नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय
2025-26 में 6.1 गीगावॉट की बढ़ोतरी के साथ भारत ने पवन ऊर्जा क्षेत्र में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की: नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री
सरकार 2030 तक 100 गीगावॉट और 2036 तक 156 गीगावॉट पवन ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध: श्री प्रल्हाद जोशी
नीतिगत सुधार और उद्योग जगत का सहयोग भारत को वैश्विक पवन ऊर्जा विनिर्माण केंद्र के रूप में और मजबूत करेंगे: श्री जोशी
प्रविष्टि तिथि:
22 APR 2026 6:46PM by PIB Delhi
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा तथा उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री, श्री प्रह्लाद जोशी ने आज पवन ऊर्जा स्वतंत्र विद्युत उत्पादक संघ (डब्ल्यूआईपीपीए) के स्थापना दिवस पर हुए समारोह के अवसर पर संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने पवन ऊर्जा क्षेत्र में भारत की उल्लेखनीय प्रगति पर प्रकाश डाला और देश के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।
श्री जोशी ने बताया कि भारत ने पवन ऊर्जा क्षमता में बढ़ोतरी के मामले में अपना अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया है, जिसमें 2025-26 के दौरान ऐतिहासिक 6.1 गीगावॉट क्षमता जोड़ी गई है। पवन ऊर्जा के क्षेत्र में भारत अभी दुनिया में चौथे स्थान पर है, जिसकी स्थापित क्षमता 56.1 गीगावॉट से ज़्यादा है और 28 गीगावॉट की अतिरिक्त क्षमता पर काम जारी है।
पवन ऊर्जा क्षेत्र की अपार संभावनाओं पर जोर देते हुए, केंद्रीय मंत्री ने इस बात को रेखांकित किया कि 150 मीटर की ऊंचाई पर भारत की पवन ऊर्जा क्षमता लगभग 1164 गीगावाट होने का अनुमान है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि निरंतर प्रयासों के साथ, देश 2030 तक 100 गीगावाट और 2036 तक 156 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता हासिल कर लेगा, जो 2070 तक नेट-जीरो लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
मंत्री महोदय ने इस बात पर विशेष बल दिया कि भारत की ऊर्जा प्रणाली को स्थिर करने में पवन ऊर्जा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, विशेष रूप से शाम और रात के घंटों के दौरान जब उत्पादन अपने चरम पर होता है। यह वह समय होता है जब देश में बिजली की मांग सबसे अधिक होती है। उन्होंने बताया कि पवन ऊर्जा का लगभग 45% उत्पादन सबसे अधिक मांग के घंटों के दौरान होता है, जो इसे सौर ऊर्जा के लिए एक अनिवार्य और पूरक ऊर्जा स्रोत बनाता है।
नीतिगत उपायों पर प्रकाश डालते हुए, श्री जोशी ने कहा कि सरकार ने लगातार मांग सुनिश्चित करने के लिए 'नवीकरणीय खरीद दायित्वों' के तहत एक विशेष 'पवन ऊर्जा घटक' शुरू किया है। 'विलंबित भुगतान अधिभार' नियमों को लागू करने, पारदर्शी बोली दिशानिर्देशों और 'मॉडल और निर्माताओं की अनुमोदित सूची' (एएलएमएम) को लागू करने जैसे उपायों से निवेशकों का विश्वास बढ़ रहा है और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिल रहा है।
उन्होंने आगे यह भी बताया कि भारत ने एक सुदृढ़ घरेलू विनिर्माण इकोसिस्टम विकसित कर लिया है, जिसकी वार्षिक क्षमता 24 गीगावाट से अधिक है और जिसमें स्वदेशीकरण का स्तर 70–80% तक पहुँच गया है। देश के पास ब्लेड, टावर, गियरबॉक्स और अन्य महत्वपूर्ण घटकों के लिए एक मजबूत आपूर्ति श्रृंखला क्षमता भी मौजूद है।
उद्योग की चिंताओं के बारे में संबोधित करते हुए, मंत्री महोदय ने बताया कि सरकार सक्रिय रूप से अतिरिक्त पवन ऊर्जा टेंडर जारी करने पर विचार कर रही है और साथ ही ग्रिड की दक्षता बढ़ाने के लिए हाइब्रिड और चौबीसों घंटे (आरटीसी) चलने वाली परियोजनाओं को भी बढ़ावा दे रही है। डेविएशन सेटलमेंट मैकेनिज्म से जुड़े जुर्माने, बिजली कटौती और ट्रांसमिशन में देरी जैसे मुद्दे विचाराधीन हैं, और इन समस्याओं के संतुलित तथा व्यावहारिक समाधान खोजने के प्रयास जारी हैं।
मंत्री महोदय ने उद्योगों द्वारा सीधे नवीकरणीय बिजली की खरीद को सुगम बनाने के लिए 'ग्रीन एनर्जी ओपन एक्सेस' नियमों, पुराने विंड टर्बाइनों को फिर से पावर देने और हरित ऊर्जा गलियारे के तहत पारेषण के बुनियादी ढांचे के विस्तार जैसी पहलों पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने उल्लेख किया कि सरकार ब्लेंडेड फाइनेंस और क्रेडिट संवर्द्धन फ्रेमवर्क जैसे अभिनव तंत्रों के माध्यम से लंबी अवधि के और कम लागत वाले धन जुटाने पर काम कर रही है। 'कॉन्ट्रैक्ट्स फॉर डिफरेंस' मॉडल के तहत हाल ही में शुरू की गई 500 मेगावाट की प्रमुख परियोजना से राजस्व निश्चितता मिलने और बाजार की स्थिरता में सुधार होने की उम्मीद है।
श्री जोशी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि बदलता वैश्विक परिदृश्य भारत के लिए एक रणनीतिक अवसर प्रस्तुत करता है, जिसके ज़रिए वह पवन ऊर्जा क्षेत्र में एक भरोसेमंद वैश्विक विनिर्माण और आपूर्ति भागीदार के रूप में उभर सकता है—विशेष रूप से ऐसे समय में, जब विभिन्न देश अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने का प्रयास कर रहे हैं।
पवन ऊर्जा उद्योग की एक विश्वसनीय आवाज़ के रूप में डब्ल्यूआईपीपीए की भूमिका के लिए उसे बधाई देते हुए, मंत्री ने कहा कि इस संगठन ने नीतिगत संवाद को आकार देने, क्षेत्र से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करने और भारत की नवीकरणीय ऊर्जा संबंधी महत्वाकांक्षाओं को समर्थन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
अपने संबोधन के अंत में, मंत्री महोदय ने दोहराया कि अगले दशक में 156 गीगावॉट के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करना पूरी तरह से संभव है, जिसे स्पष्ट नीतिगत दिशा, मज़बूत संस्थागत सहयोग और उद्योग की भागीदारी का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने एक विश्वसनीय और टिकाऊ ऊर्जा भविष्य सुनिश्चित करने के लिए पवन, सौर और भंडारण को मिलाकर बने एकीकृत हाइब्रिड प्रणालियों पर अधिक ध्यान देने का आह्वान किया।
इस कार्यक्रम में नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव श्री संतोष सारंगी और अन्य लोग उपस्थित थे।
***
पीके/केसी/एसके/एसएस
(रिलीज़ आईडी: 2254652)
आगंतुक पटल : 165