जल शक्ति मंत्रालय
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जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने 'स्वच्छ गांव, सुरक्षित जलवायु' अभियान और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (एसडब्ल्यूएम)  नियम 2026 पर राष्ट्रीय स्तर का जागरूकता अभियान (आईईसी) का शुभारंभ किया


विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के उपलक्ष्य में डीडीडब्ल्यूएस का 'स्वच्छ गांव, सुरक्षित जलवायु' (एसजीएसजे) अभियान 1 से 5 जून 2026 तक चलेगा

राष्ट्रीय स्तर के  आईईसी अभियान का उद्देश्य राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, राष्ट्रीय अपशिष्ट निकाय (आरएलबी) और अन्य भागीदारों के बीच ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के बारे में जागरूकता बढ़ाना है

एसजीएसजे अभियान का समापन 5 जून 2026 को आयोजित होने वाली विशेष ग्राम सभाओं और 'एक पेड़ मां के नाम' पौधरोपण अभियान के साथ होगा

प्रविष्टि तिथि: 01 JUN 2026 9:27PM by PIB Delhi

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने आज नई दिल्ली में जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में स्वच्छ ग्राम, सुरक्षित जलवायु अभियान और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए राष्ट्रीय स्तर के आईईसी अभियान का शुभारंभ किया।

हाइब्रिड मोड में आयोजित इस कार्यक्रम में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव श्री अशोक के.के. मीना, संयुक्त सचिव एवं एसबीएम (जी) की मिशन निदेशक सुश्री ऐश्वर्या सिंह और डीडीडब्ल्यूएस के अधिकारी उपस्थित थे। इस दौरान वर्चुअल मोड में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इनमें अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव, राज्य मिशन निदेशक, एसबीएम (जी) और ग्राम पंचायतों के चयनित सरपंच थे।

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स्वच्छ गांव, सुरक्षित जलवायु, विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के लिए पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) के सहयोग से शुरू किया गया डीडीडब्ल्यूएस  का एक अभियान है। यह अभियान 1 जून से 5 जून तक शुरू किया जाएगा और इससे पहले 25 मई से 29 मई, 2026 तक पूर्व-कार्यान्वयन चरण का आयोजन किया गया।

यह अभियान मिशन लाइफ, सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करने पर केंद्रित है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) 2.0, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के 4 आर (कम करें, पुनः उपयोग करें, पुनर्चक्रण करें) सिद्धांतों, अपशिष्ट जल प्रबंधन के 3 आर (कम करें, पुनः उपयोग करें, पुनः भरें) सिद्धांतों को बढ़ावा देकर और सर्कुलर अर्थव्यवस्था के साथ-साथ अपशिष्ट से संसाधन सृजन को प्रोत्साहित करके मिशन लाइफ के उद्देश्यों का समर्थन करता है। साथ ही इस मिशन के माध्यम से गांवों को ओडीएफ प्लस (आदर्श) गांवों में परिवर्तित करने का लक्ष्य भी हासिल किया जा रहा है। ‘स्वच्छ गांव, सुरक्षित जलवायु’ अभियान का एक अन्य मुख्य उद्देश्य ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (एसडब्ल्यूएम) नियम, 2026 के बारे में जागरूकता पैदा करना और लोगों को इसके प्रति संवेदनशील बनाना है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू हो गए हैं।

इस संदर्भ में 'स्वच्छ गांव, सुरक्षित जलवायु' अभियान का उद्देश्य है :

ग्रामीण क्षेत्रों में भागीदारों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के बारे में जागरूक करना, जिसमें थोक अपशिष्ट उत्पादकों (बीडब्ल्यूजी) की पहचान, चार-स्तरीय स्रोत पृथक्करण और पुराने कचरे का प्रबंधन शामिल हैं।

ग्राम पंचायतों द्वारा सामुदायिक अपशिष्ट प्रबंधन संसाधनों की कार्यक्षमता के स्व-मूल्यांकन और सत्यापन को सुगम बनाना।

मिशन लाइफ के विषयों पर जागरूकता पैदा करें और स्थायी व्यवस्थाओं को बढ़ावा देना।

स्वच्छता, परिसंपत्तियों का उचित संचालन और रखरखाव सुनिश्चित करने के लिए समाज को संगठित करना और संपूर्ण स्वच्छता और ओडीएफ प्लस (मॉडल) गांवों के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि करना।

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इस अभियान में सुनियोजित गतिविधियां शामिल होंगी और इसका समापन 'एक पेड़ मां के नाम' पौधरोपण अभियान और 5 जून 2026 को एक विशेष ग्राम सभा के साथ होगा, जहां सभी ग्राम पंचायत सदस्यों द्वारा अभियान की उपलब्धियों और एसडब्ल्यूएम नियम 2026 के बारे में जागरूकता पर चर्चा की जाएगी।

एसडब्ल्यूएम नियम, 2026 पर जागरूकता के लिए डीडीडब्ल्यूएस का राष्ट्रीय आईईसी अभियान राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, जिला प्रशासन, ग्रामीण स्थानीय निकायों, घरों, संस्थानों, थोक अपशिष्ट उत्पादकों और ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यान्वयन में शामिल अन्य भागीदारों के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के प्रमुख प्रावधानों को सरल बनाने पर ध्यान केंद्रित करेगा।  इस अभियान के तहत एसडब्ल्यूएम नियम 2026 को सरल, नागरिक-अनुकूल संदेशों में बांटा जाएगा ताकि सामुदायिक स्तर पर जागरूकता, व्यवहार परिवर्तन और अनुपालन को बढ़ावा दिया जा सके।

इस कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, असम और उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों के सरपंचों के साथ भी बातचीत की, जिन्होंने जमीनी स्तर पर अपने अनुभव, एसबीएम (जी) 2.0 के तहत किए गए उपाय, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन सहित अपशिष्ट प्रबंधन के लिए स्वयं सहायता समूहों के साथ किए जा रहे कार्य और स्वच्छता से संबंधित गतिविधियों के लिए सभी संबंधित भागीदारों को शामिल करने के अपने प्रयासों को साझा किया।

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सरपंचों ने केंद्रीय मंत्री को अपने ग्राम पंचायतों में एसजीएसजे अभियान के तहत नियोजित गतिविधियों के बारे में भी जानकारी दी। सरपंचों के साथ अपनी बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री ने अपशिष्ट प्रबंधन को उचित रूप से सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया, जिसमें ग्रेवॉटर प्रबंधन और यह सुनिश्चित करना शामिल है कि अपशिष्ट जल जल निकायों और नदियों में प्रवेश न करे।

केंद्रीय मंत्री ने असम और जम्मू एवं कश्मीर के राज्य एसबीएम (जी) मिशन निदेशकों के साथ एसजीएसजे अभियानों से संबंधित विभिन्न पहलुओं, एसबीएम (जी) 2.0 के तहत हासिल की गई प्रगति और एसडब्ल्यूएम नियम, 2026 के कार्यान्वयन में राज्य द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर भी बातचीत की।

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केंद्रीय मंत्री श्री सी.आर. पाटिल ने अपने भाषण में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) [एसबीएम (जी)] की सफलता की सराहना की। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि 5 लाख से अधिक गांवों ने सफलतापूर्वक खुद को ओडीएफ प्लस (मॉडल) घोषित कर दिया है। उन्होंने उल्लेख किया कि यह उपलब्धि गांधीजी के स्वच्छ भारत के दृष्टिकोण की विशाल नींव पर आधारित है। इसे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में आगे बढ़ाया गया है और इसने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।

उन्होंने बताया कि एसबीएम (जी) योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 12 करोड़ शौचालयों का निर्माण हुआ है और इसकी वजह से पूरे देश में स्वच्छता को लेकर आदत में बदलाव आया है। उन्होंने उल्लेख किया कि विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के लिए डीडीडब्ल्यूएस द्वारा आयोजित किया जा रहा 'स्वच्छ गांव, सुरक्षित जलवायु' अभियान और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के लिए राष्ट्रीय स्तर का आईईसी अभियान, दोनों ही महत्वपूर्ण पहल हैं जो जन भागीदारी और पर्यावरण संरक्षण को और मजबूत करेंगी।

केंद्रीय मंत्री ने उल्लेख किया कि एसबीएम (जी) 2.0 ग्रेवॉटर प्रबंधन में अपशिष्ट कमी के प्रभावी और वैज्ञानिक प्रबंधन और 'अपशिष्ट से संसाधन का सृजन' पहलों को बढ़ावा देता है। उन्होंने इस बात का जिक्र किया कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एसबीएम (जी) 2.0 का एक अभिन्न अंग है। साथ ही लोगों से आग्रह किया कि वे अपशिष्ट पृथक्करण और पर्यावरण संरक्षण को अपने व्यवहार और जीवनशैली का हिस्सा बनाएं। विशेष ग्राम सभा, स्वच्छता अभियान और 'एक पेड मां के नाम' पौधरोपण, सामुदायिक एसडब्ल्यूएम परिसंपत्तियों के सत्यापन जैसी विभिन्न गतिविधियों पर जोर देते हुए केंद्रीय मंत्री ने सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, ग्राम पंचायतों, युवाओं, एसएचजी और विभिन्न अन्य भागीदारों से एसजीएसजे अभियान में दिल से भाग लेने का आग्रह किया। उन्होंने आगे बताया कि एसडब्ल्यूएम नियम 2026 के बारे में जागरूकता के लिए डीडीडब्ल्यूएस द्वारा चलाया गया राष्ट्रीय स्तर का आईईसी अभियान भी इनके प्रभावी कार्यान्वयन में सहायक होगा।

अपने प्रारंभिक संबोधन में डीडीडब्ल्यूएस के सचिव श्री अशोक के.के. मीना ने इस बात पर जोर दिया कि एसबीएम (जी) 2.0 अपने अंतिम वर्ष में है। गांवों को ओडीएफ प्लस (मॉडल) के रूप में परिपूर्ण करने, स्वच्छता, संसाधनों की कार्यक्षमता और डीडब्ल्यूएसएम के माध्यम से एसबीएम (जी) और जल जीवन मिशन की नियमित निगरानी पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ग्राम पंचायतें हमेशा से ही इस मिशन को जमीनी स्तर पर लागू करने में केंद्रीय भूमिका निभाती रही हैं और परिणामों को बनाए रखने और एसडब्ल्यूएम नियम, 2026 के अनुपालन को सुनिश्चित करने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी। उन्होंने अनुरोध किया कि सभी स्थानीय गतिविधियों की विधिवत रिपोर्ट डीडीडब्ल्यूएस को दी जानी चाहिए ताकि राष्ट्रीय स्तर पर प्रगति को विधिवत दर्ज किया जा सके और मिशन लाइफ पर आवश्यकतानुसार विधिवत रिपोर्ट की जा सके।

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इससे पहले एसबीएम (जी) की संयुक्त निदेशक एवं निदेशक सुश्री ऐश्वर्या सिंह ने डीडीडब्ल्यूएस द्वारा शुरू किए जा रहे एसजीएसजे अभियान के महत्व, मिशन लाइफ के साथ इसके संबंध और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एसजीएसजे अभियान को पांचों दिनों के लिए विशिष्ट गतिविधियों के साथ तैयार किया गया है, जिन्हें सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में आयोजित किया जाना चाहिए। उन्होंने आगे बताया कि एसडब्ल्यूएम नियम 2026 और इस मामले पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न आदेशों में नियमों के कार्यान्वयन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि एसडब्ल्यूएम नियम 2026 ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यान्वयन की निगरानी, उत्तरदायित्व निर्धारण और कार्रवाई के लिए एक स्पष्ट ढांचा प्रदान करते हैं। उन्होंने बताया कि डीडीडब्ल्यूएस द्वारा डिजाइन किए गए एसडब्ल्यूएम नियम 2026 के लिए राष्ट्रीय स्तर के आईईसी अभियान का उद्देश्य नियमों के विभिन्न प्रावधानों को सरल बनाना और उन्हें सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए आसानी से सुलभ बनाना भी है।

इस अभियान से मिशन लाइफ, 'जलवायु कार्रवाई' और एसडब्ल्यूएम नियमों जैसे विषयों पर जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है। इससे स्वच्छता के लिए जन भागीदारी को प्रोत्साहन और बढ़ावा मिलेगा, जो एसबीएम (जी) 2.0 के व्यापक दृष्टिकोण का समर्थन करेगा और कार्यक्रम के तहत परिणामों की व्यापकता सुनिश्चित करने में मदद करेगा।

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पीके/केसी/आरकेजे


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