सूचना और प्रसारण मंत्रालय
आईआईसीटी-यूट्यूब के सहयोगात्मक क्रिएट विद एआई कार्यक्रम के तहत चार एआई-सक्षम फिल्में प्रदर्शित की गईं
आईआईसीटी तकनीक, मेंटरशिप (मार्गदर्शन) और रचनात्मक नवाचार के माध्यम से भारत के एआई फिल्म मेकिंग इकोसिस्टम को आगे बढ़ा रहा है
प्रविष्टि तिथि:
07 OCT 2026 7:03PM by PIB Delhi
भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) और यूट्यूब क्रिएट विद एआई कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो रहे हैं। इस कार्यक्रम की घोषणा नवंबर 2025 में एआई-संचालित रचनात्मक परियोजनाओं का समर्थन करने और उभरती हुई प्रौद्योगिकियों में भारत की क्षमताओं को मजबूत करने के लिए की गई थी। इस कार्यक्रम ने अब अपनी पहली चार एआई-इनेबल्ड शॉर्ट फिल्मों को रिलीज किया है, जो भारत को एआई-AI-आधारित फिल्म मेकिंग में ग्लोबल लीडर के रूप में स्थापित करने में सक्षम एक इकोसिस्टम के निर्माण की दिशा में एक कदम है।

आज मुंबई के आईआईसीटी थिएटर में प्रदर्शित की गई इन चारों फिल्मों को फिल्म निर्माताओं द्वारा उनके यूट्यूब चैनलों पर भी उसी समय रिलीज किया गया। ये फिल्में इतिहास, पौराणिक कथाओं, मानवीय भावनाओं और अंतरिक्ष अन्वेषण जैसे विभिन्न विषयों और कहानी कहने के तरीकों को प्रदर्शित करती हैं, साथ ही एआई-इनेबल्ड फ़िल्म मेकिंग की क्रिएटिव संभावनाओं को भी प्रदर्शित करती हैं।
एवियम स्टूडियोज द्वारा निर्देशित 'चेकावर' एक काल्पनिक सिनेमाई कहानी है, जो 1741 के ऐतिहासिक कोलचेल के युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित है। यह फिल्म उस दौर की धरती, वहां के लोगों, साहस और युद्ध-कला की परंपराओं से प्रेरणा लेती है।
इलेवंथ डोर स्टूडियो द्वारा निर्मित 'चाणक्य - द माइंड ऑफ एन एम्पायर' एक ऐतिहासिक महागाथा है जो मौर्य साम्राज्य के दार्शनिक, रणनीतिकार और वास्तुकार चाणक्य की अनकही यात्रा को दर्शाती है।
कल्पनानिक फिल्म्स द्वारा निर्मित 'देवी: द नाइन अस्त्रस' शक्ति के दिव्य स्वरूप और ब्रह्मांडीय संतुलन को बहाल करने के लिए उनके महायुद्ध को दर्शाती है।
‘कार्तिक कुल्ट क्रिएशंस द्वारा निर्मित लाइका' अंतरिक्ष में भेजे गए एक श्वान की मार्मिक यात्रा को दर्शाती है। यह अंतरिक्ष अन्वेषण की पृष्ठभूमि में साहस, त्याग और इंसानों व जानवरों के बीच के बंधन के विषयों की पड़ताल करती है।

ये फिल्में दर्शाती हैं कि एआई तब सबसे अधिक असरदार होता है जब यह रचनात्मक संभावनाओं का विस्तार करता है, जबकि फिल्म निर्माता कहानी कहने की प्रक्रिया के केंद्र में पूरी तरह से बने रहते हैं। क्रिएट विद एआई कार्यक्रम को गूगल और यूट्यूब की एआई तकनीकों, आईआईसीटी के इंफ़्रास्ट्रक्चर व फैकल्टी के मार्गदर्शन और फिल्म निर्माताओं की कल्पना शक्ति को एक साथ लाने के लिए एक व्यावहारिक प्रयोग के रूप में डिजाइन किया गया था।
इस अवसर पर बोलते हुए, आईआईसीटी के सीईओ डॉ. विश्वास देवस्कर ने कहा कि भारत के पास एआई-आधारित फिल्म निर्माण के अगले अध्याय का नेतृत्व करने का अवसर है। क्रिएट विद एआई कार्यक्रम संस्थागत मार्गदर्शन और उन्नत एआई टूल तक पहुंच को एक साथ लाता है, जिससे भारतीय रचनात्मक स्टूडियो को प्रयोग करने, क्षमताएं विकसित करने और नई फिल्म निर्माण कार्यप्रणालियों को विकसित करने का अवसर मिलता है। उन्होंने आगे कहा कि यह एक ऐसा इकोसिस्टम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है जो भारत को एआई-आधारित कहानी कहने के मामले में सबसे आगे रख सकता है।
क्रिएटर्स के लिए जनरेटिव एआई की क्षमता पर प्रकाश डालते हुए, यूट्यूब इंडिया की प्रबंध निदेशक सुश्री गुंजन सोनी ने कहा कि भारत हमेशा से एक असाधारण कहानी कहने वाला देश रहा है, लेकिन अब हम देख रहे हैं कि स्वतंत्र क्रिएटर्स अपनी शर्तों पर प्रोडक्शन हाउस बना रहे हैं। उन्होंने कहा, "आईआईसीटी के साथ हमारी साझेदारी यह दर्शाती है कि जब निडर भारतीय कहानी कहने की कला अत्याधुनिक तकनीक से मिलती है, तो स्वतंत्र स्तर पर वर्ल्ड-क्लास सिनेमा बनता है।
इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे, जिनमें महानिदेशक (पश्चिमी क्षेत्र) सुश्री स्मिता वत्स शर्मा, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री सेंथिल राजन, एनएफडीसी के प्रबंध निदेशक श्री प्रकाश मगदुम और सीबीएफसी के सीईओ श्री राजेंद्र सिंह शामिल थे।
इवेंट में दिखाई गई एआई फिल्मों के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए कृपया नीचे दिए गए लिंक को स्कैन करें।

जनरेटिव एआई प्रोडक्शन की बाधाओं को मौलिक रूप से दूर करता है, जिससे रचनाकारों को लेखन, वर्ल्ड-बिल्डिंग और अपनी कला पर ध्यान केंद्रित करने के लिए बहुमूल्य समय वापस मिलता है। पब्लिक फर्स्ट और गूगल की एक नई जेन मीडिया इंडिया रिपोर्ट के अनुसार, जनरेटिव मीडिया टूल भारत में क्रिएटिव काम करने वालों की प्रोडक्टिविटी में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हैं। इसका मतलब हर साल लगभग 390 घंटे की बचते हैं, जो प्रभावी रूप से रचनाकारों को केवल लेखन, वर्ल्ड-बिल्डिंग और अपनी कला को निखारने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए लगभग दस पूरे सप्ताह देता हैं।
आईआईसीटी के बारे में:
भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी (AVGC-XR) के लिए भारत का नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस है, जिसकी स्थापना भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय, महाराष्ट्र सरकार, फिक्की और सीआईआई के साथ मिलकर की गई है। इसका पहला कैंपस जुलाई 2025 में एनएफडीसी कॉम्प्लेक्स में शुरू हो चुका है, जबकि गोरेगांव की फिल्म सिटी में 10 एकड़ के एक स्थायी परिसर का विकास किया जा रहा है। आईआईसीटी वर्तमान में 18 कोर्स ऑफर करता है और इसकी प्रमुख वैश्विक टेक्नोलॉजी तथा मीडिया कंपनियों के साथ साझेदारियां हैं।
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पीके/केसी/आरटी/डीवी/डीए
(रिलीज़ आईडी: 2320682)
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