रक्षा मंत्रालय
सरकार ने पूर्व सैनिक (केंद्रीय सिविल सेवा और पद संबंधी पुनर्रोजगार) संशोधन नियम 2026 को अधिसूचित किया
एमएनएस कर्मी पुनर्रोजगार नियमों के दायरे में आए, इसने पुनर्वास और दूसरे करियर के अवसरों को मजबूती प्रदान की
प्रविष्टि तिथि:
10 FEB 2026 3:04PM by PIB Delhi
केन्द्र सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत पूर्व सैनिक (केंद्रीय सिविल सेवा और पदों संबंधी पुनर्रोजगार) संशोधन नियम 2026 को अधिसूचित किया है। प्रमुख परिवर्तन नियम 2 (सी) (i) को संशोधित करता है, जिसमें भारतीय संघ की नियमित सेना, नौसेना या वायु सेना के साथ-साथ सैन्य नर्सिंग सेवा (एमएनएस) में किसी भी रैंक में, चाहे योद्धा हों या गैर-यौद्धा, सेवा दे चुके कर्मियों को केंद्रीय सिविल सेवाओं में पूर्व सैनिकों के पुनर्रोजगार के लिए परिभाषा के दायरे में स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है।
इस कदम से उस पहले वाली अस्पष्टता को दूर कर दिया गया है कि क्या एमएनएस अधिकारी, जो कि कमीशन प्राप्त अधिकारी होते हैं, अन्य पूर्व सैनिकों के समान पुनर्रोजगार लाभों के हकदार थे या नहीं। यह संशोधन पुनर्रोजगार नियमों के तहत एमएनएस कर्मियों को औपचारिक रूप से मान्यता देता है और पूर्व रक्षा कर्मियों के एक व्यापक वर्ग के लिए पुनर्वास और दूसरे करियर के अवसरों को मजबूती प्रदान करता है।
नियम 2, खंड (सी) संशोधन के तहत 'पूर्व सैनिक' की परिभाषा में अब नियमित सेना, नौसेना और वायु सेना के साथ 'भारतीय संघ की सैन्य नर्सिंग सेवा' भी स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध किया गया है। यह नियम उन सभी पर लागू होता है जिन्होंने किसी भी रैंक पर, चाहे योद्धा के रूप के या गैर-योद्धा के रूप में सेवा कीं हों। यह संशोधन 9 फरवरी, 2026 को इसके प्रकाशन के साथ ही तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
यह संशोधन औपचारिक रूप से एमएनएस कर्मियों को निम्नलिखित लाभों तक पहुंच प्रदान करता है:
- आरक्षण कोटा : केंद्र सरकार के समूह 'सी' पदों में 10 प्रतिशत और समूह 'डी' पदों में 20 प्रतिशत आरक्षण।
- आयु सीमा में छूट : सिविल नौकरियों की पात्रता के लिए अपनी वास्तविक आयु में से सैन्य सेवा के वर्षों और अतिरिक्त 3 वर्षों को घटाने की सुविधा।
- रोजगार में प्राथमिकता : संघ लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन आयोग की नजर में अन्य पूर्व सैनिकों के समान दर्जा।
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पीके/केसी/आईएम /एम
(रिलीज़ आईडी: 2225992)
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