इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय
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डिजिटल इंडिया को 11 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और किफायती डिजिटल कनेक्टिविटी के माध्यम से प्रौद्योगिकी आधारित विकास के भारत के अगले चरण को बढ़ावा मिल रहा है


12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं में 1.64  लाख करोड़ रुपये का निवेश स्वीकृत; इलेक्ट्रॉनिक्स भारत की तीसरी सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी बना

45,000 से अधिक जीपीयू के साथ साझा कंप्यूट सुविधा भारत के एआई इकोसिस्टम को सुदृढ़ करती है; शासन संबंधी दिशानिर्देश सुरक्षित, समावेशी और भरोसेमंद एआई को बढ़ावा देते हैं

सुदृढ़ डिजिटल इंडिया के साथ, भारत के नवाचार परितंत्र का  सबसे बेहतरीन वर्ष दर्ज किया है; स्टार्टअप्स में रोज़गार का आंकड़ा 23.36 लाख तक पहुंचा और लगभग आधे स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक या साझीदार हैं

प्रविष्टि तिथि: 27 JUN 2026 6:24PM by PIB Delhi

भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान- आधारित अर्थव्यवस्था में बदलने की दृष्टि से 1 जुलाई 2015 को डिजिटल इंडिया का शुभारंभ किया गया था। ग्यारह वर्ष बाद, वह बदलाव भारतीय जीवन के हर स्तर पर दिखाई दे रहा है – फिर चाहे वह हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड से जुड़ी ग्राम पंचायत हो, कुछ ही सेकंड में सीधे लाभ पाने वाले किसान हों या स्मार्टफोन पर बेहतर शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र हों। इंटरनेट कनेक्शन पहले की तुलना में लगभग चार गुना बढ़ गए हैं और मोबाइल डेटा की कीमत 269 रुपए प्रति जीबी से घटकर 810 रुपए हो गई है, जिससे डिजिटल पहुंच सुविधा दुनिया में सबसे किफायती में से एक सुविधा बन गई है।

डिजिटल इंडिया के 11 वर्ष पूरे होने पर, इसकी यात्रा एक निर्णायक मोड़ पर है। पहले दशक में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, वित्तीय  समावेशन और नागरिकों तक सेवाएं पहुंचाने का बुनियादी ढांचा तैयार करने के बाद, अब यह कार्यक्रम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग जैसे नए और महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। ये दोनों ही क्षेत्र भारत के तकनीकी भविष्य को निर्धारित करेंगे और 'विकसित भारत 2047' के विज़न को साकार करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

इंडियाएआई मिशन: भारत का स्वदेशी एआई परितंत्र तैयार करना

10,372 करोड़ रुपये से अधिक के परिव्यय से अनुमोदित इंडियाएआई मिशन ने पिछले वर्ष में महत्वपूर्ण प्रगति की है। इसके आधार के रूप में 45,000 से अधिक जीपीयू वाली एक साझा कंप्यूट सुविधा विकसित करना शामिल है, जो राष्ट्रीय स्तर पर एआई अनुसंधान और उसे लागू करने के लिए कंप्यूटिंग का आधार तैयार करती है।

एआई फाउंडेशन मॉडल के तहत, स्पीच, टेक्स्ट और विजन अलग-अलग तरीकों (मोडैलिटी) में 15 बड़े और छोटे भाषा मॉडल को सपोर्ट किया जा रहा है। एआई कोश प्लेटफॉर्म पर अब 12,519 से अधिक डेटासेट, 307 एआई मॉडल और 20 टूलकिट मौजूद हैं, जिससे देश भर के शोधकर्ताओं, स्टार्टअप और संस्थानों के लिए एआई विकास संसाधन आसानी से उपलब्ध हो गए हैं। चुनौतियों, हैकाथॉन और इन-हाउस डेवलपमेंट के माध्यम से 12 क्षेत्रों में बीस एआई समाधानों को लागू किया गया है।

एआई क्षमता महानगरीय केंद्रों से आगे पहुंचे, यह सुनिश्चित करने के लिए  27 डेटा और एआई प्रयोगशालाएं टियर 2 और टियर 3 शहरों में स्थापित की गई हैं, छात्रों को 684 फैलोशिप प्रदान की गई हैं, और वाईयूवीए एआई पाठ्यक्रम के माध्यम से 8.4 मिलियन शिक्षार्थियों को सहायता प्रदान की गई है। देश भर में अठारह उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए गए हैं और क्षमता बढ़ाने के लिए 20 भारतीय एआई स्टार्टअप को सहायता दी गई है। नवंबर 2025 में जारी एआई शासन संबंधी दिशानिर्देश, सुरक्षित, समावेशी और भरोसेमंद एआई विकसित करने की भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं।

फरवरी में आयोजित भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026 ने वैश्विक एआई नेतृत्व में भारत की भूमिका को एक नई पहचान दी। इस समिट में 100 से अधिक देशों और 20 अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधिमंडल शामिल हुए, जिसमें फिजिकल व वर्चुअल माध्यमों से लगभग 15 लाख प्रतिभागियों ने भाग लिया। भारत एआई इम्पैक्ट समिट घोषणपत्र को 92 देशों और संगठनों ने अपनाया, जो भरोसेमंद और विकास-उन्मुख एआई के भारत के दृष्टिकोण के लिए व्यापक अंतर्राष्ट्रीय समर्थन को दर्शाता है। इस कार्यक्रम से एआई से संबंधित निवेश के लिए में 200 बिलियन अमरिकी डॉलर से अधिक की प्रतिबद्धताएं प्राप्त हुईं और एआई अनुसंधान, बुनियादी ढांचे और डिजिटल सार्वजनिक वस्तुओं के लिए एक विश्वसनीय वैश्विक संयोजक के रूप में भारत की स्थिति मजबूत हुई।

सेमीकंडक्टर मिशन: नीति से उत्पादन तक

भारत का सेमीकंडक्टर परितंत्र नीति से उत्पादन की ओर निर्णायक रूप से बढ़ गया है। भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत, लगभग 1.64 लाख करोड़ रुपये की निवेश वाली 12 सेमीकंडक्टर विनिर्माण परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनमें एक सेमीकंडक्टर निर्माण इकाई, दो कंपाउंड सेमीकंडक्टर निर्माण इकाइयां और नौ पैकेजिंग इकाइयां शामिल हैं। केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0, चिप मैन्युफैक्चरिंग के प्रति राष्ट्रीय प्रतिबद्धता को और मज़बूत करता है, जिसमें सेमीकंडक्टर उपकरण, सामग्री, स्वदेशी बौद्धिक संपदा और लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

डिजाइन के मामले में, 24 परियोजनाओं को डिजाइन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना के तहत सहायता दी जा रही है, 105 कंपनियों को उन्नत चिप डिजाइन टूल्स के साथ सहायता दी गई है और उन्नत नोड्स सहित विभिन्न फाउंड्री में 23 डिजाइन टेपआउट पूरे किए गए हैं, जो सेमीकंडक्टर डिजाइन में भारत की बढ़ती क्षमता को दर्शाते हैं।

सेमीकॉन इंडिया 2025 में भारत के एक वैश्विक सेमीकंडक्टर गंतव्य (डेस्टिनेशन) के रूप में उभरने  को मजबूत अंतर्राष्ट्रीय मान्यता मिली, जिसमें 48 देशों और क्षेत्रों की 350 से अधिक कंपनियों ने भाग लिया था। 13 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर और प्रमुख वैश्विक सेमीकंडक्टर सीईओ की भागीदारी ने भारत के नीतिगत ढांचे और सेमीकंडक्टर से संबंधित दीर्घकालिक दृष्टिकोण में बढ़ते अंतर्राष्ट्रीय भरोसे को उजागर किया।

इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण: वैश्विक स्तर पर पहचान

एआई और सेमीकंडक्टर में निवेश के अनुरूप भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का परिदृश्य बदल रहा है। यह क्षेत्र 13 लाख करोड़ रुपए का उद्योग बन गया है और इलेक्ट्रॉनिक्स भारत का तीसरा सबसे बड़ा निर्यात सेक्टर बनकर उभरा है, जो  ऐसी उपलब्धि है जिसकी कल्पना भी एक दशक पहले नहीं की जा सकती थी। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फ़ोन बनाने वाला देश है। वर्तमान में एआई-सक्षम डेटा सेंटर कंपोनेंट्स, 5जी उपकरणों और उच्च-स्तरीय नेटवर्किंग गियर तक फैला जो उन्नत विनिर्माण परितंत्र बन रहा है, वह भारत को वैश्विक प्रौद्योगिकी आपूर्ति श्रृंखलाओं से जोड़ रहा है और इसके साथ ही देश में बड़े पैमाने पर रोज़गार भी सृजित कर रहा है।

यूपीआई का एक दशक पूरा हुआ : वैश्विक भुगतान भारत का नेतृत्व

अप्रैल 2026 में, भारत के वित्तीय परिदृश्य को बदलने वाले यूपीआई के दस वर्ष पूरे हो गए हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में, इस प्लेटफॉर्म पर 24,162 करोड़ लेनदेन दर्ज किए। यूपीआई अब भारत के 81% डिजिटल भुगतान को संचालित करता है और वैश्विक स्तर पर सभी वास्तविक समय डिजिटल लेनदेन लगभग 49% है, जिससे वास्तविक समय भुगतान के क्षेत्र में भारत के वैश्विक नेतृत्व के रूप में स्थिति सुदृढ़ हुई है। यूपीआई कई देशों में काम कर रहा है और सहयोग समझौतों के ज़रिए 23 देशों ने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को औपचारिक रूप से अपनाया है।

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार

पिछले एक वर्ष में भारत का डिजिटल आधार और मज़बूत हुआ है। मार्च 2026 तक ब्रॉडबैंड ग्राहकों (सब्सक्राइबर्स) की संख्या 106.58 करोड़ तक पहुंच गई है। भारतनेट ने 2.18 लाख ग्राम पंचायतों को हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड से जोड़ा है, जिससे ग्रामीण भारत के आखिरी कोने तक डिजिटल पहुंच संभव हो पाई है। भारत का 5जी नेटवर्क अब 99.9% ज़िलों तक पहुंच चुका है और इसके लिए 4.74 लाख टावर लगाए गए हैं। फरवरी 2026 में पूर्वोत्‍तर क्षेत्र के लिए गुवाहाटी में राष्ट्रीय डेटा केंद्र शुरू किया गया, जिससे इस क्षेत्र में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा संप्रभुता को मज़बूती मिली है।

डिजिटल शासन संबंधी ढा़ंचे का सुदृढ़ीकरण

पिछले वर्ष भारत के डिजिटल शासन संबंधी संरचना में निर्णायक प्रगति हुई है। जनवरी 2025 में जारी किए गए डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण मसौदा नियमों में सहमति-आधारित डेटा शासन के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार किया जा रहा है, जिसमें डेटा उल्लंघन को रिपोर्ट करना और डेटा संरक्षण बोर्ड का गठन जैसे उपाय शामिल हैं। ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन और विनियमन अधिनियम, जिसे अगस्त 2025 में राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली, 1 मई 2026 को लागू हुआ, और अप्रैल 2026 में ऑनलाइन गेमिंग अथोरिटी ऑफ इंडिया का गठन किया गया, जो भारत के सबसे तेजी से बढ़ते डिजिटल क्षेत्रों में से एक के लिए एक संरचित और संतुलित नियामक ढांचा प्रदान करता है।

नवाचार और स्टार्टअप परितंत्र

भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के लिए यह अभी तक का सबसे बेहतरीन वर्ष रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में अकेले उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) द्वारा 55,200 से अधिक संस्थाओं को प्रमाणित किया गया था, जो कार्यक्रम की शुरुआत के बाद से एक वर्ष में जुड़ी संस्थाओं की सबसे अधिक संख्या है। मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स से सीधे तौर पर 23.36 लाख लोगों को रोज़गार मिला है, जो रोज़गार सृजन में साल-दर-साल 36.1% की बढ़ोतरी को दर्शाता है। लगभग 48% मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक या साझीदार है, जो भारत के नवाचार विकास के समावेशी स्वरूप को प्रदर्शित करता है।

डिजिटल इंडिया के ग्यारह वर्ष पूरे होने पर, यह कार्यक्रम बड़े पैमाने पर और नई सीमाओं को छूते हुए काम कर रहा है। यह करोड़ों नागरिकों को सेवाएँ देने के साथ-साथ भविष्य के लिए एआई  इंफ्रास्ट्रक्चर, सेमीकंडक्टर क्षमता और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स परितंत्र भी तैयार कर रहा है। वैश्विक नवाचार सूचकांक में भारत की रैंकिंग 2015 के 81 से सुधर कर 2025 में 38 हो गई है और 2,23,000 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप नवाचार-आधारित विकास को बढ़ावा दे रहे हैं। ऐसे में, 'डिजिटल इंडिया' की ग्यारहवीं वर्षगांठ सिर्फ़ एक उपलब्धि का अवसर नहीं है, बल्कि यह वह आधार है जिस पर अगले दशक में  भारत का वैश्विक तकनीकी नेतृत्व आकार लेगा।

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पीके/केसी/एमके/डीके

 


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