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केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल ने विधायी विभाग में पुनर्गठित 'इंडिया कोड पोर्टल' का शुभारंभ किया


कानूनों तक पहुंच को अधिक सरल, तेज और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए पोर्टल को नया रूप दिया गया

प्रमुख विशेषताओं में एआई-सपोर्टेड सर्च, सेमांटिक एवं स्पीच सर्च, बेहतर नेविगेशन और बहुभाषी एक्सेस शामिल है

प्रविष्टि तिथि: 13 AUG 2026 8:54PM by PIB Delhi

केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल ने आज, 13 अगस्त 2026 को, भारत के अटॉर्नी जनरल श्री आर. वेंकटरमणी, विधायी विभाग एवं कानूनी कार्य विभाग के सचिव डॉ. राजीव मणि, अपर सचिव डॉ. मनोज कुमार और विधायी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति में कर्तव्य भवन 2, नई दिल्ली में पुनर्गठित 'इंडिया कोड पोर्टल' का शुभारंभ किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के महानिदेशक श्री प्रियंका भारती, इंडिया-एआई मिशन के मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) श्री सुदीप श्रीवास्तव और एनआईसी के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

यह पुनर्गठित पोर्टल आधुनिक डिजिटल तकनीकों का उपयोग करके, कानूनों तक पहुंच को अधिक सरल, तेज, व्यापक और नागरिक-केंद्रित बनाने के सरकार के निरंतर प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री अर्जुन राम मेघवाल ने संविधान के महत्व तथा यह सुनिश्चित करने पर बल दिया कि कानून सभी हितधारकों के लिए आसानी से सुलभ, समझने योग्य और उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि इंडिया कोड पोर्टल संविधान, केंद्रीय अधिनियमों, नियमों और अन्य विधायी जानकारियों तक नागरिकों की आसान पहुंच के लिए एक विश्वसनीय और व्यापक मंच के रूप में कार्य करता है। कानून तक पहुंच को मजबूत करने में तकनीक की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने इस पुनर्गठन की परिकल्पना, समन्वय और निगरानी के लिए विधायी विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के समर्पित प्रयासों तथा तकनीकी विशेषज्ञता एवं विकास सहायता के लिए एनआईसी की टीम की सराहना की। श्री मेघवाल ने कहा कि इस साझा प्रयास से विधायी जानकारी की सुलभता, पारदर्शिता और नागरिक-केंद्रित वितरण में काफी सुधार होगा।

भारत के अटॉर्नी जनरल  श्री आर. वेंकटरमणी ने कानूनों तक फिजिकल से डिजिटल पहुंच की ओर हुए बदलाव को रेखांकित किया और विधायी विभाग द्वारा कई नई व यूजर-फ्रेंडली सुविधाओं के साथ विकसित किए गए पुनर्गठित 'इंडिया कोड पोर्टल' की सराहना की। उन्होंने पोर्टल को तकनीकी रूप से अपडेटेड रखने और उभरती आवश्यकताओं के अनुकूल बनाए रखने के महत्व पर बल दिया। इसके अलावा, उन्होंने स्पष्ट, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण कानून बनाने में विधायी अधिकारियों के उत्तरदायित्व पर जोर दिया और कानूनों तक व्यापक व सुविधाजनक पहुंच सुनिश्चित करने के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने पुनर्गठित पोर्टल के विकास में विधायी विभाग और तकनीकी टीम के समन्वित प्रयासों की सराहना की, जिससे विधायी जानकारी तक पारदर्शिता और सार्वजनिक पहुंच को और मजबूती मिलेगी।

विधायी विभाग और कानूनी कार्य विभाग के सचिव डॉ. राजीव मणि ने इंडिया कोड पोर्टल के विकासक्रम और नागरिकों, कानूनी पेशेवरों, सरकारी विभागों व अन्य हितधारकों के लिए प्रामाणिक एवं अपडेटेड विधायी जानकारी को आसानी से सुलभ बनाने के प्रयासों की रूपरेखा प्रस्तुत की। कानूनों के प्रसार और पहुंच को बेहतर बनाने में तकनीक की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने पुनर्गठित पोर्टल की मुख्य विशेषताओं पर प्रकाश डाला, जिसमें इसका अधिक यूजर-फ्रेंडली इंटरफेस तथा उन्नत सर्च, नेविगेशन और सुलभता शामिल हैं। उन्होंने विधायी विभाग और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के समन्वित प्रयासों की सराहना की तथा विश्वास व्यक्त किया कि यह पुनर्गठित प्लेटफॉर्म विश्वसनीय विधायी जानकारी तक व्यापक और आसान सार्वजनिक पहुंच को काफी मजबूत करेगा।

विधायी विभाग के अपर सचिव डॉ. मनोज कुमार ने पुनर्गठित 'इंडिया कोड पोर्टल' का परिचय दिया और इसकी प्रमुख विशेषताओं तथा इसके ट्रांसफॉर्मेशन के पीछे के व्यापक दृष्टिकोण की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि कानून तक पहुंच, न्याय तक पहुंच की दिशा में पहला कदम है और कानून न केवल उपलब्ध होने चाहिए, बल्कि उन्हें खोजना, नेविगेट करना, समझना और उपयोग करना भी आसान होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि पुनर्गठित पोर्टल का उद्देश्य इंडिया कोड को केवल विधायी दस्तावेजों के संग्रह से आगे बढ़ाकर कानून के एक सुलभ, परस्पर जुड़े हुए और नागरिक-केंद्रित डिजिटल गेटवे के रूप में विकसित करना है जिसमें बेहतर सर्च एवं नेविगेशन, अधिनियमों और अधीनस्थ विधानों के बीच लिंक, ई-गजट इकोसिस्टम के साथ एकीकरण, एआई-असिस्टेड एवं सेमांटिक खोज, स्पीच-सक्षम पहुंच और बहुभाषी क्षमताएं शामिल हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीक को कानून और नागरिकों के बीच की दूरी को कम करना चाहिए और विधायी जानकारी को अधिक खोजने योग्य, इंटरऑपरेबल और उपयोगी बनाना चाहिए, जिससे पारदर्शिता, कानूनी जागरूकता और नागरिक-केंद्रित गवर्नेंस को मजबूती मिले।

इंडिया कोड केंद्रीय अधिनियमों और उनके अधीनस्थ विधानों, राज्य अधिनियमों और उनके अधीनस्थ विधानों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के विधानों व विनियमों का एक यूनिफाइड डिजिटल संग्रह प्रदान करता है। यह पुनर्गठित पोर्टल बेहतर और स्मार्ट सर्च क्षमताओं, एआई-सहायता प्राप्त खोज व सहभागिता, सेमांटिक एवं स्पीच-आधारित सर्च, विधानों के बीच आसान नेविगेशन, संशोधनों और विधायी इतिहास तक पहुंच, अधिनियमों का संबंधित अधीनस्थ विधानों के साथ जुड़ाव, ई-गजट इकोसिस्टम के साथ इंटीग्रेशन, बेहतर डॉक्यूमेंट व्यूइंग, क्यूआर-इनेबल्ड एक्सेस और नागरिकों की फीडबैक के लिए एक व्यवस्थित सिस्टम, कानूनी पेशेवरों, शोधकर्ताओं, न्यायपालिका और सरकार द्वारा विधायी जानकारी को खोजने, नेविगेट करने तथा प्राप्त करने के तरीके को काफी बेहतर बनाता है। इसका उद्देश्य संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाओं में कानूनों तक एआई-सहायता प्राप्त बहुभाषी पहुंच प्रदान करना भी है, जिससे पूरे भारत में कानून तक पहुंच अधिक व्यापक, आसान और नागरिक-केंद्रित हो सके।

इस तकनीकी बदलाव का उद्देश्य इंडिया कोड को केवल कानूनों के ऑनलाइन संग्रह से आगे बढ़ाकर एक परस्पर जुड़े हुए और नागरिक-अनुकूल कानूनी सूचना ढांचे के सहयोग से कानून के एक डिजिटल गेटवे के रूप में परिवर्तित करना है।

यह पहल कानून तक पहुंच की सुगमता, पारदर्शिता, व्यापक नागरिक भागीदारी और कानूनी व सार्वजनिक सेवाओं के बेहतर वितरण के लिए तकनीक का लाभ उठाने के व्यापक उद्देश्य के अनुरूप है।

पुनर्गठित 'इंडिया कोड पोर्टल' भारत के लिए एक विश्वसनीय और तकनीक-सक्षम कानूनी सूचना इकोसिस्टम के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम का प्रतिनिधित्व करता है, जहाँ कानून अधिक से अधिक खोजने योग्य, सुलभ, परस्पर जुड़े हुए और नागरिकों के लिए उनकी सुविधानुसार भाषा और रूप में उपलब्ध हैं।

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