वियतनामी फिल्म "स्किन ऑफ यूथ" को इफ्फी-2025 की सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का सबसे प्रतिष्ठित 'गोल्डन पीकॉक' पुरस्कार से नवाज़ा गया
स्किन ऑफ यूथ: ट्रांसजेंडर पहचान, प्रेम और सशक्तिकरण की एक सशक्त कहानी
देवियों और सज्जनो...
तैयार हो जाइए और गर्मजोशी के साथ ज़ोरदार तालियाँ बजाइए!
इफ्फी का सबसे कीमती रत्न, गोल्डन पीकॉक, अपना नया आशियाना बसाने के लिए तैयार है!
वियतनामी फिल्म "स्किन ऑफ यूथ" ने आज गोवा के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी इंडोर स्टेडियम में आयोजित एक भव्य समापन समारोह में इफ्फी का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार, सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का 'गोल्डन पीकॉक' पुरस्कार जीता। यह पुरस्कार गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत और केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने प्रदान किया।

निर्देशक एशले मेफेयर और निर्माता त्रान थी बिच गोक, ऐश मेफेयर और फ्रान बोर्गिया गोल्डन पीकॉक ट्रॉफी, एक प्रमाण पत्र और 40,00,000 रुपये का नकद पुरस्कार साझा करेंगे।

1990 के दशक के साइगॉन की पृष्ठभूमि में सजी, यह फिल्म सैन (एक ट्रांसजेंडर सेक्स वर्कर, जो सेक्स चेंज सर्जरी का सपना देखती है) और नाम (अंडरग्राउंड पिंजरे में बंद होकर लड़ाई लड़ने वाले फाइटर, जो अपने बेटे का पेट पालने के लिए संघर्ष करती है) के बीच गहरे प्रेम को दर्शाती है। सैन एक महिला के रूप में जीने के लिए दृढ़ है, जबकि नाम अपनी सर्जरी के लिए पैसे जुटाने के लिए क्रूर संघर्षों का सामना करती है। जब वे हिंसक अंडरग्राउंड दुनिया, सामाजिक पूर्वाग्रहों और उन बुरी ताकतों का सामना करती हैं, जिनकी कीमत उन्हें अपने रिश्ते से चुकानी पड़ती है, इस दौरान उनके प्यार को तमाम कठोर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
फ़िल्म पर टिप्पणी करते हुए, निर्णायक मंडल ने कहा, "पहली ही झलक से दिल को छू लेने वाली, प्रेरणादायक छायांकन और दमदार प्रोडक्शन डिज़ाइन के साथ, निर्देशक ने दोनों उल्लेखनीय मुख्य कलाकारों से बेमिसाल अभिनय करवाया है। फिल्म का हर तत्व, मनोरंजक संगीत, कुशल संपादन और कला की बारीकियां एक साथ सहजता से उभर कर आते हैं। साहसी, अद्भुत और स्टाइलिश, यह फ़िल्म एक ऐसी दुनिया में प्रेम और त्याग की खोज करती है, जिसकी झलक हममें से बहुत कम लोगों ने देखी है। यह कला का एक ऐसा नायाब उदाहरण है, जो लंबे वक्त तक हमारे दिलों में छाया रहेगा।"
इससे पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में फ़िल्म के बारे में बात करते हुए, निर्देशक एश्ले मेफ़ेयर ने कहा, "यह एक बेहद निजी कहानी है। मैं तीन भाई-बहनों में से एक हूँ, और मेरी छोटी बहन एक ट्रांसजेंडर है। यह फ़िल्म उसके सफ़र, उसकी गरिमा, उसके अधिकारों, उसके डर और उसकी पहचान को दर्शाती है। मेरा मानना है कि उसकी कहानी में ट्रांसजेंडर समुदाय के कई लोग खुद को देख पाएँगे।"
इस साल, वैश्विक सिनेमा के जीवंत परिदृश्य का प्रतिनिधित्व करने वाली 15 फिक्शन फ़ीचर फ़िल्मों ने प्रतिष्ठित गोल्डन पीकॉक पुरस्कार के लिए प्रतिस्पर्धा में शिरकत की।
ट्रेलर यहां देखें:
प्रेस कांफ्रेंस के दौरान मीडिया के साथ उनकी बातचीत यहां देखें:
समापन समारोह यहां देखें:
इफ्फी के बारे में
1952 में शुरू हुआ भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इफ्फी) दक्षिण एशिया के सबसे पुराने और सबसे बड़े सिनेमा उत्सव के रूप में आज भी प्रतिष्ठित स्थान रखता है। राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (एनएफडीसी), सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार और गोवा मनोरंजन सोसायटी (ईएसजी), गोवा सरकार द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित, यह महोत्सव एक वैश्विक सिनेमाई शक्ति के रूप में विकसित हुआ है, जहाँ पुनर्स्थापित क्लासिक फ़िल्मों का साहसिक प्रयोगों के साथ मिलना होता है, और दिग्गज कलाकार, पहली बार आने वाले हुनरमंद कलाकारों के साथ मंच साझा करते हैं। इफ्फी को वास्तव में शानदार बनाने वाला इसका शानदार सिनेमा की विधाओं का सम्मिश्रण है- अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताएँ, सांस्कृतिक प्रदर्शनियाँ, मास्टरक्लास, श्रद्धांजलि और ऊर्जावान वेव्स फिल्म बाज़ार, जहाँ विचार, सौदे और सहयोग उड़ान भरते हैं। 20 से 28 नवंबर तक गोवा की शानदार झिलमिलाते तटीय इलाके में आयोजित, 56वाँ संस्करण भाषाओं, शैलियों, नवाचारों और आवाज़ों की एक चकाचौंध भरी श्रृंखला का वादा करता है, जहां विश्व मंच पर भारत की रचनात्मक प्रतिभा का एक गहन उत्सव देखने को मिलता है।
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