विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
टीडीबी ने येटी-भारी भार उठाने वाले ऑटोनॉमस एरियल लॉजिस्टिक्स व्हीकल के विकास के लिए 151 करोड़ रुपये के आरडीआईआई समर्थन हेतु आईडियाफोर्ज के साथ समझौता किया
200 किलोग्राम तक के भार को ले जाने में सक्षम स्वदेशी वीटीओएल प्लेटफॉर्म, जिसकी लक्षित सीमा 200 किलोमीटर है, टीआरएल-9 की दिशा में आगे बढ़ रहा है
प्रविष्टि तिथि:
14 OCT 2026 12:50PM by PIB Delhi
भारत की स्वायत्त हवाई प्रणालियों और अगली पीढ़ी की लॉजिस्टिक्स क्षमताओं को मजबूत करने के दृष्टिकोण से भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने अनुसंधान विकास और नवाचार (आरडीआई) कोष के तहत 151 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता के लिए मुंबई स्थित आइडियाफोर्ज टेक्नोलॉजी लिमिटेड के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
कुल 302 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य येटी नामक भारी भार उठाने वाले और लंबी दूरी तक उड़ान भरने वाले स्वायत्त हवाई रसद वाहन का विकास करना है, ताकि इसकी तकनीक को प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर (टीआरएल)-4 से टीआरएल-9 तक उन्नत किया जा सके। वित्तीय सहायता ऋण वित्तपोषण के माध्यम से प्रदान की जाएगी।
चुनौतीपूर्ण परिचालन वातावरणों के लिए डिज़ाइन किया गया येटी एक स्वायत्त वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग वाला, फिक्स्ड-विंग वाला हाइब्रिड मानवरहित हवाई वाहन है, जिसका उद्देश्य लंबी दूरी तक भारी पेलोड का परिवहन करना है। इसकी प्रस्तावित क्षमताएं उन क्षेत्रों में रसद संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए हैं जहां पारंपरिक परिवहन कठिन, समय लेने वाला या परिचालन संबंधी बाधाओं से ग्रस्त हो सकता है। यह प्लेटफॉर्म 200 किलोग्राम तक का पेलोड ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसकी लक्षित सीमा 200 किलोमीटर तक और परिचालन ऊंचाई समुद्र तल से 6,500 मीटर तक है। इसका मौसम-प्रतिरोधी डिज़ाइन उच्च-ऊंचाई वाले क्षेत्रों, रेगिस्तानों और समुद्री परिस्थितियों सहित चुनौतीपूर्ण वातावरणों में संचालन में सहायता करने के लिए बनाया गया है।
येटी की एक प्रमुख विशेषता इसकी वर्टिकल उड़ान भरने और उतरने की क्षमता है, साथ ही यह लंबी दूरी के संचालन के लिए फिक्स्ड-विंग संरचना को भी बनाए रखती है। यह वाहन लगभग 15 मीटर × 15 मीटर के अपेक्षाकृत छोटे, अविकसित लैंडिंग क्षेत्रों से संचालन के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिससे सीमित जमीनी बुनियादी ढांचे वाले स्थानों में भी इसकी तैनाती संभव हो पाती है। इस प्लेटफॉर्म में फॉल्ट टॉलरेंस को बेहतर बनाने के लिए वितरित और अतिरेकपूर्ण प्रणोदन और विद्युत संरचना शामिल है। इसकी प्रस्तावित क्षमताओं में जीएनएसएस-रहित नेविगेशन, 200 किमी तक का संचार लिंक और त्वरित तैनाती के लिए कंटेनरीकृत परिवहन भी शामिल हैं। इसका डिज़ाइन इस तरह तैयार किया गया है कि वाहन को जल्दी से परिवहन के लिए स्थापित किया जा सके, जिससे भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण स्थानों पर रसद मिशनों में सहायता मिल सके।
कठिन भूभागों में आवश्यक आपूर्ति पहुंचाने के लिए भारी भार वहन करने वाले स्वायत्त हवाई प्लेटफार्मों का विकास तेजी से महत्वपूर्ण होता जा रहा है। वर्टिकल उड़ान भरने और उतरने की क्षमता, लंबी दूरी की उड़ान क्षमता और पर्याप्त भार वहन क्षमता को मिलाकर येटी को मानवरहित विमानन और हवाई रसद बाजार के एक विशिष्ट क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए विकसित किया जा रहा है।
आरडीआई समर्थित कार्यक्रम लागू तकनीकी, सुरक्षा और नियामक आवश्यकताओं के अधीन, प्लेटफ़ॉर्म को टीआरएल-9 की ओर आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रौद्योगिकी विकास, इंजीनियरिंग, एकीकरण, परीक्षण और सत्यापन को सुगम बनाएगा। यह परियोजना डीप टेक्नोलॉजी क्षेत्र के अंतर्गत आती है, जिसमें इंटेलिजेंट सिस्टम और रोबोटिक्स उप-क्षेत्र हैं। यह स्वदेशी स्वायत्त प्रणालियों के बढ़ते महत्व को दर्शाता है जो एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, प्रणोदन, नेविगेशन, संचार और इंटेलिजेंट कंट्रोल को एकीकृत करती हैं।
टीडीबी के सचिव श्री राजेश कुमार पाठक ने कहा, “उन्नत स्वायत्त प्रणालियों का विकास जटिल परिचालन और रसद संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए नए अवसर खोल रहा है। स्वदेशी भारी-भरकम हवाई प्लेटफार्म दूरस्थ और दुर्गम स्थानों तक पहुंच में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। आरडीआई फंड के माध्यम से टीडीबी उन प्रौद्योगिकी-प्रधान परियोजनाओं का समर्थन कर रहा है जिनमें उन्नत विकास से तैनाती की ओर बढ़ने के लिए निरंतर निवेश की आवश्यकता होती है। आइडियाफोर्ज के साथ यह समझौता स्वायत्त प्रणालियों, रोबोटिक्स और अगली पीढ़ी की एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियों में भारत की क्षमताओं को मजबूत करने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”
आइडियाफोर्ज टेक्नोलॉजी लिमिटेड के सीईओ और सह-संस्थापक ने इस अवसर पर कहा, “येटी भारत की स्वायत्त डिजाइन, निर्माण और संचालन क्षमताओं में एक क्रांतिकारी कदम है। हमारी सशस्त्र सेनाओं और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को हर दिन ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है जहां सड़कें खत्म हो जाती हैं और मौसम साथ नहीं देता। येटी इसी चुनौती का हमारा जवाब है, जिसे न केवल उड़ान भरने के लिए बल्कि सबसे कठिन परिचालन परिस्थितियों में भी विश्वसनीय और बार-बार सफल प्रदर्शन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। आरडीआई ढांचे के माध्यम से आइडियाफोर्ज में सरकार का विश्वास इस बात की पुष्टि करता है कि भारतीय डीपटेक कंपनियां अब राष्ट्रीय क्षमता निर्माण का भार उठाने के लिए तैयार हैं।”

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पीके/केसी/आरटी/पीसी/एनजे
(रिलीज़ आईडी: 2323190)
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