स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जेपी नड्डा ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी पीएम-जेएवाई) के आठ वर्ष और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के पांच वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आरोग्य मंथन 2026 का उद्घाटन किया


एबी पीएम-जेएवाई और एबीडीएम की उपलब्धियां भारत के विस्तारित डिजिटल और स्वास्थ्य बीमा इकोसिस्टम को दर्शाती हैं: श्री जेपी नड्डा

एबी पीएम-जेएवाई 60 करोड़ से अधिक लाभार्थियों के साथ विश्व का सबसे बड़ा स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम बनकर उभरा है: श्री जेपी नड्डा

आरोग्य मंथन 2026 ने डिजिटल स्वास्थ्य और स्वास्थ्य बीमा से जुड़ी कई पहलें शुरू की, इनमें एबी पीएम-जेएवाई के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा प्रदाता रजिस्ट्री मोबाइल ऐप, सुरक्षित डेटा वातावरण और ऑटो-एडजुडिकेशन फ्रेमवर्क शामिल हैं

आरोग्य मंथन 2026 ने विभिन्न श्रेणियों में एबी पीएम-जेएवाई और एबीडीएम के कार्यान्वयन में उत्कृष्टता के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मान्यता दी

प्रविष्टि तिथि: 25 SEP 2026 3:18PM by PIB Delhi

केंद्रीय स्वास्थ्य तथा परिवार कल्याण एवं रसायन तथा उर्वरक मंत्री श्री जेपी नड्डा ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी पीएम-जेएवाई) के आठ वर्ष और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के पांच वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आरोग्य मंथन 2026 का उद्घाटन किया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, स्वास्थ्य सेवा प्रदाता, बीमाकर्ता, प्रौद्योगिकी एवं डिजिटल स्वास्थ्य विशेषज्ञ, शिक्षाविद, विकास भागीदार और अन्य हितधारक देश के स्वास्थ्य बीमा और डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम की प्रगति और इसके अगले चरण की प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श करने के लिए शामिल हुए।

केंद्रीय मंत्री श्री जेपी नड्डा ने इस अवसर पर एबी पीएम-जेएवाई के आठ वर्ष और एबीडीएम के पांच वर्ष पूरे होने पर सभी हितधारकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां प्रगति का जायजा लेने और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास” के दृष्टिकोण के अनुरूप समाज के गरीब और वंचित वर्गों के कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को नवीनीकृत करने का अवसर प्रदान करती हैं।

श्री नड्डा ने एबी पीएम-जेएवाई योजना की शुरुआत से हुए महत्वपूर्ण विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि यह योजना दुनिया के सबसे बड़े स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम के रूप में उभरी है, जिसमें 60 करोड़ से अधिक लाभार्थी, 13 करोड़ से अधिक अस्पतालों की सुविधा और 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक के उपचार शामिल हैं।

श्री नड्डा ने कहा कि सरकार ने इस योजना का विस्तार करते हुए 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को, उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना, इसके दायरे में शामिल किया है। उन्होंने योजना के अंतर्गत प्रवासी श्रमिकों के लिए पोर्टेबिलिटी के महत्व का उल्लेख किया और कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में राज्य सरकारों, स्वास्थ्य संस्थानों और अन्य हितधारकों के योगदान की सराहना की।

श्री नड्डा ने कहा कि एबी पीएम-जेएवाई और एबीडीएम की यात्रा ने स्वास्थ्य सेवा में प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी भूमिका को प्रदर्शित किया है, जिसमें डिजिटल प्रणालियां विभिन्न स्थानों पर प्रमाणीकरण, प्राधिकरण और उपचार तक पहुंच को सुगम बनाती हैं। एबीडीएम के तहत हुई प्रगति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि 97.8 करोड़ से अधिक आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाते (एबीएचए) बनाए गए हैं, जिनमें 121 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड लिंक किए गए हैं, जबकि 5.6 लाख से अधिक स्वास्थ्य सुविधाएं और लगभग 11 लाख स्वास्थ्य पेशेवर एबीडीएम इकोसिस्टम पर पंजीकृत हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्वास्थ्य दावा विनिमय के विकास पर भी प्रकाश डाला, जिसका उद्देश्य अस्पतालों और बीमा कंपनियों को एक साझा डिजिटल मंच पर लाना है।

श्री नड्डा ने आरोग्य मंथन 2026 में शुरू की गई पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे डिजिटल स्वास्थ्य सेवा को और मजबूती मिलेगी, स्वास्थ्य डेटा का सुरक्षित उपयोग सुगम होगा और स्वास्थ्य अनुसंधान, नवाचार और डेटा-आधारित निर्णय लेने के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की सराहना की और राज्य सरकारों, स्वास्थ्य पेशेवरों, सूचीबद्ध अस्पतालों, आयुष्मान मित्रों, आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, प्रौद्योगिकी भागीदारों और अन्य हितधारकों की भूमिका को स्वीकार किया।

श्री नड्डा ने स्वास्थ्य सेवा को अधिक सुलभ, कुशल और रोगी-केंद्रित बनाने के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने हेतु निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आरोग्य मंथन 2026 में हुई चर्चाओं के परिणामों से भारत के स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत करने तथा मानवता की सेवा में और अधिक योगदान मिलेगा।

इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. एम. श्रीनिवास ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) को बधाई दी। उन्होंने एबी पीएम-जेएवाई योजना द्वारा लाए गए बदलावों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस योजना ने लोगों को, विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को, अधिक आत्मविश्वास और कम वित्तीय बोझ के साथ स्वास्थ्य सेवा प्राप्त करने में सक्षम बनाया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अगले चरण में देखभाल की निरंतरता, गुणवत्ता और रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए, जिसमें विशेष उपचार की आवश्यकता वाले रोगियों के लिए सुगम रेफरल तंत्र शामिल हैं।

डॉ. श्रीनिवास ने एबीएचए को अपनाने और इसे व्यापक स्तर पर लागू करने तथा नागरिकों की सहमति और उचित सुरक्षा उपायों के साथ डिजिटल स्वास्थ्य अभिलेखों की अंतरसंचालनीयता को मजबूत करने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि उच्च गुणवत्ता वाला, मानकीकृत और अंतरसंचालनीय स्वास्थ्य डेटा स्वास्थ्य अनुसंधान को आगे बढ़ाने और स्वास्थ्य सेवा में एआई का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने के लिए महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने राष्ट्रीय स्वास्थ्य दावा विनिमय को मजबूत करने, दावों और पूर्व-अनुमोदन प्रक्रियाओं को सुगम बनाने तथा स्वास्थ्य बीमा और डिजिटल स्वास्थ्य पहलों के बारे में जागरूकता बढ़ाने का भी आह्वान किया।

भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण  (आईआरडीएआई)  के अध्यक्ष के अध्यक्ष श्री अजय सेठ ने आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि इस योजना से प्राप्त अनुभव देश में स्वास्थ्य बीमा व्यवस्था को और मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने नागरिकों, अस्पतालों, बीमा कंपनियों और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं सहित सभी हितधारकों के लिए स्वास्थ्य सेवा में गुणवत्ता, सामर्थ्य और सुलभता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

श्री सेठ ने स्वास्थ्य बीमा में मानकीकरण, पारदर्शिता, प्रमुख डिजिटल और परिचालन घटकों को व्यापक रूप से अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया, जिनमें स्वास्थ्य बीमा के लिए एबीएचए को एक पहचान के रूप में अपनाना, उपचारों का मानकीकरण, मानक बिलिंग प्रारूप और मानक उपचार प्रोटोकॉल एवं दिशानिर्देश शामिल हैं। उन्होंने भारत के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य दावा विनिमय की भूमिका पर भी प्रकाश डाला, जो अधिक अंतरसंचालनीयता को सक्षम बनाने और एक अधिक संयोजित स्वास्थ्य बीमा प्रणाली बनाने में सहायक हैं। उन्होंने कहा, “अधिकतम संभव जनसंख्या को किफायती और उच्च गुणवत्ता वाली प्रभावी स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना हमारी पहुंच में है।”

आईसीएमआर के महानिदेशक और डीएचआर के सचिव डॉ. राजीव बहल ने आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई की आठवीं वर्षगांठ और एबीडीएम की पांचवीं वर्षगांठ के अवसर पर कहा कि आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना के रूप में उभरी है, जिससे 60 करोड़ से अधिक नागरिकों को लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता में और सुधार लाने और पहुंच का विस्तार करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि नागरिकों को अधिक से अधिक लाभ मिल सके।

डॉ. बहल ने स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर), आईसीएमआर और एनएचए के बीच सहयोग पर प्रकाश डालते हुए दो प्रमुख क्षेत्रों को रेखांकित किया। उपचार के मानकीकरण पर उन्होंने कहा कि मानकीकृत एल्गोरिदम पर आधारित उपचार से देखभाल की गुणवत्ता और स्थिरता सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है, और आईसीएमआर ने 150 से अधिक मानक उपचार कार्यप्रवाह और दिशानिर्देश विकसित किए हैं। उन्होंने स्वास्थ्य सेवा में लागत-प्रभावशीलता के महत्व पर भी बल दिया और कहा कि डीएचआर के अंतर्गत भारत में स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी मूल्यांकन (एचटीएआईएन) स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों और हस्तक्षेपों की लागत-प्रभावशीलता का मूल्यांकन करता है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री सुनील कुमार बरनवाल ने आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई के आठ वर्ष और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के पांच वर्ष पूरे होने पर सभी हितधारकों को बधाई दी। उन्होंने दोनों कार्यक्रमों की व्यापकता और पहुंच पर प्रकाश डाला, जिसके अंतर्गत देशभर में 49 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड और लगभग 98 करोड़ एबीएएचए आईडी जारी किए गए हैं।

श्री सुनील कुमार बरनवाल ने भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करते हुए बताया कि आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई योजना के तहत 13 करोड़ से अधिक मरीजों के रिकॉर्ड तैयार किए गए हैं, जो अनुसंधान, विकास और स्वास्थ्य विश्लेषण के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षित डेटा वातावरण से मरीजों की पहचान की सुरक्षा करते हुए ऐसे डेटा का जिम्मेदारी से उपयोग संभव हो सकेगा। उन्होंने स्वचालित निर्णय प्रणाली पर भी प्रकाश डाला, जिसका उद्देश्य प्रौद्योगिकी और डेटा-आधारित प्रक्रियाओं के माध्यम से एबी पीएम-जेएवाई के तहत दावों के निपटान की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित और मजबूत बनाना है।

आरोग्य मंथन 2026 का एक प्रमुख आकर्षण भारत के स्वास्थ्य बीमा तंत्र की डिजिटल नींव को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई कई पहलों का शुभारंभ था। इनमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा प्रदाता रजिस्ट्री (एनएचपीआर) मोबाइल ऐप, भुगतानकर्ताओं के लिए एनएचसीएक्स कार्यान्वयन मार्गदर्शिका, एक आदर्श डिजिटल स्वास्थ्य सुविधा के लिए मार्गदर्शिका, सुरक्षित डेटा पर्यावरण (एसडीई) एप्लिकेशन और एबी पीएम-जेएवाई के तहत दावों के स्वतः निपटान के लिए ऑटो-एडजुडिकेशन फ्रेमवर्क शामिल थे।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलुरु के सहयोग से विकसित सुरक्षित डेटा वातावरण, एबी पीएम-जेएवाई और एबीडीएम स्वास्थ्य डेटा तक पहुंच और विश्लेषण के लिए एक नियंत्रित वातावरण के रूप में परिकल्पित है। अनुमोदित संस्थाएं पहचान रहित डेटा के साथ काम कर सकेंगी या एक अलग वातावरण के भीतर कोड निष्पादित कर सकेंगी, और आउटपुट जारी करने से पहले उनकी समीक्षा की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य स्वास्थ्य अनुसंधान, कार्यक्रम नियोजन, परिणाम विश्लेषण और जिम्मेदार एआई नवाचार को सुगम बनाना है, साथ ही व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा के लिए उपायों को भी शामिल करना है।

आरोग्य मंथन 2026 में हुई चर्चाओं का मुख्य केंद्र स्वास्थ्य सेवाओं की दक्षता, गुणवत्ता और अंतरसंचालनीयता को सुदृढ़ करना था। "स्वास्थ्य बीमा को सुव्यवस्थित करने के लिए एनएचसीएक्स" सत्र में राष्ट्रीय स्वास्थ्य दावा विनिमय (एनएचसीएक्स) की भूमिका का विश्लेषण किया गया, जिसमें सुव्यवस्थित, मानकीकृत और प्रौद्योगिकी-आधारित स्वास्थ्य बीमा प्रक्रियाओं को सक्षम बनाने पर विचार किया गया। इसमें यह चर्चा की गई कि अंतरसंचालनीय डिजिटल दावा अवसंरचना किस प्रकार दक्षता में सुधार कर सकती है, स्वास्थ्य बीमा प्रणाली में समन्वय को मजबूत कर सकती है और स्वास्थ्य वित्तपोषण के नए रास्ते खोल सकती है।

एबी पीएम-जेएवाई और एबीडीएम ट्रैक के तहत आयोजित सत्रों में कार्यक्रम कार्यान्वयन, स्वास्थ्य सेवा वितरण और डिजिटल परिवर्तन के प्रमुख पहलुओं की जांच की गई।

एबी पीएम-जेएवाई ट्रैक के अंतर्गत, "दावा प्रसंस्करण से बुद्धिमान आश्वासन तक: एबी पीएम-जेएवाई का रूपांतरण" सत्र में दावा प्रसंस्करण और कार्यक्रम की अखंडता को मजबूत करने के लिए प्रौद्योगिकी, डेटा और विश्लेषण के उपयोग की जांच की गई। "गुणवत्ता और लागत-प्रभावशीलता के परिप्रेक्ष्य से रणनीतिक खरीद" सत्र में संसाधनों के कुशल उपयोग को बढ़ावा देते हुए देखभाल की गुणवत्ता में सुधार के दृष्टिकोणों पर चर्चा की गई।

एबीडीएम सत्र में "स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में सुधार के लिए राष्ट्रीय विशिष्ट स्वास्थ्य पहचानकर्ता (यूएचआई)" पर चर्चा शामिल थी, जिसमें स्वास्थ्य सेवा इकोसिस्टम में पहुंच और भागीदारी का विस्तार करने में डिजिटल प्लेटफार्मों की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया गया, और "बेहतर स्वास्थ्य वितरण के लिए मानकों का लाभ उठाना" पर चर्चा हुई, जिसमें सूचनाओं के निर्बाध आदान-प्रदान और स्वास्थ्य सेवा वितरण की निरंतरता और गुणवत्ता में सुधार के लिए सामान्य स्वास्थ्य-डेटा मानकों के महत्व की जांच की गई।

इस कार्यक्रम में विभिन्न श्रेणियों में एबी पीएम-जेएवाई और एबीडीएम के तहत प्रदर्शन करने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भी सम्मानित किया गया। एबी पीएम-जेएवाई के तहत, आंध्र प्रदेश, सिक्किम और जम्मू-कश्मीर को क्रमशः बड़े राज्य, छोटे राज्य और केंद्र शासित प्रदेश श्रेणियों में आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता (एडब्ल्यूडब्ल्यू) और आंगनवाड़ी सहायक (एडब्ल्यूएच) लाभार्थियों के बीच सबसे अधिक कार्ड वितरित के लिए सम्मानित किया गया। छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और गुजरात को अंतर-राज्य पोर्टेबिलिटी के लिए दावा निपटान में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों के रूप में मान्यता दी गई।

एबीडीएम के अंतर्गत, बिहार, लद्दाख और दादरा एवं नगर हवेली को जिला जनसंख्या श्रेणियों के आधार पर मॉडल जिलों में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के रूप में मान्यता दी गई। चंडीगढ़, असम और उत्तर प्रदेश को क्रमशः छोटे राज्य/केंद्र शासित प्रदेश, मध्यम राज्य/केंद्र शासित प्रदेश और बड़े राज्य श्रेणियों में एबीडीएम-सक्षम स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) का उपयोग करने वाले उप-केंद्रों की उच्चतम संख्या के लिए मान्यता दी गई।

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पीके/केसी/आरटी/जेके/एनजे


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