गृह मंत्रालय
आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए एकीकृत नियंत्रण कक्ष (आईसीआर-ईआर), गृह मंत्रालय द्वारा राज्य आपातकालीन संचालन केंद्रों (एसईओसी) के साथ एकीकरण पर तीसरे सेमिनार का आयोजन
यह सेमिनार आपदा जोखिम को कम करने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 10-सूत्रीय एजेंडा को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था
केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में सरकार का प्रयास आपदाओं के दौरान “शून्य जनहानि” (Zero Casualty) के लक्ष्य को प्राप्त करना है
सेमिनार का मुख्य उद्देश्य सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के एसईओसी तथा आपदा न्यूनीकरण के लिए निरंतर कार्यरत अन्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और तालमेल स्थापित करना था
इस सेमिनार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आए प्रतिभागियों को आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में हो रही तकनीकी प्रगति के बारे में जानने और सीखने का अवसर भी प्रदान किया
प्रविष्टि तिथि:
07 MAR 2026 4:53PM by PIB Delhi
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आपदा जोखिम को कम करने के लिए निर्धारित 10-सूत्रीय एजेंडा को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से, गृह मंत्रालय के आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए एकीकृत नियंत्रण कक्ष (आईसीआर-ईआर), ने राज्य आपातकालीन संचालन केंद्रों (एसईओसी) के साथ एकीकरण पर तीसरे सेमिनार का आयोजन किया। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में सरकार का प्रयास आपदाओं के दौरान “शून्य जनहानि” (Zero Casualty) के लक्ष्य को प्राप्त करना है।
सेमिनार का मुख्य उद्देश्य सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के राज्य आपातकालीन संचालन केंद्रों (एसईओसी) तथा आपदा न्यूनीकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही अन्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और तालमेल स्थापित करना था।
सेमिनार के दौरान आपदाओं से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी के प्रसार में लगने वाले समय को कम करने के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (एनआरएससी), भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) और केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी), के प्रख्यात वैज्ञानिकों और विषय विशेषज्ञों ने विभिन्न आपदा संबंधी विषयों तथा पूर्व चेतावनी प्रणाली पर महत्वपूर्ण सुझाव और जानकारी साझा की। इसी क्रम में आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए एकीकृत नियंत्रण कक्ष (आईसीआर-ईआर) में आपातकालीन प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय डेटाबेस (एनडीईएम 5.0) पर एक व्यावहारिक प्रशिक्षण (हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग) भी आयोजित किया गया। एनडीईएम 5.0 पर आयोजित संवादात्मक सत्रों में आपदाओं की पूर्वानुमान क्षमता, जोखिम न्यूनीकरण, संसाधनों के प्रभावी उपयोग, तथा केंद्र और राज्यों के बीच सूचना के सुचारु आदान-प्रदान को सुनिश्चित करने के उपायों पर विशेष बल दिया गया।
सेमिनार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आए प्रतिभागियों को आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में हो रही तकनीकी प्रगति के बारे में जानने का अवसर प्रदान किया। कार्यक्रम के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर भी एक सत्र आयोजित किया गया। यह अपेक्षा की जा रही है कि एआई वर्तमान कार्यप्रणाली में एक मौलिक परिवर्तन लाएगा और आपदा न्यूनीकरण तथा आपदा प्रतिक्रिया से जुड़ी सभी एजेंसियों को उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण प्रोत्साहन प्रदान करेगा।
सेमिनार में मानसून-2026 के लिए तैयारियों पर भी चर्चा की गई। इस कार्यक्रम ने विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों तथा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों को आपसी समन्वय बढ़ाने और अंतराल को कम करने के लिए एक उत्कृष्ट मंच प्रदान किया। इसके माध्यम से आपदाओं से निपटने के लिए राहत-केंद्रित दृष्टिकोण से आगे बढ़कर सक्रिय और रोकथाम-केंद्रित रणनीति अपनाने पर जोर दिया गया।
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पीके/केसी/पीकेपी
(रिलीज़ आईडी: 2236536)
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