जल शक्ति मंत्रालय
पेयजल और स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) ने 5 राज्यों और 1 केन्द्र-शासित प्रदेश के 6 ग्राम पंचायतों के मुख्यालय वाले गांवों में स्थानीय भाषा में बहुभाषी सुजल ग्राम संवाद के चौथे संस्करण का आयोजन किया
ग्रामीण समुदायों के साथ स्थानीय भाषा में संवाद ‘जन भागीदारी’ और समुदाय के नेतृत्व वाली जल व्यवस्था को मजबूत करता है
‘सुजल ग्राम संवाद’ गांवों को स्थानीय बोलियों में सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करने का मंच प्रदान करता है और अन्य गांवों के समुदाय के सदस्यों के बीच आपस में सीखने की प्रक्रिया को संभव बनाता है
प्रविष्टि तिथि:
24 FEB 2026 5:26PM by PIB Delhi
जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल और स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) ने सहभागी जल व्यवस्था और जल जीवन मिशन (जेजेएम) के समुदाय के नेतृत्व वाले कार्यान्वयन के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हुए आज ‘सुजल ग्राम संवाद’ के चौथे संस्करण का सफलतापूर्वक आयोजन किया।

इस वर्चुअल संवाद में ग्राम पंचायत के प्रतिनिधि, ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति के सदस्य, सामुदायिक प्रतिभागी, महिला स्वयं सहायता समूह, विद्यार्थी एवं अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ता के साथ-साथ जेजेएम के राज्य मिशन निदेशक, जिला कलेक्टरो/जिला मजिस्ट्रेट/उपायुक्त, डीडब्ल्यूएसएम के अधिकारी और राज्यों व केन्द्र- शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी एक साथ आए।
सुजल ग्राम संवाद के चौथे संस्करण में 6 ग्राम पंचायतों के मुख्यालय वाले गांवों में ग्राम-स्तरीय संवाद आयोजित किए गए। इस पहल में लगभग 2,000 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जो समुदायों और अधिकारियों, दोनों की सशक्त भागीदारी को दर्शाता है। इसके अलावा महिलाओं, बच्चों, युवा और बुजुर्ग समुदाय के सदस्यों सहित ग्राम पंचायत स्तर पर ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में भाग लिया, जिसके परिणामस्वरूप सामूहिक भागीदारी पंजीकृत संख्या से कहीं अधिक रही।
डीडीडब्ल्यूएस के सचिव श्री अशोक के.के. मीणा ने अपने उद्घाटन भाषण में इस बात पर जोर दिया कि जेजेएम ने ग्रामीण भारत में पेयजल से जुड़े बुनियादी ढांचे के निर्माण पर ध्यान केन्द्रित किया है, लेकिन अगला सबसे महत्वपूर्ण चरण इन प्रणालियों की निरंतरता सुनिश्चित करना होगा। भौतिक बुनियादी ढांचा तैयार हो जाने के बाद, वास्तविक जिम्मेदारी सुदृढ़ संचालन और रखरखाव तंत्र के जरिए घरों तक पेयजल की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की है। अब सेवाओं की निरंतर आपूर्ति को केन्द्रीय प्राथमिकता बनानी होगी।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जल आपूर्ति प्रबंधन मूल रूप से एक स्थानीय जिम्मेदारी है और योजनाओं का स्वामित्व लेने में ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति (वीडब्ल्यूएससी) की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। आगे चलकर, जल आपूर्ति प्रणालियों को ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित करने पर अधिक जोर दिया जाएगा ताकि वे पूर्ण स्वामित्व के साथ उनका संचालन और प्रबंधन कर सकें। इस बदलाव को समर्थन देने हेतु, जिला तकनीकी इकाइयों (डीटीयू) सहित संस्थागत प्रणालियों को मजबूत किया जाएगा ताकि आवश्यक तकनीकी एवं परिचालन संबंधी सहायता प्रदान की जा सके।
उन्होंने जल सेवा आंकलन के जरिए पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्व पर भी जोर दिया, जिसके तहत ग्राम पंचायतें प्रतिवर्ष ग्राम सभा के समक्ष जल सेवा संबंधी विवरण प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने बताया कि काफी संख्या में ग्राम पंचायतों ने यह प्रक्रिया पूरी कर ली है और शेष पंचायतों से भी आने वाले समय में इसे पूरा करवाने के प्रयास जारी हैं।
उन्होंने आगे बताया कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से शुरू होकर विश्व जल दिवस पर समाप्त होने वाला राष्ट्रव्यापी जल महोत्सव 8 से 22 मार्च के दौरान आयोजित किया जाएगा। इस अभियान के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
• जल अर्पण दिवस के जरिए ग्राम पंचायतों को जल आपूर्ति से परिसंपत्तियों का औपचारिक हस्तांतरण
• जल गुणवत्ता परीक्षण और निगरानी को सुदृढ़ बनाना
• ग्राम और जिला स्तर पर संस्थागत क्षमता निर्माण
• सामुदायिक भागीदारी के जरिए सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करना
उन्होंने प्रत्येक गांव में निरंतर एवं समुदाय के नेतृत्व वाली जल व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु जल महोत्सव में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।

जमीनी स्तर के अनुभव
- पश्चिम दमचेरा, उत्तरी त्रिपुरा, त्रिपुरा
संवाद की शुरुआत उत्तरी त्रिपुरा के पश्चिम दमचेरा में ग्राम समुदाय के साथ बातचीत से हुई। इस बातचीत में वीडब्ल्यूएससी के सदस्यों, आशा कार्यकर्ताओं, एडब्ल्यूडब्ल्यू, पंप संचालकों, एफटीके प्रशिक्षित महिलाओं और अन्य सामुदायिक प्रतिनिधियों ने बंगाली में अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि जेजेएम से पहले वे पहाड़ी जल-धाराओं और मौसमी जल निकायों जैसे बिना छने पानी के स्रोतों पर निर्भर थे, जिससे पानी की कमी और जलजनित बीमारियां होती थीं।
ग्राम समुदाय के लोगों ने कहा कि जेजेएम के तहत घरों में नल कनेक्शन मिलने से उनका दैनिक जीवन काफी बेहतर हुआ है। विशेष रूप से महिलाओं को अब पानी लाने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ती। नियमित जल आपूर्ति और बार-बार जल गुणवत्ता परीक्षण से बच्चों में दस्त और संबंधित बीमारियों में उल्लेखनीय कमी आई है।
ग्राम समुदाय के लोगों ने यह भी बताया कि जल सेवा आंकलन की प्रक्रिया पूरा हो चुकी है। तकनीकी टीम ने पाइपलाइन में रिसाव को तुरंत ठीक कर दिया और बिना किसी देरी के सामान्य जल आपूर्ति बहाल कर दी, जो स्थानीय रखरखाव और निगरानी प्रणाली की दक्षता को दर्शाता है।
उन्होंने आगे कहा कि घरों और समुदायों में बने सोख गड्ढों के जरिए अपशिष्ट जल का प्रभावी ढंग से प्रबंधन किया जा रहा है, जिससे गांव का वातावरण स्वच्छ बना हुआ है।

- सेदेरापेट, पुडुचेरी, पुडुचेरी

सेदेरापेट के ग्राम समुदाय के सदस्यों ने डीडीडब्ल्यूएस अधिकारी से तमिल में बात की और बताया कि शत-प्रतिशत घरों में नल कनेक्शन (एफएचटीसी) स्थापित कर दिए गए हैं, जिससे लगभग 6,700 की आबादी वाले सभी 1,248 घरों को गुणवत्तापूर्ण पानी की सुनिश्चित आपूर्ति हो रही है। पेयजल आपूर्ति प्रणाली पूरी तरह से जारी है और कुशलतापूर्वक कार्य कर रही है।
पंचायत ने एक मजबूत जल से जुड़े बुनियादी ढांचे की स्थापना की है जिसमें 5,000 लीटर का ओवरहेड टैंक, सात बोरवेल और 24 चालू वितरण कनेक्शन शामिल हैं और निर्बाध सेवा सुनिश्चित करने हेतु इनकी नियमित रूप से निगरानी की जाती है। दैनिक संचालन पंचायत स्तर पर नामित पंप ऑपरेटरों द्वारा प्रबंधित किया जाता है।
सभी घरों को सुरक्षित और पीने योग्य पेयजल मिलना सुनिश्चित करने हेतु समय-समय पर जल गुणवत्ता परीक्षण किया जाता है। एक प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र भी मौजूद है।
- पुलिमामिडी, रंगारेड्डी, तेलंगाना

डीडीडब्ल्यूएस अधिकारियों के साथ बातचीत के दौरान, तेलंगाना के पुलिमामिडी गांव के ग्रामीणों ने स्थानीय तेलुगु बोली में बोलते हुए बताया कि ग्राम पंचायत ने सभी घरों, स्कूलों तथा आंगनवाड़ी केन्द्रों में शत-प्रतिशत नल के पानी की आपूर्ति का लक्ष्य हासिल कर लिया है और उन्हें नियमित रूप से स्वच्छ एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल मिल रहा है। उन्होंने बताया कि गांव में जल अर्पण और जल सेवा आंकलन, दोनों गतिविधियां पूरी हो चुकी हैं और आगामी जल महोत्सव के दौरान जल अर्पण समारोह आयोजित करने की तैयारियां चल रही हैं। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि स्कूलों और आंगनवाड़ी केन्द्रों में शौचालयों और हाथ धोने के केन्द्रों में नल के कनेक्शन लगाए गए हैं, जिससे बच्चों के लिए बेहतर स्वच्छता सुविधाएं सुनिश्चित हो रही हैं। जमीनी स्तर पर पानी की गुणवत्ता की नियमित रूप से जांच की जा रही है ताकि आपूर्ति किया गया पानी सभी के लिए पीने योग्य और सुरक्षित बना रहे।
- न्गोपोक पोकडम, पूर्वी सियांग, अरुणाचल प्रदेश
न्गोपोक के ग्राम समुदाय के लोगों ने स्थानीय आदि भाषा में जल संसाधन विभाग के अधिकारी से बात की और बताया कि जेजेएम के तहत किए गए सभी कार्य पूरे हो चुके हैं, जिससे गुरुत्वाकर्षण आधारित जल आपूर्ति प्रणाली के जरिए पांच बस्तियों के सभी 330 घरों को स्वच्छ और पीने योग्य पानी मिल रहा है। न्गोपोक चौबीसों घंटे नियमित और विश्वसनीय जल आपूर्ति सुनिश्चित करने वाली जिले की पहली पंचायत बन गई है। पंचायत ने मजबूत सामुदायिक नेतृत्व वाले संचालन और रखरखाव पर प्रकाश डाला, जिसमें एक सुचारू रूप से कार्यरत वीडब्ल्यूएससी, प्रशिक्षित “नल जल मित्र” और नियमित जल गुणवत्ता परीक्षण का काम संभालने वाली दस कुशल महिलाएं शामिल हैं। गांव को हर घर जल का प्रमाण पत्र भी हासिल है।
ग्राम समुदाय के लोगों ने बताया कि नियमित आईईसी गतिविधियां, उचित रजिस्टरों के साथ उपयोगकर्ता शुल्क संग्रह और घर-घर जागरूकता ने जल प्रणाली की स्थिरता सुनिश्चित की है। ग्राम सभा में स्वीकृत 50 रुपये प्रति परिवार और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के लिए 200 रुपये का मासिक शुल्क संचालन और रखरखाव की जरूरतों को पूरा करता है। स्वच्छता श्रमदान, भंडारण टैंकों के रखरखाव और जल स्रोत वाले क्षेत्रों के संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी उच्च बनी हुई है। जल शोधन संयंत्र के पास कूड़ा फेंकने पर सख्त दंड और नियमित रूप से जल स्रोतों का दौरा जल प्रणाली की सुरक्षा और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के प्रति पंचायत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

- मावतावर, पूर्वी खासी हिल्स, मेघालय
अंग्रेजी में बोलते हुए, मावतावर के सरपंच ने बताया कि पहाड़ी और ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में पानी पहुंचाना लंबे समय से बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है। जेजेएम से पहले, ग्रामीण, विशेषकर महिलाएं, नदियों और कुओं से पानी लाने में प्रतिदिन 1-3 घंटे खर्च करती थीं और सूखे मौसम में अक्सर लंबी कतारों में खड़ी रहती थीं। जेजेएम के लागू होने के बाद, गुरुत्वाकर्षण आधारित वितरण को सुविधाजनक बनाने हेतु ऊंचे भंडारण टैंकों का निर्माण किया गया है, जिससे हर घर में नियमित रूप से नल का पानी पहुंच रहा है। समुदाय ने दैनिक जीवन में महत्वपूर्ण सुधार देखे हैं। इनमें विशेषकर महिलाओं के लिए शारीरिक बोझ में कमी, समय की बचत और अधिक सम्मान एवं सुविधा शामिल हैं।
ग्राम नेतृत्व ने इस बात पर जोर दिया कि जल गुणवत्ता आश्वासन सेवाओं की आपूर्ति का एक अभिन्न अंग बन गया है। प्रशिक्षित चार महिलाओं, आशा कार्यकर्ताओं और एडब्ल्यूडब्ल्यू कार्यकर्ताओं द्वारा वर्ष में कम से कम तीन बार पानी का परीक्षण किया जाता है। वीडब्ल्यूएससी वितरण प्रबंधन, गुणवत्ता निगरानी, जागरूकता अभियान और शिकायत निवारण में सक्रिय भूमिका निभाती है। रिसाव जैसी छोटी-मोटी समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर किया जाता है, जबकि बड़ी समस्याओं की सूचना तुरंत पीएचईडी को दी जाती है, जो मजबूत सामुदायिक भागीदारी और एक प्रभावी ग्रामीण जल शासन प्रणाली को दर्शाता है।

- कुन्नुम्मल, कोझिकोड, केरल
केरल के कोझिकोड जिले की कुन्नुम्मल ग्राम पंचायत के निर्वाचित प्रतिनिधियों और जेजेएम के लाभार्थियों ने मलयालम में अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि मिशन से पहले, पंचायत गर्मियों के महीनों में टैंकर के पानी पर निर्भर थी। जेजेएम के लागू होने से अब घरों को पूरे वर्ष स्वच्छ पेयजल मिलता है और पंचायत ने चौबीसों घंटे जल आपूर्ति के साथ प्रभावी रूप से आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है। समुदाय के सदस्यों ने यह भी बताया कि पंचायत में स्थानीय स्वयंसेवकों का एक प्रशिक्षित समूह है जो समय पर जल की गुणवत्ता की जांच करता है, जिससे आपूर्ति किए जा रहे पेयजल की सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित होती है।
कोझिकोड जिले के उप कलेक्टर भी इस चर्चा में शामिल हुए और उन्होंने वास्तविक समय में जल आपूर्ति और सेवा संबंधी जरूरतों की निगरानी हेतु पूरे जिले में उपयोग की जा रही व्हाट्सएप आधारित निगरानी प्रणाली के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक पंचायतों को हर घर जल प्रमाणित पंचायत घोषित करने के लिए सक्रिय प्रयास जारी हैं, जो सुरक्षित पेयजल की सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करने और स्थानीय स्तर पर सेवा वितरण तंत्र को मजबूत करने के प्रति केरल की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

अपने समापन भाषण और आगे की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए, एनजेजेएम के एएस एवं एमडी श्री कमल किशोर सोआन ने विस्तृत प्रस्तुति की सराहना की और पंचायत एवं जिला अधिकारियों द्वारा किए गए व्यापक प्रयासों को स्वीकार किया। उन्होंने सहभागितापूर्ण दृष्टिकोण, जल जीवन क्लब जैसी जागरूकता पहलों के एकीकरण और उत्तरदायी शिकायत निवारण तंत्र की स्थापना की प्रशंसा की।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह मंच न केवल अच्छी कार्यप्रणालियों को प्रदर्शित करने, बल्कि चुनौतियों पर खुलकर चर्चा करने के लिए भी है ताकि उनका सामूहिक रूप से समाधान किया जा सके और उनमें सुधार किया जा सके। उन्होंने आगामी जल महोत्सव (8-22 मार्च) पर भी प्रकाश डाला और ग्राम पंचायतों को सक्रिय रूप से भाग लेने तथा इस अवसर का उपयोग करके सामुदायिक स्वामित्व को मजबूत करने, जल सेवा वितरण को संस्थागत रूप देने और जल गुणवत्ता निगरानी प्रयासों को और बेहतर बनाने हेतु प्रोत्साहित किया।
उन्होंने ऐसी सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का विस्तार करने और अधिक पंचायतों को इसमें शामिल करने हेतु निरंतर प्रयासों को प्रोत्साहित किया ताकि पारदर्शिता, सामुदायिक भागीदारी और जवाबदेही के ऐसे ही मॉडल अन्य क्षेत्रों में भी दोहराए जा सकें।

इस कार्यक्रम का शुभारंभ एनजेजेएम की उप सचिव डॉ. अंकिता चक्रवर्ती द्वारा सभी प्रतिभागियों का स्वागत करने और सुजल ग्राम संवाद के चौथे संस्करण के उद्देश्य को संक्षेप में बताने के साथ हुआ। इस कार्यक्रम का सफल समापन एनजेजेएम के निदेशक श्री वाई.के. सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन करके किया।
चौथे संस्करण का संपूर्ण संवाद यहां देखा जा सकता है:
Ministry of Jal Shakti | Webcast Services of National Informatics Centre, Government of India
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पीके/केसी/आर/डीके
(रिलीज़ आईडी: 2232407)
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