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भारत और मर्कोसुर ने इलेक्ट्रॉनिक मूल प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए प्रथम अतिरिक्त प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए


भारत-मर्कोसुर तरजीही व्यापार समझौते के तहत पेपरलेस व्यापार को सुगम बनाने और सीमा शुल्क प्रक्रियाओं का आधुनिकीकरण करने हेतु प्रोटोकॉल

प्रविष्टि तिथि: 14 SEP 2026 4:31PM by PIB Delhi

भारत और मर्कोसुर ने इलेक्ट्रॉनिक मूल प्रमाणपत्रों की स्वीकार्यता को सुविधाजनक बनाने के लिए भारत-मर्कोसुर तरजीही व्यापार समझौते (पीटीए) के प्रथम अतिरिक्त प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए, जो भारत और मर्कोसुर देशों के बीच कागज रहित व्यापार को सुगम बनाने और सीमा शुल्क प्रक्रियाओं के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस प्रोटोकॉल पर भारत सरकार के वाणिज्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल, भारत में उरुग्वे के राजदूत श्री अल्बर्टो गुआनी और भारत में पैराग्वे के राजदूत श्री फ्लेमिंग राउल डुआर्टे रामोस ने मर्कोसुर की कार्यवाहक अध्यक्षता कर रहे उरुग्वे गणराज्य के विदेश मंत्री श्री मारियो लुबेटकिन और अर्जेंटीना और ब्राजील के दूतावासों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए।

भारत-मर्कोसुर पीटीए पर 25 जनवरी, 2004 को हस्ताक्षर किए गए थे और यह 1 जून, 2009 से लागू हुआ। यह समझौता भारत द्वारा 450 टैरिफ लाइनों और मर्कोसुर पक्ष द्वारा 452 टैरिफ लाइनों पर तरजीही टैरिफ रियायतें प्रदान करता है।

प्रथम अतिरिक्त प्रोटोकॉल पीटीए के परिशिष्ट III (मूल नियमावली) के अनुच्छेद 16 में संशोधन करता है, जिसमें यह प्रावधान किया गया है कि इलेक्ट्रॉनिक प्रारूप में जारी किए गए उत्पत्ति प्रमाण पत्रों की कानूनी वैधता और मूल्य कागजी प्रारूप में जारी किए गए मूल प्रमाणपत्रों के समान ही होगा। ऐसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पत्ति प्रमाण पत्र संबंधित पक्षों के घरेलू कानूनों के अनुसार विधिवत अधिकृत संस्थाओं और अधिकारियों द्वारा जारी किए जाने और इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्ताक्षरित किए जाने आवश्यक होंगे।

इस कदम से डिजिटल और कागज रहित व्यापार दस्तावेजीकरण की ओर बदलाव को सुगम बनाने, मूल प्रमाणपत्र जारी करने और सत्यापन से जुड़ी लेनदेन लागत और प्रक्रिया में लगने वाले समय को कम करने और मौजूदा भारत-मर्कोसुर पीटीए के तहत तरजीही व्यापार की दक्षता में सुधार करने की उम्मीद है।

यह पहल भारत-मर्कोसुर पीटीए की संयुक्त प्रशासनिक समिति में हुई चर्चाओं के बाद की गई है। 27 नवंबर, 2025 को आयोजित अपनी चौथी बैठक में, दोनों पक्षों ने डिजिटल मूल प्रमाणपत्रों के उपयोग को सुगम बनाने के लिए समझौते को अद्यतन करने का समर्थन किया। इसके बाद, 9 अप्रैल, 2026 को आयोजित संयुक्त प्रशासनिक समिति की पांचवीं बैठक में अतिरिक्त प्रोटोकॉल के प्रस्ताव को आपसी सहमति से अपनाया गया।

भारत और मर्कोसुर के सदस्य देशों द्वारा संबंधित आंतरिक प्रक्रियाओं को पूरा करने और एक दूसरे को इसकी सूचना देने के बाद प्रोटोकॉल लागू हो जाएगा।

प्रथम अतिरिक्त प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर भारत और मर्कोसुर की व्यापार सुविधा को गहरा करने, आधुनिक सीमा शुल्क प्रणालियों को अपनाने और द्विपक्षीय व्यापार का समर्थन करने वाले संस्थागत ढांचे को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

यह समझौता भारत और मर्कोसुर के बीच चल रही व्यापारिक और आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने और विस्तार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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पीके/केसी/एसकेएस/एसवी


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