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azadi ka amrit mahotsav AI Impact Summit 2026

एआई के दौर में भारत की युवा शक्ति


भविष्य के लिए तैयार प्रतिभा-सम्पन्न इकोसिस्टम बनाना

प्रविष्टि तिथि: 19 FEB 2026 9:24AM by PIB Delhi

प्रमुख विशेषताएं

  • भारत का जनसांख्यिकीय लाभ इसके एआई परिवर्तन को शक्ति प्रदान कर रहा है, जिसमें 35 वर्ष से कम आयु की 65 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या देश की डिजिटल और नवाचार रणनीति के केंद्र में है।
  • विद्यालयों, व्यावसायिक प्लेटफॉर्मो, उन्नत अनुसंधान फेलोशिप और उद्योग साझेदारों तक व्याप्त राष्ट्रीय पहलों के समर्थन से एआई कौशल व्यापक स्तर पर प्रगति कर रहा है
  • इंडियाएआई मिशन के अंतर्गत किफायती एआई बुनियादी ढांचा और नीतिगत समर्थन महानगरों से परे कंप्यूट, डेटा और नवाचार के अवसरों तक पहुंच को लोकतांत्रिक बना रहा है।
  • युवाओं के नेतृत्व वाला नवोन्मेष, प्रयोग से वैश्विक प्रभाव की ओर बढ़ रहा है, जिससे भारत ज़िम्मेदार, सबको साथ लेकर चलने वाले और यूज़-केस पर आधारित एआई नेतृत्व के लिए एक उभरता हुआ केन्द्र बन रहा है।

परिचय

इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026, का शुभारंभ 16 फरवरी 2026 को एक मज़बूत विज़न के साथ हुआ, जिसमें भारत के युवाओं को देश की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) यात्रा के केंद्र में रखा गया है। भविष्य के स्वप्न से कहीं ज़्यादा, यह सम्मेलन एआई को एक बदलाव लाने वाली क्षमता के रूप में प्रस्तुत करता है जो पहले से ही रोजगारों और आजीविका को बदल रही है। भारत में दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है, जिसकी 65 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या 35 वर्ष से कम उम्र की है, जो इस जनसांख्यिकीय पॉवरहाउस को आर्थिक रफ़्तार के इंजन के तौर पर पेश करता है।

यह सम्मेलन निष्क्रिय शिक्षण से सक्रिय भागीदारी की ओर बदलाव, अलग-अलग क्षेत्र में रोज़गार को फिर से परिभाषित करना, कौशल पर ध्यान देना और उद्योग जगत की आवश्यकताओं के साथ शिक्षा को समकालीन बनाने की शीघ्र ज़रूरत को दिखाता है। इसका मुख्य ध्यान रोजगार, उत्पादन बढ़ाने और कक्षा से एआई-जनित करियर तक आसान मार्ग प्रशस्त करने पर है।

इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में, युवा नवोन्मेषक अभिनव चुनौती, स्टार्टअप गतिविधियों और प्रत्यक्ष समाधान प्रदर्शन जैसे प्रायोगिक प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं। ये संरचित जुड़ाव कौशल को बाजार की ज़रूरतों से जोड़ते हैं और भारत के युवाओं की क्षमता को उत्पादक क्षमता में बदलते हैं। यह सम्मेलन एनिमेशन, विज़ुअल इफ़ेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स जैसे उभरते क्षेत्र में रोज़गार सृजन को तेज़ करने के लिए एक उत्प्रेरक का कार्य करता है, जिनसे वर्ष 2030 तक लगभग 2 मिलियन रोज़गार सृजन होने का अनुमान है। युवाओं के कौशल और रोज़गार सृजन के साथ वैश्विक दृष्टिकोण को साझा करते हुए, भारत अपनी एआई रणनीति और भविष्य के लिए तैयार कार्यबल के आधार के रूप में जनसांख्यिकीय लाभ को मज़बूत कर रहा है।

भारत के प्रतिभा-सम्पन्न समूह के लिए एक अवसर के रूप में एआई

एआई तेज़ी से भारत के बड़े प्रतिभा सम्पन्न समूह के लिए एक बदलाव लाने वाले अवसर के तौर पर उभर रहा है। रोज़गार के परिवेश को बदलकर, एआई नई भूमिकाओं का सृजन कर रहा है, उत्पादकता बढ़ा रहा है, और सबको साथ लेकर चलने वाले विकास के मार्ग में वृद्धि कर रहा है। भारत एआई को युवाओं रोजगार और कौशल को बढ़ाने के लिए एक आवश्यक माध्यम मानता है, जो उभरती हुई प्रौद्योगिकी को सबको साथ लेकर चलने वाले विकास और कौशल विकास के साथ जोड़ता है।

एआई कौशल की बढ़ती मांग

एआई कौशल और रोज़गारों की बढ़ती मांग युवा भारतीयों के लिए अवसरों को बदल रही है। जनवरी 2023 और मार्च 2025 के बीच, दक्षिण एशिया में एआई से जुड़ी रोज़गार पोस्टिंग सभी पदों के 2.9 प्रतिशत से बढ़कर 6.5 प्रतिशत हो गईं, जिसमें एआई कौशल की मांग गैर-एआई भूमिकाओं के मुकाबले 75 प्रतिशत ज़्यादा तेज़ी से बढ़ी। यह बदलाव भारत के श्रम बाजार में एक संरचनात्मक बदलाव का संकेत देता है—एक ऐसा बदलाव जो डिजिटल रूप से सक्षम प्रवाह, अत्याधुनिक तकनीकी क्षमता और बहुविषयक विशेषज्ञता को तेज़ी से सकारात्मक लाभ दे रहा है। भारत के युवाओं के लिए, एआई सिर्फ़ एक तकनीकी दौर नहीं है, बल्कि प्रौदयौगिकी और आस-पास के क्षेत्रों में कौशल-प्रखर, भविष्य के लिए तैयार रोज़गार की ओर एक सुस्पष्ट मार्ग है।

एआई-तैयार युवा कौशल के लिए नीतिगत समर्थन

एआई को एक रणनीतिक रोज़गार संचालक के तौर पर पहचानते हुए, केन्द्रीय बजट 2026-27 ने एआई कौशल और योग्यता विकास पर सरकार के ध्यान को और मज़बूत किया। बजट ने ऑरेंज इकोनॉमी को प्राथमिकात दी, जो एनिमेशन, गेमिंग, डिजिटल कंटेंट और इमर्सिव मीडिया जैसे एआई से जुड़े क्षेत्रों के साथ परस्पर संबंध रखती है। इसने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज़ (आईआईसीटी), मुंबई को 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में एआई-से जुड़े विषय सृजन लैब्स बनाने के लिए समर्थन दिया, जिससे युवाओं के लिए भविष्य के तैयार कौशल हासिल करने और एआई-केन्द्रित रोज़गार भूमिका में आने के मार्ग खुलेंगे। इस पहल से लगभग 20 लाख नए रोज़गार सृजन होने का अनुमान है, जिससे पूरे भारत में छात्र, सृजनकर्ता और युवा पेशेवर के लिए रोजगार के अवसर सीधे तौर पर बढ़ेंगे।

बजट ने एआई और उभरती तकनीकों को सभी क्षेत्रों में रोजगार और कौशल को आकार देने का केन्द्र बिन्दु बताया। इसने एजुकेशन टू एम्प्लॉयमेंट एंड एंटरप्राइज स्टैंडिंग कमेटी का प्रस्ताव रखा ताकि यह पता लगाया जा सके कि एआई और उससे जुड़े टेक रोजगार और कौशल आवश्यकताओं को कैसे प्रभावित करती हैं, जिसका उद्देश्य शिक्षा, कार्य और उद्म मांग को दूर करना है।

एआई बुनियादी ढांचे तक पहुंच का लोकतंत्रीकरण

भारत के कौशल समूह में अवसर बढ़ाने के लिए डिजिटल बुनियादी ढांचे तक सभी की बराबर पहुंच भी ज़रूरी है। इंडियाएआई मिशन के अंतर्गत, सरकार ने एआई क्षमताओं को मज़बूत करने और वर्तमान 38,000 जीपीयू से आगे कंप्यूट क्षमता बढ़ाने के लिए 10,300 करोड़ रुपए से ज़्यादा दिए हैं, साथ ही 20,000 और हाई-एंड जीपीयू जोड़े जाने हैं। 65 रूपए प्रति घंटे की सब्सिडी वाली दर पर मिलने वाला यह कंप्यूट एक्सेस स्टार्टअप्स, युवा इनोवेटर्स और सरकारी संस्थानों के लिए प्रवेश बाधाओं को कम करता है। कंप्यूट, डेटासेट और मॉडल इकोसिस्टम तक पहुंच को लोकतंत्रीकरण करके, भारत यह सुनिश्चित कर रहा है कि एआई का अवसर सिर्फ़ बड़े शहरों तक ही सीमित न रहे, बल्कि देश भर के उभरते हुए प्रतिभाओं के लिए भी उपलब्ध हो। 58,000 से ज़्यादा जीपीयू तक बढ़ाने की योजना एआई इकोनॉमी में सबको शामिल करने, ज़िम्मेदार इनोवेशन और व्यापक स्तर पर भागीदारी के लिए देश की वचनबद्धता को मज़बूत करती है।

कौशल क्षमता, नवोन्मेष और पहुंच को एक साथ लाकर, एआई युवाओं द्वारा संचालित आर्थिक वद्धि और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए एक शक्तिशाली इंजन बन रहा है।

प्रतिभायुक्त एआई-तैयार कार्यबल  बनाने के लिए राष्ट्रीय प्रयास

भारत सरकार विद्यालयी शिक्षा,  व्यावसायिक प्रशिक्षण, उच्च शिक्षा और पेशेवर कौशल उन्नयन में मिलकर काम करके एक बड़ी एआई प्रतिभा सम्पन्न श्रृंखला तैयार कर रही है। इन प्रयासों का उद्देश्य युवाओं को उद्योग की मांग के हिसाब से बेसिक, इंटरमीडिएट और अत्याधुनिक एआई क्षमता प्रदान करना है।

विद्यालयों में बुनियादी एआई साक्षरता

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020:

एनईपी 2020 डिजिटल और एआई साक्षरता को आवश्यक योग्यता के तौर पर प्राथमिकता देता है, जिसमें अगली पीढ़ी को तेज़ी से प्रौद्योगिकी में हो रहे बदलाव के लिए तैयार करने के लिए सभी शैक्षिक स्तर पर कम्प्यूटेशनल विचारधारा और एआई अवधारणा को शामिल किया गया है। यह समग्र पहुंच डेटा-आधारित निर्णय लेने की क्षमता और नैतिक एआई सिद्धांत के बारे में शीघ्र जानकारी सुनिश्चित करता है, प्राथमिक शिक्षण से ही नवोन्मेष की संस्कृति को बढ़ावा देता है और भारतीय छात्रों को अंतर्राष्ट्रीय एआई इकोसिस्टम में भविष्य के लिये तैयार योगदानकर्ता के तौर पर तैयार करता है।

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग (एआई एंड सीटी): एआई एंड सीटी  पहल, ग्रेड 3 से शुरू होकर और धीरे-धीरे "एआई फॉर पब्लिक गुड" की ओर बढ़ते हुए, सीखने, सोचने और सिखाने के तरीकों को मज़बूत करके शिक्षण तरीकों को फिर से परिभाषित करती है। यह बुनियादी पहल नैतिक एआई तरीकों को पाठ्यक्रम में शामिल करती है, जिससे युवा सीखने वाले एल्गोरिदम, समस्या-समाधान और सामाजिक एप्लीकेशन को जल्दी समझ पाते हैं, जिससे एआई-प्रधान भविष्य के लिए संज्ञानात्मक रूप से अनुकूल बनता है।
  • वाईयूवीएआई (एआई के साथ उन्नति के लिए युवा): नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीज़न (एनईजीडी) के साथ शुरू किया गया इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय का वाईयूवीएआई, कक्षा 8-12 के छात्रों को आठ विषयपरक क्षेत्रों में व्यवहारिक एआई समाधान तैयार करने में सहायता करता है।
  • सभी के लिए युवा एआई: सभी के लिए युवा एआई 11 भाषाओं (असमिया, बंगाली, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, मलयालम, मराठी, ओडिया, पंजाबी, तमिल, तेलुगु) में एक निःशुल्क राष्ट्रीय एआई साक्षरता पाठ्यक्रम देता है। इसमें दीक्षा, आईगॉट कर्मयोगी और फ्यूचरस्किल्स प्राइम के माध्यम से पहुंचा जा सकता है। इसका लक्ष्य 1 करोड़ नागरिकों को एआई की बेसिक जानकारी देना है। यह बड़े स्तर की ज्ञान पहल को सबके लिए उपलब्ध कराती है, शहर-गांव के बीच की दूरी को पाटती है, और एआई  को एक ज़रूरी जीवन कौशल के तौर पर बढ़ावा देती है, जिससे लोगों की भागीदारी बढ़ती है और प्रौद्योगिकी को बड़े पैमाने पर अपनाने की तैयारी होती है।

व्यावसायिक और उद्योग-संरेखित प्रशिक्षण

  • कौशल भारत मिशन और एसओएआर पहल: कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के नेतृत्व में स्किल इंडिया मिशन, एआई को पेशेवर प्रशिक्षण में समेकित करता है। एसओएआर (स्किलिंग फॉर एआई रेडीनेस) पहल के तहत दिसंबर 2025 तक माइक्रोसॉफ्ट, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और एनएएसएसओएम के साथ साझेदारी के ज़रिए 1.34 लाख छात्रों और शिक्षकों को शामिल किया जाएगा। प्रेसिडेंट के #स्किलदनेशन  चुनौती के साथ, यह बेसिक और एप्लाइड एआई पाठ्यक्रम देता है, जिससे कार्यबल स्थानांतरण तेज़ होता है और उच्च-मांग वाले प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में रोजगार में बढ़ता है।


फ्यूचरस्किल्स प्राइम पहल: यह पहल, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और नेसकॉम के बीच एक सहयोग है, जो एआई, बिग डेटा, क्लाउड कंप्यूटिंग और दूसरी नई प्रौद्योगिकी में पेशवरों के कौशल उन्नयन पर ध्यान केन्द्रित करती है। यह पहल नेशनल ऑक्यूपेशनल स्टैंडर्ड्स (एनओएस) और नेशनल स्किल्स क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क (एनक्यूएफ) के समानुकूल है, जिससे सीखने वाले मांग के अनुरूप कौशल हासिल कर पाते हैं जिन्हें नियोक्ता भी बहुत महत्व देते हैं। 25.3 लाख से ज़्यादा रजिस्टर्ड सीखने वाले और 3,000+ पाठ्यक्रम और मार्ग के साथ, यह प्लेटफॉर्म सीधे कार्यबल हस्तांतरण में योगदान देता है, जिससे सभी क्षेत्रों में रोजगार क्षमता और उत्पादकता बढ़ती है।

  • स्किल इंडिया डिजिटल हब (सिद्ध - एसआईडीएच): एमएसडीई का स्किल इंडिया डिजिटल हब (सिद्ध) कौशल विकास को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एकीकृत करता है, जो विभिन्न शिक्षार्थियों की दक्षताओं के अनुरूप प्रारंभिक से लेकर उन्नत स्तर तक के एआई और मशीन लर्निंग पाठ्यक्रम प्रदान करता है। गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण तक सुगम पहुंच प्रदान करके, यह आजीवन शिक्षण, क्षेत्रीय समावेशन और मापन योग्‍य कौशल उन्‍नयन का समर्थन करता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि प्रत्येक इच्छुक पेशेवर अपनी पृष्ठभूमि या स्थान की परवाह किए बिना एआई-केंद्रित करियर की ओर अग्रसर हो सके।

 

उन्नत एआई प्रतिभा और अनुसंधान इको-सिस्‍टम

  • इंडियाएआई फ्यूचरस्किल्स: इंडियाएआई मिशन के अंतर्गत, इंडियाएआई फ्यूचरस्किल्स स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी छात्रों के लिए फैलोशिप और विशेष कौशल-संवर्धन पाठ्यक्रमों के माध्यम से एक विशिष्ट एआई इको-सिस्‍टम का निर्माण करता है, जो दिसंबर 2025 तक 500 पीएचडी शोधार्थियों, 5,000 स्नातकोत्तर छात्रों और 8,000 स्नातक छात्रों को सहायता प्रदान करता है। यह लक्षित पहल शोध प्रतिभा को पोषित करती है, नवाचार को बढ़ावा देती है और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों में भारत के नेतृत्व को मजबूत करने के लिए उन्नत एआई विशेषज्ञों की एक सतत आपूर्ति का निर्माण करती है।

 

  • इंडियाएआई डेटा और एआई लैब्स: इंडियाएआई डेटा और एआई लैब्स, जिनकी स्थापना एनआईईएलआईटी के माध्यम से टियर-2/3 शहरों में 27 केंद्रों में की गई है और 27 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों में 174 अतिरिक्त प्रयोगशालाओं के लिए अनुमोदन प्राप्त हैं, एआई पाठ्यक्रम, डेटा क्यूरेशन, एनोटेशन, क्लीनिंग और एप्लाइड डेटा साइंस पर जोर देती हैं। ये केंद्र उच्च स्तरीय संसाधनों का विकेंद्रीकरण करते हैं, जमीनी स्तर पर अनुसंधान को बढ़ावा देते हैं और व्यावहारिक प्रशिक्षण को सक्षम बनाते हैं, जिससे महानगरों से परे एआई क्षमताओं का समान वितरण सुनिश्चित होता है।

 

कक्षाओं से लेकर उन्नत प्रयोगशालाओं तक, यह बहुस्तरीय संरचना व्यापक पहुंच, क्षेत्रीय समानता और उद्योग संरेखण की गारंटी देती है, जिससे भारत के युवाओं को नैतिक एआई नवाचार और एआई-संचालित अर्थव्यवस्था में सक्रिय भागीदारी के लिए सशक्त बनाया जा सके।

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में युवाओं का सशक्तिकरण

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 ने भारत की एआई परिवर्तन यात्रा के केंद्र में युवाओं और समावेशी प्रतिभा विकास को रखा है। वैश्विक चुनौतियों, नवाचार प्रदर्शनों और नीतिगत संवादों के माध्यम से, यह शिखर सम्मेलन इस बात पर प्रकाश डाल रहा है कि कैसे युवा नवप्रवर्तक और महिला उद्यमी जनहित के लिए जिम्मेदार, स्केलेबल एआई समाधानों को आकार दे रही हैं।

भारत के व्‍यापक एआई विजन के केंद्र में युवा:

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में, भारत की व्‍यापक एआई क्षमताओं को आगे बढ़ाने के व्यापक दृष्टिकोण में युवा सशक्तिकरण को शामिल किया गया है। "भारत के व्‍यापक एआई और डेटा से प्रभाव बढ़ाना" सत्र में गहन अनुसंधान प्रतिभा, सतत नवाचार इको-सिस्‍टम और भारत के भाषायी और विकासात्मक संदर्भों के अनुरूप स्वदेशी एआई मॉडल विकसित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया। इस क्षेत्र के दिग्‍गजों ने इस बात पर बल दिया कि युवा नवोन्मेषकों को पारदर्शी, समझने योग्य और राष्ट्रीय स्तर पर तालमेल द्वारा एआई प्रणालियां बनाने में सक्षम होना चाहिए जो वास्तविक चुनौतियों का समाधान कर सकें। उन्नत एआई अनुसंधान को कृषि, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और वित्तीय समावेशन जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों से जोड़कर, यह शिखर सम्मेलन भारत के युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और सामाजिक रूप से प्रभावशाली एआई समाधानों के प्रमुख चालक के रूप में स्थापित कर रहा है।

एल्गोरिदम से परिणाम तक:

शिखर सम्मेलन में, मापनयोग्य सार्वजनिक प्रभाव प्रदान करने वाली एआई के निर्माण पर विशेष बल देकर युवाओं की भागीदारी को मजबूत किया जा रहा है। "एल्गोरिदम से परिणाम तक" सत्र में, इलेक्‍ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय  के सचिव श्री एस. कृष्णन ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत एआई मिशन को कंप्यूट, मॉडल और डेटा को उपयोग योग्य अनुप्रयोगों में परिवर्तित करके वास्तविक दुनिया की चुनौतियों का समाधान करने के लिए डिजाइन किया गया है। स्वास्थ्य सेवा, कृषि, शिक्षा और विनिर्माण क्षेत्रों में 600 से अधिक स्टार्टअप और कंपनियों द्वारा प्रदर्शित एआई समाधानों के साथ, शिखर सम्मेलन युवा नवप्रवर्तकों को मापनयोग्‍य इस्‍तेमाल के मामलों और सार्वजनिक क्षेत्र की समस्या-समाधान का प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान करता है। वैश्विक विशेषज्ञों के साथ चर्चाओं ने कठोर मूल्यांकन, जिम्मेदार विस्तार और साक्ष्य-आधारित कार्यान्वयन के महत्व से अवगत कराया, जिससे युवाओं को न केवल प्रौद्योगिकीविदों के रूप में, बल्कि परिणाम-उन्मुख और नागरिक-केंद्रित एआई प्रणालियों में योगदानकर्ताओं के रूप में स्थापित किया गया।

युवाएआई ग्लोबल यूथ चैलेंज:

युवाएआई ग्लोबल यूथ चैलेंज, इंडियाएआई मिशन की एक प्रमुख पहल है, जो 13 से 21 वर्ष की आयु के युवा नवप्रवर्तकों को 'लोग, ग्रह और प्रगति' के उद्देश्यों के अनुरूप एआई समाधान विकसित करने के लिए सशक्त बना रही है। 38 देशों से 2,500 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से इस चैलेंज में स्वास्थ्य सेवा, कृषि, जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता, सुलभता, डिजिटल विश्वास और स्मार्ट मोबिलिटी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम करने वाली 70 उच्च-क्षमता वाली टीमों ने भाग लिया। विजेता टीमों को राष्ट्रीय मान्यता के साथ-साथ वित्तीय पुरस्कार और सुव्‍यवस्थित इको-सिस्‍टम की सहायता भी मिली, जिसमें मेंटरशिप, इनक्यूबेशन और उद्योग से जुड़ाव शामिल हैं। तकनीकी मजबूती, तैनाती की तैयारी और सामाजिक प्रभाव पर केंद्रित कठोर मूल्यांकन के माध्यम से, यह शिखर सम्मेलन प्रदर्शित कर रहा है कि कैसे युवा नेतृत्व वाली एआई नवाचार प्रोटोटाइप से लेकर बड़े पैमाने पर सार्वजनिक हित के समाधानों तक पहुंच सकती है, जिससे जिम्मेदार और समावेशी एआई में भारत का नेतृत्व मजबूत हो रहा है।

 

‘एआई बाय हर’ ग्लोबल इम्पैक्ट चैलेंज:

‘एआई बाय हर’ ग्लोबल इम्पैक्ट चैलेंज ने भारत के जिम्मेदार एआई आंदोलन में महिलाओं और युवा नवोन्मेषकों को अग्रणी स्थान दिया। पैनल चर्चाओं, स्टार्टअप प्रदर्शनियों और त्वरित प्रस्तुति सत्रों के माध्यम से, कार्यक्रम ने दिखाया कि कैसे सहानुभूति-आधारित नवाचार स्वास्थ्य सेवा, जलवायु अनुकूलन, शिक्षा, फिनटेक, सुरक्षा और डिजिटल सार्वजनिक इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर जैसे क्षेत्रों में व्यापक समाधानों में परिवर्तित हो सकता है। स्कूली स्तर के समस्या समाधानकर्ताओं से लेकर डीप-टेक संस्थापकों तक, प्रतिभागियों ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे विश्वास, क्षेत्र-विशिष्ट डिजाइन और मजबूत डिजिटल सार्वजनिक इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर पर आधारित एआई मापनयोग्य सामाजिक परिणाम प्रदान कर सकता है। 150 महिला-नेतृत्व वाले एआई स्टार्टअप के लिए एक समर्पित क्षमता-निर्माण कार्यक्रम की घोषणा ने शिखर सम्मेलन की पहुंच से तीव्रता की ओर बढ़ने की प्रतिबद्धता को और मजबूत किया, यह सुनिश्चित करते हुए कि युवा और महिला नवोन्मेषकों को विचार से लेकर विस्तार तक हर चरण में समर्थन मिले।

 

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर वैश्विक संवाद – श्रम बाजार की मजबूती के लिए डेटा:

 

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दूसरे दिन आयोजित सत्र "कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर वैश्विक संवाद – श्रम बाजार की मजबूती के लिए डेटा" में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को तेजी से अपनाने के संदर्भ में काम और रोजगार परिदृश्यों की बदलती प्रकृति और इस परिवर्तन को प्रबंधित करने के लिए आवश्यक नीतिगत विकल्पों पर ध्यान केंद्रित किया गया। उभरते अंतरराष्ट्रीय साक्ष्यों के आधार पर, चर्चा में विभिन्न आयु समूहों, क्षेत्रों और भौगोलिक क्षेत्रों में अलग-अलग प्रभावों पर प्रकाश डाला गया, जिसमें प्रारंभिक रुझान उच्च एआई एक्सपोजर वाली भूमिकाओं में युवा श्रमिकों पर रोजगार के दबाव को दर्शाते हैं।

 

एआई इम्पैक्ट स्टार्टअप बुक:

 

एआई इम्पैक्ट स्टार्टअप बुक का शुभारंभ भारत भर में विकसित 100 से अधिक एआई समाधानों का एक समेकित संग्रह उपलब्ध कराकर युवा उद्यमियों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह संकलन स्वास्थ्य सेवा, कृषि, शिक्षा, बुनियादी मॉडल और अत्याधुनिक एआई में नवाचारों को उजागर करता है, जो भारतीय स्टार्टअप की बढ़ती परिपक्वता और वैश्विक उपस्थिति को दर्शाता है। मंत्रालयों और राज्यों में प्रभावशाली उपयोग मामलों के मूल्यांकन और विस्तार के लिए एक व्‍यवस्‍थि‍त प्रणाली बनाकर, यह पहल युवा नवोन्मेषकों को पायलट परियोजनाओं से बड़े पैमाने पर इस्‍तेमाल की ओर बढ़ने में सक्षम बनाती है। अगले 12-18 महीनों में भारत को "उपयोग का केन्‍द्र" बनाने के लक्ष्य पर जोर देते हुए, शिखर सम्मेलन ने युवा नेतृत्व वाले एआई नवाचार को मापनयोग्य, वास्तविक दुनिया के परिणामों में परिवर्तित करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।

 

सामूहिक रूप से, ये पहलें युवा नेतृत्व और महिला-पुरुष आधारित विविधता द्वारा संचालित भविष्य के लिए तैयार, समावेशी एआई इकोसिस्‍टम के निर्माण के लिए भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि करती हैं। नवाचार प्लेटफार्मों को नीतिगत सहभागिता और इकोसिस्‍टम के समर्थन के साथ जोड़कर, शिखर सम्मेलन ने युवा प्रतिभाओं के लिए सतत विकास और वैश्विक एआई प्रभाव को आगे बढ़ाने के मार्ग को मजबूत किया।

 

 

भारत में एआई के क्षेत्र में प्रतिभा-आधारित नेतृत्व के वैश्विक संकेतक

2047 तक विकसित भारत के विज़न की राह पर अग्रसर भारत में अब 50 प्रतिशत से अधिक स्टार्टअप महानगरों से बाहर उभर रहे हैं, जिससे यह मिथक टूट रहा है कि भारत में नवाचार केवल महानगरों तक ही सीमित है।

युवा नेतृत्व वाले एआई नेतृत्व को दर्शाने वाले वैश्विक संकेतक:

  • एआई कौशल का उच्च प्रसार: स्टैनफोर्ड ग्लोबल एआई इंडेक्स रिपोर्ट 2025 के अनुसार, भारत में एआई कौशल का सापेक्ष प्रसार, समान व्यवसायों में वैश्विक औसत से 2.5 गुना अधिक है, जो प्रारंभिक और व्यापक कौशल विकास पहलों के प्रभाव को दर्शाता है।
  • उद्यमों द्वारा व्यापक स्वीकृति: नैसकॉम एआई एडॉप्शन इंडेक्स के अनुसार, भारत में 87 प्रतिशत उद्यम सक्रिय रूप से एआई समाधानों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे एआई-योग्य युवाओं की निरंतर मांग बनी हुई है और शिक्षा एवं कार्यस्थल के बीच संबंध मजबूत हो रहे हैं।
  • युवा शक्ति: भारत में डिजिटल रूप से अनुकूलनीय युवाओं का विश्व का सबसे बड़ा समूह है, जो युवाएआई जैसे एआई शिक्षण और नवाचार कार्यक्रमों में बड़े पैमाने पर भागीदारी को सक्षम बनाता है।

इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड

युवाओं की भागीदारी नवाचार से आगे बढ़कर जिम्मेदार एआई अपनाने तक फैली, क्योंकि भारत ने 24 घंटों में 25 लाख से अधिक एआई जिम्मेदारी प्रतिज्ञाओं के साथ गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। इंटेल इंडिया के सहयोग से इंडियाएआई मिशन के तहत चलाए गए इस राष्ट्रव्यापी अभियान ने छात्रों और नागरिकों को नैतिक, पारदर्शी और जवाबदेह एआई उपयोग के लिए प्रतिबद्ध होने के लिए प्रेरित किया। इंटरैक्टिव परिदृश्यों के माध्यम से डेटा गोपनीयता, गलत सूचना और जवाबदेही पर चिंतन को प्रोत्साहित करके, इस पहल ने युवाओं को विश्वसनीय एआई के संरक्षक के रूप में स्थापित किया। व्‍यापक भागीदारी जिम्मेदार डिजिटल नागरिकता की बढ़ती संस्कृति से अवगत कराती है, जो मानव-केंद्रित और नैतिक रूप से आधारित एआई इकोसिस्‍टम के भारत के दृष्टिकोण को मजबूत करती है।

 

ये सभी संकेतक मिलकर यह दर्शाते हैं कि युवाएआई किस प्रकार एक व्यापक राष्ट्रीय इकोसिस्‍टम के भीतर कार्य करता है जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और भविष्योन्मुखी है। प्रारंभिक एआई एक्सपोजर को मजबूत वैश्विक रैंकिंग, उद्यम स्तर पर इसके उपयोग और जनसांख्यिकीय पैमाने से जोड़कर, भारत अपने युवाओं को वैश्विक एआई परिदृश्य में सक्रिय भागीदार और भविष्य के नेताओं के रूप में स्थापित कर रहा है, जिससे जिम्मेदार और समावेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए एक विश्वसनीय केंद्र के रूप में देश की भूमिका मजबूत हो रही है।

निष्कर्ष

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में भारत की युवा शक्ति एक निर्णायक ताकत के रूप में उभर रही है। निरंतर नीतिगत समर्थन, व्यापक कौशल विकास पहलों और लोकतांत्रिक डिजिटल इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर के माध्यम से, देश अपनी युवा शक्ति को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी प्रतिभा इकोसिस्‍टम में परिवर्तित कर रहा है। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 इस बात पर जोर देता है कि कैसे युवा नेतृत्व वाली नवाचार, जिम्मेदारीपूर्ण एआई अपनाने और उद्योग समन्वय समावेशी और परिणामोन्मुखी विकास को गति देने के लिए एक साथ आ रहे हैं। जैसे-जैसे भारत एक विकसित भारत की ओर बढ़ रहा है, अपनी युवा आबादी को एआई क्षमताओं से सशक्त बनाना दीर्घकालिक उत्पादकता, अनुकूलन और वैश्विक नेतृत्व के लिए केंद्रीय महत्व रखता है।

संदर्भ

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय

 

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय

 

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2217689&reg=3&lang=1

 

पीआईबी मुख्यालय

 

पीआईबी शोध

एआई के दौर में भारत की युवा शक्ति

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