प्रधानमंत्री कार्यालय
प्रधानमंत्री ने शांति और संतोष पर केंद्रित संस्कृत सुभाषित साझा किया
प्रविष्टि तिथि:
27 JAN 2026 8:57AM by PIB Delhi
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने शांति और संतोष के महत्व को रेखांकित करते हुए एक संस्कृत सुभाषित साझा किया:
"शान्तितुल्यं तपो नास्ति न सन्तोषात् परं सुखम्।
न तृष्णायाः परो व्याधिर्न च धर्मो दयापरः।।”
इस सुभाषित का संदेश है कि शांति के समान कोई तप नहीं, संतोष से बढ़कर कोई सुख नहीं, लालच से बढ़कर कोई बीमारी नहीं और दया से बढ़कर कोई धर्म नहीं है।
प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पोस्ट पर लिखा:
“शान्तितुल्यं तपो नास्ति न सन्तोषात् परं सुखम्।
न तृष्णायाः परो व्याधिर्न च धर्मो दयापरः।।”
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पीके/केसी/बीयू/एसके
(रिलीज़ आईडी: 2218989)
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