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केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने बेंगलुरु में हुई समीक्षा बैठकों के दौरान एजेंसियों को लंबित खनन और अन्वेषण परियोजनाओं में तेजी लाने का निर्देश दिया


श्री रेड्डी ने बेंगलुरु में जीएसआई, एनआईआरएम और आईबीएम की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठकों की अध्यक्षता की और गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर जी का आशीर्वाद प्राप्त किया

प्रविष्टि तिथि: 25 MAY 2026 3:09PM by PIB Delhi

केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने सोमवार को मंत्रालय के अधीन सभी खनन एवं अन्वेषण एजेंसियों को लंबित परियोजनाओं में तेजी लाने और भारत की खनिज सुरक्षा एवं रणनीतिक विकास उद्देश्यों को सुदृढ़ करने के लिए मिशन-मोड दृष्टिकोण अपनाने का निर्देश दिया।

श्री जी. किशन रेड्डी ने बेंगलुरु में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई), राष्ट्रीय रॉक मैकेनिक्स संस्थान (एनआईआरएम), भारतीय खान ब्यूरो (आईबीएम) और रिमोट सेंसिंग और एरियल सर्वे (आरएसएएस) विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठकों की एक श्रृंखला की अध्यक्षता करते हुए कहा, सभी संगठनों को लंबित परियोजनाओं को तेजी से पूरा करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रौद्योगिकी, पारदर्शिता और दक्षता प्रत्येक संस्थागत प्रक्रिया की नींव बनें। भारत की जनता और भारत सरकार इस सेक्टर में कार्यरत प्रत्येक एजेंसी से गति, जवाबदेही और स्पष्ट परिणाम की अपेक्षा करती है।

इन बैठकों में खनिज अन्वेषण में तेजी लाने, वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीय क्षमताओं को मजबूत करने, टिकाऊ खनन कार्य प्रणालियों को बढ़ावा देने और संस्थागत प्रयासों को विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ संयोजित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

श्री रेड्डी ने समीक्षा के दौरान देश भर में जारी परियोजनाओं, प्रौद्योगिकीय प्रगति और अन्वेषण कार्यकलापों, विशेष रूप से दुर्लभ पृथ्वी तत्व (आरईई), लिथियम, निकेल, कोबाल्ट, टंगस्टन, वैनेडियम और प्लैटिनम समूह तत्व (पीजीई) सहित महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों के क्षेत्र का आकलन किया। इन संगठनों ने भारत की खनिज सुरक्षा और रणनीतिक विकास उद्देश्यों को सुद़ृढ़ करने के लिए लागू की जा रही संसाधन संवर्धन, खनिज लक्ष्यीकरण, वैज्ञानिक सर्वेक्षण, खान स्थिरता, भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों और उन्नत अन्वेषण प्रणालियों पर विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।

श्री जी. किशन रेड्डी ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा:

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और विजन में भारत आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है। खनन और अन्वेषण सेक्टर भारत के भविष्य के विकास, औद्योगिक विस्तार और रणनीतिक खनिज सुरक्षा को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उन्होंने सभी संगठनों को स्पष्ट रूप से परिभाषित समयसीमा, मापनीय परिणामों और अधिक जवाबदेही के साथ समन्वित मिशन-मोड दृष्टिकोण में काम करने का निर्देश दिया।

श्री रेड्डी ने भारत के अन्वेषण इको-सिस्टम को मजबूत करने में उन्नत प्रौद्योगिकियों, डेटा एकीकरण और वैज्ञानिक नवाचार के महत्व पर भी बल दिया।

उन्होंने कहा, “खनिज अन्वेषण का भविष्य एआई, रिमोट सेंसिंग, एकीकृत भूविज्ञान विश्लेषण और उन्नत अन्वेषण पद्धतियों सहित प्रौद्योगिकी-संचालित प्रणालियों में निहित है। भारत को भविष्य के लिए तैयार और संसाधन-सुरक्षित बनाने के लिए हमारे संस्थानों को इस परिवर्तन का नेतृत्व करना होगा।

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) ने कर्नाटक और गोवा में किए गए प्रमुख अन्वेषण परिणामों को रेखांकित किया, जिसमें सोने, तांबे, पीजीई, निकल और कोबाल्ट युक्त क्षेत्रों की पहचान के साथ-साथ एमएमडीआर संशोधन अधिनियम, 2015 के तहत किए गए सुधारों के बाद खनिज संसाधनों में महत्वपूर्ण वृद्धि शामिल है। जीएसआई ने लगभग 48,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर करने वाली व्यापक स्तर पर विषयगत मानचित्रण, एआई/एमएल-सक्षम खनिज लक्ष्यीकरण और उन्नत चरण की अन्वेषण परियोजनाओं से संबंधित अपनी पांच वर्षीय कार्ययोजना की रूपरेखा भी प्रस्तुत की।

राष्ट्रीय रॉक मैकेनिक्स संस्थान ने राष्ट्रीय महत्व की अवसंरचना और खनन सुरक्षा परियोजनाओं में अपने योगदान को प्रदर्शित किया, जिनमें जलविद्युत, मेट्रो रेल, सुरंग अभियांत्रिकी, भूकंपीय निगरानी और संवेदनशील अवसंरचनाओं के निकट नियंत्रित विस्फोट शामिल हैं। संस्थान ने रॉक मैकेनिक्स, अभियांत्रिकी भूविज्ञान, सूक्ष्म भूकंपीय निगरानी और रणनीतिक राष्ट्रीय विकास परियोजनाओं को सहयोग देने वाले भू-तकनीकी समाधानों में अपनी क्षमताओं का भी प्रदर्शन किया।

भारतीय खान ब्यूरो ने सतत खनन पद्धतियों, नीलाम किए गए खनिज ब्लॉकों के संचालन, वैज्ञानिक खान परिसमापन, खनिज संवर्धन और पर्यावरण सुरक्षा उपायों में हुई प्रगति की समीक्षा की। आईबीएम ने राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के तहत विद्यमान खनन इको-सिस्टम से महत्वपूर्ण खनिजों के संवर्धन और पुनर्प्राप्ति क्षमता से संबंधित निष्कर्ष भी प्रस्तुत किए।

आरएसएएस विभाग ने राष्ट्रीय एयरोभूभौतिकीय मानचित्रण कार्यक्रम (एनएजीएमपी) के अंतर्गत प्राप्त प्रगति को प्रस्तुत किया, जिसमें हवाई भूभौतिकीय सर्वेक्षण, हाइपरस्पेक्ट्रल रिमोट सेंसिंग और एआई/एमएल-आधारित खनिज संभावना मानचित्रण शामिल हैं। समीक्षा में बताया गया कि इस कार्यक्रम के अंतर्गत 6.5 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र को कवर किया जा चुका है, जिससे एयरोभूभौतिकीय डेटासेट का उपयोग करते हुए 200 से अधिक अन्वेषण परियोजनाएं तैयार की गई हैं।

बेंगलुरु दौरे के दौरान, श्री जी. किशन रेड्डी ने आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन इंटरनेशनल सेंटर का दौरा किया और आर्ट ऑफ लिविंग परिवार के सदस्यों से परस्पर बातचीत की। उन्होंने गुरुकुल और प्रदर्शनी केंद्र का भी दौरा किया और भारत की सांस्कृतिक विरासत पर आधारित मूल्य-आधारित शिक्षा, आध्यात्मिक जागरूकता और सामाजिक परिवर्तन के लिए संस्था के प्रयासों की सराहना की।

श्री रेड्डी ने श्री श्री रवि शंकर से भी बातचीत की और उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया।

श्री जी. किशन रेड्डी ने यात्रा पर टिप्पणी करते हुए कहा:

विकसित भारत 2047 की ओर भारत की विकास यात्रा न केवल आर्थिक प्रगति और प्रौद्योगिकीय उन्नति से, बल्कि आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक मूल्यों और समाज के प्रति सामूहिक सेवा की भावना से भी निर्देशित होना चाहिए।

यह यात्रा विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप वैज्ञानिक प्रगति, सतत विकास, सांस्कृतिक मूल्यों और संस्थागत उत्कृष्टता के माध्यम से राष्ट्र निर्माण पर नए सिरे से बल देने के साथ समाप्त हुई।

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पीके/केसी/एसकेजे/एचबी


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