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राष्ट्रीय अनुसूचित जाति–अनुसूचित जनजाति हब : समावेशी उद्यमिता को सशक्‍त बनाना

प्रविष्टि तिथि: 08 OCT 2026 10:25 AM

कौशलों, बाजारों और व्‍यवसाय के विकास के माध्यम से समावेशिता को बढ़ावा देना

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति–अनुसूचित जनजाति हब (एनएसएसएच), अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति उद्यमों को अपनी क्षमताओं का विकास करने और बाजार के व्यापक अवसरों तक पहुँच बनाने में सक्षम बनाकर समावेशी उद्यमिता को सशक्त कर रहा है। यह योजना वित्त, प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और बाजार संपर्क जैसी विभिन्न पहलों के माध्यम से उद्यम की पूरी यात्रा के दौरान आने वाली प्रमुख बाधाओं को दूर करने में सहायता करती है। सार्वजनिक खरीद पर इसका फोकस एससी/एसटी स्वामित्व वाले एसएसई  को संस्थागत खरीदारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लाभार्थियों की बढ़ती पहुँच, प्रशिक्षण में सहायता और सार्वजनिक खरीद में भागीदारी के माध्यम से एनएसएसएच  अधिक प्रतिस्पर्धी और समावेशी एमएसएमई  इकोसिस्‍टम तैयार करने में योगदान दे रहा है।  

समावेशी उद्यमिता इकोसिस्‍टम का निर्माण

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) भारत के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता, रोजगार तथा आर्थिक अवसरों के सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण रूप से मार्ग प्रशस्त करते हैं। इन अवसरों को अधिक समावेशी बनाने के लिए आवश्‍यक है कि ऐतिहासिक रूप से कम प्रतिनिधित्व वाले समुदायों के उद्यमियों को भागीदारी, प्रतिस्पर्धा और विकास करने में सक्षम बनाया जाए। इस संदर्भ में, अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदायों के बीच उद्यम स्वामित्व को बढ़ावा देना एक महत्वपूर्ण प्राथमिकता है। वित्त, कौशल, प्रौद्योगिकी और बाजारों तक बेहतर पहुँच से भारत के एमएसएमई इकोसिस्‍टम में इन समुदायों की भागीदारी को व्यापक बनाने में सहायता मिल सकती है।  

राष्ट्रीय एससी-एसटी हब: उद्यम विकास को सक्षम बनाना 

18 अक्टूबर 2016 को शुरू की गई राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना (एनएसएसएच), उद्यमों के विकास की यात्रा के विभिन्न चरणों में उन्हें लक्षित सहायता प्रदान करती है। राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (एनएसआईसी), के माध्यम से कार्यान्वित की जा रही यह योजना एससी-एसटी स्वामित्व वाले उद्यमों के सामने आने वाली प्रमुख बाधाओं को दूर करने तथा सार्वजनिक खरीद में उनकी भागीदारी को बढ़ावा देने में सहायता करती है।

एनएसएसएच के अंतर्गत उद्यम विकास पहल में प्रशिक्षण, मार्गदर्शन, व्यवसाय विकास, नेटवर्किंग और ज्ञान संबंधी सहायता शामिल है। ये सभी कदम मिलकर उद्यमियों को अपनी व्यावसायिक क्षमताओं में सुधार करने, नए अवसरों तक पहुँच बनाने और अधिक प्रतिस्पर्धी उद्यमों का निर्माण करने में सहायता देते हैं। 

पहुँच का विस्तार करना, समावेशन को सुदृढ़ बनाना

एनएसएसएच का प्रभाव केवल समर्थित उद्यमियों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बाजारों में उनकी बढ़ती भागीदारी में भी परिलक्षित होता है। उद्यमिता सहायता को खरीद के अवसरों से जोड़कर, यह योजना एससी/एसटी स्वामित्व वाले उद्यमों को अपनी क्षमताओं में सुधार करने, बाजार में अपनी उपस्थिति का विस्तार करने और सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ने में सहायता कर रही है।

एनएसएसएच ने अपनी शुरुआत से 31 जुलाई 2026 तक  1,90,414 लाभार्थियों को सहायता प्रदान की है, जबकि 54,499 अभ्यर्थियों को प्रशिक्षित किया है। इसने एससी/एसटी स्वामित्व वाले सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (एमएसई) से सार्वजनिक खरीद में भी उल्लेखनीय विस्तार किया है। यह खरीद 2015-16 में 99.37 करोड़ रुपये से  लगभग 39 गुना बढ़कर 2025-26 में 4,013.42 करोड़ रुपये हो गई।  एनएसएसएच के अंतर्गत उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और असम पांच प्रमुख राज्य बनकर उभरे हैं।

2025-26 की अवधि के दौरान:

  • 12,524 एमएसई से 4,013.42 करोड़ रुपये की सार्वजनिक खरीद दर्ज की गई
  • 24 आकांक्षी जिलों सहित 27 राज्यों के 47 संस्थानों के माध्यम से 10,717 अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया
  • प्रशिक्षित अभ्यर्थियों में 55% महिलाएँ थीं

प्रशिक्षण कार्यक्रमों को सार्वजनिक खरीद और जीईएम के अवसरों के अनुरूप तैयार किया गया, ताकि बाजार में उनकी प्रासंगिकता को बेहतर बनाया जा सके। प्रमुख क्षेत्रों में कैफेटेरिया प्रबंधन एवं खाद्य उत्पादन, वेल्डिंग, कंप्यूटर-एडेड डिजाइन (सीएडी) / कंप्यूटर-एडेड मैन्युफैक्चरिंग (सीएएम), लॉन्ड्री सेवाएँ, फैशन डिजाइनिंग एवं सिलाई तथा बांस-आधारित कार्य शामिल रहे।

उद्यमों की विकास यात्रा के हर चरण में सहायता  प्रदान करना 

एनएसएसएच उद्यमों की विकास संबंधी विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अनेक प्रकार की सहायता पहलों को एक साथ लाता है।

विशेष ऋण-संबद्ध पूंजी सब्सिडी योजना  (एससीएलसीएसएस)

एससीएलसीएसएस संयंत्र, मशीनरी और उपकरणों में निवेश के माध्यम से नई और मौजूदा एससी/एसटी स्वामित्व वाली सूक्ष्म एवं लघु इकाइयों (एमएसई) को अपनी उत्पादन एवं व्यवसायिक क्षमता को मजबूत करने में सहायता करती है। यह योजना संस्थागत ऋण के माध्यम से वित्तपोषित खरीद पर 25% पूंजीगत सब्सिडी प्रदान करती है, जिसकी अधिकतम सीमा 25 लाख रुपये है। योजना के अंतर्गत विनिर्माण और सेवा—दोनों क्षेत्रों के उद्यम शामिल हैं तथा उत्पाद / क्षेत्र विशेष से संबंधित कोई प्रतिबंध नहीं है। 

स्थापना (2016) से मार्च 2026 तक की प्रगति:

  • 3,160 एमएसई को कुल 356.10 करोड़ रुपये तक की सहायता राशि प्रदान की गई
  • 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 233 जिलों तक योजना का विस्तार किया गया

एकल बिंदु पंजीकरण योजना (एसपीआरएस)

एसपीआरएस एनएसआईसी में पंजीकरण के जरिए एमएसई को सरकारी खरीद के अवसरों तक पहुँच प्राप्त करने में सहायता करती है। पंजीकृत एमएसई को निःशुल्क टेंडर दस्तावेज़ उपलब्ध कराए जाते हैं और बयाना राशि (ईएमडी) के भुगतान से छूट सहित खरीद संबंधी अन्य लाभ प्राप्त होते हैं।.

सार्वजनिक खरीद नीति के तहत, केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और सीपीएसई के लिए अपनी वार्षिक खरीद का 25% एमएसई से करना आवश्‍यक है। इसमें कुल खरीद का 4% एससी/एसटी स्वामित्व वाले एमएसई के लिए निर्धारित है।

विशेष विपणन सहायता योजना (एसएमएएस)

एसएमएएस प्रदर्शनियों, व्यापार मेलों, विक्रेता विकास कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और जागरूकता अभियानों के माध्यम से एससी/एसटी उद्यमों के उत्पादों की दृश्यता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में सहायता करता है। पंजीकृत उद्यम प्रत्येक वित्तीय वर्ष में अधिकतम चार घरेलू और दो अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भाग ले सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों के लिए सूक्ष्म उद्यमों को 3 लाख रुपये तक, लघु उद्यमों के लिए 2.5 लाख रुपये तक और मध्यम उद्यमों के लिए 1.5 लाख रुपये तक सहायता प्रदान की जाती है। इस सहायता का लाभ लेने के लिए उद्यमों का उद्यम पंजीकरण पोर्टल और एमएसएमई डेटा बैंक पर पंजीकृत होना आवश्यक है।

2025-26 के दौरान प्रगति:

  • 141 एससी/एसटी एमएसई को 4 घरेलू प्रदर्शनियों में भाग लेने की सुविधा प्रदान की गई
  • सीपीएसई के साथ 247 विशेष विक्रेता विकास कार्यक्रम आयोजित किए गए
  • 197 ई-निविदा कार्यशालाएँ आयोजित की गईं
  • जागरूकता फैलाने के लिए केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (सीपीएसई) और सरकारी विभागों के साथ 230 कार्यशालाएँ आयोजित की गईं

बैंक ऋण प्रसंस्करण शुल्क प्रतिपूर्ति योजना

एससी/एसटी एमएसई के लिए ऋण लेने की लागत को कम करने के उद्देश्य से, यह सहायता योजना लागू करों को छोड़कर ऋण प्रसंस्करण शुल्क की 80% राशि या 1 लाख रुपये, जो भी कम हो, की प्रतिपूर्ति करती है। इसका लाभ ऋण वितरित होने के बाद लिया जा सकता है और एक वित्तीय वर्ष में एक से अधिक बार दावा किया जा सकता है। इस योजना के अंतर्गत अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों, एनबीएफसी और राज्य वित्त निगमों से लिए गए ऋण शामिल हैं। 

बैंक गारंटी शुल्क प्रतिपूर्ति योजना

केंद्र या राज्य सरकार तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों की निविदाओं में भाग लेने की लागत को कम करने के लिए, एससी/एसटी एमएसई को निष्‍पादन बैंक गारंटी शुल्क की प्रतिपूर्ति का लाभ मिल सकता है। इस सहायता के अंतर्गत  लागू करों को छोड़कर पात्र शुल्क की 80% राशि या 1 लाख रुपये, जो भी कम हो, की प्रतिपूर्ति की जाती है।

परीक्षण शुल्क प्रतिपूर्ति योजना 

यह योजना एससी/एसटी एमएसई को उत्पाद परीक्षण, लाइसेंसिंग और भारतीय मानक ब्यूरो  द्वारा प्रदान किए जाने वाले प्रमाणन से संबंधित लागत को कम करने में सहायता करती है। इसके अंतर्गत एक वित्तीय वर्ष में लागू करों को छोड़कर पात्र परीक्षण शुल्क की 80% राशि या 1 लाख रुपये, जो भी कम हो, की प्रतिपूर्ति की जाती है।

परीक्षण एनएबीएल/बीआईएस से मान्यता प्राप्त, सरकारी या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की प्रयोगशालाओं के माध्यम से कराया जाना आवश्यक है।

निर्यात संवर्धन परिषद सदस्यता शुल्क प्रतिपूर्ति योजना

निर्यात नेटवर्कों तक पहुँच को सुगम बनाने के लिए एससी/एसटी एमएसई को निर्यात संवर्धन परिषदों (ईपीसी) की सदस्यता के लिए सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना के अंतर्गत प्रति वित्तीय वर्ष में लागू करों को छोड़कर पात्र सदस्यता शुल्क की 80% राशि या 20,000, रुपये जो भी कम हो, की प्रतिपूर्ति की जाती है। इसमें वार्षिक सदस्यता शुल्क, एकमुश्त सदस्यता शुल्क तथा प्रवेश शुल्क शामिल हैं। आवेदन करने वाले उद्यम के पास वैध आयात-निर्यात कोड (आईईसी) और पंजीकरण-सह- सदस्‍यता प्रमाणपत्र (आरसीएमसी) होना आवश्यक है ।

क्षमता निर्माण प्रबंधन शुल्क प्रतिपूर्ति योजना

प्रबंधकीय और व्यावसायिक कौशल को मजबूत करने के लिए एनआईआरएफ के अंतर्गत चिन्हित शीर्ष 50 प्रबंधन संस्थानों में अल्पकालिक प्रशिक्षण की सुविधा प्रदान की जाती है। इस योजना के तहत एससी/एसटी उद्यमी और उनके आश्रित 1 से 30 दिनों की अवधि वाले प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग ले सकते हैं तथा प्रति वर्ष अधिकतम दो पाठ्यक्रमों के लिए सहायता प्राप्त कर सकते हैं। प्रतिभागियों को प्रति वित्तीय वर्ष, पाठ्यक्रम शुल्क की 90% राशि या 1 लाख रुपये, जो भी कम हो, की प्रतिपूर्ति प्रदान की जाती है।

सरकार द्वारा प्रवर्तित ई-कॉमर्स पोर्टलों का सदस्यता शुल्क 

यह घटक सरकार द्वारा प्रवर्तित ई- कॉमर्स पोर्टलों के माध्यम से एससी/एसटी एमएसई की डिजिटल बाजार तक पहुँच का विस्तार करने में सहायता करता है। इनमें जीईएम, ई-खादी, ट्राइफेड, ट्राइब्स इंडिया और एमएसएमई मार्ट शामिल हैं । इस योजना के अंतर्गत प्रति वित्तीय वर्ष लागू करों को छोड़कर सदस्यता शुल्क की 80% राशि या 25,000 रुपये, जो भी कम हो, की प्रतिपूर्ति की जाती है।

यह एकीकृत दृष्टिकोण उद्यमों को संभावित आपूर्तिकर्ताओं से संस्थागत और सरकारी बाजारों में प्रतिस्पर्धी प्रतिभागियों के रूप में आगे बढ़ने में सहायता करता है।  

सहायता से बाजार में सफलता तक

एनएसएसएच वित्तीय और बाजार संबंधी सहायता से आगे बढ़कर, उद्यमों को व्यावसायिक सहायता को बेहतर वाणिज्यिक परिणामों में बदलने में मदद करता है। बिजनेस एक्सेलेरेटर प्रोग्राम (बीएपी) के माध्यम से व्यवसाय रणनीति, मूल्य निर्धारण, परिचालन दक्षता और बाजार में स्थिति निर्धारण जैसे क्षेत्रों में संरचित मार्गदर्शन और उद्योग संबंधी जानकारी प्रदान की जाती है।

यह कार्यक्रम उद्यमियों को संरचित और डेटा – आधारित दृष्टिकोण अपनाने तथा अपने व्यवसायों को बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने में सहायता करता है। इससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होती है और विशेष रूप से सरकारी खरीद के क्षेत्र में बड़े अवसरों तक उनकी पहुँच बढ़ती है।

सफलता की कहानियाँ (बीएपी)

 

अनुपालन-आधारित बाजारों में प्रासंगिकता बनाना - मेसर्स सेफ्टी एंड सिक्योरिटी इंजीनियरिंग, पश्चिम बंगाल

श्री देबाशीष मंडल ने मूल्य निर्धारण, लागत प्रबंधन और बाजार में स्थिति निर्धारण को बेहतर बनाया। इस सहायता से सरकारी खरीद में उनके उद्यम की प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत हुई। इसके परिणामस्वरूप, उद्यम ने पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड से 8.48 लाख रुपये मूल्य की निविदाएँ सफलतापूर्वक प्राप्त कीं।

स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार- मेसर्स रेनर्जी सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड, असम  

श्री भार्गव देवोरी ने अपने नवीकरणीय ऊर्जा उद्यम की व्यावसायिक प्रक्रियाओं, रणनीतिक दिशा और बाजार में स्थिति निर्धारण को मजबूत किया। कार्यक्रम के माध्यम से खरीद प्लेटफॉर्मों पर उद्यम की भागीदारी और सरकारी निविदाओं के लिए तैयारी में सुधार हुआ। इससे उद्यम को सार्वजनिक खरीद के अवसरों का बेहतर लाभ उठाने और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में अपनी उपस्थिति का विस्तार करने में सहायता मिली ।

 सटीकता के साथ गतिशीलता को बढ़ावा देना- सवालाराम एंटरप्राइजेज, महाराष्ट्र 

श्री सुनील पोपटराव जगताप ने अपनी व्यावसायिक रणनीति और सरकारी खरीद प्रक्रियाओं की समझ को मजबूत किया। इन जानकारियों को व्यावहारिक रूप से अपनाते हुए, सवालाराम एंटरप्राइजेज ने हाइड्रोलिक सिलेंडरों के लिए सेल से 5.10 लाख रुपये की निविदा प्राप्त की। इस अवसर से उद्यम के व्यावसायिक प्रदर्शन को मजबूती मिली और बाजार में उसकी उपस्थिति बढ़ी।

उद्यमिता को सशक्त बनाना, समावेशन को आगे बढ़ाना

राष्ट्रीय एससी/एसटी हब (एनएसएसएच) एससी/एसटी उद्यमियों के लिए भारत की आर्थिक प्रगति में अधिक सार्थक भागीदारी के अवसरों का विस्तार कर रहा है। इसकी विभिन्न पहलें उद्यमों को कौशल विकसित करने और व्यापक बाजारों से जुड़ने में सहायता करती हैं। यह प्रगति सार्वजनिक खरीद में अधिक भागीदारी को भी सक्षम बना रही है तथा रोजगार और उद्यम विकास के लिए नए अवसर तैयार कर रही है। जैसे-जैसे एनएसएसएच की पहुँच बढ़ रही है, यह एक अधिक समावेशी, विविधतापूर्ण और प्रतिस्पर्धी एमएसएमई इकोसिस्‍टम के निर्माण में योगदान दे रहा है। 

संदर्भ

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय

https://www.scsthub.in/sites/default/files/NSSH-Annual-Report-2025-26-1.pdf

https://www.scsthub.in/membership-nsic-b2b-portal

https://www.scsthub.in/content/nssh-dashboard

https://msme1connect.up.gov.in/GovernmentScheme/GovernmentScheme638740909894501747.pdf

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2280604&reg=48&lang=1

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2290460&reg=48&lang=2

राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम

https://www.nsic.co.in/Schemes/NSSH

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पीआईबी शोध

पीके/केसी/आरटी/आरके

(तथ्य सामग्री आईडी: 151101) आगंतुक पटल : 37


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