मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
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भारत और मालदीव ने मत्स्यपालन और जलीय कृषि में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

प्रविष्टि तिथि: 26 JUL 2025 11:04AM by PIB Delhi

भारत के मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के तहत, मत्स्यपालन विभाग और मालदीव के मत्स्यपालन एवं महासागर संसाधन मंत्रालय ने मत्स्यपालन और जलीय कृषि के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिए, एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता ज्ञापन, 25 जुलाई 2025 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की, इस द्वीपीय राष्ट्र की राजकीय यात्रा के दौरान भारत और मालदीव के बीच आदान-प्रदान किए गए छह समझौता ज्ञापनों का हिस्सा है।

इस साझेदारी का मकसद ट्यूना और गहरे समुद्र में मत्स्य पालन को बढ़ावा देना, जलीय कृषि और सतत् संसाधन प्रबंधन को मज़बूत करना, मत्स्य पालन पर आधारित पारिस्थितिक पर्यटन को बढ़ावा देना और दोनों देशों के बीच नवाचार और वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देना है।

इस समझौता ज्ञापन में सहयोग के जिन प्रमुख क्षेत्रों का ज़िक्र किया गया है, उनमें मूल्य श्रृंखला विकास, सागरीय कृषि उन्नति, व्यापार सुगमता और मत्स्यपालन क्षेत्र में क्षमता निर्माण शामिल हैं। इस पहल के तहत, मालदीव कोल्ड स्टोरेज से जुड़ी ढ़ांचागत व्यवस्था में निवेश करके और हैचरी विकास, बेहतर उत्पादन क्षमता और संवर्धित प्रजातियों के विविधीकरण के ज़रिए, जलीय कृषि क्षेत्र को मज़बूत करते हुए अपनी मत्स्य प्रसंस्करण क्षमताओं का विस्तार करेगा।

यह समझौता ज्ञापन प्रशिक्षण और ज्ञान आदान-प्रदान कार्यक्रमों को भी आसान बनाएगा, जिसमें जलीय पशु स्वास्थ्य, जैव सुरक्षा जाँच, जलीय कृषि फार्म प्रबंधन और रेफ्रीजरेशन, यांत्रिक अभियांत्रिकी और समुद्री अभियांत्रिकी जैसे खास तकनीकी क्षेत्रों में क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, ताकि इस क्षेत्र में दीर्घकालिक कौशल विकास को बढ़ावा दिया जा सके।

दोनों मुल्कों के बीच यह सहयोग, मत्स्यपालन उद्योग के लिए एक अधिक मज़बूत, नवोन्मेषी और टिकाऊ भविष्य के निर्माण के लिए भारत और मालदीव के साझा दृष्टिकोण को दर्शाता है।

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पीके/एके/केसी/एनएस


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