स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय

डॉ. हर्षवर्धन ने लान्जिटूडनल एजिंग स्टडीज ऑफ इंडिया (एलएएसआई) वेव-1, इंडिया रिपोर्ट जारी की

 “एलएएसआई वृद्ध लोगों की आबादी के लिए राष्ट्रीय तथा राज्य स्तरीय कार्यक्रमों, नीतियों को साक्ष्य आधार प्रदान करेगी”

एलएएसआई की अनूठी विशेषता व्यापक बायोमार्कर का कवरेज है, भारत में दूसरा कोई और सर्वे परिवार तथा सामाजिक नेटवर्क, आय, परिसंपत्ति तथा उपयोगपर सूचना के साथ स्वास्थ्य और बायोमार्कस पर एक साथ विस्तृत डाटा एकत्रित नहीं करता”

Posted On: 06 JAN 2021 4:36PM by PIB Delhi

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने आज वर्चुअल प्लेटफॉर्म सेलान्जिटूडनल एजिंग स्टडीज ऑफ इंडिया (एलएएसआई)पर इंडिया रिपोर्ट वेव-1 जारी की।

एलएएसआई भारत में उम्रदराज हो रही आबादी के स्वास्थ्य, आर्थिक तथा सामाजिक निर्धारकों और परिणामों की वैज्ञानिक जांच का व्यापक राष्ट्रीय सर्वे है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय का वृद्धजनों के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम में हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ, यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया, अमेरिका, डीटीई.जीएचएस, संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) तथा राष्ट्रीय नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजिंग के सहयोग से इंटरनेशलन इंस्टीट्यूट फॉर पॉपुलेशन साइंसेज (आईआईपीएस), मुंबई के माध्यम से लान्जिटूडनल एजिंग स्टडीज ऑफ इंडियाको किया गया।

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एलएएसआई, वेव-1 में 45 वर्ष तथा उससे ऊपर के 72,250 व्यक्तियों और उनके जीवनसाथी का बेसलाइन सैम्पल कवर किया गया है। इसमें 60 साल और उससे ऊपर की उम्र के 31,464 व्यक्ति तथा 75 वर्ष और उससे ऊपर की आयु के 6,749 व्यक्ति शामिल हैं। ये सैम्पल सिक्किम को छोड़कर सभी राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों से लिए गए।

डॉ. हर्षवर्धन ने रिपोर्ट जारी होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह भारत का पहला तथा विश्व का अब तक का सबसे बड़ा सर्वे है जो सामाजिक, स्वास्थ्य तथा आर्थिक खुशहाली के पैमानों पर वृद्ध आबादी के लिए नीतियां और कार्यक्रम बनाने के उद्देश्य से लान्जिटूडनल डाटाबेस प्रदान करता है। एलएएसआई से प्राप्त साक्ष्य का उपयोग वृद्धजनों के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम को मजबूत और व्यापक बनाने में किया जाएगा और इससे वृद्धजनों की आबादी के लिए प्रतिरोधी तथा स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाने में मदद मिलेगी।

लान्जिटूडनल एजिंग स्टडीज ऑफ इंडिया (एलएएसआई) के महत्व की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि 2011 की जनगणना में 60+आबादी भारत की आबादी का 8.6 प्रतिशत थी यानी 103 मिलियन वृद्ध लोग थे। तीन प्रतिशत की वार्षिक वृद्धिदर से 2050 में वृद्धिजनों की आबादी बढ़कर 319 मिलियन हो जाएगी। 75 प्रतिशत वृद्धजन किसी न किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्ति होते हैं। 40 प्रतिशत वृद्धजन को कोई न कोई दिव्यांगता है और 20 प्रतिशत वृद्धजन मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित रोगों से ग्रसित हैं। उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट वृद्धजन आबादी के लिए राष्ट्रीय तथा राज्यस्तरीय कार्यक्रमों और नीतियों के लिए आधार प्रदान करेगी।

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डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि एलएएसआई ने अत्याधुनिक व्यापक सर्वे प्रोटोकॉल तथा फील्ड क्रियान्वयन रणनीतियों को अपनाया है। इसमें भारत तथा इसके राज्यों का प्रतिनिधि सैम्पल सामाजिक आर्थिक परिदृश्य, व्यापक, प्रासंगिक फोकस, लान्जिटूडनल डिजाइन, डाटा संग्रह, गुणवत्ता नियंत्रण तथा भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) के लिए कम्प्यूटर असिसटेड पर्सनल इंटरव्यूइंग (सीएपीआई) टेक्नॉलॉजी का उपयोग शामिल है। एलएएसआई की अनूठी विशेषता व्यापक बायोमार्कर का कवरेज है। भारत में परिवार तथा सामाजिक नेटवर्क, आय, परिसंपत्ति तथा उपयोग पर सूचना के साथ स्वास्थ्य तथा बायोमार्कर पर एक साथ किसी भी सर्वेक्षण में विस्तृत डाटा एकत्रित नहीं किया गया है।

आयु वृद्धि को लेकर सरकार के संकल्प को दोहराते हुए डॉ. वर्धन ने कहा कि हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वृद्धजनों को बेहतरीन चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाए। भारत के पास विश्व की सबसे महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना है जो स्वास्थ्य सेवा सुविधाओं के विस्तार पर बल देती है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आयु वृद्धि रोकने में एलएएसआई डाटा सहायक होगा। इससे विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में तालमेल होगा तथा अन्य विभागों, मंत्रालयों के साथ अंतर क्षेत्रीय समन्वय को प्रोत्साहन मिलेगा।

इस अवसर पर आईआईपीएस के निदेशक डॉ. के.एस. जेम्स, एएस और एमडी–एनएचएम सुश्री वंदना गुरनानी, प्रोफेसर ऑफ एक्सेलेंस प्रोफेसर (डॉ.) राजीव गर्ग, संयुक्त सचिव एनसीडी श्री विशाल चौहान और एडीजी-एनपीएचसीई डॉ. गोरी एनसेनगुप्ता उपस्थित थे।

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