पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय

07 अगस्त, 2020 को ओडिशा समुदायों को यूनेस्को-आईओसी सुनामी तैयारी मान्यता प्रदान करने के लिए वर्चुअल कार्यक्रम का आयोजन

Posted On: 06 AUG 2020 3:28PM by PIB Delhi

यह देखा गया है कि जब सुनामी का खतरा रखने वाले लोगों को समय पर सटीक चेतावनी प्रदान कर दी जाती है, तो वे जीवन रक्षक उपायों को अपना सकते हैं, नुकसान को कम कर सकते हैं और प्रतिक्रिया में तेजी ला सकते हैं। वैज्ञानिकों और आपातकालीन प्रबंधन अधिकारियों के निरंतर प्रयास के माध्यम से, बेहतर सेंसर, सटीक मॉडल और समवर्ती प्रसार के कई उपायों को अपनाकर, सूनामी की चेतावनी और समय-सीमा में पर्याप्त सुधार किया गया है। हालांकि, एक चेतावनी की सफलता को इस आधार पर मापा जाता है कि संबंधित अधिकारी एक सार्वजनिक चेतावनी को जारी करने के बाद लोगों के लिए क्या कार्रवाई करते हैं। खतरे में रहने वाले क्षेत्र के किसी व्यक्ति के लिए सुनामी के बाद सुरक्षित रहना, उसके द्वारा चेतावनी संकेतों को पहचानने, सही निर्णय लेने और जल्दी से जल्द कार्यवाही करने की क्षमता पर निर्भर करता है। 

 

सुनामी तैयारी, एक सामुदायिक प्रदर्शन-आधारित कार्यक्रम है, जिसे यूनेस्को के अंतर-सरकारी समुद्र विज्ञान आयोग (आईओसी) द्वारा सार्वजनिक, सामुदायिक नेताओं और राष्ट्रीय और स्थानीय आपातकालीन प्रबंधन एजेंसियों के सक्रिय सहयोग के माध्यम से, सुनामी तैयारियों को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य, सूनामी आपातकाल स्थितियों के लिए तटीय समुदाय की तैयारियों में सुधार लाना है, जिससे कि जीवन और संपत्ति के नुकसान को कम किया जा सके और यूनेस्को-आईओसी की हिंद महासागर सुनामी चेतावनी और शमन प्रणाली (आईसीजी/आईओटीडब्ल्यूएमएस) के लिए अंतर-सरकारी समन्वय समूह द्वारा निर्धारित सर्वोत्तम अभ्यास संकेतकों को पूरा करने की सामुदायिक तैयारी में एक संरचनात्मक और व्यवस्थित दृष्टिकोण को सुनिश्चित किया जा सके। दिशा-निर्देशों का पूरा करना इस बात को सुनिश्चित करता है कि समुदायों के पास एक मजबूत एंड-टू-एंड सुनामी प्रारंभिक चेतावनी और शमन प्रणाली हो, जिसमें समुदायिक जागरूकता और प्रतिक्रिया देने के लिए तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया जाए।

 

भारतीय सुनामी प्रारंभिक चेतावनी केंद्र- भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (आईटीईडब्ल्यूसी- आईएनसीओआईएस), भारत को सुनामी की चेतावनी प्रदान करने वाली नोडल एजेंसी है। आईएनसीओआईएस, आईओसी-यूनेस्को द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारी वाले सुनामी सेवा प्रदाताओं के रूप में, हिंद महासागर क्षेत्र (25 देशों) को सुनामी सलाह भी प्रदान कर रहा है। सुनामी के बारे में जागरूकता और तैयारियों के लिए, आईएनसीओआईएस नियमित रूप से तटीय राज्यों के राज्य और जिला स्तरीय आपदा प्रबंधन अधिकारियों (डीएमओ) के लिए, सुनामी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) कार्यशालाओं, प्रशिक्षण सत्रों और सेमिनारों का आयोजन करता है।

 

आईएनसीओआईएस में आईटीईडब्लूसी द्वारा आईओवेव सुनामी मॉक अभ्यास का भी आयोजन किया जाता है जिसे आईसीजी/ आईओटीडब्ल्यूएमएस के साथ समन्वय में किया जाता है और सभी हितधारकों के साथ आपात स्थितियों को संभालने की तैयारियों को मजबूती प्रदान करने करने के लिए गृह मंत्रालय (एमएचए) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) और राज्य आपदा प्रबंधन एजेंसियों (एसडीएमए) के साथ मिलकर समन्वय में राष्ट्रीय स्तर पर मॉक अभ्यास का आयोजन वैकल्पिक वर्षों में किया जाता है। हाल ही में, सुनामी मॉक एक्सरसाइज यानी आईओवेव18 (सितंबर 2018) और मल्टी-स्टेट मेगा मॉक एक्सरसाइज (नवंबर 2017), सुनामी लोचदार समुदाय का निर्माण करने के बेहतरीन उदाहरण हैं। समुदायों को और मजबूत करने के लिए, आईटीईडब्लूसी- आईएनसीओआईएस  भारत में सुनामी तैयारी कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए डीएमओ के साथ समन्वय कर रहा है।

 

भारत में सुनामी तैयारी और आईओवेव अभ्यासों के कार्यान्वयन को लागू करने और निगरानी करने के लिए, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (आईएनसीओआईएस) के निदेशक की अध्यक्षता में एक राष्ट्रीय बोर्ड की स्थापना की है, जिसमें पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए), गृह मंत्रालय (एमएचए), ओडिशा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ओएसडीएमए), अंडमान और निकोबार द्वीप समूह आपदा प्रबंधन निदेशालय (डीडीएम) और आईएनसीओआईएस  के सदस्यों को शामिल किया गया है।

 

ओडिशा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ओएसडीएमए), ओडिशा ने अब जगतसिंगपुर जिले के नोलियाशाही और गंजम जिले के वेंकटरायपुर नामक दो गांवों में सुनामी तैयारी कार्यक्रम को लागू कर दिया है। राष्ट्रीय बोर्ड ने दिशानिर्देशों के अनुसार, उन गांवों में संकेतकों के कार्यान्वयन के सत्यापन के बाद, उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्रदान करने का फैसला किया और मान्यता प्रदान करने के लिए यूनेस्को-आईओसी के पास सिफारिश की। राष्ट्रीय बोर्ड की सिफारिशों के आधार पर, यूनेस्को-आईओसी ने दोनों समुदायों, वेंकटरायपुर और नोलियाशाही को सुनामी तैयारी समुदाय के रूप में मान्यता प्रदान करने की मंजूरी दे दी है। इस मान्यता के साथ, भारत हिंद महासागर क्षेत्र में सुनामी तैयारी को लागू करने वाला पहला देश और ओडिशा पहला राज्य बन गया है।

 

वेंकटरायपुर और नोलियाशाही समुदायों, ओएसडीएमए अधिकारियों को यूनेस्को-आईओसी की मान्यता और प्रशंसा प्रमाणपत्र प्रदान करने के लिए, 07 अगस्त, 2020 को भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (आईएनसीओआईएस), यूनेस्को-आईओसी के आईसीजी/आईओटीडब्ल्यूएमएस सचिवालय और हिंद महासागर सुनामी सूचना केंद्र (आईओटीआईसी) द्वारा संयुक्त रूप से एक वर्चुअल कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।

 

इस आयोजन के मुख्य अतिथि, डॉं एम. राजीवन, सचिव, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस), सरकार भारत और सम्मानीय अतिथि, श्री जी. वी. वी. सरमा, सदस्य सचिव, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए), भारत सरकार, ओएसडीएमए के दोनों गांवों और अधिकारियों को मान्यता और प्रशंसा प्रमाणपत्र प्रदान करेंगें।

 

यूनेस्को-आईओसी के अधिकारी, डॉ श्रीनिवास कुमार तुममाला, प्रमुख-आईसीजी/आईओटीडब्ल्यूएमएस और श्री आर्दितो एम कोडिजाट, प्रमुख-हिंद महासागर सुनामी सूचना केंद्र (आईओटीआईसी), प्रो द्विकोरिता कर्णावती, निदेशक, बीएमकेजी, इंडोनेशिया और आईसीजी/ आईओटीडब्ल्यूएमएस के अध्यक्ष इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। श्री प्रदीप कुमार जेना, अतिरिक्त मुख्य सचिव, ओडिशा सरकार और एमडी-ओएसडीएमए के साथ-साथ ओएसडीएमए और वेंकटरायपुर और नोलियाशाही समुदाय के अधिकारी भी मान्यता और प्रशंसा प्रमाणपत्र प्राप्ति के लिए कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। डॉ एस.एस.सी शेनोई आईओसी-यूनेस्को के उपाध्यक्ष, पूर्व आईएनसीओआईएस निदेशक और राष्ट्रीय बोर्ड के अध्यक्ष; डॉ टी.एम. बालाकृष्णन नायर, आईएनसीओआईएस के निदेशक (स्वतंत्र प्रभार) और टीडब्ल्यूजी- आईएनसीओआईएस के प्रमुख- श्री ई पट्टाभि रामाराव भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। इस कार्यक्रम के अन्य प्रतिभागियों में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधिकारी, राष्ट्रीय बोर्ड (एनडीएमए, गृह मंत्रालय, ओएसडीएमए, एएंडएन डीडीएम आदि) के सदस्यगण, आईएनसीओआईएस के अधिकारी भी शामिल होंगें।

 

 

तस्वीरें: राष्ट्रीय बोर्ड के सदस्यों और आईसीजी/आईओटीडब्ल्यूएमएस के प्रतिनिधियों का 13-14 दिसंबर 2019 के दौरान, वेंकटरायपुर गांव, गंजम जिला और नोलियासहाय गांव, जगतसिंहपुर जिला, ओडिशा का दौरा।

 

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