MIFF banner

जब तकनीक कहानीकार का स्‍थान लेती है: एमआईएफएफ में एआई फिल्में कथाकारिता के नए क्षितिज खोलती हैं

मशीनों से परे, कल्पना की दुनिया में: एमआईएफएफ की एआई फिल्में भविष्य के सिनेमा के मानवीय हृदय को प्रदर्शित करती हैं

19वें मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (एमआईएफएफ) 2026 ने "द एआई फिल्म्स" खंड में प्रदर्शित फिल्मों के साथ सिनेमाई नवाचार की भावना का जश्न मनाया। कहानी कहने, प्रौद्योगिकी और कल्पना के सुस्‍पष्‍ट संगम को दर्शाते हुए, चयनित फिल्मों ने दिखाया कि कैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक शक्तिशाली नए रचनात्मक उपकरण के रूप में कार्य करती है, जो दुनिया भर के फिल्म निर्माताओं को इतिहास, पौराणिक कथाओं, व्यक्तिगत स्मृति और सिनेमाई सीमाओं से परे फैले जटिल आख्यानों की खोज करने में सक्षम बनाती है।

चाहे ऐतिहासिक लड़ाइयों की कहानियों को दर्शाना हो, अनोखी एनीमेशन शैलियों का उपयोग करना हो या किसी रचनाकार के सोचने के तरीके को गहराई से समझना हो, इन फिल्मों ने दिखाया कि एआई मानव रचनात्मकता की जगह नहीं ले रहा है। इसने दर्शाया है‍ कि यह फिल्म निर्माताओं को ऐसी कहानियाँ सुनाने का एक शक्तिशाली नया उपकरण प्रदान करता है जिन्हें पारंपरिक तरीकों से बनाना मुश्किल होता।

दीपक विजय द्वारा निर्देशित उत्कृष्ट फिल्म "लेजेंड्स - द इटरनल फ्लेम ऑफ मेवाड़" में एक अकेला कवि अरावली पहाड़ियों में गाता है जो बप्पा रावल से लेकर महाराणा प्रताप तक के क्रमिक ऐतिहासिक युगों का वर्णन करते हुए सम्मान से परिभाषित एक राज्य को चित्रित करता है।

लॉरेंट क्लिकेट द्वारा लिखित "द स्क्रीनराइटर" एक तनावपूर्ण रचना है जो एक दबावग्रस्‍त  लेखक के मन में गहराई से उतरती है और रचनात्मक प्रक्रिया के मनोवैज्ञानिक संघर्षों की जांच करने के लिए एक सीमित परिप्रेक्ष्य का उपयोग करती है।

ज़ुआन ली का "द स्टार शेफर्ड" एक स्पर्शनीय, फेल्ट-एनीमेशन तकनीक आधारित संगीत वीडियो है जो मलावी में यूनिसेफ की यात्रा से प्रेरित है और बहुत ही शानदार तरीके से दर्शाता है कि कैसे प्यार अजनबियों को एक ही आकाश के नीचे जोड़ता है।

पौराणिक कथाओं को पसंद करने वालों के लिए अक्षत वर्मा द्वारा लिखित "किष्किंधा: वन कथा" प्राचीन वानर साम्राज्य के भीतर के भव्य संघर्षों, राजनीति और दुखद यात्राओं को पुनर्जीवित करने के लिए कई पुराणों के शोध पर आधारित है।

मुख्य आकर्षणों में से एक ताल्या लोटन की "स्टोनवॉल, द मेकिंग ऑफ" एक गृहयुद्ध जनरल के बारे में एक अधूरी फीचर फिल्म के निर्माण की कहानी बताती है जिसमें साक्षात्कार और सेट पर फिल्माए गए फुटेज को इस तरह मिलाया गया है कि पर्दे के पीछे की रिकॉर्डिंग और मंचित इतिहास के बीच की रेखा पूरी तरह से मिट जाती है।

अन्य फिल्मों में कर्ष झावेरी द्वारा निर्देशित लघु फिल्म "द एक्ट ऑफ किलिंग ड्रीम्स" शामिल थी, जिसमें एक अवास्तविक, चित्रमय परिदृश्य के माध्यम से कलात्मक परंपरा और तकनीकी टकराव का विश्लेषण किया गया था जहां दिग्गज शुद्धतावादी निर्देशक उभरते एआई रचनाकारों को चुनौती देते हैं। जर्मनी की फिल्म "द सिनेमा दैट नेवर वाज़", जिसे मार्क वाचहोल्ज़ ने निर्देशित किया था अनुपस्थिति पर एक मध्‍यस्थ के रूप में कार्य करती है जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग कर एक नयी सामग्री का उपयोग करके समय या नष्‍ट हो चुकी स्क्रिप्ट, रीलों और फिल्म इतिहास की यादों को ताजा किया गया है। राजेश भाटिया और भरत अरोरा द्वारा निर्देशित "द इको मॉनेस्ट्री" में एक शोकग्रस्त लद्दाखी महिला की स्मृति और मौन का सामना करने के लिए गहरे पहाड़ों की यात्रा को दर्शाया गया है। वहीं समरेश श्रीवास्तव द्वारा निर्देशित एआई-आधारित जीवनीपरक एनीमेशन "द लीजेंड ऑफ बिरसा मुंडा" ने औपनिवेशिक शासन के खिलाफ ऐतिहासिक उल्गुलान प्रतिरोध को पुनर्जीवित करके स्वदेशी आवाजों के लचीलेपन को सशक्त श्रद्धांजलि दी।

इन फिल्मों ने मिलकर एमआईएफएफ में फिल्म प्रेमियों को अंतरराष्ट्रीय फिल्म निर्माण के भविष्य की एक उल्लेखनीय झलक पेश की है और यह साबित किया है कि जब फिल्मों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विकास दिन-प्रतिदिन हो रहा है तो प्राप्त परिणाम गहन मानवीय कहानियों को जीवंत रूप से चित्रित कर सकते हैं।

***

पीके/केसी/जेके/आर


Great films resonate through passionate voices. Share your love for cinema with #MIFF2026. Tag us @pibmumbai on X, and we'll help spread your passion! For journalists, bloggers, and vloggers wanting to connect with filmmakers for interviews/interactions, reach out to us at miff.mediadesk@pib.gov.in with the subject line: Take One with PIB.


रिलीज़ आईडी: 2275613   |   Visitor Counter: 110