PIB Backgrounder
भारत का उभरता हुआ टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम
भारत के भविष्य को रफ्तार देती टेक्नोलॉजी
प्रविष्टि तिथि:
22 JUN 2026 10:41AM by PIB Delhi
पिछले एक दशक में भारत की पहचान सिर्फ एक बड़े डिजिटल बाजार की नहीं रही, बल्कि वह दुनिया के सामने एक उदीयमान वैश्विक टेक-पावर बनकर उभरा है। पहले जहाँ भारत को केवल इंटरनेट प्लेटफॉर्म्स और डिजिटल सेवाओं के एक विशाल उपभोक्ता के रूप में देखा जाता था, वहीं आज हमारा देश अपने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई), स्वदेशी नवाचारों और दमदार स्टार्टअप इकोसिस्टम के दम पर पूरी दुनिया में तकनीक की दिशा तय कर रहा है। सरकार के निरंतर निवेश ने देश की तकनीकी क्षमता को न केवल विस्तार दिया है, बल्कि दुनिया में भारत की विश्वसनीयता को भी मजबूत किया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सेमीकंडक्टर्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी, सुपरकंप्यूटिंग, क्लाउड कंप्यूटिंग और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में चलाए जा रहे मिशन-मोड अभियानों ने देश में इनोवेशन की एक नई लहर पैदा कर दी है। आज हमारा भरोसेमंद डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, समावेशी डिजिटल गवर्नेंस और बढ़ती ग्लोबल पार्टनरशिप भारत को दुनिया के सामने एक विश्वसनीय तकनीकी साझेदार के रूप में स्थापित कर रहे हैं। ये तमाम उपलब्धियां 'विकसित भारत 2047' के सपने की मजबूत नींव रख रही हैं और वैश्विक पटल पर भारत की भूमिका को और बुलंद कर रही हैं।
बारह वर्ष पहले, देश ने 'विकसित भारत' के संकल्प को सिद्ध करने के लिए तकनीक को अपना मुख्य आधार बनाने की एक दृढ़ यात्रा शुरू की थी। इसके बाद देश ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण, नवाचार को सशक्त बनाने और हर नागरिक तक तकनीक की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एक निरंतर और एकजुट राष्ट्रीय प्रयास किया। सरकार ने सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्वांटम टेक्नोलॉजी, सुपरकंप्यूटिंग, ब्लॉकचेन और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी उभरती हुई तकनीकों में समर्पित 'मिशन-मोड' कार्यक्रमों के माध्यम से देश की तकनीकी क्षमता को नए शिखर पर पहुंचाया। दीर्घकालिक नीतिगत समर्थन और रणनीतिक निवेश के बल पर ही आज भारत स्वदेशी तकनीकों, सुरक्षित डिजिटल सिस्टम और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी इनोवेशन इकोसिस्टम को विकसित करने में सक्षम हो सका है।
भारत के इस बदलाव को राष्ट्रीय क्षमता विकास में किए गए बड़े निवेशों से जबरदस्त ताकत मिली। इसके लिए बड़े पैमाने पर स्किलिंग प्रोग्राम, एडवांस्ड रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टार्टअप सपोर्ट और इंडस्ट्री-एकेडेमिया सहयोग को बढ़ावा दिया गया। इसके साथ ही, देश भर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, रिसर्च हब्स, सेमीकंडक्टर प्रयोगशालाओं और उभरती प्रौद्योगिकियों के संस्थानों की स्थापना की गई। इन सभी प्रयासों ने मिलकर देश के उभरते हुए क्षेत्रों में एक भविष्य के लिए तैयार कार्यबल को विकसित करने के अभूतपूर्व अवसर पैदा किए।
देश की इस बढ़ती क्षमता और व्यापक विस्तार ने वैश्विक स्तर पर भारत की तकनीकी विश्वसनीयता को और भी मजबूत किया है। आज भारत ने एक भरोसेमंद डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई), सुरक्षित डिजिटल गवर्नेंस सिस्टम और मजबूत अंतर्राष्ट्रीय तकनीकी साझेदारियां खड़ी कर ली हैं। भारत ने पूरी दुनिया के सामने यह साबित करके दिखाया है कि कैसे समावेशन, सुलभता और किफायत को सुनिश्चित करते हुए इतनी बड़ी आबादी के स्तर पर तकनीक का सफल उपयोग किया जा सकता है। आज भारत न केवल वैश्विक तकनीकों को अपना रहा है, बल्कि एक भरोसेमंद, समावेशी और मानव-केंद्रित तकनीकी विकास को लेकर वैश्विक विमर्श और बहसों को नया आकार भी दे रहा है।
डिजिटल इंडिया प्रोग्राम: उभरती हुई तकनीकी क्षमताओं का आधारस्तंभ
वर्ष 2015 में शुरू किए गए 'डिजिटल इंडिया प्रोग्राम' ने देश भर में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करके भारत के उभरते टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम की नींव रखी। ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के तेजी से विस्तार ने हाई-स्पीड कनेक्टिविटी के लिए मजबूत आधार तैयार किया। ऑप्टिकल फाइबर कवरेज 2019 में 19.35 लाख रूट किलोमीटर से बढ़कर 2025 में 42.36 लाख रूट किलोमीटर हो गई है। इस विस्तार ने शहरी और ग्रामीण भारत में इंटरनेट की पहुंच, नेटवर्क की विश्वसनीयता और डिजिटल कनेक्टिविटी में सुधार किया है। भारत ने विश्व के सबसे तेज 5G रोलआउट में से एक को भी हासिल किया है, जिसकी सेवाएं 99.9 प्रतिशत जिलों तक पहुँच चुकी हैं। इस उन्नत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर ने पूरे देश में इंटरनेट के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया।
इंटरनेट कनेक्शन की संख्या 2014 में 25.15 करोड़ से बढ़कर 2026 में 102.86 करोड़ हो गई है। इंटरनेट के ज्यादा इस्तेमाल ने ब्रॉडबैंड पहुंच का और अधिक विस्तार किया है, जिससे ब्रॉडबैंड कनेक्शन 2014 के 6.1 करोड़ से बढ़कर दिसंबर 2025 में 99.56 करोड़ हो गए हैं।
इस डिजिटल विस्तार ने नागरिकों, स्टार्टअप्स, व्यवसायों, शैक्षणिक संस्थानों, स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों और सरकारी सेवाओं को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ दिया है। तेज और अधिक विश्वसनीय कनेक्टिविटी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, ब्लॉकचेन, फिनटेक और अन्य डेटा-संचालित प्रौद्योगिकियों के विकास को भी सक्षम बनाया है।
किफायती मूल्यों पर उपलब्ध इंटरनेट ने लोगों के बीच प्रौद्योगिकी को अपनाने की गति को और तेज कर दिया है। औसत मासिक डेटा खपत 2014 में 61.66 एमबी से बढ़कर दिसंबर 2025 में 24.01 जीबी हो गई है। इसी अवधि के दौरान, डेटा की लागत ₹269 प्रति जीबी से घटकर ₹8-10 प्रति जीबी रह गई है।. इंटरनेट की कम लागत ने टेलीमेडिसिन, ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल भुगतान, ई-कॉमर्स और ई-गवर्नेंस सेवाओं तक पहुंच का विस्तार किया है। इस व्यापक डिजिटल उपयोग ने नवाचार, स्टार्टअप्स और डिजिटल एंटरप्रेन्योरशिप के लिए एक मजबूत यूजर इकोसिस्टम का निर्माण किया है।

पिछले 12 वर्षों में, 'डिजिटल इंडिया' प्रोग्राम भारत के डिजिटल रूपांतरण की रीढ़ बनकर उभरा है। इस प्रोग्राम ने न केवल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ किया और कनेक्टिविटी का विस्तार किया, बल्कि सभी क्षेत्रों में टेक्नोलॉजी को अपनाने की प्रक्रिया भी तेज की है। इन प्रयासों ने भारत को एक वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी डिजिटल अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने के साथ-साथ भविष्य की तैयारी और उभरती प्रौद्योगिकियों में राष्ट्रीय क्षमताओं को विस्तार देने के लिए एक सशक्त आधार तैयार किया है।
भविष्य की तैयारी हेतु क्षमताओं का विकास
भारत एआई, सेमीकंडक्टर्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी और सुपरकंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में निरंतर निवेश के माध्यम से भविष्य के लिए तैयार एक तकनीकी इकोसिस्टम का निर्माण कर रहा है। मिशन-आधारित कार्यक्रम विभिन्न क्षेत्रों में स्वदेशी नवाचार, अनुसंधान क्षमताओं और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर रहे हैं। ये पहल एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और रणनीतिक प्रौद्योगिकी विकास को भी प्रोत्साहित कर रही हैं, साथ ही उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए भारत को एक विश्वसनीय और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी केंद्र के रूप में मजबूत बना रही हैं।
हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग के लिए सुपरकंप्यूटर
सुपरकंप्यूटर अत्यंत शक्तिशाली कंप्यूटर होते हैं, जिन्हें प्रति सेकंड अरबों गणनाएं करने के लिए डिजाइन किया गया है। इनका उपयोग उन जटिल समस्याओं को हल करने के लिए किया जाता है जिन्हें सामान्य कंप्यूटर कुशलतापूर्वक नहीं संभाल सकते। आज, मौसम पूर्वानुमान, क्लाइमेट मॉडलिंग, एआई और दवाएं खोजने आदि के लिए ये अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। जैसे-जैसे डेटा की मात्रा और कंप्यूटिंग की मांग बढ़ रही है, सुपरकंप्यूटर वैज्ञानिक नवाचार को गति देने और तीव्र, साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में मदद करते हैं। ये तकनीकी नेतृत्व और आर्थिक प्रतिस्पर्धा के लिए एक अनिवार्य इंफ़्रास्ट्रक्चर ढांचा बन गए हैं।
वर्ष 2015 में ₹4,500 करोड़ के परिव्यय के साथ शुरू किए गए नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन (एनएसएम) के अंतर्गत, भारत ने देश के अग्रणी संस्थानों में 47 पेटाफ्लॉप्स की संयुक्त कंप्यूटिंग क्षमता वाले 38 सुपरकंप्यूटर तैनात किए हैं। एक बड़ी उपलब्धि स्वदेशी 'परम रुद्र' सीरीज का विकास है, जिसे भारतीय-डिजाइन वाले हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के साथ तैयार किया गया है। यह हाई-परफ़ॉर्मेंस कंप्यूटिंग (एचपीसी) में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें
भारत का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम
सेमीकंडक्टर आधुनिक डिजिटल और उभरती हुई प्रौद्योगिकियों की नींव हैं। ये कम्युनिकेशन, मोबिलिटी, डिफेंस, मैन्युफैक्चरिंग आदि में इस्तेमाल होने वाले डिवाइस को चलाते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), 5जी और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी प्रौद्योगिकियां काफी हद तक सेमीकंडक्टर क्षमता पर ही निर्भर हैं।

टेक्नोलॉजिकल आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के उद्देश्य से, भारत सरकार ने दिसंबर 2021 में ₹76,000 करोड़ के परिव्यय के साथ 'सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम' शुरू किया। इस कार्यक्रम ने सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, डिस्प्ले फैब्रिकेशन, चिप डिजाइन, पैकेजिंग, टेस्टिंग, टैलेंट डेवलपमेंट और रिसर्च सहयोग को प्रोत्साहित किया। 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' से प्रेरित यह पहल भारत को ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन का हिस्सा बनाने के लिए थी। इस गति को आगे बढ़ाते हुए, केंद्रीय बजट 2026–27 में 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) 2.0' की घोषणा की गई, जिसमें वित्त वर्ष 2026–27 के लिए ₹1,000 करोड़ का प्रारंभिक प्रावधान रखा गया है। आईएसएम 2.0 मुख्य रूप से इक्विपमेंट, मटीरियल, स्वदेशी बौद्धिक संपदा (आईपी), मजबूत सप्लाई चेन, रिसर्च, ट्रेनिंग और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं पर केंद्रित है, जो भारत को सेमीकंडक्टर के एक वैश्विक प्रतिस्पर्धी केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है।
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क्या आप जानते हैं?
वर्ष 2021 में शुरू की गई डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (डीएलआई) स्कीम, भारत के फैबलेस सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को विकसित करने में एक प्रमुख भूमिका निभा रही है। 'सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम' के तहत कार्यान्वित यह योजना स्टार्टअप्स, एमएसएमई और शैक्षणिक संस्थानों को फाइनेंशियल इंसेंटिव और एडवांस्ड डिजाइन इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से सहायता प्रदान करती है। यह योजना सेमीकंडक्टर डिजाइन के संपूर्ण लाइफसाइकल को कवर करती है। स्वदेशी चिप डिजाइन क्षमताओं को सुदृढ़ करके, यह योजना आयात पर निर्भरता को कम करती है और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में घरेलू मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देती है। मार्च 2026 तक, डीएलआई योजना के तहत 24 कंपनियों को वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है और 105 आवेदकों को ईडीए टूल्स (डिजाइन टूल्स) का समर्थन मिला है। साथ ही, 16 टेप-आउट्स से सात चिप्स का निर्माण किया गया है, जिनमें एडवांस्ड 12 नैनोमीटर (12 nm) डिजाइन भी शामिल हैं।
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जून 2026 तक की स्थिति के अनुसार, 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' (आईएसएम) के तहत लगभग ₹1.64 लाख करोड़ की लागत वाली 12 परियोजनाओं को स्वीकृति दी जा चुकी है। इनमें एक सेमीकंडक्टर फैब, दो कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब और नौ पैकेजिंग यूनिट शामिल हैं। यह पहल देश में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग के स्वदेशी इकोसिस्टम का निर्माण कर रही है और आयात पर निर्भरता को कम कर रही है। अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें
क्वांटम भविष्य का सूत्रपात: एक नई तकनीकी युग की ओर
क्वांटम टेक्नोलॉजी इक्कीसवीं सदी के उन निर्णायक क्षेत्रों के रूप में उभर रही हैं जो भविष्य की दिशा तय करेंगे। ये टेक्नोलॉजी क्वांटम मैकेनिक्स या फिजिक्स के उन नियमों पर आधारित हैं, जो सब-एटॉमिक पार्टिकल्स (परमाणु से भी छोटे कणों) पर लागू होते हैं। यह क्षेत्र संभावनाओं के सिद्धांतों पर आधारित है, जहाँ तत्व एक साथ कई अवस्थाओं में विद्यमान रह सकते हैं। इस तकनीक पर आधारित टूल्स अत्यंत शक्तिशाली कंप्यूटिंग क्षमता से लैस हैं और सामान्य उपकरणों की तुलना में कहीं अधिक संवेदनशील और सुरक्षित हैं। इनमें स्वास्थ्य सेवा, वित्त, लॉजिस्टिक्स और क्लाइमेट मॉडलिंग जैसे क्षेत्रों में कई अवस्थाओं में परिवर्तन लाने की क्षमता है। साथ ही, ये बेहद सुरक्षित कम्युनिकेशन और एडवांस्ड डेटा प्रोसेसिंग को संभव बनाते हैं। जैसे-जैसे राष्ट्र इन क्षमताओं को हासिल करने के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, क्वांटम प्रौद्योगिकियाँ आर्थिक विकास, तकनीकी नेतृत्व और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कारक बनती जा रही हैं।

क्वांटम तकनीक के रणनीतिक महत्व को पहचानते हुए, सरकार ने अप्रैल 2023 में ₹6,003.65 करोड़ के परिव्यय के साथ 'नेशनल क्वांटम मिशन' (एनक्यूएम) को मंजूरी दी। यह मिशन चार प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है: क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम कम्युनिकेशन, क्वांटम सेंसिंग एवं मेट्रोलॉजी और क्वांटम मटीरियल्स एंड डिवाइसेस। इस मिशन का उद्देश्य स्वदेशी क्वांटम प्रौद्योगिकियों का विकास करना, रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना, कुशल प्रतिभाओं का निर्माण करना, स्टार्टअप्स को सपोर्ट करना, उद्योग-शिक्षा जगत के बीच सहयोग को बढ़ावा देना और भारत को विश्व के अग्रणी क्वांटम प्रौद्योगिकी संपन्न राष्ट्रों की पंक्ति में स्थापित करना है।
इसके परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। देश के अग्रणी संस्थानों में चार समर्पित थीमैटिक हब (विषय-आधारित केंद्र) स्थापित किए गए हैं, जो 43 विभिन्न संगठनों के 152 से अधिक शोधकर्ताओं को एक साथ जोड़कर इस मिशन को गति दे रहे हैं। इस मिशन ने 17 स्टार्टअप्स को सहायता प्रदान की है, जिनमें नौ डीप-टेक वेंचर्स भी शामिल हैं, जो भारत के इनोवेशन इकोसिस्टम को और अधिक सुदृढ़ बना रहे हैं। भारत ने 1,000 किलोमीटर के सुरक्षित क्वांटम कम्युनिकेशन नेटवर्क का सफल प्रदर्शन किया है और यह उपलब्धि निर्धारित समय से छह वर्ष पूर्व ही प्राप्त कर ली है। इस दृष्टि को और आगे बढ़ाते हुए, फरवरी 2026 में अमरावती में भारत की पहली 'क्वांटम वैली' की आधारशिला रखी गई। यह भविष्य के क्वांटम अनुसंधान, नवाचार और रणनीतिक क्षमताओं के लिए एक समर्पित इकोसिस्टम का निर्माण करेगी। अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें
भारत का एआई ट्रांसफॉर्मेशन
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से काम करने वाले ऑटोमेशन, बेहतर प्रोडक्टिविटी और आधुनिक औद्योगिक नवाचार के माध्यम से अर्थव्यवस्थाओं को परिवर्तित कर रहा है। अपने मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और बड़ी टेक्नोलॉजी वर्कफोर्स के सहयोग से, भारत भी एक प्रमुख ग्लोबल एआई इकोसिस्टम के रूप में उभरा है।

इस प्रगति में तेजी लाने के लिए, सरकार ने 2024 में ₹10,300 करोड़ से अधिक के परिव्यय के साथ 'इंडिया एआई मिशन' को मंजूरी दी। यह मिशन स्वदेशी एआई कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण और हाई-एंड जीपीयू सुविधाओं तक पहुंच बढ़ाने पर केंद्रित है। इसके साथ ही, यह मिशन एआई रिसर्च, स्टार्टअप डेवलपमेंट, युवाओं के कौशल विकास और सार्वजनिक सेवा में नवाचार को भी समर्थन देता है। तकनीकी विकास के साथ-साथ, यह मिशन सुरक्षित, समावेशी और जिम्मेदार एआई सिस्टम को बढ़ावा देता है। इन प्रयासों का उद्देश्य भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए एक वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
अपनी शुरुआत के दो वर्षों के भीतर, इस मिशन ने भारत के एआई इकोसिस्टम को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मार्च 2026 तक की स्थिति के अनुसार, भारत में लगभग 1.8 लाख स्टार्टअप्स हैं, जिनमें से लगभग 89 प्रतिशत नए स्टार्टअप्स एआई समाधानों का उपयोग कर रहे हैं। एडवांस्ड एआई इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंच को आसान बनाने के लिए 38,000 से अधिक जीपीयू की एक कॉमन कंप्यूटिंग सुविधा स्थापित की जा रही है। एआई कोश प्लेटफॉर्म पर 20 क्षेत्रों में 12,115 डेटासेट और 306 एआई मॉडल होस्ट किए गए हैं, जो बड़े पैमाने पर नवाचार और अनुसंधान को सक्षम बना रहे हैं। ये पहल कंप्यूटिंग पावर, डेटा और एआई टूल्स तक पहुंच बढ़ा रही है, जिससे भारत को एआई विकास के लिए एक अग्रणी केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद मिल रही है। अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें
क्लाउड कंप्यूटिंग के माध्यम से भविष्य को गति देना
क्लाउड, इंटरनेट के माध्यम से स्टोरेज, सर्वर, सॉफ्टवेयर और डेटा प्रोसेसिंग जैसी कंप्यूटिंग सेवाएं प्रदान करता है, जो गवर्नेंस, बिजनेस और वित्त जैसे विविध क्षेत्रों में स्केलेबल, लागत-प्रभावी और सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करती हैं। जैसे-जैसे भारत का डिजिटल इकोसिस्टम विस्तृत हो रहा है, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर डेटा सोवर्जिनिटी, डिजिटल गवर्नेंस और जन-सेवा वितरण के लिए एक अपरिहार्य आवश्यकता बन गया है।

भारत के स्वदेशी क्लाउड इकोसिस्टम की शुरुआत 2014 में इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) द्वारा 'मेघराज' के शुभारंभ के साथ हुई, जो सरकार के राष्ट्रीय क्लाउड प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करता है। इसके उपरांत, 'मेघराज 2.0' ने हाइब्रिड क्लाउड आर्किटेक्चर और बेहतर साइबर सुरक्षा के माध्यम से इस इकोसिस्टम को और अधिक सशक्त बनाया। इसने सरकारी विभागों को डेटा पर अपना पूर्ण नियंत्रण बनाए रखते हुए, एडवांस्ड क्लाउड संसाधनों का सुरक्षित रूप से उपयोग करने में सक्षम बनाया है।
जून 2026 तक की स्थिति के अनुसार, मेघराज क्लाउड प्लेटफॉर्म को अपनाने वाले सरकारी विभागों की संख्या 2015-16 के 342 से बढ़कर 2,323 हो गई है। यह प्लेटफॉर्म डिजीलॉकर, माईगव और नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल जैसे प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को संचालित करते हुए सुशासन को नई गति प्रदान कर रहा है।
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क्या आप जानते हैं?
केंद्रीय बजट 2026-27 ने क्लाउड और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को गति देने के लिए प्रमुख नीतिगत प्रोत्साहन घोषित किए हैं। इसमें 2047 तक टैक्स हॉलिडे, डेटा सेंटर सेवाओं के लिए 15 प्रतिशत का 'सेफ हार्बर' मार्जिन और आईटी सेवाओं के लिए सेफ हार्बर मानदंडों के तहत पात्रता सीमा को ₹300 करोड़ से बढ़ाकर ₹2,000 करोड़ करना शामिल है। ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस को और बेहतर बनाने के लिए ऑटोमेटेड अप्रूवल सिस्टम की भी शुरुआत की गई है।
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ब्लॉकचेन: डिजिटल नवाचार का नया युग
ब्लॉकचेन एक सुरक्षित और छेड़छाड़-रहित डिजिटल लेजर है, जो मध्यवर्ती इकाई के बिना एक डिस्ट्रिब्यूटेड नेटवर्क पर ट्रांज़ैक्शन को रिकॉर्ड करता है। पारदर्शिता, अपरिवर्तनीयता, ट्रेस करने की क्षमता और विकेंद्रीकरण जैसी इसकी मुख्य विशेषताएं इसे गवर्नेंस, वित्त, सप्लाई चेन, जूडिशरी और डिजिटल सर्विस डिलीवरी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती हैं। इस क्षमता को पहचानते हुए, इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) ने 2021 में ₹64.76 करोड़ के परिव्यय के साथ 'नेशनल ब्लॉकचेन फ्रेमवर्क' (एनबीएफ) की शुरुआत की। इसका उद्देश्य नागरिक-केंद्रित गवर्नेंस और डिजिटल विश्वास के लिए एक सुरक्षित, स्केलेबल और इंटरऑपरेबल ब्लॉकचेन इकोसिस्टम का निर्माण करना है।
अनुकूल सरकारी नीतियों के समर्थन से, भारत का ब्लॉकचेन इकोसिस्टम विश्वास्या ब्लॉकचेन स्टैक, एनबीएफलाइट सैंडबॉक्स, प्रामाणिक ऐप वेरिफिकेशन सिस्टम और नेशनल ब्लॉकचेन पोर्टल जैसे स्वदेशी प्लेटफॉर्मों के माध्यम से विस्तारित हुआ है। यह फ्रेमवर्क भुवनेश्वर, पुणे और हैदराबाद स्थित एनआईसी डेटा सेंटरों के माध्यम से ब्लॉकचेन-एज-अ-सर्विस (BaaS) को सहायता प्रदान करता है। ब्लॉकचेन एप्लिकेशन पहले से ही सुरक्षित दस्तावेज सत्यापन, न्यायिक रिकॉर्ड, दवा सप्लाई-चेन ट्रैकिंग और प्रॉपर्टी मैनेजमेंट के जरिए गवर्नेंस को बदल रहे हैं। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ रही है और धोखाधड़ी में कमी आ रही है, बल्कि यह 'डिजिटल इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' के विजन को भी मजबूती प्रदान कर रहा है।
अक्टूबर 2025 तक, ब्लॉकचेन प्लेटफॉर्म के माध्यम से 34 करोड़ से अधिक संपत्ति दस्तावेजों का सत्यापन किया जा चुका है, जिससे छेड़छाड़-रहित रिकॉर्ड तैयार हुए हैं और भूमि संबंधी विवादों में कमी आई है। एनआईसी ने अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी में एक सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस की स्थापना की है। भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने डिजिटल रुपया (e₹) के पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए हैं, जबकि भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने स्पैम पर अंकुश लगाने के लिए ब्लॉकचेन-आधारित डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी (डीएलटी) को अपनाया है। इसके अतिरिक्त, नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) भी सुरक्षित ऑडिट ट्रेल के लिए ब्लॉकचेन का उपयोग कर रही है। अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें
डेटा सेंटर: भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की आधारशिला
डेटा सेंटर ऐसी सुरक्षित सुविधाएं हैं जो डिजिटल सूचनाओं को स्टोर करने, प्रोसेस करने और उसे एक जगह से दूसरी जगह भेजने का काम करती हैं। ये क्लाउड सेवाओं, एआई, ब्लॉकचेन एप्लिकेशन और भविष्य की प्रौद्योगिकियों जैसे क्वांटम कंप्यूटिंग का आधार हैं। विश्वसनीय डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, सुरक्षित डिजिटल सेवाओं और रियल-टाइम डेटा एक्सेस को सक्षम बनाती है। भारत के लिए, यह तकनीकी आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करता है, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) का सपोर्ट करता है, निवेश को आकर्षित करता है, उच्च-कुशल रोजगार के अवसर पैदा करता है और वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में देश की भूमिका को बढ़ाता है। भारत के डेटा सेंटर क्षेत्र ने तीव्र विस्तार देखा है, जहाँ इसकी क्षमता 2020 के लगभग 375 एमडब्ल्यू से बढ़कर 2025 तक लगभग 1,500 एमडब्ल्यू हो गई है। मुंबई, नवी मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु, नोएडा और जामनगर में प्रमुख डेटा सेंटर हब के रूप में उभरकर सामने आए हैं। साथ ही, आंध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में कई बड़े हाइपरस्केल और एआई-केंद्रित डेटा सेंटरों का विकास किया जा रहा है, जो भारत के भविष्य के लिए तैयार डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम को और अधिक सशक्त बना रहे हैं। अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें

बायोटेक्नोलॉजी: इनोवेशन-आधारित विकास का अगला चरण
बायोटेक्नोलॉजी एक अहम टेक्नोलॉजी सेक्टर के रूप में उभर रही है, जो टेक्नोलॉजी-आधारित इंडस्ट्रियल एप्लीकेशन में इनोवेशन को बढ़ावा दे रही है। जीनोमिक्स, सटीक चिकित्सा, सिंथेटिक बायोलॉजी और डिजिटल बायोटेक्नोलॉजी में हुई प्रगति अर्थव्यवस्थाओं को रूपांतरित कर रही है और स्वास्थ्य एवं खाद्य सुरक्षा प्रणालियों को सुदृढ़ बना रही है। जैसे-जैसे वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं बायो-इकोनॉमी से जुड़ी ग्रोथ में निवेश बढ़ा रही हैं, बायोटेक्नोलॉजी भविष्य की इंडस्ट्रियल कॉम्पिटिटिवनेस, साइंटिफिक इनोवेशन और आर्थिक मजबूती का एक अहम आधार बनती जा रही है।
पिछले एक दशक में, भारत सरकार ने मिशन-संचालित नीतियों और रणनीतिक निवेशों के माध्यम से बायोटेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को अत्यधिक सहयोग प्रदान किया है। बायोटेक्नोलॉजी विभाग (डीबीटी) और बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (बीआईआरएसी) ने इनोवेशन, एंटरप्रेन्योरशिप और बायो-मैन्युफैक्चरिंग में तेजी लाने के लिए लक्षित खास कदम उठाए हैं। प्रमुख पहलों में 2017 में ₹1,500 करोड़ के परिव्यय के साथ स्वीकृत नेशनल बायोफार्मा मिशन (एनबीएम), 2023 में शुरू की गई बायो-ई3 नीति, बायोनेस्ट इनक्यूबेटर, और 'इंटेंसिफाइंग द इम्पैक्ट ऑफ इंडस्ट्रियल इनोवेशन' (i4) तथा 'प्रमोटिंग एकेडमिक रिसर्च कन्वर्जन टू एंटरप्राइज' (पीएसीई) जैसी नवाचार योजनाएं शामिल हैं। सरकार ने स्वदेशी नवाचार और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बायोटेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए ट्रांसलेशनल रिसर्च इन्फ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर सहायता और बायोटेक्नोलॉजी इनक्यूबेशन सुविधाओं का भी विस्तार किया है।
भारत के जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र ने पिछले एक दशक में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है। इसने 2023 में 150 बिलियन अमेरिकी डॉलर के आंकडे को पार कर लिया, जिससे 'नेशनल बायोटेक डेवलपमेंट स्ट्रैटेजी 2021' का लक्ष्य समय से दो साल पहले ही हासिल कर लिया गया। 2024 के अंत तक यह क्षेत्र 165.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। नवाचार क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए, डीबीटी-बीआईआरएसी ने 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 94 बायो-इंक्यूबेटर स्थापित किए हैं और स्टार्टअप्स एवं अनुसंधान-संचालित उद्यमों को 50 लाख रुपये से लेकर 10.5 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की है।
भारत, निरंतर सरकारी निवेश और उन्नत प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम में मिशन-मोड प्रोग्राम के माध्यम से भविष्य की तैयारियों को मजबूत कर रहा है। रणनीतिक नीतिगत समर्थन और उद्योग जगत की साझेदारियां स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास और नवाचार-आधारित विकास को गति प्रदान कर रही हैं। ये पहल एक सशक्त राष्ट्रीय नवाचार इकोसिस्टम का निर्माण कर रही हैं और भारत को अगली पीढ़ी की टेक्नोलॉजी के लिए एक भरोसेमंद ग्लोबल हब के रूप में स्थापित कर रही हैं। सरकार के नेतृत्व में, भारत 'विकसित भारत' के विजन के अनुरूप एक ग्लोबल टेक्नोलॉजी पावरहाउस के रूप में निरंतर उभर रहा है।
नवाचार की ओर अग्रसर भारत: शिक्षा, अनुसंधान और कौशल से निर्मित आत्मनिर्भरता का मार्ग
भविष्य को आकार देने वाली प्रौद्योगिकियों के लिए केवल इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश की ही आवश्यकता नहीं है, बल्कि इसके लिए एक कुशल कार्यबल, मजबूत अनुसंधान संस्थान और नवाचार की संस्कृति का होना भी अनिवार्य है। इस आवश्यकता को पहचानते हुए, भारत ने ह्यूमन कैपिटल बनाने, रिसर्च इकोसिस्टम को मज़बूत करने और अगली पीढ़ी को टेक्नोलॉजी पर आधारित भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में व्यापक प्रयास शुरू किए हैं। अनुसंधान, कौशल विकास, उच्च शिक्षा और उद्योग जगत की साझेदारियों में निवेश के माध्यम से, भारत सरकार उन आधारभूत स्तंभों का निर्माण कर रही है जो उभरते हुए प्रौद्योगिकी युग में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए आवश्यक हैं।
अनुसंधान और विकास इकोसिस्टम को मजबूत करना
इस दिशा में एक बड़ा कदम 2024 में 'अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन' (एएनआरएफ) का परिचालन है। एएनआरएफ उच्च-प्रभाव वाले अनुसंधान और नवाचार को गति देने के लिए शिक्षा जगत, उद्योग, स्टार्टअप्स और सरकारी संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है। इसके फोकस क्षेत्रों में एआई, सेमीकंडक्टर्स, एडवांस्ड मटीरियल और अन्य अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियां शामिल हैं। 'मिशन फॉर एडवांसमेंट इन हाई-इम्पैक्ट एरियाज' (एमएएचए), 'पार्टनरशिप्स फॉर एक्सीलरेटेड इनोवेशन एंड रिसर्च' (पीएआईआर) और 'एएनआरएफ ट्रांसलेशनल रिसर्च एंड इनोवेशन' (एटीआरआई) जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से, यह फाउंडेशन लैब में हुए रिसर्च को व्यावहारिक जीवन में इस्तेमाल के लायक बनाने में मदद कर रहा है।
एएनआरएफ ने युवा शोधकर्ताओं, पोस्ट-डॉक्टरल स्कॉलर्स और विदेशों में कार्यरत भारतीय वैज्ञानिकों के लिए फेलोशिप और ग्रांट भी प्रारंभ किए हैं। मार्च 2026 तक, हाई-इम्पैक्ट टेक्नोलॉजी वाले क्षेत्रों में 264.70 करोड़ रुपये की ग्रांट दी जा चुकी थी। डीप-टेक नवाचार को और अधिक मजबूती प्रदान करने के लिए, सरकार ने जुलाई 2025 में 1 लाख करोड़ रुपये के कोष के साथ 'अनुसंधान विकास और नवाचार' (आरडीआई) योजना को मंजूरी दी है। एएनआरएफ के अंतर्गत संचालित और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा कार्यान्वित यह योजना, निजी क्षेत्र के अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए दीर्घकालिक और सुलभ वित्तीय सहायता प्रदान करती है। इसके प्रमुख क्षेत्रों में एआई, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियां, डीप-टेक स्टार्टअप और रणनीतिक उद्योग शामिल हैं।
एएनआरएफ और आरडीआई वैज्ञानिक अनुसंधान, औद्योगिक नवाचार और आर्थिक विकास के मध्य एक सशक्त आधार का निर्माण कर रहे हैं।
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क्या आप जानते हैं?
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्किल्स (आईआईएस) के मुंबई और अहमदाबाद परिसरों का पहला चरण, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत 9 अक्टूबर 2024 को शुरू हुआ, जिसमें टाटा आईआईएस ऑपरेटिंग पार्टनर है। इन संस्थानों का मुख्य उद्देश्य इंडस्ट्री 4.0 के लिए एक कुशल कार्यबल तैयार करना है। इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मेक्ट्रोनिक्स, डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग, डेटा एनालिटिक्स, फैक्ट्री ऑटोमेशन और एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग जैसे आधुनिक क्षेत्रों में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है, जो भारत के उभरते प्रौद्योगिकी और उन्नत विनिर्माण इकोसिस्टम को मजबूती प्रदान कर रहा है।
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उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए भारत का कौशल विकास
भारत की प्रौद्योगिकी महत्वाकांक्षाओं को साकार करने के लिए एक ऐसा कार्यबल अनिवार्य है जो उभरते डिजिटल कौशल से सुसज्जित हो। इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए, इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) ने नैस्कॉम के साथ साझेदारी में 2018 में 'फ्यूचरस्किल्स प्राइम' कार्यक्रम लॉन्च किया। यह कार्यक्रम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बिग डेटा एनालिटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), साइबर सिक्योरिटी, ब्लॉकचेन और ऑगमेंटेड एवं वर्चुअल रियलिटी (एआर/वीआर) जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में स्किलिंग, री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग पर केंद्रित है। शिक्षार्थी उद्योग-मानकों के अनुरूप ऑनलाइन पाठ्यक्रमों तक पहुंच प्राप्त कर सकते हैं और सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र अर्जित कर सकते हैं।
फ्यूचरस्किल्स प्राइम भारत की सबसे बड़ी डिजिटल कौशल पहल में से एक के रूप में उभरी है। मार्च 2026 तक, इस प्लेटफॉर्म पर 27.53 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने पंजीकरण कराया है, जबकि 17.14 लाख से अधिक शिक्षार्थियों ने नामांकन या प्रशिक्षण पूर्ण कर लिया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि लगभग 80 प्रतिशत शिक्षार्थी टियर-2 और टियर-3 शहरों से हैं, जो प्रमुख शहरी केंद्रों से आगे अवसरों के विस्तार में मदद कर रहे हैं। यह व्यापक भागीदारी भारत की डिजिटल टैलेंट पाइपलाइन को मजबूत कर रही है और प्रौद्योगिकी अर्थव्यवस्था में समावेशन को बढ़ावा दे रही है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (NIELIT) ने तकनीकी प्रतिभा को विकसित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अपने 56 केंद्रों, 750 संबद्ध संस्थानों और 9,000 से अधिक सुविधा केंद्रों के माध्यम से कार्यरत, NIELIT एआई, साइबर सुरक्षा, ब्लॉकचेन, आईओटी (आईओटी), क्लाउड कंप्यूटिंग, तथा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिज़ाइन और मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान करता है। जुलाई 2024 में डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी का दर्जा प्राप्त करने वाले इस संस्थान ने अब तक देश भर में एक करोड़ से अधिक उम्मीदवारों के लिए परीक्षाएं आयोजित की हैं। NIELIT ने 27 केंद्रों पर इंडियाएआई डेटा लैब्स स्थापित किए हैं और आकांक्षी जिलों में डिजिटल कौशल कार्यक्रम कार्यान्वित किए हैं। ये प्रयास एक भौगोलिक रूप से विविध और भविष्य के लिए तैयार कार्यबल के निर्माण में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।

NIELIT के केंद्र निम्नलिखित स्थानों पर स्थित हैं: अगरतला, आइजोल, अजमेर, औरंगाबाद, बालासोर, भुवनेश्वर, बीकानेर, बक्सर, कालीकट, चंडीगढ़, चेन्नई, चित्रदुर्ग, चुचुयिमलांग, चुराचांदपुर, दमन, दिल्ली, पूर्वी दिल्ली, दक्षिण-पश्चिम दिल्ली, डिब्रूगढ़, दीमापुर, गंगटोक, गोरखपुर, गुवाहाटी, हरिद्वार, हैदराबाद, इंफाल, ईटानगर, जम्मू, जोरहाट, कारगिल, कोहिमा, कोलकाता, कोकराझार, कुरुक्षेत्र, लेह, लखनऊ, लुंगलेई, माजुली, मंडी, मुजफ्फरपुर, नोएडा, पासीघाट, पटना, पाली, पीलीभीत, रांची, रोपड़, सेनापति, शिलांग, शिमला, सिलचर, श्रीनगर, तेजपुर, तेजू, तिरुपति और तुरा।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षमता का विस्तार
भारत एआई के क्षेत्र में लीडरशिप हासिल करने के लिए खास संस्थानों में भी निवेश कर रहा है। "मेक एआई इन इंडिया और मेक एआई वर्क फॉर इंडिया" के विजन के तहत, सरकार ने कुल ₹1,490 करोड़ के बजट से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में चार सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस (सीओई) स्थापित किए हैं। ये सेंटर शिक्षा, हेल्थकेयर, सस्टेनेबल शहरों और खेती पर ध्यान केंद्रित करते हैं और इनका नेतृत्व क्रमशः इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मद्रास, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस बेंगलुरु, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कानपुर और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी रोपड़ कर रहे हैं।

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क्या आप जानते हैं?
उत्कृष्टता केंद्र पहले से ही प्रैक्टिकल समाधान प्रदान कर रहे हैं। 'सस्टेनेबल सिटीज़ CoE (उत्कृष्टता केंद्र)' एआई-आधारित यातायात और बाढ़ पूर्वानुमान प्रणाली विकसित कर रहा है। 'हेल्थकेयर CoE' ओरल कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, रेटिना से जुड़ी बीमारियों और डायबिटीज़ जैसी बीमारियों का पता लगाने के लिए एआई उपकरण तैयार कर रहा है। 'एग्रीकल्चर CoE' ने क्लाइमेट-स्मार्ट खेती को समर्थन देने और कृषि संबंधी निर्णय लेने की क्षमता में सुधार करने के लिए ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन लगाए हैं। ये पहल प्रदर्शित करती हैं कि एआई किस प्रकार भारत की नवाचार क्षमताओं को मजबूत करते हुए वास्तविक दुनिया की चुनौतियों का समाधान कर सकती है।
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इन प्रयासों को और अधिक बेहतर बनाने के उद्देश्य से, कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय द्वारा जुलाई 2025 में स्किलिंग फॉर एआई रेडिनेस (एसओएआर) कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। यह कार्यक्रम कक्षा 6 से कक्षा 12 तक के स्कूली छात्रों पर केंद्रित है, जिसमें 15-15 घंटे के तीन विशेष मॉड्यूल शामिल हैं और यह स्किल इंडिया डिजिटल हब पर उपलब्ध सेल्फ-पेस्ड पाठ्यक्रमों के माध्यम से एआई साक्षरता को व्यापक रूप से बढ़ावा देता है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत उद्योग-मानकों के अनुरूप तैयार किया गया पाठ्यक्रम, नेशनल स्किल्स क्वालिफिकेशन्स फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) से मान्यता प्राप्त माइक्रो-क्रेडेंशियल्स, तथा शिक्षकों एवं छात्रों के लिए समर्पित विशेष मॉड्यूल प्रदान किए जाते हैं।
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क्या आप जानते हैं?
स्किल इंडिया डिजिटल हब (एसआईडीएच) भारत के स्किल डेवलपमेंट इकोसिस्टम के लिए एक डिजिटल आधारस्तंभ के रूप में उभरा है। मार्च 2026 तक, 1.5 करोड़ से अधिक उम्मीदवारों ने इस प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण कराया है, जहाँ 23 भाषाओं में 1,000 से अधिक पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। SIDH एक एकल विश्वसनीय डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से कौशल विकास, रोजगार, अप्रेंटिसशिप और उद्यमिता के अवसरों को एकीकृत करता है, जो देश भर में करियर के रास्तों और आजीवन सीखने के अवसरों तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करता है।
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फरवरी 2026 तक, 'एआई टू बी अवेयर' के अंतर्गत 15,643, 'एआई टू एस्पायर' के अंतर्गत 5,885, और 'एआई टू एक्वायर' के अंतर्गत 4,065 प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त, 'एआई फॉर एजुकेटर्स' कार्यक्रम के तहत 4,178 प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं। यह कार्यक्रम अब माइक्रोसॉफ्ट, नैस्कॉम, सीआईआई और अन्य उद्योग भागीदारों के सहयोग से विकसित 50 एआई और एआई-एप्लीकेशन कोर्स प्रदान करता है, जो एआई कौशल तक पहुंच को आसान बनाने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।

भारत में सेमीकंडक्टर टैलेंट पाइपलाइन तैयार करना
सेमीकंडक्टर आधुनिक टेक्नोलॉजी के लिए बहुत ज़रूरी हैं, जो टैलेंट डेवलपमेंट को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाता है। इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए, इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) द्वारा 2022 में 'चिप्स टू स्टार्टअप' (C2S) कार्यक्रम शुरू किया गया, जिसका पाँच वर्षों के लिए कुल परिव्यय 250 करोड़ रुपये है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सेमीकंडक्टर और चिप डिजाइन के क्षेत्र में अंडरग्रेजुएट, पोस्ट-ग्रेजुएट और डॉक्टरेट स्तर पर 85,000 ऐसे प्रोफेशनल्स तैयार करना है जो इंडस्ट्री में काम करने के लिए पूरी तरह तैयार हों। यह स्टार्टअप इनक्यूबेशन, पेटेंट बनाने, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और वीएलएसआई, एप्लिकेशन-स्पेसिफिक इंटीग्रेटेड सर्किट (एएसआईसी), सिस्टम-ऑन-चिप (एसओसी) डिजाइन तथा एम्बेडेड सिस्टम जैसे क्षेत्रों में एडवांस्ड रिसर्च को भी बढ़ावा देता है। अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें
इस कार्यक्रम ने पहले ही उल्लेखनीय परिणाम दिए हैं। लगभग एक लाख लोगों ने 400 संगठनों में साझा 'नेशनल इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन' (ईडीए) इंफ्रास्ट्रक्चर का लाभ उठाया है, जिसमें 300 शैक्षणिक संस्थान और 95 स्टार्टअप शामिल हैं। 265 से अधिक उद्योग-नेतृत्व वाले प्रशिक्षण कार्यक्रमों ने चिप डिज़ाइन क्षमताओं को और अधिक मजबूत किया है। सेमीकंडक्टर प्रयोगशाला (एससीएल), मोहाली स्थित 'ChipIN' केंद्र ने छह साझा वेफर रन आयोजित किए हैं, जिससे 46 संस्थानों से 122 चिप डिज़ाइन सबमिशन संभव हुए हैं। सहभागी संस्थानों ने 75 से अधिक पेटेंट दाखिल किए हैं, जबकि 500 से अधिक आईपी कोर, एएसआईसी और एसओसी डिज़ाइन विकास के चरण में हैं। ये प्रयास एक मजबूत सेमीकंडक्टर प्रतिभा इकोसिस्टम का निर्माण कर रहे हैं और चिप डिज़ाइन व मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक वैश्विक केंद्र बनने की भारत की महत्वाकांक्षा का समर्थन कर रहे हैं।
भारत की उभरती तकनीकी महत्वाकांक्षाओं की नींव बहुत सरल है—अर्थात जनशक्ति। अनुसंधान, नवाचार, शिक्षा और डिजिटल कौशल में निरंतर निवेश के माध्यम से, देश अगली तकनीकी क्रांति के लिए आवश्यक ह्यूमन कैपिटल का निर्माण कर रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर से लेकर क्वांटम टेक्नोलॉजी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग तक, ये पहल शोधकर्ताओं, उद्यमियों, इंजीनियरों और इनोवेटर्स की एक नई पीढ़ी तैयार कर रही है। जैसे-जैसे ये क्षमताएं विस्तार ले रही हैं, भारत न केवल अपने कार्यबल को भविष्य के लिए तैयार कर रहा है, बल्कि स्वयं को ज्ञान, नवाचार और तकनीकी नेतृत्व के वैश्विक केंद्र के रूप में भी स्थापित कर रहा है।
ग्लोबल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत की बढ़ती विश्वसनीयता
ग्लोबल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत की बढ़ती विश्वसनीयता इसके भरोसेमंद डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, बड़े पैमाने पर टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के विस्तार में परिलक्षित होती है। देश ने यह प्रदर्शित किया है कि किस प्रकार समावेशी, सुरक्षित और किफायती तकनीकी समाधानों को जनसंख्या के व्यापक स्तर पर लागू किया जा सकता है। मजबूत नीतिगत समर्थन और नवाचार-आधारित विकास के माध्यम से, भारत भविष्य की तकनीकों के विकास में एक विश्वसनीय वैश्विक भागीदार के रूप में तेजी से उभर रहा है।
ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत की बेहतर होती स्थिति:
भारत ने ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में अपनी रैंकिंग में उल्लेखनीय प्रगति करते हुए वर्ष 2015 के 81वें स्थान से वर्ष 2025 में 38वें स्थान पर जगह बनाई है। यह उपलब्धि एक ग्लोबल इनोवेशन हब के रूप में भारत के तीव्र विकास को प्रतिबिंबित करती है। 'स्टार्ट-अप इंडिया', 'डिजिटल इंडिया' और 'अटल इनोवेशन मिशन' जैसी पहलों ने उद्यमिता, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, अनुसंधान और प्रौद्योगिकी विकास को अभूतपूर्व गति प्रदान की है। सरकार के मजबूत समर्थन, स्टार्टअप इकोसिस्टम, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी फ्रेमवर्क और इंडस्ट्री-एकेडेमिया के बीच सहयोग ने भारत की नवाचार क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को और अधिक सुदृढ़ किया है।

नेटवर्क रेडिनेस इंडेक्स (एनआरआई)
नेटवर्क रेडिनेस इंडेक्स (एनआरआई) पोर्टुलन्स इंस्टीट्यूट द्वारा प्रकाशित किया जाता है, जो यह मूल्यांकन करता है कि अर्थव्यवस्थाएं आर्थिक विकास, गवर्नेंस और इनोवेशन के लिए सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) का उपयोग किस प्रकार कर रही हैं। पिछले एक दशक में इस सूचकांक में भारत की निरंतर प्रगति, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, टेलीकॉम कनेक्टिविटी और टेक्नोलॉजी के मामले में हुए व्यापक सुधारों को दर्शाती है। डिजिटल इंडिया, भारतनेट, स्टार्टअप इंडिया, दूरसंचार सुधारों और भारत 6जी विजन जैसी पहलों ने डिजिटल पहुंच, नवाचार और ईज़ ऑफ़ डूइंग बिजनेस को अत्यधिक सशक्त किया है। इन बदलावों ने भारत को एक तीव्र गति से बढ़ती वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था और भविष्य की तकनीकों के उभरते हुए लीडर के रूप में स्थापित किया है।
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी)
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा स्थापित ऐसे विशेष केंद्र हैं, जिन्हें भारत जैसे देशों में सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सिक्योरिटी, फाइनेंस, रिसर्च और डिजिटल ऑपरेशन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के प्रबंधन के लिए स्थापित किया गया है।
समय के साथ, भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) साधारण बैक-ऑफिस सपोर्ट यूनिट्स से विकसित होकर वैश्विक उद्यमों के लिए नवाचार और मूल्य सृजन के स्ट्रैटेजिक हब के रूप में उभरे हैं। भारत में वर्तमान में 3,728 यूनिट्स में 2,100 से अधिक जीसीसी कार्यरत हैं, जो लगभग 2.36 मिलियन प्रोफेशनल्स को रोजगार प्रदान करते हैं। 2021 के बाद स्थापित हुए लगभग आधे जीसीसी अपनी स्थापना के समय से ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर केंद्रित रहे हैं। यह विकास एक विशाल टैलेंट पूल, सेंटर्स ऑफ़ एक्सीलेंस और यूनिवर्सिटीज़ व स्टार्टअप्स के साथ सहयोग से समर्थित है। 'डिलीवरी सेंटर्स' से 'एंटरप्राइज नर्व सेंटर्स' की ओर यह बदलाव भारत के कुशल वर्कफ़ोर्स, इनोवेशन इकोसिस्टम और डिजिटल क्षमताओं में वैश्विक विश्वास को दर्शाता है। यह भारत को अत्याधुनिक तकनीकों और भविष्य की आर्थिक वृद्धि के एक प्रमुख प्रेरक के रूप में स्थापित करता है। अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें
2023 में गठित 'भारत 6जी एलायंस' (B6GA) एक उद्योग-नेतृत्व वाली और सरकार द्वारा सुगम बनाई गई पहल है, जो दूरसंचार सेवा प्रदाताओं, शिक्षाविदों, अनुसंधान संस्थानों और मानक संगठनों को एक मंच पर लाती है। यह एलायंस स्वदेशी 6जी अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देता है, ताकि एक आत्मनिर्भर और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी एडवांस्ड कम्युनिकेशन इकोसिस्टम का निर्माण किया जा सके। इसका विशेष ध्यान मल्टी-चिप मॉड्यूल (एमसीएम), सिस्टम-ऑन-चिप (एसओसी) और उन्नत इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) एप्लीकेशन पर है। B6GA सार्वजनिक और निजी हितधारकों के लिए मिलकर काम करने का एक प्लेटफॉर्म देता है और इसने स्पेक्ट्रम, टेक्नोलॉजी, एप्लीकेशन, ग्रीन और सस्टेनेबिलिटी तथा यूज़ केसेस से जुड़े सात वर्किंग ग्रुप बनाए हैं।

क्या आप जानते हैं?
न्यू एंड इमर्जिंग स्ट्रटैजिक टेक्नोलॉजीज डिवीजन (एनईएसटी) की स्थापना 2020 में विदेश मंत्रालय के अंतर्गत की गई थी। यह 5जी, 6जी, एआई, बायोटेक, सेमीकंडक्टर और क्लीन टेक्नोलॉजी जैसी तकनीकों के विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय कानूनी पहलुओं को संभालता है। यह डिवीजन घरेलू हितधारकों और विदेशी भागीदारों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए टेक्नोलॉजी डिप्लोमेसी के लिए आंतरिक क्षमता का विकसित करती है। इसका कार्य वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देना और इंटरनेशनल टेक गवर्नेंस पर भारत के दृष्टिकोण को आकार देना है।
सेमीकॉन इंडिया 2025 ने एक विश्वसनीय ग्लोबल सेमीकंडक्टर डेस्टिनेशन के रूप में भारत के उदय को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया है। इस आयोजन में 48 देशों और क्षेत्रों की 350 से अधिक प्रदर्शक कंपनियों ने भाग लिया। सम्मेलन ने सेमीकंडक्टर डिजाइन, फैब्रिकेशन, पैकेजिंग और मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में निवेश, रणनीतिक साझेदारी, अनुसंधान सहयोग और कार्यबल विकास को सुगम बनाया। 13 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर और प्रमुख वैश्विक सेमीकंडक्टर कंपनियों के सीईओ की भागीदारी ने भारत के पॉलिसी फ़्रेमवर्क और दूरदर्शी लक्ष्यों में बढ़ते अंतरराष्ट्रीय विश्वास को रेखांकित किया। इस आयोजन ने वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में भारत की विश्वसनीयता को मजबूती से स्थापित किया है।

'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' ने जिम्मेदार और समावेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में एक ग्लोबल लीडर के रूप में भारत की विश्वसनीयता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है। इस शिखर सम्मेलन ने 100 से अधिक देशों और 20 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों को एक मंच पर एकत्रित किया, जिसमें फ़िज़िकल व वर्चुअल सहभागिता के माध्यम से लगभग 15 लाख प्रतिभागी शामिल हुए। एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में, 92 देशों और संगठनों द्वारा 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट डिक्लेरेशन' को अपनाया गया, जो भरोसेमंद और विकास-केंद्रित एआई के भारत के विजन के लिए व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन को दर्शाता है। इस आयोजन ने एआई-संबंधित निवेश प्रतिबद्धताओं के लिए 200 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का मार्ग प्रशस्त किया और भारत के बढ़ते सॉवरेन एआई इंफ़्रास्ट्रक्चर को प्रदर्शित किया। इन परिणामों ने एक विश्वसनीय ग्लोबल कन्वेनर, इनोवेशन पार्टनर और एआई रिसर्च, इंफ़्रास्ट्रक्चर व डिजिटल पब्लिक गुड्स के उभरते हुए हब के तौर पर भारत की स्थिति को और मज़बूत किया।

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क्या आप जानते हैं?
'पैक्स सिलिका' (Pax Silica) विश्वसनीय और लोकतांत्रिक देशों का एक रणनीतिक गठबंधन है, जो संपूर्ण 'सिलिकॉन स्टैक' (silicon stack) को सुरक्षित करने के लिए कार्य कर रहा है। इसके दायरे में क्रिटिकल मिनरल्स, सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन, एडवांस्ड एआई सिस्टम और डिप्लॉयमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। यह पहल सत्तावादी शक्तियों द्वारा वैश्विक व्यापार में लाए जाने वाले आर्थिक दबाव के विरुद्ध एक सुरक्षा कवच का कार्य करती है। 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' के पांचवें दिन, भारत ने औपचारिक रूप से इस गठबंधन में शामिल होकर अपनी रणनीतिक भागीदारी को मजबूत किया है।
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डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) और इंडिया स्टैक डिप्लोमेसी: वैश्विक नेतृत्व की नई आधारशिला
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) से तात्पर्य उन डिजिटल सिस्टम से है, जो सरकारों को कुशलतापूर्वक, सुरक्षित रूप से और बड़े पैमाने पर नागरिक सेवाएं प्रदान करने में सक्षम बनाती हैं। भारत के डीपीआई इकोसिस्टम, जिसे 'इंडिया स्टैक' के नाम से जाना जाता है, ने 2014 के बाद आधार, यूपीआई, डिजिलॉकर, कोविन, उमंग और जीईएम (GeM) जैसे सशक्त प्लेटफार्मों के माध्यम से अभूतपूर्व गति प्राप्त की है।
इन प्लेटफ़ॉर्म ने डिजिटल पहचान, तुरंत पेमेंट, ऑनलाइन डॉक्यूमेंटेशन, हेल्थकेयर और गवर्नेंस सेवाओं के जरिए सर्विस डिलीवरी की पूरी प्रक्रिया को बदल दिया है। भारत ने डीपीआई पर सहयोग के लिए 23 देशों के साथ समझौते भी किए हैं। यूपीआई आज सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों में सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है। इसने डिजिटल गवर्नेंस और फिनटेक इनोवेशन में एक भरोसेमंद ग्लोबल लीडर के तौर पर भारत की साख को मजबूत किया है। अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें
भारत एक ऐसे टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम का निर्माण कर रहा है जो नवाचार, समावेशिता और आत्मनिर्भरता पर आधारित है। बढ़ते निवेश, मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और मिशन-उन्मुख सुधारों ने देश को टेक्नोलॉजी के कंज्यूमर से ग्लोबल टेक्नोलॉजी क्रिएटर की भूमिका में अग्रसर कर दिया है। ये प्रयास भारत की 'विकसित भारत' की यात्रा को गति प्रदान कर रहे हैं और उभरती प्रौद्योगिकियों के भविष्य को वैश्विक स्तर पर आकार देने में भारत की भूमिका को सशक्त बना रहे हैं।
इंडियाज मोमेंट, इंडियाज मेकिंग: भविष्य का निर्माण
बारह साल पहले, भारत विश्व के लिए केवल एक विशाल डिजिटल बाजार के रूप में देखा जाता था। आज, यह अपनी आत्मनिर्भरता और नवाचार से ग्लोबल डिजिटल महाशक्ति के रूप में उभर रहा है। यह बदलाव कोई आकस्मिक घटना नहीं, बल्कि लंबे समय के दूरदर्शी नीतिगत संकल्पों और महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों में 'मिशन-मोड' पर आधारित कार्यान्वयन का परिणाम है।
भारत की यह तकनीकी यात्रा तीन परस्पर जुड़े स्तंभों पर आधारित है: राष्ट्रीय क्षमता का विस्तार, तकनीकी क्षमता को मजबूत करना और वैश्विक विश्वसनीयता का निर्माण। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर ने इस समावेशी विकास की नींव रखी है। सुलभ कनेक्टिविटी, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई), क्लाउड सिस्टम और डेटा नेटवर्क ने नागरिकों, व्यवसायों और संस्थानों को अभूतपूर्व स्तर पर आपस में जोड़ा है। इस मजबूत डिजिटल सिस्टम ने भारत को शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं, नवाचार और उद्यमिता तक पहुंच को तेजी से विस्तारित करने में सक्षम बनाया है।
सरकार ने उभरती प्रौद्योगिकियों में केंद्रित पहलों के माध्यम से स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत किया है। रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर, सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस, स्टार्टअप, स्किलिंग इकोसिस्टम और इंडस्ट्री-एकेडेमिया पार्टनरशिप में बड़े पैमाने पर निवेश से इनोवेशन और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयारी को बढ़ावा मिला। भरोसेमंद गवर्नेंस फ्रेमवर्क, सुरक्षित डिजिटल सिस्टम, पारदर्शी रेगुलेशन और भरोसेमंद टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप की वजह से भारत की विश्वसनीयता बढ़ी है। आज, वैश्विक निवेशक, टेक्नोलॉजी कंपनियाँ और रणनीतिक साझेदार भारत को इनोवेशन, मैन्युफैक्चरिंग, टैलेंट और डिजिटल बदलाव के एक विश्वसनीय केंद्र के रूप में देख रहे हैं।
पिछले बारह वर्षों की उपलब्धियाँ केवल पड़ाव नहीं हैं, बल्कि ये 'विकसित भारत 2047' की एक मजबूत तकनीकी आधारशिला हैं। आज का भारत केवल वैश्विक प्रौद्योगिकियों को अपनाने वाला राष्ट्र नहीं रह गया है, बल्कि वह समावेशी, विश्वसनीय और मानव-केंद्रित तकनीकी विकास पर होने वाली वैश्विक चर्चाओं को दिशा देने वाला एक अग्रणी राष्ट्र है। यह भारत का समय है, और यह भारत द्वारा निर्मित भविष्य है।
संदर्भ:
इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय
संचार मंत्रालय
पीआईबी बैकग्राउंडर
कैबिनेट
विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय
रक्षा मंत्रालय
विदेश मंत्रालय
उच्च शिक्षा विभाग (शिक्षा मंत्रालय)
कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय
प्रधानमंत्री कार्यालय
वित्त मंत्रालय
नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स
नैस्कॉम
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पीआईबी रिसर्च
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(रिलीज़ आईडी: 2276454)
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