आधार ऐप, लॉन्च होने के पांच महीनों के भीतर ही 3.1 करोड़ डाउनलोड का आंकड़ा पार कर चुका है। यह मोबाइल नंबर और पते के डिजिटल अपडेट जैसी सेवाएं प्रदान करता है, जिससे कागज रहित सत्यापन को रोजमर्रा के उपयोग में लाया जा सकता है।

विश्व की निगाहों का केंद्र: आज, आधार को वैश्विक स्तर पर डिजिटल पहचान प्रणाली (डीपीआई) के लिए मानक के रूप में मान्यता प्राप्त है, और मिस्र, नाइजीरिया, इंडोनेशिया और पापुआ न्यू गिनी जैसे देश इस मॉडल का अध्ययन कर रहे हैं। यह दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे भरोसेमंद डिजिटल पहचान प्रणालियों में से एक है, जो विश्व भर में डिजिटल शासन मॉडलों को प्रेरित करती है।

 

डिजिलॉकर:

डिजिलॉकर फिजिकल डॉक्यूमेंट्स की जगह सुरक्षित डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल कर रहा है और पूरे भारत में दस्तावेज़ों को सहेजने और उनके सत्यापन के तरीके को बदल रहा है। मार्च 2026 तक, इस प्लेटफ़ॉर्म पर 70.69 करोड़ से ज़्यादा यूज़र्स रजिस्टर हो चुके हैं और 850 करोड़ से ज़्यादा दस्तावेज जारी किए जा चुके हैं, जिससे सत्यापन तेज़, काग़ज़मुक्त और ज़्यादा भरोसेमंद हो गया है।

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यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई)

 

2026 में दस वर्ष पूरे कर रही यूपीआई, नागरिकों और बिज़नेस के लिए तुरंत और सुरक्षित लेनदेन के ज़रिए डिजिटल भुगतान का कायाकल्प कर रहा है। जो साधारण पेमेंट प्लेटफ़ॉर्म के तौर पर शुरू हुआ था, वह अब पूरे भारत में रोज़ाना के डिजिटल कॉमर्स को चला रहा है। लेनदेन की संख्या वित्त वर्ष  2016-17 में सिर्फ़ 2 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 24,162 करोड़ से ज़्यादा हो गई है। यूपीआई की ग्लोबल पहुंच अब नौ देशों तक फैल गई है, जिसमें कंबोडिया सबसे नया देश है जिसने यात्रियों के लिए आसान यूपीआई-आधारित भुगतान की सुविधा शुरू की है। और पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

 

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क्या आप जानते थे? भीम (भारत इंटरफेस फॉर मनी) सरकार द्वारा समर्थित यूपीआई ऐप है जिसे भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) ने बनाया है। यह यूपीआई का इस्तेमाल करके तुरंत पैसे ट्रांसफर करने की सुविधा देता है, जिससे पूरे भारत में लाखों लोगों के लिए सुरक्षित और कैशलेस डिजिटल भुगतान आसान और सुलभ हो जाते हैं।

 

सार्वजनिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाले डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म

 

पिछले दशक में, डिजिटल इंडिया  ने सेवाओं को तेज़, कनेक्टेड और ज़्यादा सुलभ बनाकर सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल में परिवर्तन किया है। ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली (ओआरएस) मरीज़ों को डिजिटल रूप से अपॉइंटमेंट बुक करने की सुविधा देती है, साथ ही लाइन और कागज़ी काम को भी कम करती है। 24 जून 2026 तक, ओआरएस पर 1.37 करोड़ से ज़्यादा ऑनलाइन अपॉइंटमेंट दर्ज किए जा चुके हैं। इस पारिस्थितिकी का समर्थन करते हुए, क्लाउड-बेस्ड eHospital प्लेटफ़ॉर्म अस्पताल के कामकाज को डिजिटाइज़ कर रहा है, जबकि eBloodBank स्वास्थ्य संस्थानों में रक्त की उपलब्धता और प्रबंधन को बेहतर बना रहा है।

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eSanjeevani के ज़रिए स्वास्थ्य देखभाल तक पहुँच और बढ़ रही है। यह टेलीमेडिसिन प्लेटफ़ॉर्म मरीज़ों को दूर से ही विशेष रूप से ग्रामीण और कम सुविधा वाले इलाकों में डॉक्टरों से जोड़ता है, इससे यात्रा का खर्च और प्रतीक्षा का समय कम हो रहा है, साथ ही पूरे देश में स्पेशलिस्ट हेल्थकेयर तक पहुँच बढ़ रही है। 24 जून 2026 तक, eSanjeevani ने 48 करोड़ से ज़्यादा कंसल्टेशन में मदद की है और 2.3 लाख से ज़्यादा हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स को जोड़ा है, जिससे टेलीमेडिसिन सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा वितरण का महत्वपूर्ण अंग बन गई है।

कोविड-19 महामारी के दौरान, भारत ने आरोग्य सेतु और CoWIN जैसे प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए अपने डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम का विस्तार किया। आरोग्य सेतु ने शुरू में कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग (संक्रमित लोगों के संपर्क में आए लोगों का पता लगाने) और स्वास्थ्य परामर्श जारी करने में सहायता की। बाद में यह आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत राष्ट्रीय स्वास्थ्य ऐप बन गया। CoWIN भारत के टीकाकरण कार्यक्रम का डिजिटल आधार बन गया। इसने 220 करोड़ से ज़्यादा वैक्सीन डोज़ का प्रबंधन किया और डिजिटल पब्लिक हेल्थ सिस्टम के लिए ग्लोबल मॉडल के तौर पर उभरा।

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Tele MANAS पूरे देश में 14416 और 1-800-891-4416 के ज़रिए मुफ़्त टेली-काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य समर्थन देता है। जून 2026 तक, इसे 40.42 लाख से ज़्यादा कॉल मिल चुके हैं, और देश भर में इसके 53 Tele MANAS सेल, 23 ​​मेंटरिंग इंस्टीट्यूट और 5 क्षेत्रीय समन्वय केंद्र हैं। इसके अलावा, MANAS (मादक-पदार्थ निषेध आसूचना केंद्र) नागरिकों को टोल-फ्री नंबर 1933 और उमंग ऐप के ज़रिए मादक पदार्थों की तस्करी और उससे जुड़े अपराधों की गुमनाम रूप से रिपोर्ट करने की सुविधा देता है। यह प्लेटफ़ॉर्म काउंसलिंग और पुनर्वास सहायता भी देता है। जून 2026 तक, इसे मादक पदार्थों से जुड़ी 2.16 लाख से ज़्यादा जानकारी और मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़ी 16,200 से ज़्यादा कार्रवाई-योग्य जानकारी मिली है, जिससे देशव्यापी 'मादक पदार्थ मुक्त भारत' अभियान मज़बूत हुआ है।

 

प्रौद्योगिकी के ज़रिए व्यापार को सशक्त बनाना

गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) ने सरकारी खरीद को पारदर्शी, कुशल और पेपरलेस बनाकर उसमें बड़ा बदलाव किया है। जून 2026 तक, इसने 18.4 लाख करोड़ से ज़्यादा का कुल ग्रॉस मर्चेंडाइज़ वैल्यू (GMV) दर्ज किया है, जिसमें वित्त वर्ष 2025-26 का 5 लाख करोड़ भी शामिल है। साथ ही, इसने 11 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को सरकारी बाज़ारों तक पहुँचने में सहायता की है।

ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) ऐसा खुला और इंटरऑपरेबल डिजिटल कॉमर्स इकोसिस्टम बना रहा है जो अलग-अलग प्लेटफ़ॉर्म पर खरीदारों और विक्रेताओं को जोड़ता है। जून 2026 तक, ONDC का विस्तार 20 करोड़ से ज़्यादा खरीदारों और 5 लाख विक्रेताओं तक हो गया था; यह 1,000 शहरों में मौजूद है और यहाँ हर महीने लगभग 90 लाख लेनदेन होते हैं। ONDC ने भारतीय डाक विभाग को रसद सेवा प्रदाता के तौर पर भी जोड़ा है, जिससे पूरे देश में भरोसेमंद और व्यापक ई-कॉमर्स डिलीवरी मज़बूत हुई है। तालमेल (इंटरऑपरेबिलिटी) को बढ़ावा देकर और प्लेटफ़ॉर्म पर निर्भरता कम करके, ONDC छोटे व्यवसायों के लिए बाज़ार तक बेहतर पहुँच बना रहा है और डिजिटल कॉमर्स में समावेशी विकास को बढ़ावा दे रहा है।

इन प्लेटफ़ॉर्म ने खरीद की प्रक्रियाओं को आसान बनाया है, छोटे व्यवसायों के लिए बाज़ार तक पहुँच बढ़ाई है और प्रतिस्पर्धी कीमतों को बढ़ावा दिया है। GeM और ONDC ने 'ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस' (व्यापार करने में आसानी) को भी मज़बूत किया है और भारत में सार्वजनिक सेवा वितरण के बड़े पैमाने पर डिजिटलाइज़ेशन को आगे बढ़ाया है।

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क्या आप जानते थे? eSaras और Indiahandmade स्वयं-सहायता समूहों, बुनकरों और कारीगरों को सीधे डिजिटल बाज़ारों तक पहुँचने में मदद कर रहे हैं, जिससे ग्रामीण आजीविका को सहारा मिलता है और पारंपरिक शिल्प सुरक्षित रहते हैं। ONDC के साथ जुड़ने से 11 से ज़्यादा बायर ऐप पर उनकी पहुँच और भी बढ़ गई है।

सामाजिक कल्याण के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित सार्वजनिक सेवाएँ

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उमंग सरकारी सेवाओं के लिए सिंगल डिजिटल गेटवे बन गया है, जिसमें 2017 की 166 सेवाओं की तुलना में जून 2026 तक 2572 सेवाएं शामिल हो गई हैं। लेनदेन की संख्या 3.9 करोड़ से बढ़कर 796.69 करोड़ हो गई है, जिससे बड़े पैमाने पर डिजिटल सेवाओं को अपनाए जाने का पता चलता है। नागरिकों के लिए अलग-अलग तरह की सेवाओं को एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर लाकर, उमंग ने पूरे देश में सरकारी सेवाओं तक पहुँचने, सुविधा और आसानी को बेहतर बनाया है।

माल एवं सेवा कर नेटवर्क (GSTN) ने पंजीकरण, रिटर्न फाइलिंग, कर भुगतान और ई-इनवॉइसिंग को एक साथ लाकर अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को आधुनिक बनाया है। अप्रैल 2026 तक, कुल जीएसटी संग्रह लगभग 2.43 लाख करोड़ तक पहुँच गया। इस प्लेटफ़ॉर्म ने कर नियमों का पालन बेहतर किया है, पारदर्शिता बढ़ाई है और जीएसटी सिस्टम के तेज़ी से और प्रौद्योगिकी-आधारित कामकाज को संभव बनाया है।

पोषण ट्रैकर (POSHAN Tracker) पोषण सेवा की रियल-टाइम मॉनिटरिंग में सहायता करता है। यह 13.35 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को जोड़ता है और 8.9 करोड़ से ज़्यादा लाभार्थियों तक सेवाएँ पहुँचाता है, जिनमें गर्भवती महिलाएँ, स्तनपान कराने वाली माताएँ, बच्चे (0-6 वर्ष) और किशोर लड़कियाँ (आकांक्षी ज़िलों और पूर्वोत्तर राज्यों में) शामिल हैं। इस डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म ने डेटा-आधारित निगरानी को संभव बनाया है और महिलाओं व बच्चों के लिए पोषण और कल्याण कार्यक्रमों की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में मदद की है।

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क्या आप जानते थे? पोषण हेल्पलाइन (1515 डायल करें) समर्पित सरकारी सहायता सुविधा है, जिसे 'मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0' और 'प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY)' के लाभार्थियों के लिए बनाया गया है। यह 17 भाषाओं में जानकारी, शिकायतों के समाधान और तकनीकी सहायता तक तुरंत पहुँच प्रदान करती है।

 

पीएम गतिशक्ति ने एकीकृत अवसंरचना नियोजन के लिए जीआईएस-आधारित प्लेटफ़ॉर्म बनाया है। फरवरी 2026 तक, नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप ने 16.10 लाख करोड़ की लागत वाले 352 परियोजनाओं का मूल्यांकन किया था, जिनमें से 201 को स्वीकृति दी गई और 167 पर काम चल रहा है। विभिन्न क्षेत्रों और मंत्रालयों के बीच तालमेल वाली प्लानिंग को संभव बनाकर, इस प्लेटफ़ॉर्म ने कार्यक्षमता बढ़ाई है, लॉजिस्टिक्स की कमियों को दूर किया है और अवसंरचना के विकास में तेज़ी लाई है।

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MY भारत (मेरा युवा भारत) https://mybharat.gov.in/ युवाओं के लिए भारत का सबसे बड़ा डीपीआई है। यह ऐसा एकीकृत, सुरक्षित और स्केलेबल प्लेटफ़ॉर्म है जो युवा नागरिकों को वॉलंटियरिंग, अनुभव-आधारित सीखने (एक्सपीरिएंशियल लर्निंग), इंटर्नशिप, नौकरी, कौशल विकास, नेतृत्व, नवाचार और राष्ट्रीय कार्यक्रमों के अवसरों से जोड़ता है। 31 अक्टूबर 2023 को आरंभ किए गए इस प्लेटफ़ॉर्म पर 2.21 करोड़ से ज़्यादा युवा पंजीकृत हो चुके हैं, 1.52 लाख से ज़्यादा वॉलंटियरिंग के अवसर और 28,000 से ज़्यादा अनुभव-आधारित लर्निंग प्रोग्राम (ELP) उपलब्ध कराए गए हैं, और 1.19 लाख से ज़्यादा संगठन इससे जुड़े हैं। एआई, कई भाषाओं के सपोर्ट, मोबाइल-फ़र्स्ट सेवाओं, गेमिफ़िकेशन, ओपन एपीआई और रियल-टाइम एनालिटिक्स से बना MY भारत सरकारों और सहयोगी संगठनों को एक ही राष्ट्रीय डिजिटल इकोसिस्टम के ज़रिए लाखों युवाओं को जोड़ने, उनकी पहचान करने और उन्हें सशक्त बनाने में सहायता करता है। इससे 'डिजिटल इंडिया' और 'विकसित भारत@2047' के विज़न को आगे बढ़ाने में सहायता मिलती है।

क्या आप जानते थे?

MY Bharat ने "एक हफ़्ते में ऑनलाइन क्विज़ में भाग लेने वाले सबसे ज़्यादा यूज़र्स" का गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर भारत के डीपीआई की ताकत दिखाई। इसमें 390,812 सत्यापित प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

 

AgriStack: प्रौद्योगिकी के ज़रिए किसानों को सशक्त बनाना

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डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत विकसित AgriStack किसानों पर केंद्रित डीपीआई है। यह e-NAM (ऑनलाइन कृषि व्यापार के लिए) और 'किसान ई-मित्र' (एआई-आधारित चैटबॉट जो खेती से जुड़ी तुरंत जानकारी और सरकारी योजनाओं का सपोर्ट देता है) जैसी सेवाओं को चलाता है। किसान, ज़मीन और फ़सल के डेटा को एक साथ लाकर, यह क्रेडिट, बीमा, सब्सिडी, खरीद और व्यक्तिगत परामर्श सेवाओं तक आसान पहुँच बनाता है। मार्च 2026 तक, 9.20 करोड़ से ज़्यादा किसान पहचान पत्र बनाए जा चुके हैं।

क्या आप जानते थे? भारत ने वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी-आधारित खेती को बढ़ावा देने के लिए 731 कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) स्थापित किए हैं। 'किसान सारथी' डिजिटल परामर्श प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए, किसानों को KVK, ICAR और कृषि विश्वविद्यालयों से रियल-टाइम मार्गदर्शन मिलता है। इससे कृषि संबंधी जानकारी ज़्यादा लोगों तक पहुँचती है और साथ ही जलवायु-अनुकूल और किसान-केंद्रित खेती के तरीकों को बढ़ावा मिलता है।

 

शिक्षा तक पहुँच बढ़ाने वाले डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म

डिजिटल इंडिया क्लासरूम और भौगोलिक सीमाओं से परे अच्छी गुणवत्ता वाली शिक्षा उपलब्ध कराकर शिक्षा के क्षेत्र में मौजूद अंतर को कम कर रहा है।

DIKSHA (ज्ञान साझा करने के लिए डिजिटल अवसंरचना) करिकुलम से जुड़े डिजिटल लर्निंग रिसोर्स और टीचर ट्रेनिंग के ज़रिए स्कूली शिक्षा में परिवर्तन ला रहा है। यह प्लेटफ़ॉर्म स्टूडेंट्स और टीचर्स के लिए QR-कोड वाली टेक्स्टबुक, इंटरैक्टिव कंटेंट और एआई-इनेबल्ड लर्निंग टूल उपलब्ध कराता है। यह भारतीय संकेत भाषा संसाधनों और आसानी से इस्तेमाल किए जा सकने वाले डिजिटल कंटेंट के ज़रिए समावेशी शिक्षा को भी बढ़ावा दे रहा है। मार्च 2026 तक, DIKSHA के देशभर में 2 करोड़ से ज़्यादा रजिस्टर्ड यूज़र्स हो गए हैं।

इसके अलावा, SWAYAM (युवाओं के लिए एक्टिव लर्निंग का स्टडी वेब) और SWAYAM Prabha क्लासरूम से बाहर भी अच्छी क्वालिटी वाली शिक्षा तक पहुँच बढ़ा रहे हैं। SWAYAM प्रमुख संस्थानों के ज़रिए क्लास 9 से स्नातकोत्तर स्तर तक के फ़्री ऑनलाइन कोर्स ऑफ़र करता है और जनवरी 2026 तक, इसमें अलग-अलग विषयों के 4,400 से ज़्यादा कोर्स उपलब्ध हैं। इसके साथ ही, SWAYAM Prabha 48 समर्पित डीटीएच चैनलों के ज़रिए एजुकेशनल कंटेंट ब्रॉडकास्ट करता है, जिससे कम इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले इलाकों में भी सीखने की सुविधा मिलती है।

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इन कार्यक्रमों को आगे बढ़ाते हुए, PM e-Vidya बिना रुकावट और कई तरीकों से सीखने की सुविधा देने के लिए DIKSHA, SWAYAM, SWAYAM Prabha, कम्युनिटी रेडियो और डेडिकेटेड एजुकेशनल टेलीविज़न चैनलों को एक ही फ़्रेमवर्क में जोड़ता है। यह दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए कंटेंट के ज़रिए समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देते हुए अच्छी क्वालिटी वाली शिक्षा तक पहुँच बढ़ा रहा है।

क्या आप जानते थे? APAAR (ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री) हर विद्यार्थी को विशिष्ट डिजिटल शैक्षिक पहचान देता है, शैक्षिक रिकॉर्ड का सुरक्षित रूप से भंडार करता है और प्रवेश, स्कॉलरशिप और अन्य सेवाओं के लिए काग़ज़ मुक्त सत्यापन की सुविधा देता है। जून 2026 तक, 33.74 करोड़ से ज़्यादा APAAR पहचान कार्ड बनाए जा चुके हैं।

 

भारत की डिजिटल श्रमशक्ति को मज़बूत बनाना

डिजिटल इंडिया देशभर में डिजिटल कौशल, नई प्रौद्योगिकी और रोज़गार के अवसरों को बढ़ाकर भविष्य के लिए तैयार श्रमशक्ति बना रहा है।

PMGDISHA ने नागरिकों को स्मार्टफोन के इस्तेमाल, इंटरनेट एक्सेस, डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन सेवाओं का प्रशिक्षण देकर ग्रामीण डिजिटल अंतर को कम किया है। मार्च 2024 तक, इसने 6.39 करोड़ ग्रामीण नागरिकों को प्रशिक्षण दिया, जो इसके लक्ष्य से अधिक था।

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FutureSkills Prime सीखने वालों को एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी और डेटा एनालिटिक्स जैसी उभरती हुई प्रौद्योगिकी के लिए तैयार कर रहा है। इसमें 26 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने पंजीकरण किया है और यह नैसकॉम के टैलेंट कनेक्ट के ज़रिए सीखने वालों को नौकरी से जोड़ता है।

स्किल इंडिया डिजिटल हब (SIDH) स्किलिंग, सर्टिफ़िकेशन और रोज़गार सेवाओं के लिए एकीकृत प्लेटफ़ॉर्म है। मार्च 2026 तक, इसमें 32 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने नामांकन किया था और यह PMKVY, पीएम विश्वकर्मा, सरकारी योजनाओं और डिजिटल लर्निंग पार्टनर्स के तहत कोर्स ऑफ़र करता है।

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IndiaAI मिशन एआई शिक्षा, अवसंरचना और ज़िम्मेदार एआई अपनाए जाने की प्रक्रिया को मज़बूत कर रहा है। यह IndiaAI कोश जैसी योजनाओं के ज़रिए स्कूलों, हायर एजुकेशन संस्थानों और प्रोफ़ेशनल ट्रेनिंग प्रोग्राम में एआई स्किलिंग को बढ़ावा दे रहा है। India AI मिशन के बारे में और पढ़ें।

 

क्या आप जानते थे?

भारत ने फ़रवरी 2026 में IndiaAI इम्पैक्ट समिट की मेज़बानी की, और ग्लोबल साउथ का पहला देश बना जिसने ग्लोबल एआई शिखर सम्मेलन की मेज़बानी की। इसमें 100 से ज़्यादा देशों के प्रतिभागी शामिल हुए।

भारत का डिजिटल नेतृत्व और आगे का रास्ता

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मापन योग्य (स्केलेबल) और नागरिकों पर केंद्रित डिजिटल गवर्नेंस प्लेटफ़ॉर्म के कारण भारत, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) के क्षेत्र में ग्लोबल लीडर के तौर पर उभर रहा है। फरवरी 2026 तक, भारत ने 'इंडिया स्टैक' और डीपीआई सिस्टम पर सहयोग के लिए 24 देशों के साथ समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें डिजिटल पहचान, पेमेंट, डेटा एक्सचेंज और सेवा वितरण जैसे क्षेत्र शामिल हैं। यूपीआई अब संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सिंगापुर, फ्रांस, मॉरिशस और श्रीलंका सहित आठ से अधिक देशों में काम कर रही है, जिससे ग्लोबल फिनटेक में भारत की मौजूदगी मज़बूत हुई है। आधार, डिजीलॉकर, कोविन (CoWIN), GeM, दीक्षा (DIKSHA), उमंग (UMANG) और ई-संजीवनी (eSanjeevani) जैसे प्लेटफ़ॉर्म अंतरराष्ट्रीय डिजिटल गवर्नेंस मॉडल को तेज़ी से आकार दे रहे हैं। भारत ने 2023 में अपनी G20 अध्यक्षता के दौरान 'इंडिया स्टैक ग्लोबल' और 'ग्लोबल डीपीआई रिपॉजिटरी' भी आरंभ किए, जिससे भारतीय डिजिटल समाधानों तक वैश्विक पहुँच बढ़ी है। जैसे-जैसे 'डिजिटल इंडिया' अपने अगले दशक में प्रवेश कर रहा है, भारत प्रौद्योगिकी को समावेशी विकास, डिजिटल सशक्तिकरण और वैश्विक सहयोग के साधन के तौर पर स्थापित कर रहा है।

 

संदर्भ

संचार मंत्रालय 

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  • https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2223772&reg=3&lang=1

 

वित्त मंत्रालय

  • https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2200569&reg=3&lang=1
  • https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2219981&reg=6&lang=1
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  • https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2213154&reg=48&lang=2

 

पंचायती राज मंत्रालय

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इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय

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  • https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2202905&reg=48&lang=2

 

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय

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विधि और न्याय मंत्रालय

  • https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2238787&reg=48&lang=2

 

कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय

  • https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2244626&reg=48&lang=2
  • https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/187/AU3991_M3rthT.pdf?source=pqals

 

राज्य सभा

  • https://sansad.in/getFile/annex/270/AU4273_LT3Fyr.pdf?source=pqars

 

अन्य:

 

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