प्रधानमंत्री कार्यालय
भारत और वियतनाम के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी बढ़ाए जाने पर संयुक्त वक्तव्य
प्रविष्टि तिथि:
06 MAY 2026 5:24PM by PIB Delhi
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के निमंत्रण पर वियतनाम के राष्ट्रपति और वियतनामी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के महासचिव श्री तो लाम 5 से 7 मई 2026 तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। राष्ट्रपति तो लाम के साथ एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल और बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है।
राष्ट्रपति तो लाम का 6 मई 2026 को राष्ट्रपति भवन में समारोहपूर्वक स्वागत किया गया। उन्होंने राजघाट जाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद प्रधानमंत्री श्री मोदी और राष्ट्रपति तो लाम के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई। दोनों नेताओं की उपस्थिति में द्विपक्षीय दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने अतिथि राष्ट्रपति के सम्मान में भोज आयोजित किया। वियतनाम के राष्ट्रपति ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। उन्होंने भी राष्ट्रपति तो लाम के लिए रात्रिभोज का आयोजन किया। राष्ट्रपति तो लाम ने भारतीय विश्व मामलों की परिषद में नीतिगत भाषण दिया और वियतनाम-भारत नवाचार मंच को संबोधित किया। राष्ट्रपति तो लाम का अब मुंबई का दौरा निर्धारित है, जहां वे राज्य सरकार और व्यापारिक नेताओं के साथ बातचीत और विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। वे वियतनाम-भारत व्यापार मंच को भी संबोधित करेंगे।
राजनीतिक परिणाम
प्रधानमंत्री श्री मोदी और राष्ट्रपति तो लाम ने सौहार्दपूर्ण वातावरण में व्यापक मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की और पारस्परिक हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने वियतनाम का राष्ट्रपति चुने जाने पर महासचिव श्री तो लाम को बधाई दी और विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में वियतनाम अपनी विकास आकांक्षाओं की ओर निरंतर बढ़ेगा। राष्ट्रपति तो लाम ने राष्ट्रीय विकास की महत्वपूर्ण उपलब्धियों, उच्च आर्थिक विकास और बहुपक्षवाद को सुदृढ़ करने और विकासशील देशों (वैश्विक दक्षिण) के प्रति सहयोग को बढ़ावा देने की भारतीय पहल के लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी को बधाई दी। दोनों नेताओं ने इस बात पर बल दिया कि भारत-वियतनाम संबंधों को और सुदृढ़ बनाने से दोनों देशों की जनता को पारस्परिक लाभ मिलता रहेगा और इससे विकसित भारत 2047 तथा वियतनाम के विज़न 2045 जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
वैश्विक और क्षेत्रीय परिदृश्य में हो रहे बदलावों पर विचार साझा करते हुए, दोनों नेताओं ने आपसी विश्वास, सम्मान, समझ, साझा दृष्टिकोण और विभिन्न क्षेत्रों में प्रभावी सहयोग पर आधारित संबंधों के मज़बूत आधार को स्वीकार किया। इसी अनुरूप उन्होंने साझा दृष्टिकोण, रणनीतिक अभिसरण, ठोस सहयोग की भावना से द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाकर व्यापक रणनीतिक साझेदारी स्तर तक ले जाने पर सहमति व्यक्त की, जिससे आपसी सद्भावना को ठोस परिणामों में परिणत किया जा सके।
दोनों नेताओं ने 2026 में भारत-वियतनाम व्यापक रणनीतिक साझेदारी की 10वीं वर्षगांठ को देखते हुए इसे समुचित तरीके से मनाने पर सहमति व्यक्त की। दोनों पक्षों ने पिछले एक दशक में द्विपक्षीय सहयोग में हुई महत्वपूर्ण प्रगति का स्वागत करते हुए हाल के वर्षों में उच्च स्तरीय वार्ता और दौरों के परिणामों के प्रभावी कार्यान्वयन को जारी रखने पर सहमति व्यक्त की, जिसमें अगस्त 2024 में भारत और वियतनाम के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी सुदृढ़ करने पर संयुक्त वक्तव्य, 2020 में शांति, समृद्धि और जन-सहयोग के लिए भारत-वियतनाम संयुक्त दृष्टिकोण और दोनों देशों के नेताओं के बीच हुई बैठकों के परिणाम शामिल हैं। दोनों नेताओं ने शीर्ष नेतृत्व स्तर सहित सभी स्तरों पर नियमित संपर्क बनाए रखने पर सहमति व्यक्त की।
भारतीय संसद में भारत-वियतनाम संसदीय मैत्री समूह के गठन पर गौर करते हुए दोनों नेताओं ने दोनों देशों की विधायिका के बीच सहयोग बढ़ाने और अंतर-संसदीय संघ और आसियान अंतर-संसदीय सभा सहित बहुपक्षीय मंचों पर दोनों पक्षों के संसदीय प्रतिनिधिमंडलों के बीच घनिष्ठ समन्वय जारी रखने का स्वागत किया।
दोनों नेताओं ने स्वीकार किया कि सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में मौजूदा संस्थागत तंत्रों के तहत नियमित संवाद और आदान-प्रदान से विश्वास में बढ़ोत्तरी और आपसी समझ बढ़ी है। उन्होंने सहमति व्यक्त की कि राजनीतिक परामर्श एवं रणनीतिक संवाद; और आर्थिक, व्यापार एवं वैज्ञानिक सहयोग पर संयुक्त आयोग की बैठक भारत-वियतनाम संबंधों के प्रमुख स्तंभ बने रहेंगे। दोनों नेताओं ने यह भी सहमति व्यक्त की कि इन उपायों के तहत, विशेष रूप से रक्षा, सुरक्षा, समुद्री क्षेत्र, व्यापार एवं निवेश, कृषि, स्वास्थ्य, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, साइबर क्षेत्र, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा अंतरिक्ष एवं परमाणु ऊर्जा के क्षेत्रों में नियमित रूप से बैठकें आयोजित करने पर भी सहमत हुए। दोनों पक्षों ने रणनीतिक कूटनीति-रक्षा संवाद (टू+टू) स्थापित किए जाने की भी आशा व्यक्त की।
दोनों नेताओं ने 2024-2028 की अवधि में भारत और वियतनाम कार्य योजना और इस संयुक्त वक्तव्य के प्रभावी कार्यान्वयन में तेजी लाने पर सहमति व्यक्त की।
आर्थिक, व्यापार एवं निवेश:
दोनों पक्षों ने सरकार और व्यापार के स्तर पर तेजी से विकसित हो रही दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बीच द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और तकनीकी साझेदारी बढ़ाने के लिए सहयोग व्यापक बनाने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने द्विपक्षीय व्यापार में पिछले 10 वर्षों में हुई वृद्धि को देखते हुए संतुलित और परस्पर लाभकारी उपायों से इसे और बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया और 2030 तक आपसी व्यापार 25 अरब डॉलर पहुंचाने के नए लक्ष्य पर सहमति व्यक्त की।
उन्होंने अपने देशों में एक-दूसरे के कृषि उत्पादों सहित बाजार पहुंच को सुगम बनाने पर सहमति व्यक्त की। दोनों नेतोओं ने भारतीय अंगूर और वियतनामी ड्यूरियन के लिए बाजार पहुंच प्रदान करने के निर्णय का भी स्वागत किया। वे त्वरित द्विपक्षीय परामर्श द्वारा तकनीकी मुद्दों को शीघ्रता से हल कर भारतीय अनार और वियतनामी पोमेलो के लिए बाजार पहुंच में तेजी लाने पर भी सहमत हो गए।
दोनों पक्ष पारस्परिक हित के क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने पर भी सहमत हो गए। वियतनाम ने अपने आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाने और घरेलू उत्पादन और निर्यात आवश्यकताएं पूरी करने के लिए भारत से अधिक उत्पादों के आयात की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। दोनों पक्ष दोनों देशों की कंपनियों के लिए व्यापार सुगमता के लिए मानकों के अनुपालन प्रमाणन सहित अधिक अनुकूल नियामक वातावरण बनाने के उपायों का पता लगाने पर सहमत हुए। उन्होंने द्विपक्षीय संस्थागत तंत्रों के तहत पारस्परिक मुद्दों के समाधान के लिए रचनात्मक संवाद जारी रखने के महत्व पर जोर दिया।
दोनों देशों के नेताओं ने आसियान-भारत व्यापार समझौते (एआईटीआईजीए) की चल रही समीक्षा जल्द पूरी करने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने कहा कि समझौता पारस्परिक रूप से लाभकारी, व्यापार सुगम और मौजूदा वैश्विक व्यापार प्रथाओं के अनुरूप होना चाहिए।
दोनों नेताओं ने भारत-वियतनाम आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने विशेष रूप से उच्च प्रौद्योगिकी, परिवहन, विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा, उन्नत कृषि, विद्युत चालित वाहन, सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा, कृषि और कृषि-प्रसंस्करण, मत्स्य पालन, पर्यटन और आतिथ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच अधिक निवेश प्रोत्साहित करने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने दोनों देशों के स्टार्टअप पारितंत्र के बीच संबंधों को सुदृढ़ बनाने और नवाचार केंद्रों के बीच ठोस सहयोग प्रोत्साहित करने पर भी सहमति जताई।
तेल और गैस अन्वेषण के क्षेत्र में भारत और वियतनाम के बीच दशकों पुराने संस्थागत संबंधों की सराहना करते हुए और इस क्षेत्र में पारस्परिक लाभकारी सहयोग को समझते हुए, दोनों नेताओं ने वियतनामी और अंतरराष्ट्रीय अधिनियमों, विशेष रूप से 1982 के यूएनसीएलओएस के अनुसार, भारतीय कंपनियों की रुचि वाले नए तेल कुओं के विकास सहित अन्वेषण और उत्पादन गतिविधियां बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।
ई-कॉमर्स और डिजिटल अर्थव्यवस्था के बढ़ते महत्व को स्वीकारते हुए दोनों नेताओं ने इन क्षेत्रों में सहयोग मजबूत बनाने पर सहमति व्यक्त की। इसके तहत उनके विकास में सहायक और व्यवसायों, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम-एमएसएमई को ई-कॉमर्स में भाग लेने और क्षेत्रीय तथा वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में गहनता और स्थायी रूप से एकीकृत होने में सहायता के लिए अनुकूल नियमों और नीतियों को विकसित करने में अनुभव साझा करने पर सहमति बनी।
स्वास्थ्य
दोनों नेताओं ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। भारतीय दवा उद्योग की प्रगति को स्वीकार करते हुए, दोनों पक्षों ने परस्पर सहमति से 2027 से वियतनामी सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए दवाओं की खरीद में भारतीय कंपनियों की संभावित भागीदारी के उपायों का पता लगाने पर सहमति व्यक्त की। प्रौद्योगिकी के बढ़ते महत्व को समझते हुए उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के अनुप्रयोग सहित स्वास्थ्य सेवा के डिजिटल बदलाव में सहयोग को प्रोत्साहित किया।
दोनों देशों में पारंपरिक चिकित्सा के लंबे इतिहास और समृद्ध विरासत को देखते हुए, दोनों नेताओं ने ज्ञान, अनुसंधान और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के साथ ही घनिष्ठ संस्थागत संबंधों को प्रोत्साहित करने पर सहमति जताई। उन्होंने पारंपरिक चिकित्सा पर समझौता ज्ञापन पूर्ण होने और वियतनाम में आयुर्वेद में एक अकादमिक चेयर की स्थापना के प्रस्तावित समझौता ज्ञापन में प्रगति का स्वागत किया।
रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र
दोनों नेताओं ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को भारत-वियतनाम व्यापक रणनीतिक साझेदारी के प्रमुख स्तंभ होने की फिर से पुष्टि करते हुए 2030 तक भारत-वियतनाम रक्षा साझेदारी पर संयुक्त विजन वक्तव्य के प्रभावी कार्यान्वयन की सराहना की, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा संबंधों का मार्गदर्शन करता रहता है।
दोनों देशों के नेताओं ने रक्षा नीति वार्ता, संयुक्त अभ्यास, स्टाफ वार्ता, संयुक्त अनुसंधान और नई रक्षा प्रौद्योगिकियों के सह-उत्पादन, नौसेना और वायु सेना के विमानों द्वारा बंदरगाहों पर अधिक आवाजाही, शांतिरक्षा गतिविधियां, सूचना साझाकरण, जलविज्ञान, रक्षा प्रदर्शनियां, क्षमता निर्माण, रक्षा औद्योगिक सहयोग, समुद्री सुरक्षा, समुद्री संरक्षा और तलाशी एवं बचाव अभियान सहित रक्षा सहयोग के पारंपरिक और उभरते क्षेत्रों में सहयोग और अधिक मजबूत करने तथा सक्रिय भागीदारी बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। ये सभी क्षेत्र दोनों देशों के परस्पर हितों और प्राथमिकताओं पर आधारित हैं तथा व्यापक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अधिक स्थिरता लाने में भी योगदान देंगे। उन्होंने दोनों देशों के बीच रक्षा प्रणालियों की खरीद बढ़ाने का भी निर्णय लिया।
दोनों नेताओं ने वियतनाम के लिए भारत द्वारा दी गई रियायती रक्षा ऋण के कार्यान्वयन में हुई निरंतर प्रगति का स्वागत किया, जिससे वियतनाम की रक्षा क्षमता को सुदृढ़ बनाने और द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने में योगदान मिला है।
दोनों नेताओं ने पारस्परिक संचालन सहायता समझौता; पनडुब्बी खोज एवं बचाव सहायता एवं सहयोग पर समझौता ज्ञापन; और रक्षा औद्योगिक सहयोग सुदृढ़ करने पर आशय पत्र सहित द्विपक्षीय रक्षा समझौतों के कार्यान्वयन पर संतोष व्यक्त किया।
दोनों नेताओं ने मई 2025 में वियतनाम के तट पर दोनों देशों की नौसेना द्वारा किए गए पहले संयुक्त जलवैज्ञानिक सर्वेक्षण का स्वागत किया और भविष्य में नियमित रूप से इसी तरह के अभ्यास आयोजित करने पर सहमति व्यक्त की।
वियतनाम ने भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग कार्यक्रम के तहत वियतनाम के रक्षा कर्मियों को दिए जा रहे प्रशिक्षण की सराहना की। यह प्रशिक्षण दूरसंचार विश्वविद्यालय (टीसीयू), नौसेना अकादमी और वायुसेना महाविद्यालय, न्हा ट्रांग में भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना प्रशिक्षण टीमों द्वारा क्षमता निर्माण के लिए दिया जाता है। साथ ही, टीसीयू, न्हा ट्रांग में आर्मी सॉफ्टवेयर पार्क की स्थापना में भारत के सहयोग की भी सराहना की गई। दोनों नेताओं ने इस बात का भी स्वागत किया कि दोनों देश 2027-2030 अवधि काल में साइबर सुरक्षा पर आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-सह विशेषज्ञ कार्य समूह (एडीएमएम-प्लस ईडब्ल्यूजी) की संयुक्त-अध्यक्षता करेंगे।
दोनों नेताओं ने भारत के विधि एवं न्याय मंत्रालय और वियतनाम के न्याय मंत्रालय के बीच हुए समझौता ज्ञापन के प्रभावी कार्यान्वयन द्वारा दोनों देशों के बीच कानूनी और न्यायिक क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की।
दोनों पक्षों ने साझा उद्देश्यों के लिए वियतनाम के लोक सुरक्षा मंत्रालय और भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के बीच सहयोग और गहन बनाने पर भी सहमति जताई। उन्होंने सूचना साझाकरण, साइबर सुरक्षा, आतंकवाद-निरोधी उपायों और उच्च-तकनीकी अपराध, अंतरराष्ट्रीय अपराध, धनशोधन और ऑनलाइन घोटालों से निपटने में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। इसके अतिरिक्त, दोनों पक्षों ने भारत-वियतनाम सुरक्षा वार्ता सहित मौजूदा सहयोग तंत्रों का प्रभावी उपयोग करने के महत्व पर बल दिया।
नेताओं ने प्रथम भारत-वियतनाम साइबर नीति वार्ता के सफल आयोजन का स्वागत किया, जिसमें दोनों पक्षों ने साइबर नीतियों में हाल के घटनाक्रमों पर विचार साझा किए, साइबर खतरे के परिदृश्य की समीक्षा और द्विपक्षीय सहयोग के क्षेत्रों की पहचान की। साथ ही संयुक्त क्षमता निर्माण गतिविधियों तथा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी मुद्दों पर बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की। दोनों पक्ष सुरक्षा क्षेत्र में अनुभव के आदान-प्रदान और सहयोग विस्तारित करने पर भी सहमत हुए, जिसमें कानून प्रवर्तन अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में सहयोग को बढ़ावा देना, व्यावसायिक प्रशिक्षण, विदेशी भाषा प्रशिक्षण, साइबर सुरक्षा मोचन कौशल, संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना और पारस्परिक रूप से सहमत अन्य सहयोग गतिविधियों में समर्थन शामिल है।
समुद्री सहयोग
भारत और वियतनाम के बीच हज़ारों साल पुराने समुद्री आवागमन के इतिहास को स्वीकार करते हुए, दोनों नेताओं ने समुद्री क्षेत्र को अपने सहयोग के प्रमुख स्तंभों में से एक बताया और समुद्री सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय समुद्री सुरक्षा वार्ता ने आपसी विश्वास और एक-दूसरे की चिंताओं की बेहतर समझ को बढ़ावा दिया है। उन्होंने इसे नियमित रूप से आयोजित करने के महत्व पर बल दिया। वियतनाम ने समुद्री क्षेत्र जागरुकता सहयोग बढ़ाने के लिए भारत में गुरुग्राम स्थित सूचना संलयन केंद्र - हिंद महासागर क्षेत्र (आईएफसी-आईओआर) में एक अंतर्राष्ट्रीय संपर्क अधिकारी नियुक्त करने के निमंत्रण के लिए भारत का आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने वियतनाम के हिंद-प्रशांत महासागर पहल (आईपीओआई) में शामिल होने का स्वागत किया और इस तंत्र के तहत सहयोग बढ़ाने की आशा व्यक्त की। वियतनाम आईपीओआई तंत्र के अंतर्गत भारत और अन्य साझेदारों के साथ समन्वय जारी रखेगा, साथ ही आईपीओआई और इंडो-पैसिफिक पर आसियान आउटलुक (एओआईपी) के बीच और अधिक तालमेल को बढ़ावा देगा और 2026 के आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष में ठोस सहयोग को प्रोत्साहित करेगा।
दोनों नेताओं ने समुद्र विज्ञान में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की, जिसमें समुद्री निगरानी मंच, डेटा प्रबंधन, समुद्री पूर्वानुमान और सेवाएं, क्षमता निर्माण और समुद्री वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे क्षेत्र शामिल हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने पैंगेशियस मछली के प्रजनन और पालन सुविधाओं की स्थापना और भारत में मसल्स के प्रजनन और खरीद को सक्षम बनाने में वियतनाम के साथ सहयोग का स्वागत किया।
महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों सहित विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र
दोनों नेताओं ने डिजिटल प्रौद्योगिकियों के महत्व को दोहराया और वित्तीय नवाचार और डिजिटल भुगतान पर भारतीय रिजर्व बैंक और स्टेट बैंक ऑफ वियतनाम के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर का स्वागत किया। उन्होंने क्यूआर कोड द्वारा खुदरा भुगतान प्लेटफार्मों के लिए संपर्क को बढ़ावा देने पर सहमति व्यक्त की, जिससे दोनों पक्षों के पर्यटन और व्यवसायों को सुगमता होगी।
दोनों नेताओं ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, 6जी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष और परमाणु प्रौद्योगिकी, समुद्री विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, औषधि, उन्नत सामग्री और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे महत्वपूर्ण और उभरते प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग और साझेदारी बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। सहयोग पारस्परिक लाभकारी व्यावहारिक पहल जैसे संयुक्त अनुसंधान, अनुसंधान एवं विकास केंद्र और उत्पाद विकास पर केन्द्रित होंगे।
दोनों नेताओं ने अपने जलवायु, सतत विकास लक्ष्यों और ऊर्जा परिवर्तन प्राथमिकताओं को दोहराते हुए स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा के साथ ही जलवायु एवं आपदा प्रतिरोधी प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने इस संबंध में मिशन लाइफ (पर्यावरण अनुरूप जीवनशैली) और अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) जैसी संस्थाओं के महत्व को मान्यता दी। भारत ने वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन (जीबीए) में शामिल होने की वियतनाम की रुचि का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण और स्थिति अनुकूलता में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने में आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन (सीडीआरआई) के महत्व को भी स्वीकार किया। उन्होंने उन्नत कृषि, सतत जल प्रबंधन और वायु प्रदूषण नियंत्रण में डिजिटल और उन्नत प्रौद्योगिकियों के अनुप्रयोग में सहयोग को प्रोत्साहित किया।
दोनों नेताओं ने परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के क्षेत्र में जारी सहयोग पर संतोष व्यक्त किया और परमाणु ऊर्जा पर चौथी भारत-वियतनाम संयुक्त समिति की बैठक से उभरे विभिन्न सहयोग के अवसरों पर गहन अनुवर्ती कार्रवाई पर सहमति व्यक्त की। भारत ने वियतनाम के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भागीदारी के निमंत्रण की सराहना की। वियतनाम ने कोबाल्ट-60 की आपूर्ति के लिए भारत को धन्यवाद दिया और दोनों पक्ष वियतनाम को इसकी निरंतर आपूर्ति के लिए तौर-तरीकों का पता लगाने पर सहमत हुए।
उन्होंने वियतनाम में आसियान-भारत ट्रैकिंग, डेटा रिसेप्शन स्टेशन और डेटा प्रोसेसिंग सुविधा की स्थापना की दिशा में हुई प्रगति का उल्लेख किया। वियतनाम ने परियोजना को शीघ्र पूरा करने के लिए अपनी प्रक्रिया में तेजी लाने पर सहमति व्यक्त की।
दोनों नेताओं ने दुर्लभ खनिज पदार्थ क्षेत्र में पारस्परिक सहयोग के लिए भारत सरकार के आईआरईएल (इंडिया) लिमिटेड और वियतनाम सरकार के रेडियोधर्मी तथा दुर्लभ तत्व प्रौद्योगिकी संस्थान, वीनाटॉम के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन का स्वागत किया और इसके शीघ्र और पूर्ण कार्यान्वयन पर जोर दिया।
विकास साझेदारी
दोनों नेताओं ने मेकांग-गंगा सहयोग ढांचे के तहत त्वरित प्रभाव परियोजनाओं (क्यूआईपी), आईटीईसी कार्यक्रमों और शैक्षिक छात्रवृत्तियों द्वारा समर्थित दोनों देशों के बीच व्यापक और प्रभावशाली विकास साझेदारी की सराहना की। उन्होंने वियतनाम के 34 में से 32 प्रांतों में भारत के सहयोग से 66 क्यूआईपी के कार्यान्वयन पर संतोष व्यक्त किया, जिन्हें जमीनी स्तर पर सामाजिक-आर्थिक प्रभाव के लिए स्थानीय सरकारों और समुदायों से व्यापक सराहना मिली है।
दोनों नेताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत का भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग-आईटीईसी कार्यक्रम द्विपक्षीय विकास सहयोग का एक प्रमुख स्तंभ है। वियतनाम ने आईटीईसी कार्यक्रम द्वारा वियतनामी अधिकारियों की क्षमता निर्माण में भारत के सहयोग और निरंतर समर्थन की सराहना की, जिसमें आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किए गए विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम और छात्रों एवं विद्वानों के लिए आईसीसीआर छात्रवृत्तियां शामिल हैं।
दोनों नेताओं ने विश्वविद्यालयों, विचारकों और अन्य संस्थानों के बीच छात्र, संकाय और अनुसंधान आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करते हुए भारत के नालंदा विश्वविद्यालय और हो ची मिन्ह राष्ट्रीय राजनीति अकादमी के बीच हुए समझौता ज्ञापन का स्वागत किया।
संस्कृति, पर्यटन सहयोग और जन आदान-प्रदान:
वियतनाम ने मई-जून 2025 के दौरान भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को प्रदर्शनी के लिए वियतनाम भेजने के भारत के कदम की गहरी सराहना की। नेताओं ने माना कि पवित्र अवशेषों के प्रति वियतनामी लोगों की गहरी आस्था दोनों देशों के बीच गहरे सभ्यतागत संबंधों, साझा आध्यात्मिक विरासत और स्थायी मैत्री को दर्शाते हैं।
नेताओं ने माना कि पर्यटन दोनों देशों के बीच संबंधों और आर्थिक विकास का एक प्रमुख चालक है। उन्होंने पर्यटन क्षेत्र में सहयोग समझौता ज्ञापन का स्वागत किया और सांस्कृतिक तथा विरासत, चिकित्सा और स्वास्थ्य पर्यटन सहित अन्य क्षेत्रों में सतत और समावेशी तरीके से द्विपक्षीय पर्यटन के विकास को प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने वियतनाम के पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को भारत में बौद्ध सर्किट के भ्रमण के लिए आमंत्रित किया। दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानों में बढ़ोतरी का स्वागत करते हुए उन्होंने अपने नागर विमानन प्राधिकरणों को हवाई संपर्क बढ़ाने पर चर्चा करने के लिए प्रोत्साहित किया।
नेताओं ने 2026-2030 के लिए सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम पर हस्ताक्षर का स्वागत किया और सांस्कृतिक आदान-प्रदान तथा लोगों के बीच आपसी संबंधों को और बढ़ावा देने पर सहमति व्यक्त की।
दोनों देशों के बीच गहरे सभ्यतागत संबंधों को रेखांकित करते हुए, दोनों नेताओं ने बौद्ध विद्वानों, भिक्षुओं, तीर्थयात्रियों और विद्यार्थियों के अधिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित किया। वियतनाम ने माई सोन यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता और ए, एच और के ब्लॉक में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा किए गए जीर्णोद्धार और संरक्षण कार्य तथा ई और एफ ब्लॉक में चल रहे कार्य और वियतनाम के डाक लक प्रांत में न्हान टॉवर परियोजना की सराहना की। भारत ने बड़ी संख्या में वियतनामी शहरों और प्रांतों में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के वार्षिक आयोजन के लिए वियतनाम के समर्थन की प्रशंसा की।
उन्होंने दोनों देशों के योग संस्थानों के बीच अधिक सहयोग के प्रति समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ाने और दा नांग विश्वविद्यालय और सामाजिक विज्ञान और मानविकी विश्वविद्यालय में भारत अध्ययन के लिए आईसीसीआर चेयर स्थापित करने पर भी सहमति व्यक्त की।
दोनों नेताओं ने मुंबई और हो ची मिन्ह सिटी के बीच मैत्री और सहयोग स्थापित करने के समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर का स्वागत किया और ऐसे सहयोग और संपर्क को प्रोत्साहित किया।
दोनों पक्षों ने मानव संसाधन गतिशीलता के क्षेत्र में सहयोग के महत्व पर जोर दिया। दोनों पक्षों ने श्रम बाजार गतिशीलता सुगम बनाने सहित पारस्परिक हित के मुद्दों पर चर्चा के लिए कांसुलर संवाद की स्थापना का भी स्वागत किया।
क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग
बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक और आर्थिक परिदृश्य के दृष्टिगत दोनों नेताओं ने क्षेत्र और उससे परे शांति, स्थिरता, सहयोग और समृद्धि पर आधारित अंतरराष्ट्रीय अधिनियमों पर केंद्रित व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए भारत और वियतनाम के बीच बढ़ते रणनीतिक तालमेल पर बल दिया। उन्होंने वैश्विक शासन में विकासशील देशों की आवाज़ और भूमिका मजबूत बनाने का आह्वान किया।
दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र सहित बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग और सुदृढ़ बनाने पर सहमति व्यक्त की। बहुपक्षवाद की प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सहित अंतरराष्ट्रीय संगठनों में सुधारों के प्रति प्रबल समर्थन व्यक्त किया, जिससे वे समकालीन वास्तविकताओं के अनुरूप और अधिक प्रतिनिधित्व प्रदान करें। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए वियतनाम के निरंतर समर्थन की सराहना की।
वियतनाम ने भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता का स्वागत किया। भारत ने भी ब्रिक्स भागीदार देश के रूप में वियतनाम की भूमिका को समर्थन देने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
दोनों नेताओं ने स्वीकार किया कि वियतनाम भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी, विजन महासागर और इंडो-पैसिफिक विजन का प्रमुख स्तंभ है, जो मेकांग उपक्षेत्र, आसियान और इंडो-पैसिफिक के साथ भारत की भागीदारी को गति प्रदान करता है। दोनों नेताओं ने स्वतंत्र, खुले और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के अपने साझा दृष्टिकोण की पुष्टि की। वियतनाम ने क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए विकसित हो रही क्षेत्रीय संरचना में आसियान की एकता और आसियान की केंद्रीयता के लिए भारत के निरंतर समर्थन की सराहना की। दोनों पक्षों ने आसियान-भारत व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत के प्रति समर्थन व्यक्त किया, जो संबंधित सदस्य देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों का पूरक है।
समृद्धि और सुरक्षा के बीच संबंधों को रेखांकित करते हुए दोनों नेताओं ने दक्षिण चीन सागर में शांति, स्थिरता, सुरक्षा और नौवहन एवं हवाई उड़ान की स्वतंत्रता बनाए रखने के महत्व की पुष्टि की, साथ ही अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री विधि सम्मेलन (यूएनसीएलओएस) के अनुसार बल प्रयोग या धमकी के बिना विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया। उन्होंने दावेदारों और अन्य सभी पक्षों द्वारा सभी गतिविधियों के संचालन में अहिंसा और आत्मसंयम के महत्व पर जोर दिया तथा ऐसी कार्रवाइयों से बचने का आह्वान किया जो स्थिति को और अधिक जटिल बना सकती हैं या शांति और स्थिरता को प्रभावित करने वाले विवादों को बढ़ा सकती हैं। दोनों नेताओं ने इस बात पर बल दिया कि संयुक्त राष्ट्र समुद्री विधि सम्मेलन महासागरों और समुद्रों में सभी गतिविधियों को नियंत्रित करने वाला व्यापक कानूनी ढांचा है। उन्होंने दक्षिण चीन सागर में पक्षकारों के आचरण पर घोषणा (डीओसी) के पूर्ण और प्रभावी कार्यान्वयन तथा दक्षिण चीन सागर में ठोस और प्रभावी आचार संहिता की दिशा में वार्ता के शीघ्र निष्कर्ष का भी आह्वान किया, जो अंतरराष्ट्रीय कानून तथा संयुक्त राष्ट्र समुद्री विधि सम्मेलन के अनुरूप हो। साथ ही इन वार्ताओं में शामिल न होने वाले देशों सहित सभी देशों के वैध अधिकारों और हितों को नुकसान न पहुंचे।
दोनों देशों के नेताओं ने सीमा पार आतंकवाद सहित आतंकवाद के सभी स्वरूपों और अभिव्यक्तियों की स्पष्ट रूप से निंदा की। उन्होंने आतंकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति अपनाते हुए संयुक्त राष्ट्र एवं वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) सहित व्यापक एवं सतत रूप से आतंकवाद से निपटने के लिए समन्वित अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का आह्वान किया। उन्होंने आतंकवाद के वित्तपोषण नेटवर्क और सुरक्षित ठिकानों को नष्ट करने, आतंकी ढांचे को ध्वस्त करने और आतंकवाद में शामिल अपराधियों को शीघ्र न्यायिक कटघरे में लाने का आह्वान किया।
राष्ट्रपति तो लाम ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को उनके और उनके प्रतिनिधिमंडल के गर्मजोशी भरे आतिथ्य सत्कार और उत्कृष्ट व्यवस्थाओं के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री मोदी को वियतनाम आने का निमंत्रण दिया।
*******
पीके/केसी/एकेवी/पीके
(रिलीज़ आईडी: 2258529)
आगंतुक पटल : 148