सूचना और प्रसारण मंत्रालय
सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने 15,000-स्कूलों और 500-कॉलेजों में कंटेंट क्रिएशन लैब्स के माध्यम से एवीजीसी क्षेत्र में प्रतिभा विकास पर कार्यशाला का आयोजन किया
कार्यशाला का उद्देश्य ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ विजन के तहत भारत के एवीजीसी इकोसिस्टम को सुदृढ़ करना है
प्रविष्टि तिथि:
12 FEB 2026 10:30PM by PIB Delhi
आज सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय(आई-एंड-बी) ने देश भर के 15,000-स्कूलों और 500-कॉलेजों में भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान(आईआईसीटी) के माध्यम से कंटेंट क्रिएशन लैब्स की स्थापना को क्रियान्वित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय मीडिया केन्द्र, नई दिल्ली में एक उच्चस्तरीय हितधारक परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह पहल ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ विजन की एक महत्वपूर्ण आधारशिला है, जिसका उद्देश्य भारत को एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स(एवीजीसी) क्षेत्र में एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव संजय जाजू ने कहा कि भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान(आईआईसीटी), जिसे पिछले वर्ष केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृति दी गई थी और जो अब राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम(एनएफडीसी) परिसर में में चल रहा है, इस पहल के लिए सह प्रमुख संस्था के रूप में कार्य करेगा। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित लैब्स, आईआईसीटी के लिए एक महत्वपूर्ण प्रतिभा पाइपलाइन के रूप में काम करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि लैब्स की रूपरेखा और समग्र स्वरूप, आवश्यक हार्डवेयर एवं सॉफ्टवेयर अवसंरचना, तथा एक समान ढांचे को बनाए रखते हुए विभिन्न आवश्यकताओं के अनुसार अलग-अलग दृष्टिकोण अपनाने की संभावनाओं पर पहले ही विस्तार से परामर्श किया जा चुका है।
इस कार्यशाला में नीति आयोग, शिक्षा मंत्रालय, कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय के अधिकारी; भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान(आईआईसीटी), के बोर्ड/शासी परिषदें/शैक्षणिक परिषद/अनुसंधान एवं विकास परिषद/कौशल परिषद और उद्योग विकास परिषद के सदस्य; राज्यों के प्रतिनिधि; उद्योग संघों तथा शैक्षणिक जगत के प्रतिनिधि एक साथ सम्मिलित हुए।

कार्यशाला की मुख्य बातें:
- प्रस्तावित प्रयोगशालाएं उन्नत रचनात्मक स्टूडियो के रूप में कार्य करेंगी, जहां छात्रों को उद्योग-मानक सॉफ़्टवेयर और हार्डवेयर का उपयोग करते हुए पेशेवर प्रोडक्शन पाइपलाइनों का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा।
- प्रयोगशाला गतिविधियों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति(एनईपी) के अनुरूप बनाने पर चर्चा हुई, जिससे छात्रों को रचनात्मक क्षेत्रों में बुनियादी जानकारी के साथ-साथ विशिष्ट प्रशिक्षण भी मिल सके।
- नेतृत्व ने वैश्विक रोजगार-योग्यता बढ़ाने और रचनात्मक उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए इन प्रयोगशालाओं में मेंटरशिप कार्यक्रमों और मौलिक बौद्धिक संपदा सृजन की आवश्यकता पर बल दिया।
- प्रतिभागियों ने इस पहल को देशभर में प्रभावी रूप से विस्तार देने के लिए राष्ट्रीय मिशनों और राज्य शिक्षा विभागों के बीच समन्वय के महत्व पर बल दिया।
कार्यशाला का समापन शैक्षणिक शिक्षण और उद्योग की आवश्यकताओं के बीच की खाई को पाटने की प्रतिबद्धता के साथ हुआ, जिससे भारतीय युवाओं को वैश्विक रचनात्मक अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करने के लिए सशक्त बनाया जा सकेगा। ये प्रयोगशालाएं प्रारंभिक आयु से ही रचनात्मक सोच और समस्या-समाधान कौशल को विकसित करेंगी तथा प्रौद्योगिकी-प्रेरित रचनात्मक माहौल में नए उभरते रोजगार के लिए छात्रों को तैयार करेगी।
***
पीके/केसी/पीकेपी/
(रिलीज़ आईडी: 2227371)
आगंतुक पटल : 113